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  • आज शेयर बाजार में कैसी रहेगी चाल निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश पर

    आज शेयर बाजार में कैसी रहेगी चाल निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश पर


    नई दिल्ली । सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट और आगामी वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता या मुनाफावसूली का दबाव बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    इस समय आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है इसलिए इस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बैंकिंग शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है यदि आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं। ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़ों के आधार पर चुनिंदा शेयरों में हलचल संभव है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी आज बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार पूंजी निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों या भू राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बिकवाली बढ़ने पर बाजार दबाव में आ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इसका सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिल सकता है। वहीं रुपये की मजबूती या कमजोरी भी आयात निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में चुनिंदा शेयरों पर आधारित कारोबार देखने को मिल सकता है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि केवल अफवाहों या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छी कंपनियों में चरणबद्ध निवेश अब भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है लेकिन मजबूत आर्थिक संकेत और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा दे सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें और बाजार की चाल को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाएं।

  • फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज

    फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज


    नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और यूपीआई सेवाओं की अग्रणी कंपनी फोनपे को अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO के लिए SEBI से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी अब अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। अनुमान है कि फोनपे का यह IPO लगभग ₹12,000 करोड़ का होगा, जो भारतीय शेयर बाजार में डिजिटल पेमेंट सेक्टर की मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

    इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।

    IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

    फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।

  • शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में

    शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में



    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 21 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 100 अंक से अधिक गिरकर 82,000 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी करीब 30 अंक फिसलकर 25,200 के आसपास रहा। शुरुआती सत्र से ही बाजार पर वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 14 शेयर हरे निशान में रहे। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन रियल एस्टेट मीडिया और आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही। आईटी कंपनियों पर दबाव अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और डॉलर की मजबूती के कारण देखा गया।

    वैश्विक कारकों का असर घरेलू बाजारों पर साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.26% गिरकर 4,873 पर, जापान का निक्केई 0.56% टूटकर 52,693 पर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.13% गिरकर 26,453 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 4,120 पर बंद हुआ अमेरिकी बाजारों में भी 20 जनवरी को भारी गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स 1.76% टूटकर 48,488 पर, नैस्डेक कंपोजिट में 2.39% और एसएंडपी 500 में 2.06% की गिरावट आई। इन कमजोर वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजारों पर भी देखा गया।

    संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों की बात करें तो 20 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने ₹2,191 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने ₹2,755 करोड़ की खरीदारी की जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। दिसंबर 2025 में FIIs द्वारा ₹34,350 करोड़ की निकासी के मुकाबले DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था जिससे बाजार में संतुलन बना रहा।शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO निवेशकों के रडार पर है। ₹118–₹124 के प्राइस बैंड वाला यह IPO कुल ₹1,907 करोड़ का है और 22 जनवरी तक खुला रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान वैश्विक अनिश्चितता और तीसरी तिमाही में कुछ बड़ी कंपनियों खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के कमजोर नतीजे प्रमुख वजह माने जा रहे हैं।इस प्रकार निवेशकों को वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।