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  • ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

    ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं।

    यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए “अंतिम नियम” के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था” की जगह लेगा।


    15 सितंबर से लागू होगा नया नियम

    नए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की शर्तों का पालन करते रहते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में कहा, “इस अंतिम नियम को लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। हम सभी छात्रों को सलाह देते हैं कि वे 8 सितंबर, 2026 से शुरू होने वाली कक्षाओं से पहले न्यूयॉर्क लौट आएं।”


    क्या-क्या बदलेगा?

    – डीएचएस ने एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय कर दी है।
    – नए नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने की छूट 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।
    – अगर किसी छात्र को अपनी अवधि बढ़ानी होगी तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से फॉर्म आई-539 के माध्यम से मंजूरी लेनी होगी।


    किन छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम?

    डीएचएस के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर को पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” के तहत मौजूद होंगे, वे अपने फॉर्म आई-20 में दर्ज कार्यक्रम पूरा होने तक या स्वीकृत ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी/एसटीईएम ओपीटी) की अवधि तक अमेरिका में रह सकेंगे। हालांकि, यह छूट भी नए नियम के लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य होगी और किसी भी स्थिति में 14 नवंबर, 2030 के बाद लागू नहीं रहेगी। इसमें देश छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि भी शामिल होगी।


    भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता

    नए नियम के बाद भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि इसका असर उनकी पढ़ाई और करियर की योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है, “चार वर्ष की सीमा आधुनिक डिग्री पाठ्यक्रमों के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में लगभग 5.7 वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और उनके निपटारे में करीब एक वर्ष लग रहा है।”

    विशेषज्ञों का कहना है, “छात्रों को पढ़ाई या शोध के बीच में ही अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे प्रयोगशालाओं को प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं का नुकसान होगा और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।” एफआईआईडीएस के अनुसार, शोध आधारित कई पाठ्यक्रम, विशेषकर पीएचडी और चिकित्सा शिक्षा, सामान्य तौर पर चार वर्ष से अधिक समय लेते हैं। वहीं, जे-1 श्रेणी के शोधकर्ता और चिकित्सकों को अपना कार्यक्रम पूरा करने में अक्सर पांच से सात वर्ष तक लग जाते हैं।

  • अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी

    अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय विद्यार्थियों के लिए नई चुनौती सामने आ सकती है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्र वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत अमेरिका में विदेशी छात्रों के रहने की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जा सकती है।

    यदि यह नियम लागू होता है, तो दशकों से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (Duration of Status) व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत F-1 वीजा वाले छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम में सक्रिय हैं और वीजा की सभी शर्तों का पालन कर रहे हैं।

    चार साल से ज्यादा पढ़ाई के लिए लेनी होगी मंजूरी
    रिपोर्ट्स के अनुसार, नए नियम के तहत F-1 वीजा पर अमेरिका जाने वाले छात्रों को सामान्य तौर पर अधिकतम चार साल तक रहने की अनुमति मिलेगी। अगर किसी छात्र का कोर्स, रिसर्च या प्रशिक्षण चार साल से अधिक समय तक चलता है, तो उसे अपनी वैध अवधि समाप्त होने से पहले DHS से एक्सटेंशन की मंजूरी लेनी होगी। समय पर अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में छात्र की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    यह बदलाव सिर्फ F-1 वीजा तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित नियम J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को दिए जाने वाले I वीजा पर भी निश्चित अवधि लागू कर सकता है। हालांकि, लागू होने से पहले इस नियम को अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    सरकार ने बताई राष्ट्रीय सुरक्षा वजह
    ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्र वीजा प्रणाली की निगरानी को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी बनाना है। वहीं, अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है कि नए नियमों से चार साल से अधिक अवधि वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
    इस बदलाव का प्रभाव भारतीय छात्रों पर खास तौर पर पड़ सकता है। ‘ओपन डोर्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 3.31 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे थे। यह संख्या अमेरिका में पढ़ने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब 30 प्रतिशत है।

    भारतीय छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पीएचडी, रिसर्च आधारित मास्टर्स, मेडिकल ट्रेनिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिला लेता है, जिनकी अवधि कई बार चार साल से ज्यादा हो जाती है। ऐसे छात्रों को अब पढ़ाई जारी रखने के लिए समय रहते DHS से अतिरिक्त समय की अनुमति लेनी पड़ सकती है।

    एक्सटेंशन में देरी से बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी छात्र का एक्सटेंशन आवेदन समय पर मंजूर नहीं होता या दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक देरी अथवा अन्य कारणों से उसकी वैध अवधि खत्म हो जाती है, तो वह अमेरिका में ‘अनलॉफुल प्रेजेंस’ (अवैध रूप से रहने) की स्थिति में आ सकता है।

    इसका असर भविष्य में वीजा आवेदन, रोजगार के अवसर और अमेरिका में दोबारा प्रवेश पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा पूरी होने और अंतिम प्रभावी तारीख घोषित होने तक F-1 छात्रों के लिए मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था ही जारी रहेगी।

  • कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर

    कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर


    नई दिल्ली/कैम्ब्रिज। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना संजोए भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के स्तर को वैश्विक मान्यता प्रदान की है। अब CBSE से 12वीं कक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र अपने बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के चुनिंदा अंडरग्रेजुएट UG कोर्सेज में प्रवेश के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर मुहर भी लगाता है।

    वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की पहचान इससे पहले कई विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए भारतीय छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त प्रवेश परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस फैसले ने उस बाधा को काफी हद तक कम कर दिया है। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डेबोरा प्रेंटिस ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों में अद्भुत प्रतिभा और जुनून है। कैम्ब्रिज इस मेधा को पहचानते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल 12वीं के अंक ही प्रवेश का एकमात्र आधार नहीं होंगे; छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित अन्य मापदंडों और शर्तों को भी पूरा करना होगा, लेकिन बोर्ड अंकों को मान्यता मिलना प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना देगा।

    शैक्षणिक संबंधों को नई दिशाCAS की स्थापना भारत और कैम्ब्रिज के बीच इन शैक्षणिक संबंधों को और गहरा बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कैम्ब्रिज इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह केंद्र रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के संगम के रूप में कार्य करेगा। CAS का मुख्य उद्देश्य भारत की तेजी से उभरती ‘नॉलेज इकोनॉमी’ को वैश्विक शिक्षा नेटवर्क से जोड़ना है। इस सेंटर के माध्यम से न केवल छात्रों को, बल्कि भारतीय रिसर्च स्कॉलर्स और शिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का बेहतरीन मंच मिलेगा।

    भविष्य की राह हुई आसान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का यह कदम भविष्य में अन्य वैश्विक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए करियर के नए और रोमांचक रास्ते खुलेंगे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है जो अपने बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्कूली शिक्षा की साख दुनिया भर में बढ़ेगी और वैश्विक विश्वविद्यालयों में भारतीय चेहरों की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सशक्त होगी।