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  • भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल करते हुए अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग की नई सेवा शुरू कर दी है। अब ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी समय निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक सामान ले जाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान भी कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को पार्सल कार्यालय की लंबी कतारों और अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया से राहत देना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

    अब तक रेलवे में मुफ्त सीमा से अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर अलग से बुकिंग करानी पड़ती थी। इसके लिए अतिरिक्त समय और औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन सुविधा लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया टिकट बुकिंग के साथ ही पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा से पहले होने वाली असुविधा भी काफी हद तक कम होगी।

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही इसका लाभ केवल उन श्रेणियों में मिलेगा, जहां मुफ्त सीमा से अधिक सामान निर्धारित शुल्क देकर ले जाने की अनुमति है। एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू-टियर, फर्स्ट क्लास, स्लीपर क्लास और सेकेंड क्लास के यात्री इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि इन श्रेणियों में मुफ्त सामान की सीमा और अधिकतम अनुमत सीमा समान निर्धारित है।

    रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के 70 किलोग्राम तक सामान ले जा सकते हैं, जबकि निर्धारित शुल्क देकर अधिकतम 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है। एसी टू-टियर और फर्स्ट क्लास में 50 किलोग्राम तक मुफ्त तथा अधिकतम 100 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है। स्लीपर क्लास में यात्रियों को 40 किलोग्राम तक मुफ्त सामान ले जाने की अनुमति है और अतिरिक्त शुल्क देकर यह सीमा 80 किलोग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम तक सामान मुफ्त है, जबकि अधिकतम 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है।

    दूसरी ओर, एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार के यात्रियों के लिए 40 किलोग्राम की सीमा ही मुफ्त और अधिकतम अनुमत सीमा दोनों है। इसी कारण इन श्रेणियों में अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुफ्त सीमा से अधिक लेकिन अधिकतम अनुमत सीमा के भीतर सामान ले जाने पर यात्रियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    रेलवे ने सामान के आकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य श्रेणियों में यात्री 100 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर × 25 सेंटीमीटर तक के ट्रंक, सूटकेस या बक्से अपने साथ ले जा सकते हैं। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में सामान का अधिकतम आकार 55 सेंटीमीटर × 45 सेंटीमीटर × 22.5 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।

    रेलवे का मानना है कि यह नई डिजिटल सुविधा यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से न केवल स्टेशन पर भीड़ कम होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध भी बनेगी। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे यात्रियों को आधुनिक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है।

  • पश्चिम मध्य रेलवे का बड़ा फैसला तत्काल टिकट प्रणाली पूरी तरह बदली अब दस्तावेज सत्यापन के बाद ही बनेगा टोकन

    पश्चिम मध्य रेलवे का बड़ा फैसला तत्काल टिकट प्रणाली पूरी तरह बदली अब दस्तावेज सत्यापन के बाद ही बनेगा टोकन


    नई दिल्ली। रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत और टिकट दलालों पर सख्ती की दिशा में पश्चिम मध्य रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक अगस्त से भोपाल जबलपुर और कोटा मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल टिकट बुकिंग की नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और अनधिकृत एजेंटों तथा बिचौलियों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। रेलवे का मानना है कि इस बदलाव से तत्काल टिकट पाने के लिए घंटों लाइन में लगने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और टिकटों की फर्जी बुकिंग पर भी अंकुश लगेगा।

    अब तक तत्काल टिकट के लिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर टोकन जारी किए जाते थे। कोई भी व्यक्ति लाइन में लगकर टोकन प्राप्त कर सकता था और यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह टिकट अपने लिए बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति के लिए। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई लोग बार बार लाइन में लगकर अलग अलग यात्रियों के लिए टिकट बुक कराने की कोशिश करते थे जिससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। रेलवे को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जिनमें दलालों की सक्रियता और वास्तविक यात्रियों को टिकट न मिलने की बात सामने आ रही थी।

