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  • दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान

    दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान


    नई दिल्ली । नया साल आने में अब गिनती के ही दिन बचे हैं और ऐसे में घूमने-फिरने की प्लानिंग जोरों पर है. ज्यादातर लोग चाहते हैं कि साल की शुरुआत किसी ऐसी जगह से हो जहां मस्ती सुकून और नए अनुभव एक साथ मिलें

    मनाली कसोल

    बर्फ से ढकी वादियां बोनफायर और पहाड़ी कैफे मनाली और कसोल नए साल के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हैं. यहां दिन में स्नो एक्टिविटीज और रात में म्यूजिक व पार्टी का माहौल मिलता है.

    उदयपुर

    राजस्थान का रॉयल अंदाज न्यू ईयर को यादगार बना देता है. महलों में खास डिनर लोक कलाकारों की प्रस्तुति और आतिशबाजी सेलिब्रेशन को अलग रंग देती है.

    पुडुचेरी

    यहां नया साल शोर से नहीं बल्कि सुकून और खूबसूरती से मनाया जाता है. बीच के किनारे जश्न और व्हाइट टाउन की गलियां अलग ही अनुभव देती हैं.
    ग्रेट रण ऑफ कच्छ
    अगर कुछ हटकर करना चाहते हैं तो रण उत्सव बेहतरीन विकल्प है. सफेद रेगिस्तान लोक संगीत और टेंट स्टे न्यू ईयर को खास बनाते हैं.

    गोकर्ण


    कम भीड़ और शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए गोकर्ण सही जगह है. यहां बीच पर म्यूजिक बोनफायर और दोस्तों के साथ लंबी बातचीत का मजा लिया जा सकता है. चाहे पहाड़ हों समंदर या रेगिस्तान ये डेस्टिनेशन नए साल की शुरुआत को यादगार बना सकती हैं.

  • किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है

    किसान दिवस 2025 जब मंत्री की पत्नी के हिस्से आई फटी धोतीचौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का वो किस्सा जो आज मिसाल है


    इंदौर । लखनऊ आज किसान दिवस है यह दिन देश के उन अन्नदाताओं को समर्पित है जिनकी मेहनत से हमारी थाली सजती है। लेकिन जब भी किसानों की बात होती हैदेश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘किसानों के मसीहा’ चौधरी चरण सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। साल 2025 में भी उनके जीवन के किस्से राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं।

    1966 का वो दौर: मंत्री पद और सादा जीवन

    किस्सा साल 1966 का है। उस वक्त चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री जैसे कद्दावर पद पर थे। सत्ता और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थीलेकिन उनका रहन-सहन किसी साधारण किसान जैसा ही था। उनकी सादगी का आलम यह था कि उनके घर में सुबह की शुरुआत आज के नेताओं की तरह तामझाम से नहींबल्कि अनुशासन और सादगी से होती थी।

    जब बेटी वन विभाग की जीप से घर आई

    एक सुबह उनकी बड़ी बेटी सत्यवती अपने बच्चों के साथ आगरा से लखनऊ अपने पिता से मिलने पहुंचीं। बातचीत के दौरान जब चौधरी साहब को पता चला कि सत्यवती सरकारी कार्य के लिए आवंटित ‘वन विभाग की जीप’ से आई हैंतो वे बेहद आहत हुए। उन्होंने अपनी बेटी को स्पष्ट समझाया कि सरकारी सुविधाएं जनता की अमानत हैंपरिवार के निजी उपयोग के लिए नहीं। उन्होंने अपनी बेटी से उस यात्रा का किराया तक सरकारी कोष में जमा करवाया था।

    पत्नी की फटी धोती और अटूट ईमानदारी

    चौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू उनकी पत्नी गायत्री देवी से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब वे मंत्री थेतब भी उनकी पत्नी फटी हुई धोती को टांका लगाकर पहनती थीं। एक बार किसी ने टोका कि “चौधरी साहब मंत्री हैंआप नई धोती क्यों नहीं ले लेतीं?” इस पर सादगी भरा जवाब मिला कि जो है उसी में संतोष है। चौधरी साहब का मानना था कि यदि वे अपनी मेहनत की कमाई से अधिक खर्च करेंगेतो उन्हें भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ेगाजो उनके उसूलों के खिलाफ था।

