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  • 2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा

    2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा


    नई दिल्ली। आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 में 2 अक्टूबर का दिन भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहा। 13वें दिन भारत की नजरें बॉक्सिंग तीरंदाजी कुश्ती हॉकी और कई अन्य खेलों पर थीं और दिन आगे बढ़ने के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी। सबसे खास प्रदर्शन स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन का रहा जिन्होंने अपने जन्मदिन के दिन देश को गोल्ड मेडल का तोहफा दिया। इसके अलावा भारतीय महिला रिकर्व टीम ने भी ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। 2 अक्टूबर को अपना 29वां जन्मदिन मना रहीं लवलीना के लिए यह जीत बेहद खास रही। इस स्वर्ण के साथ वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं। उनसे पहले यह उपलब्धि मैरी कॉम ने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में हासिल की थी।

    लवलीना की जीत के कुछ ही समय बाद तीरंदाजी से भी भारत के लिए बड़ी खबर आई। अंकिता भकत कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को फाइनल में 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। यह इस स्पर्धा में भारतीय महिला रिकर्व टीम का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक है। मुकाबले में भारतीय तीरंदाजों ने तेज हवा के बीच दबाव बनाए रखा और मजबूत कोरियाई टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया।

    हालांकि पुरुष रिकर्व टीम को फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। धीरज बोम्मादेवरा नीरज चौहान और यशदीप भोगे की भारतीय टीम को 1-5 से शिकस्त मिली और उसे सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इससे पहले भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ईरान को 6-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

    कुश्ती में भी भारत की उम्मीदें बनी रहीं। सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम वर्ग में ओलंपिक चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। ऐसे में उनके मुकाबले पर भी भारतीय प्रशंसकों की नजरें टिकी रहीं। दिन के मुकाबलों में भारत ने बॉक्सिंग और तीरंदाजी के अलावा कई अन्य खेलों में भी पदक की उम्मीद बनाए रखी।

    1 अक्टूबर यानी 12वें दिन भारत ने छह पदक जीते थे जिनमें दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज शामिल थे। इसके बाद 2 अक्टूबर के मुकाबलों ने भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। दिन के दौरान भारत 70 पदकों के आंकड़े तक पहुंच गया जिसमें 12 गोल्ड 24 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज शामिल थे।

    एशियन गेम्स के 13वें दिन का सबसे बड़ा आकर्षण लवलीना का जन्मदिन पर गोल्ड जीतना और भारतीय महिला रिकर्व टीम का ऐतिहासिक स्वर्ण रहा। वहीं पुरुष रिकर्व टीम का सिल्वर भी भारत की मजबूत तीरंदाजी अभियान को दर्शाता है। अब प्रतियोगिता के बाकी मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और मेडल टैली में भारत की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण

    नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के खाते में 24 सितंबर तक कुल 17 मेडल आ चुके हैं लेकिन इनमें गोल्ड सिर्फ एक है। भारत ने 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं। पदकों की कुल संख्या देखकर प्रदर्शन सामान्य नजर आ सकता है लेकिन मेडल टैली में भारत 14वें स्थान पर है और यही आंकड़ा भारतीय खेल व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए पिछले तीन साल में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग इंटरनेशनल एक्सपोजर उपकरण कोचिंग और विशेषज्ञ सेवाओं पर 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS के जरिए 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल सरकारी निवेश करीब 800.70 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

    नागोया में भारत का एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जरूर मिले लेकिन गोल्ड की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत उस प्रदर्शन के साथ चौथे स्थान पर रहा था।

    हांगझोउ के बाद भारतीय खेलों से उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। पहली बार 100 से ज्यादा मेडल जीतने के बाद अब एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन को उसी पैमाने पर देखा जा रहा है। हालांकि नागोया गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारत के कई खेलों में अभी मुकाबले बाकी हैं और आने वाले दिनों में मेडल की संख्या बढ़ सकती है।

    इस बार भारत ने 501 खिलाड़ियों का दल उतारा है जिसमें 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद है। तैयारी पर खर्च की बात करें तो इंटरनेशनल एक्सपोजर पर 251.4 करोड़ रुपये घरेलू ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये उपकरणों पर 89.2 करोड़ रुपये विदेशी विशेषज्ञों पर 86.3 करोड़ रुपये और विदेशी ट्रेनिंग पर 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि तैयारी का दायरा काफी बड़ा रहा है।

    भारत की चुनौती केवल मेडल की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। हांगझोउ में शूटिंग और एथलेटिक्स ने भारत को बड़ी संख्या में पदक दिलाए थे। एथलेटिक्स से 29 और शूटिंग से 22 पदक आए थे। शूटिंग ने 7 गोल्ड जबकि एथलेटिक्स ने 6 गोल्ड जीते थे। नागोया में शुरुआती चरण में इन खेलों से वैसी गोल्ड बढ़त दिखाई नहीं दी है।

    मेडल टैली में चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत से आगे हैं। हांगझोउ में भी भारत इन देशों के बाद चौथे स्थान पर रहा था। ऐसे में नागोया भारतीय खेलों के लिए सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने का मंच नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन की क्षमता परखने का अवसर भी है। एशियन गेम्स का प्रदर्शन लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नागोया के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत कुल कितने मेडल जीतता है और उनमें गोल्ड की हिस्सेदारी कितनी रहती है।

  • 14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल

    14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में मीणा ने भारत के लिए इस खेल का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताकुया कुरोसाका के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम एशियन गेम्स के पदक विजेताओं में दर्ज करा दिया।