    नई व्यवस्था के तहत अब केवल लाइन में पहले पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। टोकन लेने वाले व्यक्ति को यह बताना होगा कि वह अपना टिकट बनवा रहा है अपने परिवार के किसी सदस्य का टिकट बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति का। इसके आधार पर यात्रियों को दो अलग अलग प्राथमिकता श्रेणियों में रखा जाएगा। प्राथमिकता ए में स्वयं और निकट परिवार के सदस्य शामिल होंगे जिनमें माता पिता पति पत्नी पुत्र पुत्री भाई बहन तथा दादा दादी आते हैं। इन सभी के टिकटों की बुकिंग पहले की जाएगी। इसके बाद प्राथमिकता बी के तहत अन्य व्यक्तियों के टिकट बनाए जाएंगे।

    नई प्रणाली में पहचान और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य का टिकट बनवा रहा है तो उसे सरकारी दस्तावेज के माध्यम से संबंध का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। वहीं किसी अन्य व्यक्ति का टिकट बनवाने की स्थिति में संबंधित यात्री के पहचान पत्र की स्वयं सत्यापित प्रति और उसके हस्ताक्षर भी आवश्यक होंगे। रेलवे का कहना है कि इससे फर्जी बुकिंग और गलत जानकारी देकर टिकट लेने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

    टोकन वितरण की प्रक्रिया भी पहले से अधिक नियंत्रित रहेगी। एसी तत्काल टिकट के लिए सुबह साढ़े आठ बजे से नौ बजे तक प्रत्येक काउंटर पर अधिकतम दस टोकन जारी किए जाएंगे जबकि स्लीपर श्रेणी के लिए सुबह नौ बजे से साढ़े नौ बजे तक अधिकतम पंद्रह टोकन दिए जाएंगे। प्रत्येक टोकन पर संबंधित काउंटर का नंबर अंकित रहेगा और उसका पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसकी जांच की जा सके।

    रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था में टोकन किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। जिस व्यक्ति के नाम पर टोकन जारी होगा वही टिकट बुक करा सकेगा। साथ ही बार बार टोकन लेने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा। इससे दलालों और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक सीमित होने की उम्मीद है।

    वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य वास्तविक यात्रियों और उनके परिवार को प्राथमिकता देना है ताकि टिकट वितरण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत आरक्षण केंद्रों से ही टिकट बनवाएं और किसी भी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिए के झांसे में आने से बचें। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद तत्काल टिकट बुकिंग पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

  • 'इंदौर को अनाथ समझ लिया'… पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का रेलवे पर बड़ा हमला

    'इंदौर को अनाथ समझ लिया'… पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का रेलवे पर बड़ा हमला


    इंदौर। इंदौर की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा पश्चिम रेलवे के अधिकारियों को लिखा गया एक पत्र सार्वजनिक होने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। पत्र में उन्होंने इंदौर की रेल सुविधाओं की लगातार हो रही उपेक्षा पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया हो। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार और स्थानीय सांसद पर सवाल खड़े किए हैं।

    20 जुलाई को पश्चिम रेलवे के अधिकारी रामश्रय पांडे को लिखे पत्र में सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्हें अत्यंत दुख के साथ यह पत्र लिखना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर के लिए नई रेल सेवाएं शुरू करने के बजाय पहले से लंबित प्रस्तावों पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर की लगातार बढ़ती आबादी और यात्रियों की जरूरतों के बावजूद रेलवे अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

    महाजन ने पत्र में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं और सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जयपुर–इंदौर और रीवा–इंदौर रेल सेवाओं के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित MEMU सेवा का रैक इंदौर से हटाकर पुराने DEMU रैक चलाए जा रहे हैं, जो अक्सर तकनीकी खराबियों का सामना करते हैं और यात्रियों को परेशानी होती है।

    उन्होंने पुणे–इंदौर ट्रेन का संचालन बंद होने पर भी चिंता जताई और कहा कि इसे किसी वैकल्पिक मार्ग से भी शुरू नहीं किया गया, जबकि अन्य शहरों की ट्रेनों को वैकल्पिक रूट पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा पटना, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम के लिए ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी नहीं होने, महू–उज्जैन लोकल ट्रेन और अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा नहीं होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।

    पत्र में सुमित्रा महाजन ने यह भी कहा कि लक्ष्मीबाई नगर में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और महू में लाइन क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद रेलवे इन संसाधनों का उपयोग कर सुविधाओं का विस्तार नहीं कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि लगभग 40 लाख आबादी वाले इंदौर शहर के लिए मौजूदा रेल व्यवस्था क्या वास्तव में पर्याप्त मानी जा सकती है।

