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  • ओलंपिक में चूके लेकिन उपलब्धियों से चमके रंजन सोढ़ी, वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर बने भारत के स्टार निशानेबाज

    ओलंपिक में चूके लेकिन उपलब्धियों से चमके रंजन सोढ़ी, वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर बने भारत के स्टार निशानेबाज


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में रंजन सोढ़ी का नाम खास सम्मान के साथ लिया जाता है। डबल ट्रैप शूटिंग में अपनी सटीक निशानेबाजी और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान मजबूत की। कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर एशियन गेम्स और आईएसएसएफ वर्ल्ड कप तक सोढ़ी ने कई महत्वपूर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    रंजन सोढ़ी का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को पंजाब के फिरोजपुर में हुआ था। बचपन से ही निशानेबाजी के प्रति उनका झुकाव आगे चलकर एक सफल खेल करियर में बदल गया। उन्होंने मेहनत और निरंतर अभ्यास के जरिए डबल ट्रैप शूटिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और वह भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

    साल 2010 रंजन सोढ़ी के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने दो सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी वर्ष चीन के ग्वांगझू में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने डबल ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा डबल ट्रैप टीम स्पर्धा में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। इन उपलब्धियों ने उन्हें देश के प्रमुख निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया।

    विश्व स्तर पर भी सोढ़ी का प्रदर्शन शानदार रहा। साल 2010 में इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2011 में चीन की राजधानी बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उसी वर्ष स्लोवेनिया के मेरिबोर में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। लगातार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना उनकी निरंतरता और कौशल को दर्शाता है।

    चार अक्टूबर 2011 को संयुक्त अरब अमीरात के अल ऐन में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में सोढ़ी ने फिर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। साल 2011 में वह वर्ल्ड कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने। यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा और मजबूत हुई।

    विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के दम पर रंजन सोढ़ी ने 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया। उन्होंने डबल ट्रैप स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह पदक जीतने में सफल नहीं रहे। क्वालिफिकेशन राउंड में 134 अंक हासिल कर वह 11वें स्थान पर रहे। प्रतियोगिता की शुरुआत में उन्होंने 48 अंक बनाकर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन आगे वह अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। ओलंपिक पदक भले ही उनके खाते में नहीं आया लेकिन वहां तक पहुंचना भी उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही।

    निशानेबाजी में उनके योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। रंजन सोढ़ी की कहानी मेहनत अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

  • राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर

    राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा में दोनों निशानेबाज मेडल जीतने से चूक गईं। आइची नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में राइजा ढिल्लों चौथे स्थान पर रहीं जबकि परिनाज धालीवाल को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन में 125 में से 111 शॉट का स्कोर हासिल करके फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन पदक मुकाबले में उनका प्रदर्शन टीम स्पर्धा जैसा नहीं रहा।

    तीन दिनों तक चले क्वालिफिकेशन राउंड के बाद राइजा और परिनाज ने समान 111 का स्कोर बनाया। क्वालिफिकेशन में राइजा आठवें स्थान पर और परिनाज नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए पहुंचीं। फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक जीतने का मौका था लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दोनों निशानेबाज पोडियम की दौड़ से बाहर हो गईं। राइजा चौथे स्थान तक पहुंचीं जबकि परिनाज आठवें स्थान पर रहीं।

    इससे पहले महिला स्कीट टीम स्पर्धा में राइजा ढिल्लों परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन में कुल 331 का स्कोर हासिल किया था। चीन की टीम ने 347 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाकिस्तान ने 336 के स्कोर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश के खाते में एक और पदक जोड़ा।

    शूटिंग में भारत का प्रदर्शन केवल महिला स्कीट टीम स्पर्धा तक सीमित नहीं रहा। पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों ने कांस्य पदक हासिल किया। ओलंपियन अनंतजीत सिंह नरुका मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह की भारतीय टीम ने कुल 346 का स्कोर बनाया और तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में कतर ने स्वर्ण पदक जबकि कुवैत ने रजत पदक जीता। इस पदक के साथ आइची नागोया में शूटिंग में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंच गई।

