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  • देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    नई दिल्ली । भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के तहत मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार जनरल धीरज सेठ को सौंप दिया। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विदाई संबोधन में सैन्य जीवन को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि देश की रक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक सैनिक का योगदान भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

    अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिक विद्यालय से लेकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करते हुए उनके मन में विनम्रता, कृतज्ञता, गर्व और संतोष की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उन लाखों सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के विश्वास में निहित है, जिन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है।

    उन्होंने उन सभी सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की परंपराएं, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और यही मूल्य भविष्य में भी सेना का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नेतृत्व भी इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

    अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी, सतर्कता और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने उत्तरी सीमाओं पर संचालित ऑपरेशन स्नो लेपर्ड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना ने पूरी मजबूती और सजगता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी प्रकार पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सेना ने अनुशासन, संयम और रणनीतिक दक्षता का प्रभावी प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में भारतीय सेना ने स्पष्ट उद्देश्य, जिम्मेदारी और पेशेवर दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। इसी सोच ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश के लिए एक नए सुरक्षा मानक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों का महत्व लगातार बढ़ेगा।

    जनरल द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय को भी अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा रणनीति, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध अधिक एकीकृत, तकनीक आधारित और संयुक्त अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए तीनों सेनाओं को एक साथ स्थिति का आकलन करने, संयुक्त रूप से निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

    नई जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना अब बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। नेतृत्व परिवर्तन के इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के साथ भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।

  • राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के निकट मंगलवार को एक लैंडमाइन विस्फोट में भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) सहित चार जवान घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब सेना की एक टीम नौशेरा सेक्टर के अग्रिम क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है तथा घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार सेना की टुकड़ी राजौरी जिले के कलाल क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक एक बारूदी सुरंग सक्रिय हो गई और जोरदार विस्फोट हुआ। धमाके की चपेट में आने से एक जेसीओ समेत चार सैनिक घायल हो गए। विस्फोट की आवाज सुनते ही आसपास तैनात सुरक्षा बलों के जवान तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    घायल सैनिकों को प्राथमिक उपचार देने के बाद सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सेना ने अभी तक किसी जवान के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन चिकित्सा दल पूरी सतर्कता के साथ उपचार में जुटा हुआ है।

    प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह घटना किसी घुसपैठ या आतंकी गतिविधि से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं है, बल्कि पहले से बिछाई गई बारूदी सुरंग के अनजाने में सक्रिय हो जाने के कारण हुई। नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ रोकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के लिए बड़ी संख्या में लैंडमाइंस बिछाई जाती हैं। कई बार भारी बारिश, भूस्खलन या मिट्टी खिसकने के कारण ये सुरंगें अपनी निर्धारित जगह से हटकर अन्य स्थानों पर पहुंच जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

    सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि हालिया घटना भी संभवतः इसी प्रकार की परिस्थितियों का परिणाम हो सकती है। आशंका है कि बारिश और प्राकृतिक बदलावों के कारण लैंडमाइन अपनी मूल स्थिति से खिसक गई होगी और गश्त के दौरान किसी जवान का पैर पड़ने से विस्फोट हो गया। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा बलों ने इलाके में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास कोई अन्य सक्रिय बारूदी सुरंग या सुरक्षा जोखिम मौजूद न हो। गश्ती मार्गों की दोबारा जांच भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

    राजौरी और नौशेरा सेक्टर नियंत्रण रेखा के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाते हैं, जहां सेना नियमित रूप से निगरानी और गश्त करती है। सीमापार घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए यहां सुरक्षा उपाय लगातार मजबूत बनाए जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को प्राकृतिक और परिचालन संबंधी दोनों तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

    इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में तैनात सैनिकों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है। सेना की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

  • लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेनाध्यक्ष, 30 जून को संभालेंगे भारतीय सेना की कमान

    लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेनाध्यक्ष, 30 जून को संभालेंगे भारतीय सेना की कमान


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे और भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। इस नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है तथा संबंधित विभागों को इसकी सूचना भी भेज दी गई है।

    भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी और पेशेवर सैन्य शक्तियों में शामिल है। ऐसे में थल सेनाध्यक्ष का पद राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और रक्षा तैयारियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण, सीमाओं की सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।

    रक्षा मंत्रालय के आदेश के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ जनरल के पद पर पदोन्नत होकर थल सेनाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वह सेना की परिचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और सामरिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

    लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कमानों और जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक योजना और परिचालन अनुभव के कारण उन्हें सेना के शीर्ष पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना के सामने तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के बढ़ते उपयोग और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। ऐसे में नए सेना प्रमुख का नेतृत्व इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में सेना ने कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीकों को अपनाने और युद्धक तैयारियों को बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब यह जिम्मेदारी नए नेतृत्व के हाथों में जाएगी, जो इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।

    रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की संस्थागत परंपरा का हिस्सा है, जिससे संगठनात्मक निरंतरता और पेशेवर दक्षता बनी रहती है। नए सेना प्रमुख के नेतृत्व में सेना की दीर्घकालिक रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।

    देश की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय सेना की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है। अब सभी की नजर 30 जून पर होगी, जब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ औपचारिक रूप से देश के नए थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।

  • सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान, ऑपरेशन सिंदूर को बताया संयुक्त सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का प्रतीक

    सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान, ऑपरेशन सिंदूर को बताया संयुक्त सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का प्रतीक

    नई दिल्ली । भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दिए गए अपने बयान में भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक सोच और बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल पर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज का समय पारंपरिक युद्धों से आगे बढ़कर हाइब्रिड युद्ध और तेज़ी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य का है, जिसमें किसी भी देश की सेना को हर स्थिति में तुरंत और सटीक निर्णय लेने की क्षमता रखनी होती है। उनके अनुसार ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हुए यह स्थापित किया है कि उकसावे की स्थिति में देश किस प्रकार दृढ़ और संतुलित प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।

    सेना प्रमुख ने कहा कि भारत की सैन्य कार्रवाई केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं होती, बल्कि यह रणनीति, अनुशासन और संयुक्तता का परिणाम होती है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया और कहा कि आज की सुरक्षा चुनौतियों का सामना केवल अलग-अलग बलों के प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण से ही किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते समय में सेना की संरचना और कार्यप्रणाली में लगातार सुधार किया जा रहा है ताकि किसी भी चुनौती का सामना अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    अपने संबोधन के दौरान जनरल द्विवेदी ने भावनात्मक रूप से अपने सैन्य जीवन के अनुभवों को साझा किया और कहा कि वे अपने करियर के अंतिम चरण में खड़े हैं, जबकि नई पीढ़ी अब जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्दी भले ही बदलती रहे, लेकिन उसके पीछे छिपे मूल्य, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना कभी नहीं बदलती। उन्होंने कैडेट्स को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान जो सिद्धांत और आदर्श उन्होंने सीखे हैं, वही उनके पूरे जीवन की दिशा तय करेंगे।

    उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कैडेट्स का भी उल्लेख किया जो प्रशिक्षण के बाद अपने-अपने देशों में लौट रहे हैं। उनके अनुसार विभिन्न देशों से आए कैडेट्स यहां एक साझा अनुभव और मूल्यों के साथ जुड़े, जो भविष्य में वैश्विक सैन्य सहयोग और समझ को और मजबूत करेगा। यह कार्यक्रम केवल एक परेड या औपचारिकता नहीं, बल्कि एक साझा सैन्य संस्कृति का प्रतीक है जो सीमाओं से परे जाकर सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है।

    सेना प्रमुख ने अंत में कहा कि आज का सुरक्षा वातावरण तीव्र निर्णय, तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता की मांग करता है। ऐसे समय में सेना का हर सदस्य देश की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार रहना चाहिए। उनका यह संदेश न केवल वर्तमान सैन्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में देखा जा रहा है।

  • जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    नई दिल्ली । देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को अक्सर केवल सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के नजरिए से देखा जाता रहा है, लेकिन अब इन इलाकों की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। जम्मू-कश्मीर के तंगधार क्षेत्र में एक ऐसी नई पहल सामने आई है, जो वीरता और विकास को एक साथ जोड़ते हुए सीमाओं की नई पहचान बना रही है। बर्फ से ढके पहाड़ों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच तैयार किया गया शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स अब केवल एक संरचना नहीं बल्कि साहस, समर्पण, संस्कृति और जनसेवा का प्रतीक बनता जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।

    कुपवाड़ा जिले के साधना पास के निकट शमशाबरी पर्वत श्रृंखला के बीच विकसित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और रणनीतिक महत्व दोनों के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह इलाका लंबे समय से अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां तैनात सैनिक हर मौसम में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। अब इसी वीरभूमि पर विकास और पर्यटन की एक नई कहानी आकार लेती दिखाई दे रही है।

    इस विशेष परिसर को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यहां आने वाले लोग केवल पहाड़ों और बर्फीली वादियों का आनंद ही न लें, बल्कि उन सैनिकों के साहस, संघर्ष और बलिदान को भी महसूस कर सकें जो सीमाओं की रक्षा में लगातार डटे रहते हैं। परिसर में बनाए गए युद्ध स्मारक और संग्रहालय में सैन्य इतिहास की प्रेरणादायक झलक देखने को मिलती है। यहां वीर सैनिकों की कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे आने वाले लोगों को देशभक्ति और समर्पण की भावना का अनुभव हो सके।

    इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी यह प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, पहाड़ी जीवनशैली और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।