    पत्र के अंत में उन्होंने अधिकारी से भावनात्मक अपील करते हुए लिखा कि वे शब्दों के बीच छिपी पीड़ा को समझेंगे और इंदौर के यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कदम उठाएंगे।

    सुमित्रा महाजन का यह पत्र सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब केंद्र, प्रदेश और इंदौर तीनों जगह भाजपा की सरकार है और शहर का सांसद भी भाजपा का है, तब इंदौर की रेल सुविधाओं की उपेक्षा पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस ने स्थानीय सांसद से भी सवाल पूछा कि शहर को नई रेल सेवाएं दिलाने और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंदौर में रेल सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है और लोगों की नजर अब रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात

    भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात


    नई दिल्ली । भारत का बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और देश को अगले वर्ष एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि 15 अगस्त 2027 से भारत की पहली बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। शुरुआत मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण सूरत से बिलिमोरा के बीच होगी। इसके बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए वापी अहमदाबाद ठाणे और अंत में पूरे मुंबई अहमदाबाद मार्ग तक विस्तार दिया जाएगा।

    यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं बल्कि भारत के परिवहन इतिहास में तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरी तरह तैयार होने के बाद यह बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में कई गुना तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। रेल मंत्रालय के अनुसार परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है। बुलेट ट्रेन के शुरू होने से दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा जिससे व्यापार उद्योग पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    रेल मंत्री ने रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में 261 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प तेजी से किया जा रहा है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेन संचालन को बिना रोके आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन तैयार करना बड़ी चुनौती है लेकिन भारतीय रेलवे इसे सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। नए स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं और आधुनिक यात्री सेवाओं से लैस होंगे।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद क्षेत्र के लिए तीन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की मंजूरी दी है। इनमें पुणे से हैदराबाद हैदराबाद से चेन्नई और हैदराबाद से बेंगलुरु तक हाई स्पीड रेल परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दक्षिण भारत में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क विकसित होगा जिससे उद्योग व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हैदराबाद को भविष्य का प्रमुख हाई स्पीड रेल हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना केवल तेज यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आधुनिक भारत की नई पहचान बनने जा रही है। इससे रेलवे तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी निर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। आने वाले वर्षों में यदि अन्य हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भी इसी गति से विकसित होते हैं तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां अत्याधुनिक बुलेट ट्रेन नेटवर्क उपलब्ध होगा। यह परियोजना देश के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ विकास और प्रगति की नई रफ्तार भी तय करेगी।

  • दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

    दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू


    नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई।

    यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

    दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

    मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।

  • भारतीय रेलवे मजबूत करेगा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव नेटवर्क, रायपुर में आधुनिक होमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 175 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    भारतीय रेलवे मजबूत करेगा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव नेटवर्क, रायपुर में आधुनिक होमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 175 करोड़ रुपये होंगे खर्च


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे ने अपने तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के रखरखाव ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रेलवे ने रायपुर में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित करने हेतु 175 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक रखरखाव अवसंरचना तैयार करना और रेल सेवाओं की दक्षता को और बेहतर बनाना है।

    रेल मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर डीजल शेड में विकसित की जाएगी। वर्तमान में रेलवे के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े का लगातार विस्तार हो रहा है, जिसके चलते रखरखाव सुविधाओं की क्षमता बढ़ाना आवश्यक हो गया है। नई होमिंग सुविधा इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्वीकृत की गई है।

    रेलवे की तकनीकी व्यवस्था में होमिंग सुविधा का विशेष महत्व होता है। किसी भी लोकोमोटिव को जिस शेड में नियमित रूप से रखा जाता है और जहां उसकी निर्धारित जांच, मरम्मत, सुरक्षा निरीक्षण तथा तकनीकी रखरखाव किया जाता है, उसे उसका होमिंग शेड कहा जाता है। यह व्यवस्था लोकोमोटिव के सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    नई परियोजना के पूरा होने के बाद रायपुर डिपो की रखरखाव क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा, बल्कि भविष्य में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त क्षमता भी उपलब्ध रहेगी। रेलवे का मानना है कि आधुनिक रखरखाव सुविधाओं से परिचालन दक्षता में सुधार होगा और ट्रेनों के संचालन में आने वाली तकनीकी चुनौतियों को कम करने में मदद मिलेगी।

    भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन को बढ़ावा देने और माल तथा यात्री परिवहन को अधिक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार निवेश कर रहा है। इसी रणनीति के तहत विभिन्न रेल मंडलों में आधुनिक लोकोमोटिव शेड, रखरखाव केंद्र और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। रायपुर की यह परियोजना भी उसी व्यापक योजना का हिस्सा मानी जा रही है।

    रेलवे मंत्रालय का मानना है कि बेहतर रखरखाव व्यवस्था से लोकोमोटिव की उपलब्धता बढ़ेगी, मरम्मत में लगने वाला समय कम होगा और ट्रेनों के समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। इससे माल ढुलाई और यात्री सेवाओं दोनों की कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार होने की उम्मीद है।

    इसी क्रम में भारतीय रेलवे देश की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी तेजी से काम कर रहा है। रेलवे के अनुसार परियोजना के विभिन्न चरण निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं और गुजरात क्षेत्र में निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा चुका है। रेलवे का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, मजबूत बुनियादी ढांचे और उन्नत रखरखाव प्रणाली के माध्यम से देश के रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, तेज और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।

  • मुंबई से बेंगलुरु के बीच दौड़ेगी दूसरी वंदे भारत स्लीपर, 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ लंबी दूरी की यात्रा होगी और अधिक आरामदायक

    मुंबई से बेंगलुरु के बीच दौड़ेगी दूसरी वंदे भारत स्लीपर, 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ लंबी दूरी की यात्रा होगी और अधिक आरामदायक

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे लंबी दूरी की रेल यात्रा को आधुनिक और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। मुंबई और बेंगलुरु के बीच दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही यात्रियों की सेवा में शामिल हो सकती है। अंतिम चरण के तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इस ट्रेन के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह हाईस्पीड स्लीपर ट्रेन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक विकल्प उपलब्ध कराएगी।

    यह ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई और केएसआर बेंगलुरु रेलवे स्टेशन के बीच संचालित की जाएगी। लगभग 1100 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर यात्रा का समय मौजूदा पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम होने की उम्मीद है। प्रस्तावित समय-सारिणी के अनुसार ट्रेन शाम के समय मुंबई से रवाना होकर अगले दिन सुबह बेंगलुरु पहुंचेगी, जिससे व्यावसायिक यात्रियों और नियमित रेल यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी।

    16 कोच वाली इस आधुनिक ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के बैठने और सोने की व्यवस्था की गई है। इसमें 11 एसी थर्ड टियर कोच, चार एसी सेकेंड क्लास कोच तथा एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा। विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीटों और बर्थ की डिजाइन को पहले की तुलना में अधिक आरामदायक बनाया गया है ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान थकान कम महसूस हो।

    वंदे भारत स्लीपर के अंदरूनी ढांचे में आधुनिक सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ, अतिरिक्त साइड सपोर्ट, चौड़े गलियारे, स्वचालित दरवाजे, हर बर्थ पर रीडिंग लाइट, आधुनिक और स्वच्छ शौचालय तथा उन्नत वेंटिलेशन प्रणाली यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्रदान करेगी। फर्स्ट एसी श्रेणी में निजी केबिन और कूपे की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे रात के सफर में अधिक गोपनीयता और आराम सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इस ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसमें कवच एंटी-कोलिजन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो संभावित रेल दुर्घटनाओं और ट्रेनों की टक्कर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके साथ ही प्रत्येक कोच में आपातकालीन संचार प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी और यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल सूचना प्रदर्शन प्रणाली भी उपलब्ध होगी।

    ट्रेन की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक निर्धारित की गई है। हालांकि वास्तविक परिचालन गति रेल मार्ग और परिचालन परिस्थितियों के अनुसार तय होगी। आधुनिक सस्पेंशन और उन्नत कोच डिजाइन के कारण यात्रा के दौरान झटके और शोर पहले की तुलना में काफी कम रहने की संभावना है, जिससे रातभर का सफर अधिक शांत और आरामदायक बनेगा।