    आज के दौर में प्रासंगिकता

    चौधरी चरण सिंह के ये किस्से आज के दौर के राजनेताओं के लिए एक आईना हैं। उन्होंने न केवल किसानों के हक की लड़ाई लड़ीबल्कि यह भी सिद्ध किया कि सत्ता में रहकर भी इंसान अपनी जड़ों और सादगी से जुड़ा रह सकता है। यही कारण है कि आज दशकों बाद भी किसान दिवस पर उनकी ईमानदारी की गाथाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। अवसर राष्ट्रीय किसान दिवस 2025। व्यक्तित्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। आदर्श सरकारी जीप के उपयोग पर बेटी से वसूला था किराया। सादगी मंत्री पद पर रहते हुए भी पत्नी पहनती थीं फटी धोती।

  • कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम  बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है

    कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है


    नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और आंतरिक खींचतान को लेकर चल रही अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी के साथ उनके रिश्ते पूरी तरह सामान्य हैं। हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली में उनकी गैरमौजूदगी और कुछ अहम बैठकों में शामिल न होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी  से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।

    यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।

    थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।

    गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

    कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।

  • मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप

    मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने की योजना बनाई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा के स्थान पर एक नया विधेयक लाने की तैयारी हैजिसे ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण 2025’ नाम दिया गया है। इस विधेयक को संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाएगा। इस नए बिल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के लिए एक नया और अधिक मजबूत ढांचा तैयार करना हैजो गरीब और पिछड़े समुदायों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सके।

    मनरेगा की जगह VB-G RAM G

    मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिरता देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है। यह कानून ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया कराता है। हालांकियह योजना कई मायनों में विफल रही है और सरकार ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। नए विधेयक का मकसद रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करना है और इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में नई रोजगार योजनाओं को लागू करना है।

    क्या है VB-G RAM G का उद्देश्य

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और जीवन यापन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक न केवल रोजगार की गारंटी देगाबल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे। इसके अलावायह योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करनेग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा वर्ग को रोजगार में अधिक शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी।

    125 दिन रोजगार की गारंटी

    VB-G RAM G के तहतसरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार देने का वादा कर रही है। इससे पहले मनरेगा में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती थी। यह कदम सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्थिर रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। इसके तहत ग्रामीण कामकाजी वर्ग को लंबे समय तक रोजगार प्राप्त होगाजिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    BJP ने जारी किया व्हिप

    सूत्रों के मुताबिककेंद्र सरकार ने अपने विधायकों और सांसदों को इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा ने सुनिश्चित किया है कि इस विधेयक के समर्थन में पूरी पार्टी एकजुट रहेताकि इसे संसद में जल्दी से पास किया जा सके। पार्टी का मानना है कि यह नया विधेयक ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    नए विधेयक की संभावित विशेषताएं

    125 दिन रोजगार की गारंटी: यह मनरेगा से एक कदम आगे होगाजहां ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिन तक काम मिल सकेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा: इस विधेयक में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने का भी प्रस्ताव हैजिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता: महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष रोजगार अवसर दिए जाएंगे। नई परियोजनाओं की शुरुआत: ग्रामीण विकासजल संरक्षणशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    क्या होगा मनरेगा के स्थान पर

    मनरेगा को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगाबल्कि इसे नए विधेयक के तहत अपडेट किया जाएगा। जहां मनरेगा में मुख्य रूप से फिजिकल कामों पर ध्यान केंद्रित किया गया थावहीं VB-G RAM G का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और विस्तारित करना हैताकि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके।

    आखिरकारइस विधेयक का क्या असर होगा

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक के लागू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता में सुधार होगा और श्रमिकों को अधिक काम मिलेगा। इससे न केवल गांवों में आर्थिक सुधार होगाबल्कि यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हैऔर यह देश के किसानों और श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकिइसे लेकर विपक्ष में विभिन्न विचार हो सकते हैंलेकिन इसे ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

  • असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट

    असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट


    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में मतदान के पैटर्न को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम में वोट केवल सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर निर्भर नहीं होते.बल्कि यह विचारधारा और पहचान से तय होते हैं। उनका मानना है कि कई समुदाय अपने राजनीतिक निर्णय केवल आर्थिक प्रोत्साहन या सरकारी लाभ से नहीं.बल्कि अपनी विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर लेते हैं।

    एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने इस बारे में विस्तार से बात की। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम के मुस्लिम मतदाता.जिनकी संख्या राज्य में महत्वपूर्ण है.अक्सर अपनी वोटिंग पसंद को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। उनका कहना था कि चाहे सरकार 10 हजार रुपये दे या 1 लाख रुपये.कुछ समुदाय.खासकर मुस्लिम मतदाता.उसी सरकार को वोट नहीं देंगे यदि वह सरकार उनकी विचारधारा और पहचान से मेल नहीं खाती।

    नकद सहायता को नकारा

    एक सवाल के जवाब में.जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या असम में महिलाओं को बिहार की तरह नकद सहायता दी जा सकती है.तो उन्होंने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया। उनका कहना था कि चुनाव में वोटिंग का आधार केवल वित्तीय लाभ नहीं है। वह मानते हैं कि हर समुदाय अपने राजनीतिक विकल्पों का चयन विचारधारा और पहचान के आधार पर करते हैं.न कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर।

    जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता

    मुख्यमंत्री सरमा ने असम में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि 2021 में राज्य की मुस्लिम आबादी लगभग 38% थी.और हर दशक में यह 4-5% बढ़ रही है। यदि यह वृद्धि दर जारी रही.तो 2027 तक मुस्लिम आबादी 40% तक पहुंच सकती है। सरमा ने कहा कि यदि मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो गई.तो अन्य समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर दबाव बढ़ सकता है।

    व्यक्तिगत संबंध वोट में नहीं बदलते

    सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत संबंध मिया समुदाय की महिलाओं और कई मुस्लिम परिवारों के साथ अच्छा है.लेकिन चुनाव में यह जुड़ाव वोट में तब्दील नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के पक्ष में वोट करें.भाजपा अपनी स्थिति असम में बनाए रख सकती है।

    सरमा ने अंत में कहा..असम में मेरे अपने वे लोग हैं.जो खुद को असमी और भारतीय पहचान से जोड़ते हैं।. उनका यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के असमी और भारतीय पहचान के लोगों पर है.और उनकी राजनीतिक नीतियां इसी पर आधारित हैं।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान असम की राजनीति और वोटिंग पैटर्न को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने यह साफ किया कि असम में वोटिंग सिर्फ सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर नहीं.बल्कि विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित होती है। इसके साथ हीउन्होंने राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसके प्रभाव पर भी चिंता जताई।

    उनका यह बयान असम की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है.क्योंकि यह दर्शाता है कि वह न केवल चुनावी रणनीतियों को बल्कि राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को भी ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां बना रहे हैं।

  • दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़े ठग का पर्दाफाश हुआ है, जो खुद को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का प्रतिनिधि बताकर लोगों से ठगी कर रहा था। आरोपी, नोएडा निवासी दशरथ पाल को शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया। वह कई शहरों में सत्ता और संगठन के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने का काम कर चुका था।

    कैसे पकड़ा गया ठग?
    आरोपी दशरथ पाल ने उपमुख्यमंत्री के आवास पर शिष्टाचार भेंट देने का दावा करते हुए पहुंचने की कोशिश की। उपमुख्यमंत्री की टीम को पहले ही सूचना मिल गई थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति उनके आवास तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। जब वह अंदर गया, तो सतर्कता टीम ने उसकी पहचान जांची और पाया कि वह दिल्ली बीजेपी नेतृत्व से कोई संबंध नहीं रखता। इसके बाद उसे तत्काल पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    ठगी की वारदातें
    पूछताछ में सामने आया कि दशरथ पाल नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ और लखनऊ जैसे शहरों में कई लोगों से ठगी कर चुका था। वह खुद को बीजेपी के बड़े नेताओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों को काम करने का वादा करता और बदले में पैसों की मांग करता था। अब पुलिस उसकी जांच कर रही है कि उसने कितने लोगों से ठगी की और उसके पीछे कोई गिरोह तो नहीं है।

