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  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    नई दिल्ली 28 सितंबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में दबाव के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

    बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार दबाव बना रहा।सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,734.83 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत तक टूटकर 72,716.23 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत नीचे 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट बढ़ी और यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत टूटकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख कारणों में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा और शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हुई।व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी आईटी में तुलनात्मक रूप से सबसे कम गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में शामिल ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर अन्य शेयरों में कमजोरी रही। टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली।

    बाजार में तेज गिरावट का असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।वैश्विक स्तर पर भी शेयर बाजारों पर दबाव रहा। ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने से संबंधित ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद बाजारों में चिंता बढ़ी। ईरान ने संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति को ही रास्ता बताया है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर दिखाई दिया।

    एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजारों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।पश्चिम एशिया संकट के समाधान में देरी के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

    ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हुई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा

    सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा


    नई दिल्ली । बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला और बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक धारणा संतुलित बनी रही।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 141 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी बेहद सीमित दायरे में रहते हुए हल्की कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। बाजार में लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने निवेशकों को कुछ राहत दी। मिडकैप इंडेक्स में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की मजबूती के साथ बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो कई क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखा गया। मीडिया, एनर्जी, मेटल, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में तेजी रही, जिससे बाजार को सहारा मिला। इन सेक्टरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी का रुझान बना रहा।

    इसके विपरीत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। निजी बैंक और कुछ प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण लार्जकैप इंडेक्स पर असर पड़ा। आईटी और कंज्यूमर सेक्टर में भी मिला-जुला रुख रहा, जिससे पूरे बाजार में संतुलित लेकिन कमजोर समापन देखने को मिला।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई, जिनमें ऊर्जा, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इससे सूचकांक सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा और दिन के अंत में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने दिन की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ की थी और शुरुआती कारोबार में यह सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहा। दिन के मध्य सत्र में यह स्तरों पर पहुंचा लेकिन ऊपरी स्तरों पर दबाव बनने के कारण मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बाद इंडेक्स में गिरावट आई और यह अंततः हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए निकट भविष्य में एक अहम प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर भी एक मजबूत सपोर्ट जोन मौजूद है। यदि बाजार में खरीदारी का रुझान बढ़ता है तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि बिकवाली बढ़ने पर इंडेक्स सीमित दायरे में रह सकता है।

    कुल मिलाकर, बुधवार का सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा, जहां बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप ने बाजार को संभाले रखा। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी हुई है, जहां वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे।