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  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा

    नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के प्रदर्शन और उनके साथ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी से उन्हें हमेशा उम्मीद रही है और आज भी वही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ सिखाया है। उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में जो अनुभव उन्होंने हासिल किया उसका बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए मिला। इसी कारण वह छात्रों के संघर्ष और उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझते हैं।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार देखने को मिला उससे उनका मन बेहद व्यथित है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी घटना से भावुक भी हैं और भीतर से आक्रोश भी महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखें। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो छात्रों की भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है और यही उम्मीद उन्हें सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

    अपने संबोधन में अभिनेता ने सरकार की भी आलोचना की और कहा कि समय हर घटना का साक्षी बनता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ आज हो रहा है उसे लोग भूलेंगे नहीं और इतिहास हर बात को याद रखता है। उनका मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों को भी यह समझना चाहिए कि जनता की भावनाओं और युवाओं की उम्मीदों का सम्मान करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

    इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो किसी विरोध प्रदर्शन का नहीं बल्कि मुंबई में आयोजित एक फिल्म स्क्रीनिंग का था और इसे गलत संदर्भ में साझा किया गया।

    नसीरुद्दीन शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिनेता का संदेश युवाओं के समर्थन और लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

  • अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी

    अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी


    नई दिल्ली । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के दो दिनों के भीतर सामने आए पत्रों ने न केवल संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि संत समाज और रामभक्तों के बीच भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लगातार हो रही बैठकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सक्रियता ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट की व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय के पत्र सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद कई प्रमुख संत महंत और ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ लोगों ने भी अलग अलग बैठकों में हिस्सा लिया। इन मुलाकातों को सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है क्योंकि इनका उद्देश्य ट्रस्ट में बने मौजूदा हालात पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करना बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि महासचिव पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल ही में जारी उनके पत्रों में भी उनकी पीड़ा झलकने की बात कही जा रही है। पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद संगठन के भीतर यह कोशिश तेज हो गई है कि किसी तरह विवाद और अधिक न बढ़े तथा स्थिति को सामान्य बनाया जाए। इसी कारण लगातार संवाद और बैठकों का सिलसिला जारी है।

    जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी चंपत राय से संपर्क किया है। उनसे संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखने और पूरे मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का आग्रह किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास और तेज होगा।

    इधर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी से कई प्रमुख संतों ने विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद संतों ने संकेत दिए कि निकट भविष्य में ऐसा परिवर्तन देखने को मिल सकता है जिसकी व्यापक स्तर पर सराहना होगी। संत समाज का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन में संतों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है इसलिए ट्रस्ट की व्यवस्था में भी उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में निर्णय प्रक्रिया में संतों की अधिक भागीदारी से संगठन और अधिक मजबूत होगा।

    सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जा सकती है जिसमें देशभर से सैकड़ों संत और महंत शामिल हो सकते हैं। इस बैठक का उद्देश्य हाल के विवादों के बाद समाज में बने भ्रम को दूर करना और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति सकारात्मक संदेश देना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित अनियमितताओं में पूरे ट्रस्ट की भूमिका नहीं बल्कि केवल कुछ व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल अयोध्या में लगातार हो रही बैठकों और बढ़ी गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर कुछ अहम फैसले ले सकता है। हालांकि इन बैठकों का अंतिम परिणाम क्या होगा और संभावित बदलाव किस रूप में सामने आएंगे इसका जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।

  • भारत–बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की बड़ी पहल: वीजा सेवाएं फिर से पटरी पर लौटने लगीं

    भारत–बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की बड़ी पहल: वीजा सेवाएं फिर से पटरी पर लौटने लगीं


    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार के संकेत साफ दिखने लगे हैं। दोनों देशों ने वीजा सेवाओं को फिर से सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे आपसी सहयोग और यात्रा व्यवस्था दोबारा मजबूत होने की उम्मीद है।