    पुरुषों की व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में अनंतजीत सिंह नरुका भारतीय चुनौती को फाइनल तक पहुंचाने वाले एकमात्र निशानेबाज रहे। उन्होंने 125 में से 119 का स्कोर किया। वहीं मैराज अहमद खान ने 116 और भवतेघ सिंह ने 111 का स्कोर बनाया। दोनों निशानेबाज फाइनल में जगह नहीं बना सके।

    शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों को पदक के लिए इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर महिलाओं की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं। उन्होंने फाइनल में 181.1 का स्कोर किया लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।

    महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में भी भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय टीम ने 1719 के स्कोर के साथ 44 एक्स दर्ज किए। वियतनाम ने समान 1719 के स्कोर के साथ 46 एक्स दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। चीन ने 1735 और 56 एक्स के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि दक्षिण कोरिया ने 1730 और 55 एक्स के साथ रजत पदक अपने नाम किया।

    भारतीय शूटिंग दल ने एशियन गेम्स में अलग अलग स्पर्धाओं में लगातार चुनौती पेश की है। राइजा और परिनाज के लिए टीम स्पर्धा का कांस्य पदक उपलब्धि रहा लेकिन व्यक्तिगत मुकाबले में पदक से चूकना निराशाजनक रहा। अब भारतीय निशानेबाजों की नजर बाकी स्पर्धाओं पर होगी जहां टीम पदकों की संख्या को और बढ़ाने की कोशिश करेगी।

  • हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव

    हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव


    नई दिल्ली । चीन के हांगझोउ में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत की युवा स्टार निशानेबाज ईशा सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और सफलता जोड़ दी। इन दोनों उपलब्धियों के साथ भारतीय टीम के कुल पदकों की संख्या तीन हो गई है और भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    फाइनल मुकाबले में ईशा सिंह ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और सटीक निशानेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बढ़त बनाए रखी और 50 शॉट्स में 40 अंक हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। मेजबान चीन की मजबूत चुनौती के बावजूद ईशा ने किसी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और शानदार संयम के साथ मुकाबला अपने नाम किया।

    स्वर्ण पदक की दौड़ में चीन की युयुए झांग ईशा की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी थीं। हालांकि भारतीय निशानेबाज ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें तीन अंकों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। झांग ने 37 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। चीन की धरती पर मेजबान देश की स्टार निशानेबाज को हराकर स्वर्ण जीतना ईशा सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दूसरी ओर ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने भी एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कांस्य पदक के मुकाबले में उनका सामना उत्तर कोरिया की ह्योन ग्योंग पाक से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुकाबला इतना करीबी रहा कि विजेता का फैसला डबल शूटऑफ से हुआ। दबाव के इस क्षण में मनु भाकर ने शानदार संयम दिखाया और निर्णायक निशाना लगाकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

    ईशा सिंह के स्वर्ण और मनु भाकर के कांस्य पदक के साथ भारत की पदक संख्या तीन हो गई है। इससे पहले भारतीय निशानेबाज संयम ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय शूटिंग दल का आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया है।

    आईएसएसएफ वर्ल्ड कप की पदक तालिका में मेजबान चीन फिलहाल पहले स्थान पर बना हुआ है। चीन अब तक 14 पदक जीत चुका है जिनमें छह स्वर्ण पदक शामिल हैं। वहीं भारत तीन पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय निशानेबाजों का मौजूदा प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी देश के खाते में और पदक जुड़ सकते हैं तथा भारतीय दल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा

  • जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी, प्रख्यात कोच और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। खेल जगत की इस बड़ी क्षति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से लेकर केंद्र और राज्यों के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेताओं ने अपने संदेशों में जसपाल राणा के खेल जीवन, उनके योगदान और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में निभाई गई उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया।