    मीणा का यह सफर आसान नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शेरविन नुगुइट के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। निर्णायक गेम में एक समय वह पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। इस वापसी ने उन्हें 4-3 से जीत दिलाई और इसी के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल की इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक भी सुनिश्चित हो गया था। सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी के खिलाफ हार के बाद मीणा का अभियान ब्रॉन्ज मेडल के साथ समाप्त हुआ।

    जय मीणा की सॉफ्ट टेनिस तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में थी और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में दाखिले के बाद उनका ध्यान स्कूल में बने सॉफ्ट टेनिस कोर्ट की तरफ गया। शुरुआत में वह खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे और बाद में बॉल बॉय के तौर पर उनकी मदद करने लगे। इसी दौरान इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने खुद सॉफ्ट टेनिस खेलना शुरू कर दिया।

    स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत करने वाले जय मीणा ने जल्द ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने जापान जाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पुरुष टीम और डबल्स स्पर्धा में भी मध्य प्रदेश के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके बाद जय मीणा की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2025 में वह पुरुष सिंगल्स के नेशनल चैंपियन बने। एशियन गेम्स 2022 में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही पुरुष टीम स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

    वर्ष 2024 में जय मीणा ने आध्या तिवारी के साथ वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में पहला पदक दिलाया। इसके बाद 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

    जय मीणा के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल उनके लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप के एथलीट के रूप में यह उनका तीसरा एशियन गेम्स है। इससे पहले वह जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब नागोया में सॉफ्ट टेनिस का पहला भारतीय एशियन गेम्स पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।

  • ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत

    ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत


    नई दिल्ली। ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खेलो इंडिया संवाद के दौरान देश के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद करते हुए भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है और भारत को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना जरूरी है। पीएम मोदी ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का जिक्र करते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया और कहा कि उनका जीवन देश की खेल परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि जो खेले वो खिले। उनके मुताबिक मैदान पर खेलने से केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं बढ़ती बल्कि उसके परिवार का गौरव बढ़ता है और उसके स्कूल कॉलेज जिले तथा पूरे राज्य की पहचान मजबूत होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि देश को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से ऐसी प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी जो आने वाले वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए बड़े टैलेंट हंट अभियान की बात कही। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की खेल में रुचि जानना नहीं बल्कि यह पहचानना भी होगा कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से बेहतर है। इसके आधार पर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    उन्होंने भारत की ओलंपिक भागीदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीएम मोदी के अनुसार भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता जिनमें दुनिया के दूसरे देश पदक जीत रहे हैं। ऐसे में देश को सर्फिंग स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने तक सहयोग मिले। उन्होंने खेलों को फिटनेस और बेहतर जीवनशैली से भी जोड़ा और कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक खेल अब केवल शौक नहीं बल्कि करियर का भी मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने शीतल देवी अवनी लेखरा सुमित अंतिल और नितेश कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेल हमें जीत के साथ हार के बाद दोबारा उठना भी सिखाता है और यही खेल भावना जीवन को मजबूत बनाती है। अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम करने और मैदान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है। उनके मुताबिक खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की असली शक्ति है।

  • एशियाई खेल 2026 में गुजरात का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, पहली बार 9 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

    एशियाई खेल 2026 में गुजरात का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, पहली बार 9 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व


    नई दिल्ली । जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए गुजरात ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार राज्य से रिकॉर्ड 9 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन हुआ है जबकि एक खिलाड़ी को हाई वैल्यू रिजर्व के रूप में जगह मिली है। यह उपलब्धि गुजरात में खेल संस्कृति के लगातार विस्तार और खिलाड़ियों को मिल रहे बेहतर प्रशिक्षण तथा आधुनिक खेल सुविधाओं का बड़ा परिणाम मानी जा रही है।

    गुजरात के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ष 2014 में आयोजित 17वें एशियाई खेलों में राज्य से केवल तीन खिलाड़ी ही भारतीय टीम का हिस्सा थे। अब महज एक दशक में यह संख्या तीन गुना बढ़कर नौ पहुंच गई है जो राज्य के खेल विकास की नई तस्वीर पेश करती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि गुजरात अब केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा बल्कि कई खेलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    भारतीय टीम में चयनित खिलाड़ियों में शूटिंग की स्टार खिलाड़ी इलावेनिल वलारिवन प्रमुख नाम हैं। टेबल टेनिस में हरमीत देसाई मानव ठक्कर और मानुष शाह को जगह मिली है। सॉफ्ट टेनिस में अनिकेत पटेल भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे जबकि तैराकी में आर्यन नेहरा को मौका मिला है। टेनिस में अनुभवी खिलाड़ी अंकिता रैना और वैदेही चौधरी का चयन हुआ है। एथलेटिक्स में धाविका देवयानी झाला भी भारतीय दल का हिस्सा होंगी। वहीं टेनिस खिलाड़ी जील देसाई को रिजर्व खिलाड़ी के रूप में टीम में शामिल किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन वर्षों से चल रही योजनाबद्ध तैयारी का परिणाम है। राज्य में खेल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से पहचानने आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने पर लगातार काम किया गया है। इसी वजह से अब गुजरात के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने भी इसे गुजरात के लिए गर्व का क्षण बताया है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में विश्वस्तरीय खेल संस्कृति विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। खिलाड़ियों को केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि बेहतर खेल सुविधाएं आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का पूरा वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर सकें।

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2030 में गुजरात राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विश्वस्तरीय खेल परिसरों और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य गुजरात को देश का प्रमुख खेल केंद्र बनाना है जहां से भविष्य में और अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करें।

    पिछले एक दशक में गुजरात ने ओलंपिक कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में अपनी भागीदारी लगातार बढ़ाई है। अब एशियाई खेल 2026 में राज्य के इन खिलाड़ियों से देश को शानदार प्रदर्शन और पदकों की उम्मीद रहेगी।