    वीजा बहाली की दिशा में अहम कदम
    ढाका ने हाल ही में सभी श्रेणियों के लिए भारतीय नागरिकों को वीजा सेवाएं दोबारा शुरू कर दी हैं। वहीं भारत भी आने वाले हफ्तों में धीरे-धीरे अपनी वीजा सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने की तैयारी में है। पिछले महीनों में दोनों देशों के बीच कांसुलर गतिविधियों में तेजी देखी गई है।

    पिछले तनाव के बाद सुधार की शुरुआत
    अगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि अब स्थिति बदलती दिख रही है और दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वीजा सेवाओं की बहाली को इसी प्रक्रिया का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत के वीजा केंद्र फिर सक्रिय
    बांग्लादेश के सभी प्रमुख भारतीय वीजा केंद्र नई दिल्ली उच्चायोग और कोलकाता, अगरतला, मुंबई व चेन्नई स्थित कार्यालय अब पहले की तरह काम कर रहे हैं। ढाका को उम्मीद है कि भारत भी जल्द पूरी तरह सेवाएं शुरू कर देगा।

    उच्च स्तरीय बैठकों की संभावना
    सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय राजनीतिक मुलाकातें भी हो सकती हैं। इससे आर्थिक सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    व्यापार और यात्रा में राहत
    हाल के महीनों में भारत ने बांग्लादेश को ऊर्जा जरूरतों में सहयोग के तौर पर डीजल भी उपलब्ध कराया है। वीजा प्रक्रिया आसान होने से दोनों देशों के नागरिकों, व्यापारियों और मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

    भविष्य की दिशा
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सकारात्मक रुख जारी रहता है तो भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक नए स्थिर और सहयोगी दौर में प्रवेश कर सकते हैं। यह बदलाव क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी अहम माना जा रहा है।

  • हौसलों की उड़ान: गांव की पहली बहू मीनाक्षी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

    हौसलों की उड़ान: गांव की पहली बहू मीनाक्षी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल


    भोपाल । गुना जिले के बमोरी ब्लॉक से निकलकर एक साधारण ग्रामीण महिला ने आज ऐसी उड़ान भरी है जो पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है श्रीमती मीनाक्षी फराक्टे आज केवल एक नाम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और संघर्ष की पहचान बन चुकी हैं राजमाता स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपने जीवन को बदला बल्कि दर्जनों महिलाओं को रोजगार और आत्मविश्वास की राह दिखाई है

    मीनाक्षी शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ी हैं और उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज के रूप में कार्य कर रही हैं उनका काम केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं है बल्कि वह ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं इस यात्रा की शुरुआत आसान नहीं थी लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदल दिया

    प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है और उसे प्रोसेस करके तैयार उत्पादों के रूप में बाजार में भेजा जाता है समूह की महिलाएं कभी घर घर जाकर कभी दुकानों में और कभी स्कूलों तथा आंगनवाड़ी के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं यह काम शुरुआत में बेहद कठिन था क्योंकि समाज में महिलाओं की इस भूमिका को लेकर भरोसा नहीं किया जाता था

    जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर सामान लेकर पहुंचीं तो उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ा क्या आप समय पर सामान दे पाएंगी क्या गुणवत्ता बनी रहेगी क्या महिलाएं इस जिम्मेदारी को निभा सकती हैं ऐसे संदेह हर कदम पर उनके सामने खड़े थे कई बार उन्हें एक ही दुकान पर बार बार जाना पड़ा और दुकानदारों को समझाना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी

    धीरे धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और लोगों का भरोसा बढ़ता गया लगातार प्रयास और गुणवत्ता के दम पर आज यह यूनिट लगभग सत्तर लाख रुपये की बिक्री कर चुकी है जिसमें अकेले मीनाक्षी का योगदान पच्चीस से तीस लाख रुपये तक रहा है उनकी व्यक्तिगत आय जो पहले केवल पांच हजार रुपये थी वह अब बढ़कर पच्चीस हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच चुकी है यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक सोच में भी बड़ा परिवर्तन है

