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  • भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    नई दिल्ली । कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश टीम चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की है। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की। जहां भारतीय पुरुष टीम ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई वहीं महिला टीम ने भी पहले ही मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है।

    पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण में अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेला। गुरवीर सिंह युशा नफीस और आर्यवीर दीवान की तिकड़ी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले जीते और नीदरलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और विरोधी खिलाड़ियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले में भारत का सामना ब्राजील से हुआ। इस मैच में गुरवीर सिंह को आराम देते हुए पूरव रांभिया को टीम में शामिल किया गया। पूरव युशा नफीस और आर्यवीर दीवान ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए ब्राजील के खिलाड़ियों को भी 3-0 से हराया। लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह सुनिश्चित कर ली। टीम का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वह इस बार खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    महिला वर्ग में भी भारत ने विजयी शुरुआत की। पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। सान्वी कलंकी अनिका दुबे और रुद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। अब भारतीय महिला टीम का अगला मुकाबला मलेशिया से होगा जहां जीत दर्ज कर वह नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाना चाहेगी।

    भारतीय महिला टीम की स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह को शुरुआती मुकाबले में आराम दिया गया। अनाहत ने एक दिन पहले ही विश्व जूनियर व्यक्तिगत स्क्वैश खिताब जीतकर इतिहास रचा था। टीम प्रबंधन ने उन्हें पर्याप्त आराम देने का फैसला किया ताकि आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में वह पूरी ऊर्जा के साथ कोर्ट पर उतर सकें।

    टूर्नामेंट में अन्य प्रमुख टीमों ने भी शानदार शुरुआत की है। मेजबान कनाडा की महिला टीम ने नाइजीरिया को हराकर अपने अभियान का आगाज किया जबकि जापान की पुरुष टीम ने कनाडा को मात दी। वहीं गत चैंपियन मिस्र ने भी अपने खिताब बचाने की मजबूत दावेदारी पेश करते हुए महिला वर्ग में ब्राजील और पुरुष वर्ग में नीदरलैंड तथा न्यूजीलैंड को हराकर जीत दर्ज की।

    भारतीय टीमों के इस दमदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं जहां भारत दोनों वर्गों में पदक और खिताब की चुनौती पेश करने के इरादे से उतरेगा।

  • सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल

    सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल


    नई दिल्ली । मभारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अनाहत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका सपना सच हो चुका है और उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अब भी किसी सपने में हों।

    18 वर्षीय अनाहत सिंह के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि जूनियर वर्ग में यह उनका आखिरी वर्ष था। पिछले चार वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में लगातार क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब से दूर रह जाती थीं। कई बार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने मजाक में इस टूर्नामेंट को अपने लिए श्राप तक बता दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सारी बाधाएं तोड़ दीं।

    खिताब जीतने के बाद अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्हें पता था कि जूनियर करियर में यह उनका आखिरी मौका है इसलिए उन्होंने खुद पर किसी तरह का दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलना और फाइनल के हर पल का आनंद लेना था। यही सोच उन्हें विश्व चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मौके पर अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।

    स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अनाहत में विश्व स्तर पर लंबे समय तक देश का नाम रोशन करने की क्षमता है। उनके अनुसार भारतीय स्क्वैश के लिए व्यक्तिगत वर्ग में विश्व चैंपियन तैयार करने का सपना अब आखिरकार पूरा हो गया है।

    अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से पहले यह उपलब्धि देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए अनाहत का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार असफलताओं के बावजूद अगर हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपने जरूर सच होते हैं।