    इस परियोजना से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने पर स्थानीय युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। छोटे व्यवसाय, स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक कलाएं भी इससे लाभान्वित हो सकती हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

    इसके अलावा यहां विकसित किया गया हेलिपैड स्थानीय लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकता है। खराब मौसम और कठिन रास्तों वाले क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं तथा राहत कार्यों को तेजी से संचालित करने में यह मददगार होगा। तंगधार की यह बदलती तस्वीर यह संदेश देती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ विकास और जनसेवा को भी समान महत्व दिया जा सकता है। यह पहल शौर्य और सेवा की उस भावना को साकार करती दिखाई देती है जो देश की सीमाओं को नई संभावनाओं से जोड़ रही है।

  • ऊंचाई वाले क्षेत्र में हादसा: चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, तीन सैन्यकर्मी घायल, जांच के आदेश

    ऊंचाई वाले क्षेत्र में हादसा: चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, तीन सैन्यकर्मी घायल, जांच के आदेश


    नई दिल्ली । लद्दाख सेक्टर में भारतीय सेना के एक प्रशिक्षण और परिचालन उड़ान के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है, जहां सेना का चीता लाइट हेलीकॉप्टर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह घटना उस समय हुई जब हेलीकॉप्टर अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र में सामान्य ड्यूटी पर था। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई, हालांकि सेना की तत्परता से स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया।

    इस दुर्घटना में सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल सचिन मेहता समेत कुल तीन सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। हेलीकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट भी इस हादसे की चपेट में आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर अचानक नियंत्रण खो बैठा और जमीन से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि दुर्घटना के तुरंत बाद सेना की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई और तेजी से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी सैन्य चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया।

    डॉक्टरों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और किसी की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है। समय पर मिली चिकित्सा सहायता के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। सेना के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि सभी घायल सैन्यकर्मी खतरे से बाहर हैं और उनकी निगरानी लगातार की जा रही है।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सेना के चीता हेलीकॉप्टरों का उपयोग लद्दाख जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार किया जाता है। इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग मुख्य रूप से रसद आपूर्ति, निगरानी, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और परिचालन गतिविधियों के लिए किया जाता है। कठिन मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ये हेलीकॉप्टर सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    हादसे के बाद सेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस पूरी घटना की विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई या फिर किसी अन्य परिचालन कारण से। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

    लद्दाख जैसे संवेदनशील और ऊंचाई वाले क्षेत्र में विमानन गतिविधियां हमेशा चुनौतीपूर्ण मानी जाती हैं, जहां अचानक बदलते मौसम और कम ऑक्सीजन स्तर उड़ानों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह घटना एक बार फिर से इन परिस्थितियों की गंभीरता को उजागर करती है।

    सेना ने आश्वासन दिया है कि सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है और सेना पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

  • मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    नई दिल्ली ।मणिपुर में लगातार बनी हुई संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय सेना ने राज्य में अपनी तैयारियों और तैनाती की व्यापक समीक्षा की है। हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सेना ने अग्रिम इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात का गहराई से आकलन किया। इस पूरी कवायद का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना बताया जा रहा है।

    सेना के स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने राज्य के कई संवेदनशील और अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने न केवल तैनात जवानों से सीधे बातचीत की बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों की विस्तृत जानकारी भी ली। उनके दौरे के दौरान रेड शील्ड डिवीजन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों की स्थिति का भी आकलन किया गया, जहां हाल के समय में तनाव की घटनाएं सामने आई थीं।

    लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया, जिससे उन्हें जमीन पर मौजूद हालात का व्यापक और वास्तविक चित्र देखने को मिला। विशेष रूप से हाल में हुई स्थानीय संघर्ष जैसी घटनाओं से प्रभावित इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि सुरक्षा रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने जवानों की सतर्कता, उनके पेशेवर रवैये और कठिन परिस्थितियों में भी शांति बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

    दौरे के दौरान सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर सतर्कता आवश्यक है। कोर कमांडर ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है और हर स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है।

    इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने लेइमाखोंग स्थित सैन्य स्टेशन में रेड शील्ड ड्रोन लैब का भी निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्हें सेना द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी ड्रोन तकनीक, उसकी मरम्मत, असेंबली और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक निगरानी और मिशन आधारित ड्रोन तकनीक सुरक्षा अभियानों में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सेना प्रमुख ने तकनीकी नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणालियां बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीकी क्षमता को लगातार विकसित करना समय की मांग है।

    सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पूरा दौरा न केवल परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय सेना मणिपुर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में हालात को सामान्य करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती और तैयारियों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

  • बैटल ऑफ़ गलवान टीज़र, सलमान खान ने 'भारत माता की जय' के साथ लीड की भारतीय सेना की अंतिम लड़ाई

    बैटल ऑफ़ गलवान टीज़र, सलमान खान ने 'भारत माता की जय' के साथ लीड की भारतीय सेना की अंतिम लड़ाई