    मीनाक्षी कहती हैं कि मार्केटिंग कोई कठिन काम नहीं है डर सिर्फ शुरुआत न करने से लगता है जब हम पहला कदम बढ़ाते हैं तो रास्ते खुद बनते जाते हैं उनका मानना है कि आत्मविश्वास और मेहनत के साथ कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है

    उनकी सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती हाल ही में उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में भाग लेने का अवसर मिला जहां वे पहली बार हवाई जहाज में बैठीं यह अनुभव उनके जीवन का ऐतिहासिक पल था वे गर्व से कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं जिसने फ्लाइट से यात्रा की है यह उपलब्धि उनके परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व का विषय बन गई

    मीनाक्षी अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समर्थन और योजनाओं को देती हैं उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं और समूह की शक्ति ने उनके जैसे कई जीवन बदल दिए हैं आज उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि हौसले मजबूत हों तो गांव की महिलाएं भी आसमान को छू सकती हैं और अपने सपनों को साकार कर सकती हैं

  • रामनवमी उत्सव में अनोखी भेंट, जग्गा रेड्डी ने श्रीराम-सीता को अर्पित किए सोने-चांदी के गहने

    रामनवमी उत्सव में अनोखी भेंट, जग्गा रेड्डी ने श्रीराम-सीता को अर्पित किए सोने-चांदी के गहने


    नई दिल्ली:देशभर में रामनवमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है और इस पावन अवसर पर भक्ति के कई अद्भुत दृश्य सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक भगवान भगवान राम के जन्मोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में तेलंगाना के सांगारेड्डी से आस्था और समर्पण का एक विशेष उदाहरण सामने आया है जहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी जग्गा रेड्डी ने भगवान राम और माता माता सीता को करोड़ों रुपये के आभूषण भेंट कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

    इस अवसर पर जग्गा रेड्डी ने भक्तों के साथ मिलकर भव्य आयोजन किया जिसमें भगवान राम और माता सीता को लगभग ढाई करोड़ रुपये मूल्य के सोने और चांदी से बने आभूषण अर्पित किए गए। इन आभूषणों का कुल वजन करीब ढाई किलो बताया गया है जिसमें लगभग 2.25 किलो सोने का उपयोग किया गया। इन विशेष गहनों में मुकुट हार कमरबंद धनुष बाण शंख चक्र सहित कई पारंपरिक और धार्मिक महत्व के प्रतीक शामिल हैं।

    माता सीता के लिए विशेष रूप से मंगलसूत्र और कमल के आकार के आभूषण तैयार किए गए जबकि भगवान राम के लिए प्रतीकात्मक बाण धारण करने वाला विशेष आभूषण भी बनाया गया। इसके अलावा चांदी का उपयोग कर आदिशेष और एक औपचारिक कल्याण पीठ भी तैयार की गई जो इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाती है।

    इन आभूषणों को सीधे मंदिर में चढ़ाने से पहले विधि विधान के साथ विशेष पूजा और अनुष्ठान किया गया। यह अनुष्ठान राम नगर स्थित जग्गा रेड्डी के आवास पर आयोजित किया गया जहां पहले इन गहनों की विधिवत प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद एक भव्य जुलूस निकाला गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    जुलूस के पश्चात मंदिर में हवन और आहुति का आयोजन हुआ और फिर भगवान राम और माता सीता को ये सभी आभूषण समर्पित किए गए। इस पूरे आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि व्यापक स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और यह दर्शाया कि भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी और अटूट है।

    इस प्रकार रामनवमी के इस पावन अवसर पर तेलंगाना में देखने को मिला यह आयोजन भक्ति श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम बन गया जिसने यह संदेश दिया कि भगवान राम आज भी जन जन के हृदय में बसते हैं और उनके प्रति श्रद्धा समय के साथ और भी प्रगाढ़ होती जा रही है।

  • नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति

    नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति


    नई दिल्ली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनीतिक संवाद के साथ सांस्कृतिक आस्था का भी सशक्त संदेश दिया। यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही बल्कि इसमें मार्गदर्शन परंपरा और जनहित के विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस बैठक की जानकारी साझा की गई जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और संवाद लगातार मजबूत हो रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जो राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में दिशा देने वाला है। उन्होंने इस मुलाकात के दौरान रामनवमी की शुभकामनाएं भी प्रधानमंत्री को दी जिससे यह भेंट केवल राजनीतिक न रहकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावनाओं से भी जुड़ गई।

    इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति भेंट की जो उत्तराखंड की आस्था और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने बद्री गाय का घी पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित विभिन्न प्रकार के राजमा और शहद भी उपहार स्वरूप दिए। ये सभी उपहार उत्तराखंड की समृद्ध जैविक परंपरा और स्थानीय उत्पादों की पहचान को दर्शाते हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने अपने संदेश में प्रधानमंत्री को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो देश को नई दिशा नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व सेवा समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से प्रेरित है और वे गरीबों किसानों युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती को भी प्रधानमंत्री का दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों विशेषकर मिडिल ईस्ट संकट के बीच लिया गया यह निर्णय आम जनता को राहत देने वाला है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी से जहां आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा वहीं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब भी देश ने किसी चुनौती का सामना किया है तब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मजबूत नेतृत्व और प्रभावी निर्णयों से देशवासियों के हितों की रक्षा की है। डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क के माध्यम से देश में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

  • पीयूष गोयल ने T20 जीत पर मजाकिया टिप्पणी की, कहा- ‘अगर टैरिफ 0 होता तो अमेरिका जीत जाता’

    पीयूष गोयल ने T20 जीत पर मजाकिया टिप्पणी की, कहा- ‘अगर टैरिफ 0 होता तो अमेरिका जीत जाता’


    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के सहयोग के बिना संभव नहीं था। गोयल ने सर्जियो गोर की व्यक्तिगत भूमिका की सराहना की और इस अवसर पर भारत और अमेरिका के बीच खेले गए T20 मैच पर भी चुटकी ली।

    गोयल ने मजाकिया लहजे में कहा अगर अमेरिका ने अपने जवाबी टैरिफ को शून्य प्रतिशत कर दिया होता तो शायद वह भारत के खिलाफ मैच जीत जाता। इस बात पर मौजूद मेहमानों ने हँसी और तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी। गोयल ने आगे कहा कि अमेरिका ने क्रिकेट खेलना केवल कुछ साल पहले शुरू किया है और उनकी टीम का प्रदर्शन हाल ही में शानदार रहा।

    स्वागत समारोह और व्यापार समझौता

    नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने आवास पर एक स्वागत समारोह आयोजित किया। इसमें वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य दिग्गज शामिल हुए। यह बैठक भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी होने के बाद हुई।सर्जियो गोर ने कहा कि व्हाइट हाउस भारत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की दोस्ती ने व्यापार सौदे को संभव बनाया। भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ कम किया है जबकि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया।

    भारत-अमेरिका T20 मैच

    विश्व कप के पहले मैच में भारत ने अमेरिका को 29 रन से हराया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने दबाव में 84 रन की नाबाद पारी खेली जबकि मोहम्मद सिराज ने तीन विकेट लिए। भारत ने नौ विकेट पर 161 रन बनाए। अमेरिका ने 20 ओवर में 132 रन पर 8 विकेट खोकर पीछा किया। उनके लिए संजय कृष्णमूर्ति और शुभम रंजने ने 37-37 रन और मिलिंद कुमार ने 34 रन बनाए। भारत के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और सिराज ने शुरुआती सफलता दिलाई।

    पाकिस्तान के खिलाफ मैच
    पाकिस्तान सरकार ने मैच बहिष्कार का फैसला वापस ले लिया है। अब 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच T20 मैच होगा। इससे पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने क्रिकेट हित में पाकिस्तान से मैच खेलने का अनुरोध किया था।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान

    सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर जताई चिंता, 54 हजार करोड़ के गबन मामले को लेकर CJI हैरान


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए 54,000 करोड़ रुपये के गबन को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में बैंकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि आरबीआई, बैंक और दूरसंचार विभाग जैसे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार की जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की चिंता

