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  • अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की रोक खारिज की, लाखों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत

    अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की रोक खारिज की, लाखों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली । अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप को बरकरार रखते हुए ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास को खारिज कर दिया है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता का अधिकार प्राप्त रहेगा। इस फैसले को अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से दिए अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान में प्रदत्त अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि जन्म के आधार पर नागरिकता का सिद्धांत अमेरिकी संविधान में स्पष्ट रूप से स्थापित है और इसमें बदलाव केवल संवैधानिक संशोधन के माध्यम से ही संभव है। इस निर्णय के साथ ट्रंप प्रशासन का वह आदेश प्रभावी नहीं हो सका, जिसमें अवैध प्रवासियों और अस्थायी वीजा धारकों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की बात कही गई थी।

    बर्थराइट सिटिजनशिप का आधार अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन है, जो वर्ष 1868 में लागू हुआ था। इसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति, जो अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र में आता है, अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। इसी प्रावधान को लेकर विवाद पैदा हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसे पूरी तरह वैध और प्रभावी माना है।

    अदालत ने अपने निर्णय में वर्ष 1898 के ऐतिहासिक वुंग किम आर्क मामले का भी उल्लेख किया। उस फैसले में भी यह सिद्धांत स्थापित किया गया था कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा, भले ही उसके माता-पिता किसी अन्य देश के नागरिक हों। सुप्रीम कोर्ट ने इस पुराने कानूनी सिद्धांत को दोबारा स्वीकार करते हुए कहा कि संविधान की मूल भावना में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता।

    इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन लाखों विदेशी नागरिकों पर पड़ेगा जो अमेरिका में नौकरी, व्यवसाय या शिक्षा के उद्देश्य से रह रहे हैं। भारतीय समुदाय भी इससे सीधे तौर पर लाभान्वित होगा। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर एच-1बी, एल-1 और अन्य कार्य वीजा पर कार्यरत हैं, जबकि हजारों छात्र एफ-1 वीजा पर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अब उनके अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर किसी प्रकार की कानूनी अनिश्चितता नहीं रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए भी राहत लेकर आया है। हालांकि इस निर्णय का स्थायी निवास या वीजा प्रक्रिया पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता पहले की तरह सुरक्षित बनी रहेगी। इससे लंबे समय से अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंता काफी हद तक कम होगी।

    हालांकि अदालत के इस फैसले के बाद भी बर्थ टूरिज्म यानी केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाने की प्रवृत्ति को वैधता नहीं मिली है। अमेरिकी प्रशासन पहले की तरह वीजा नियमों और जांच प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे मामलों पर सख्ती जारी रख सकेगा। वहीं कुछ राजनीतिक समूह भविष्य में संवैधानिक संशोधन की मांग उठा सकते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में जन्म के आधार पर नागरिकता का संवैधानिक प्रावधान पूरी तरह प्रभावी रहेगा।

  • नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां

    नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो उनकी पांच देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है। द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों को याद किया और कहा कि 16 मई 2014 को देश में स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ था।

    पीएम मोदी ने कहा, “आज से 12 वर्ष पहले 2014 में 16 मई को कुछ खास हुआ था। उस दिन भारतवासियों के विश्वास ने नई दिशा दी, जिसने उन्हें बिना रुके और बिना थके काम करने की ताकत दी।”

    अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की और कहा कि नीदरलैंड का हेग आज भारत-नीदरलैंड मित्रता का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट और पता बदल सकता है, लेकिन भारतीयों का अपनी संस्कृति और देश के प्रति लगाव हमेशा बना रहता है।

    पीएम मोदी ने भारत की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश आज बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, इलेक्ट्रिफाइड रेल नेटवर्क और सिविल एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास वाले देशों में शामिल हो रहा है और नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर हो रही है। नीदरलैंड में करीब 90,000 से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं और लगभग 3,500 भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    पीएम मोदी 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे और इस दौरान कई द्विपक्षीय और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।