    डिप्टी सीएम का कड़ा संदेश
    घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस तरह के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मौर्य ने इस मामले में कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

    पुलिस की जांच जारी
    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किस-किस व्यक्ति से ठगी की और उसके पास कितने पैसे हैं। पुलिस आरोपी के नेटवर्क और पुराने मामलों की भी जांच कर रही है, ताकि उसकी अन्य ठगी की वारदातों का भी खुलासा हो सके।

  • हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल

    हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए घोषणा की कि वह 2026 विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के सामने सीधी चुनौती पेश करेंगे।

    कबीर ने दावा किया कि न तो टीएमसी और न ही बीजेपी बहुमत पा पाएंगी। उन्होंने कहा कि उनकी नई पार्टी 135 सीटों पर चुनाव लड़कर किंगमेकर बनेगी और सत्ता की चाबी उनके हाथ में होगी। “अगला मुख्यमंत्री हमारी पार्टी के समर्थन के बिना शपथ नहीं ले पाएगा,” कबीर ने कहा।

    22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा

    कबीर ने बताया कि 22 दिसंबर को वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे। उनका लक्ष्य चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाना और बंगाल की सियासत में नई शक्ति के रूप में उभरना है।

    टीएमसी का पलटवार

    टीएमसी ने कबीर के दावों को निराधार बताया। प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कबीर की बातें केवल राजनीतिक हताशा का संकेत हैं और उनके पास कोई वास्तविक जनाधार नहीं है। टीएमसी का कहना है कि जनता अपने निर्णय में समर्थ है और किसी भी दावे को सत्ता में बदलने की संभावना कम है।

    राजनीति में नया ताप

    हुमायूं कबीर के दावे और नई पार्टी की घोषणा ने बंगाल की राजनीति में नया ताप ला दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कबीर क्या वास्तव में बंगाल की राजनीति में नई शक्ति के रूप में उभर पाएंगे या टीएमसी का अनुमान सही साबित होगा।

  • शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद

    शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद


    नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार वजह है वीर सावरकर अवॉर्ड। हाल ही में पुरस्कार आयोजकों ने इस वर्ष के विजेताओं की सूची में थरूर का नाम शामिल किया, लेकिन सांसद ने यह अवॉर्ड स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया।

    थरूर का पक्ष

    शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से ही पता चला कि उन्हें अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इसके बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया था। थरूर ने इसे आयोजकों की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई बताया।

    उन्होंने कहा, “पुरस्कार की प्रकृति, इसे देने वाले संगठन या अन्य विवरणों की जानकारी न होने के कारण, मेरे शामिल होने या पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”

    आयोजकों का पलटवार

    वहीं, पुरस्कार आयोजक हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) इंडिया ने थरूर के आरोपों को खारिज कर दिया। HRDS के सचिव अजी कृष्णन ने कहा कि थरूर को काफी पहले ही सूचित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि संगठन और जूरी के चेयरमैन ने थरूर से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

    कृष्णन ने कहा कि थरूर ने उस समय अन्य अवॉर्ड विजेताओं की सूची भी मांगी और उन्हें वह सूची दे दी गई। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि शायद थरूर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के डर से अवॉर्ड लेने से पीछे हटे।

    राजनीतिक बहस

    सावरकर पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले थरूर का यह कदम अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस पार्टी, जो ऐतिहासिक रूप से सावरकर की विचारधारा की आलोचक रही है, के एक सांसद का पुरस्कार ठुकराना पार्टी लाइन के अनुरूप है।

    हालांकि आयोजकों के दावे ने विवाद को नया आयाम दिया है। अब यह मामला केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और मीडिया में बड़े पैमाने पर चर्चा का केंद्र बन गया है।