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे असामान्य और बड़े पैमाने के लेनदेन पर ग्राहकों को तुरंत सतर्क करें। उदाहरण के लिए, यदि कोई आमतौर पर 10-20 हजार रुपये निकालने वाला पेंशनभोगी अचानक लाखों रुपये निकालता है, तो बैंक को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए। पीठ ने जोर देकर कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से गबन की गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। यह बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण हो सकता है।

    CBI को जांच में शामिल किया गया

    सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया। गुजरात और दिल्ली की सरकारों को कहा गया कि वे इस जांच के लिए आवश्यक स्वीकृति दें। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों को मुआवजा देने में उदार दृष्टिकोण अपनाने की भी सिफारिश की।

    SOP और AI का इस्तेमाल

    अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया है, जिसमें साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपाय जैसे अस्थायी डेबिट होल्ड शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों के लिए AI टूल्स के उपयोग की सिफारिश भी की ताकि संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।

    बैंकों पर कड़ी टिप्पणी
    पीठ ने कहा कि बैंकों का ध्यान ज्यादातर व्यवसायिक मोड पर है, जिससे वे अपराधियों के लिए मंच बन सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने बताया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “ये बैंक अब एक बोझ बनते जा रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे धन के रखवाले हैं और भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। कई बार बैंक धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर एनसीएलटी/एनसीएलएटी जैसी संस्थाएं सामने आती हैं।”

    डिजिटल अरेस्ट क्या है
    ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर अपराध का बढ़ता स्वरूप है, जिसमें ठग पीड़ित को सरकारी अधिकारी या अदालत के रूप में पेश कर ऑडियो/वीडियो कॉल के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ितों को पैसे देने के लिए मजबूर करना होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई को देशव्यापी जांच करने और आरबीआई से साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज़ करने में AI का उपयोग करने का निर्देश दे रखा है।

  • जयशंकर ने PAK सेना पर साधा निशाना, मुनीर को लेकर कहा – कई समस्याओं की जड़ वहीं है, भड़का पाक

    जयशंकर ने PAK सेना पर साधा निशाना, मुनीर को लेकर कहा – कई समस्याओं की जड़ वहीं है, भड़का पाक


    नई दिल्‍ली । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मीडिया समिट में एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि भारत की अधिकांश समस्याओं की जड़ पाकिस्तान की सेना है और उसका आतंकी समूहों को समर्थन देना भी इसका हिस्सा है। पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए जयशंकर ने कहा, ‘जैसे अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही कुछ अच्छे सैन्य नेता भी होते हैं और कुछ शायद उतने अच्छे नहीं।’ यह टिप्पणी पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ओर इशारा मानी जा रही है।

    एस जयशंकर की ओर से सच्चाई उजागर करने पर पाकिस्तान को मिर्ची लगी है। पाकिस्तान ने कहा कि उसके सभी संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ हैं। जयशंकर की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘पाकिस्तान भारतीय विदेश मंत्री की भड़काऊ, बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज और निंदा करता है।’ अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार देश है और उसके सभी संस्थान, जिनमें सशस्त्र बल भी शामिल हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत आधार हैं। प्रवक्ता ने कहा कि मई महीने में हुई झड़पों ने पाकिस्तानी सेना के उस संकल्प को दिखाया कि वह किसी भी आक्रमण का जवाब दे सकती है।

    पाकिस्तान को जान-माल का भारी नुकसान
    गौरतलब है कि 7 मई को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसके जरिए पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन हमलों के बाद चार दिन तक तीव्र सैन्य टकराव चला, जो 10 मई को मिलिट्री ऐक्शन रोकने की समझौते के साथ खत्म हुआ। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, भारतीय हमलों में पाकिस्तान के 12 से अधिक लड़ाकू विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए थे। इनमें अमेरिकी मूल के एफ-16 जेट भी शामिल थे। इस तरह पाकिस्तान को जान-माल का भारी नुकसान हुआ था।