    इस नई सेवा से मुंबई, पुणे, सतारा, बेलगावी, हुबली, धारवाड़, दावणगेरे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे चरणबद्ध तरीके से विभिन्न प्रमुख मार्गों पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का विस्तार करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य लंबी दूरी की रेल यात्रा को विश्वस्तरीय सुविधाओं, बेहतर सुरक्षा और तेज गति के साथ नई पहचान देना है, जिससे यात्रियों को समय की बचत के साथ अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिल सके।

  • रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान

    रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान


    नई दिल्ली।
    रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता है कि फाटक बंद होने पर धैर्य रखें और ट्रेन गुजरने तक इंतजार करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    रेलवे फाटक तभी बंद किया जाता है जब किसी ट्रेन के आने का निर्धारित समय होता है। इस दौरान फाटक के नीचे से बाइक, कार या अन्य वाहन निकालने की कोशिश न केवल अपनी जान बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कुछ सेकंड की लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि रेलवे ने इस तरह की हरकत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है।

    रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बंद फाटक के नीचे से ट्रैक पार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की वजह से फाटक पर तैनात कर्मचारी के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

    ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड या जेल ही नहीं, बल्कि वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग गंभीर मामलों में लाइसेंस को निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। सड़क सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब कई लेवल क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर नहीं पकड़ा जाता, तब भी वाहन के नंबर के आधार पर बाद में चालान जारी किया जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में रेलवे सुरक्षा बल वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मिनट बचाने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दबाजी केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी समान रूप से खतरनाक है। ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान लगाना अक्सर संभव नहीं होता, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

    रेलवे प्रशासन लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि बंद फाटक को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें। फाटक खुलने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार विकल्प है। थोड़ी सी सावधानी न केवल जीवन की रक्षा करती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानियों से भी बचाती है। रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका भी।

  • प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे यात्रियों ने साफ-सफाई और ऑनबोर्ड सेवाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। यात्रियों का आरोप है कि भोपाल से तमिलनाडु की ओर यात्रा के दौरान उनके केबिन में पूरी रात चूहे और कॉकरोच घूमते रहे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद यात्रा के दौरान समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया, जिससे पूरी रात उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।

    यात्रियों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में चूहे और कॉकरोच लगातार दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि प्रीमियम श्रेणी का टिकट लेने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने ट्रेन के स्टाफ को कई बार स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समस्या दूर करने के बजाय उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। यात्रियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने चूहों की मौजूदगी के लिए यात्रियों के भोजन को ही कारण बता दिया।

    यात्रा कर रहे अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने ट्रेन स्टाफ से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि प्रीमियम श्रेणी के कोच की स्थिति ऐसी है तो यात्रियों का रेलवे की सेवाओं पर भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए मामले की जानकारी भी साझा की और कोच की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    दूसरे यात्री शिवांश तिवारी ने दावा किया कि पूरी रात उनका परिवार आराम से सो नहीं सका। उनके अनुसार चूहे लगातार सीटों के आसपास घूमते रहे, जबकि कॉकरोच केबिन में दिखाई देते रहे। उन्होंने बताया कि रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मौके पर केवल एक रैट ट्रैप रखा गया, जिससे तत्काल राहत नहीं मिल सकी। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद यात्रा के दौरान स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद रेलवे की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी भेजने और पीएनआर विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि यात्रियों का कहना है कि यह कार्रवाई यात्रा समाप्त होने तक उनके लिए व्यावहारिक राहत साबित नहीं हुई। उनका मानना है कि शिकायत मिलने के बाद ऑनबोर्ड टीम को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।

    मामले पर भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी साफ-सफाई या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस घटना के बाद भारतीय रेलवे की प्रीमियम श्रेणी की सेवाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रथम श्रेणी के कोच में उच्च स्तर की सुविधाओं की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि शिकायतों के बावजूद तत्काल समाधान नहीं मिलता है तो इससे न केवल यात्रियों का अनुभव प्रभावित होता है, बल्कि रेलवे की सेवा गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि कोच में स्वच्छता और रखरखाव संबंधी दावों के अनुरूप व्यवस्थाएं थीं या नहीं।