    नई दिल्ली। सलमान खान ने अपने जन्मदिन पर अपनी आने वाली फिल्म बैटल ऑफ़ गलवान का टीज़र रिलीज़ किया। इस टीज़र में वे एक बहादुर भारतीय सेना अधिकारी के रूप में दुश्मन का सामना करते दिखे। फिल्म 2020 के गलवान वैली संघर्ष पर आधारित है, जिसमें भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई भयंकर झड़प को पर्दे पर जीवंत रूप में दिखाया जाएगा।

    टीज़र की खास बातें
    टीज़र की शुरुआत सलमान की आवाज़ से होती है, जिसमें वे अपने सैनिकों को दुश्मन से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

    क्लिप में सलमान अपने सैनिकों के साथ दुश्मन की ओर बढ़ते हैं, लाठी पकड़कर संघर्ष करते हैं और अंत में दुश्मन पर वार करते हुए नजर आते हैं। टीज़र में सलमान का गंभीर चेहरा, कठिन इलाके की झलक और हाई-अल्टीट्यूड कॉम्बैट की सच्चाई दिखाई गई है।
    टीज़र में स्टेबिन बैन के वोकल्स और हिमेश रेशमिया का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के रियलिस्टिक अनुभव को और मजबूती देते हैं।

    फिल्म की टीम और रिलीज़ डेट
    बैटल ऑफ़ गलवान 17 अप्रैल, 2026 को थिएटर्स में रिलीज़ होगी।

    फिल्म अपूर्वा लखिया के निर्देशन में बनी है और सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले निर्मित है। सलमान के साथ फिल्म में चितरंगदा सिंह प्रमुख भूमिका में हैं। फिल्म बहादुरी, बलिदान और साहस की कहानी को पर्दे पर उतारने का वादा करती है।

    फैंस की प्रतिक्रिया
    टीज़र रिलीज़ होने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने इसे शानदार प्रतिक्रिया दी। एक फैन ने लिखा, सलमान खान 2026 में वापसी कर रहे हैं एक प्यूअर ब्लॉकबस्टर फिल्म के साथ। एक अन्य ने कहा, अब यह कहा जाएगा कमबैक फिल्म।

    कई लोगों ने लिखा, गूजबम्प्स आए, फिल्म शानदार होने वाली है। बैटल ऑफ़ गलवान सलमान के साथ एपिक होने वाली है।

    सलमान खान का कहना
    सलमान ने पहले इंटरव्यू में बताया कि फिल्म शारीरिक रूप से बेहद demanding है। उन्होंने कहा, फिल्म के लिए ट्रेनिंग करना बहुत कठिन है। पहले मैं एक-दो हफ्तों में तैयार हो जाता था, अब मुझे रोज़ दौड़ना, किक, पंच और हर तरह की ट्रेनिंग करनी पड़ती है। इस फिल्म में यही सब करना जरूरी है।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला

    CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला


    भारत । के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने युद्ध जीतने के लिए साफ उद्देश्य, अनुशासन और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान पाकिस्तान के खिलाफ परोक्ष रूप से था, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा की जा रही जीत के दावों पर प्रतिक्रिया के रूप में।

    जनरल चौहान एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में दिसंबर 2025 की संयुक्त दीक्षांत परेड के दौरान युवा सैन्य अधिकारियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “युद्ध केवल बयानबाज़ी और दिखावे से नहीं जीते जाते, बल्कि तैयारी, सही फैसलों और उनका ज़मीन पर लागू करने से जीते जाते हैं।” यह टिप्पणी पाकिस्तान के झूठे दावों के संदर्भ में थी, जहां ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी जीत का दावा किया था।

    सीडीएस ने आगे कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वहां के संस्थान कमजोर हैं और निर्णय जल्दबाजी में लिए जाते हैं। इसके विपरीत, भारत की ताकत उसकी मजबूत संस्थाएं, लोकतांत्रिक व्यवस्था और पेशेवर सोच वाले सशस्त्र बलों में है।

    उन्होंने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि अनुशासन और जिम्मेदारी के प्रति समर्पण ही देश की सुरक्षा का मुख्य आधार है। नए अधिकारियों से उन्होंने अपील की कि वे इस मजबूत परंपरा के संरक्षक बनें और हर स्थिति में सतर्क और तैयार रहें।

    जनरल चौहान ने अंत में युवा अधिकारियों से कहा कि वे खुद को उदाहरण के रूप में पेश करें। उनका मानना था कि सतर्कता, तैयारी और पेशेवर रवैया ही किसी भी सैन्य अधिकारी की सफलता की कुंजी है, चाहे वह युद्ध का समय हो या शांति का।

    यह बयान पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश था, और यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की सैन्य शक्ति केवल बातों में नहीं, बल्कि असलियत में उस शक्ति को जमीन पर लागू करने में है।