    जानकारी के अनुसार, जर्मनी के म्युनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 49 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शोक संदेश में कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों के ऐसे प्रतीक थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा तथा उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनके निधन को भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान देश को विश्व मंच पर गौरवान्वित किया।

    केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के बल पर भारत को अनेक गौरवपूर्ण क्षण दिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत को सम्मान दिलाने वाली उनकी उपलब्धियां और युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में निभाई गई भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी उन्हें भारतीय निशानेबाजी का गौरव बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को देवभूमि उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनके निधन को खेल जगत के लिए बड़ी क्षति करार दिया।

    राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों की सबसे बड़ी हस्तियों में से एक थे। उन्होंने न केवल देश का नाम विश्वभर में रोशन किया बल्कि नई पीढ़ी के निशानेबाजों को भी तैयार किया। कांग्रेस सांसद और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्यायों में जसपाल राणा का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

    जसपाल राणा ने अपने करियर में अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया था। बाद में कोच के रूप में उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

  • जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर

    जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी जगत ने शुक्रवार को अपने सबसे चमकदार सितारों में से एक को खो दिया। पूर्व एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता, अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल भारतीय शूटिंग समुदाय बल्कि पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। दशकों तक अपनी उपलब्धियों और समर्पण से भारतीय खेलों को गौरवान्वित करने वाले जसपाल राणा को भारतीय शूटिंग का ‘गोल्डन बॉय’ कहा जाता था।

    28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा का खेल जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा। सेना पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे राणा को बचपन से ही अनुशासन और खेल भावना का माहौल मिला। उनके पिता नारायण राणा ने ही उन्हें शूटिंग की शुरुआती बारीकियां सिखाईं और वही उनके पहले कोच बने। कम उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी। मात्र 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।

    वर्ष 1988 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखा दी थी। इसके बाद 1994 में इटली में आयोजित जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। यही वह दौर था जब दुनिया ने भारतीय शूटिंग के इस उभरते सितारे को गंभीरता से लेना शुरू किया।

    जसपाल राणा ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह ओलंपिक पदक नहीं जीत सके, लेकिन अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। कॉमनवेल्थ खेलों में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चार कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। वर्ष 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने अकेले छह पदक जीतकर इतिहास रच दिया था।

    एशियाई खेलों में भी उनका दबदबा देखने को मिला। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। इसी दौरान 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी, जो उनकी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रमाण था।

    खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया। उनकी कोचिंग में भारतीय निशानेबाजों ने विश्व स्तर पर सफलता हासिल की। विशेष रूप से मनु भाकर की उपलब्धियों में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई।

    खेल के प्रति उनके समर्पण और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। ये सम्मान उनके बहुआयामी योगदान की गवाही देते हैं।

    जसपाल राणा ने ऐसे समय में भारतीय शूटिंग को लोकप्रिय बनाया, जब यह खेल सीमित दायरे में सिमटा हुआ था। उन्होंने न केवल पदक जीते बल्कि एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित भी किया। उनके निधन के साथ भारतीय शूटिंग के एक गौरवशाली अध्याय का अंत जरूर हुआ है, लेकिन उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।

  • जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख

    जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद खेल जगत, राजनीतिक नेतृत्व और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राणा ने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा का समर्पण, अनुशासन और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा सम्मान दिलाती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और खेल समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले इस महान खिलाड़ी का अचानक निधन बेहद दुखद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जसपाल राणा न केवल एक उत्कृष्ट शूटर और कोच थे, बल्कि बेहद सरल, सहज और नेकदिल इंसान भी थे। उन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर देश का मान बढ़ाया। उनके अनुसार, राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट मेंटोर भी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय शूटिंग समुदाय को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

    दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय शूटर मनु भाकर सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों के करियर को संवारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्तमान में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे और भारतीय शूटिंग टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और मार्गदर्शन से भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

    पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

    भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।

    जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।