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  • लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    नई दिल्ली । लाल सागर में 14 भारतीय नागरिकों को ले जा रही एक नाव पर सऊदी अरब की ओर से हवाई हमला किए जाने का दावा सामने आया है। यमन के हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि जुकर द्वीप के पास एक भारतीय नौका को निशाना बनाया गया। हूती पक्ष के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद नाव पर सवार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है। हालांकि, हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नाव पर मौजूद भारतीयों की मौजूदा स्थिति को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी अरब ने लाल सागर में जुकर द्वीप के नजदीक इस नाव पर हवाई हमला किया। उनके मुताबिक, नौका पर 14 भारतीय नागरिक सवार थे। उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद हूती बलों की बचाव टीमों को सक्रिय किया गया, जो कथित तौर पर नाव में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं या हमले में किसी को चोट पहुंची है।

    इस घटना को लेकर सऊदी अरब प्रशासन या सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की ओर से हमले की पुष्टि अथवा खंडन किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया दावा माना जा रहा है। भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी स्थिति की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

    जिस इलाके में कथित हमले की बात कही गई है, वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक माल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई की खबर से समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

    हूती प्रवक्ता ने कथित हमले की निंदा करते हुए सऊदी अरब पर गैर-जिम्मेदाराना सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं लाल सागर में सामान्य नौकाओं और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। हूती पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से मामले पर ध्यान देने तथा ऐसी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए दबाव बनाने की अपील भी की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    लाल सागर और यमन के आसपास का समुद्री क्षेत्र लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। यहां किसी भी संभावित हमले का असर केवल स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और व्यापार पर भी पड़ सकता है। जुकर द्वीप के पास भारतीय नागरिकों को ले जा रही नाव पर हमले का दावा इसी कारण चिंता का विषय बन गया है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल नाव पर सवार बताए जा रहे 14 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बचाव अभियान चलाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन उसके नतीजों का विवरण सामने नहीं आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से मामले की पुष्टि, नागरिकों की पहचान और उनकी स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने तक घटना से जुड़े दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

  • डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी

    डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी


    नई दिल्ली।
    देश जब एआई (AI) और भविष्य के 6जी नेटवर्क में दुनिया का नेतृत्व करने का महत्वाकांक्षी विजन लेकर आगे बढ़ रहा है, तब साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) और ऑनलाइन स्कैम्स (Online Scams) की बाढ़ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभर रही है। वैश्विक दूरसंचार संस्था जीएसएमए के एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, साइबर ठगी के डर से देश के लगभग तीन-चौथाई (70 से 72 फीसदी) नागरिक ऑनलाइन गतिविधियों से कतरा रहे हैं और अपने डिजिटल व्यवहार को सीमित कर रहे हैं।

    नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के इतर जीएसएमए के एशिया-पैसिफिक प्रमुख जूलियन गोरमैन ने आगाह किया कि यह भरोसे का संकट देश के डिजिटल विकास की गति को कुंद कर सकता है। जीएसएमए के सर्वे के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में भारत में लगभग हर आठ में से एक नागरिक किसी न किसी ऑनलाइन स्कैम का शिकार बना। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकांश पीड़ितों को कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। गौरमैन ने कहा, सबसे चिंताजनक है कि 70-72% आबादी घबराई हुई है और ऑनलाइन व्यवहार को सीमित कर रही है।


    1-2% के अंतर को पाटेगा सैटेलाइट

    सैटेलाइट संचार पर छिड़ी बहस पर गोरमैन ने कहा, भारत का जमीनी मोबाइल ब्रॉडबैंड पहले ही 98% से अधिक आबादी तक पहुंच चुका है। सैटेलाइट केवल दूरदराज के क्षेत्रों, जहाजों या जंगलों में बचे 1-2% कनेक्टिविटी गैप को भरने का काम करेगा ना कि मोबाइल नेटवर्क की जगह ले सकता है। भारत सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ वाले देशों में से एक है, यहां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की भारी लागत इसके कार्यान्वयन में बाधा होगी।


    डिजिटल ट्रस्ट बड़ी चुनौती

    गोरमैन ने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल सेक्टर के एजेंडे में सबसे ऊपर डिजिटल ट्रस्ट (डिजिटल भरोसा) कायम करना होना चाहिए, क्योंकि धोखाधड़ी ग्राहकों के साथ-साथ व्यवसायों और सरकारी पहलों को भी प्रभावित करती है। विदेशी सैटेलाइट कंपनियां घरेलू ऑपरेटरों पर हावी होनेे के सवाल पर गोरमैन ने कहा, भारत 5जी लॉन्च करने वाला पहला देश नहीं था, लेकिन आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन चुका है। पहले आना ही सब कुछ तय नहीं करता। उन्होंने सलाह दी कि सभी को सैटेलाइट से जोड़ने की कोशिश के बजाय उन करोड़ों लोगों को मौजूदा मोबाइल ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अब तक इंटरनेट की पहुंच से बाहर हैं।

  • US: वीजा नीति में बड़ा बदलाव…. 50 देशों के लोगों को देना होगा वीजा बॉन्ड, भारतीयों को छूट

    US: वीजा नीति में बड़ा बदलाव…. 50 देशों के लोगों को देना होगा वीजा बॉन्ड, भारतीयों को छूट


    वाशिंगटन।
    संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Donald Trump Administration) ने वीजा नीति (Visa Policy) में बढ़ा बदलाव किया है। अब पर्यटक और कारोबारी वीजा लेने के लिए 50 देशों को नागरिकों को वीजा बॉन्ड (Visa Bond) देना होगा। नए नियमों के तहत इन 50 देशों के लोगों को अब अमेरिकी वीजा लेने के लिए करीब 10 से 20 हजार डॉलर का बॉन्ड लेना पड़ सकता है। इस लिस्ट से भारत को बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों (Indian citizens) के ऊपर इन निर्देशों का कोई असर नहीं होगा। हालांकि, भारत के पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और नेपाल सहित कई अन्य देश के नागरिक इस लिस्ट में हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से उन देशों की लिस्ट जारी की गई, जिनके नागरिकों को अब वीजा बॉन्ड देना होगा। एक नागरिक अमेरिकी वीजा के लिए कितने हजार डॉलर का बॉन्ड देगा यह उसके वीजा इंटरव्यू के आधार पर तय होगा। इसमें मुख्य रूप से तीन क्रम रखे गए हैं। काउंसलर अधिकारी आवेदकों के इंटरव्यू के आधार पर उन्हें 10, 15 या 20 हजार के वीजा बॉन्ड की लिस्ट में बांट सकता है।

    बता दें, भारत के पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश के लोगों के ऊपर यह नियम 21 जनवरी से लागू है, जबकि हाल ही में भूटान को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इस लिस्ट में अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, पश्चिम एशिया समेत अन्य क्षेत्रों के देश भी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक उनके इन नए नियमों का लक्ष्य अमेरिका में आने वाले विदेशी नागरिकों के जरूरत से ज्यादा रुकने पर रोक लगाना है।


    बॉन्ड जमा करने पर भी वीजा की गारंटी नहीं

    अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसा नहीं है कि अगर आपका वीजा बॉन्ड जमा किया जाता है। उसके बाद आपका वीजा पक्का हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांसुलर अधिकारियों को वीजा जारी करने से पहले बॉन्ड जमा करवाने का अधिकार है। हालांकि, इसके बाद भी वीजा देना है या नहीं यह अमेरिकी विदेश विभाग के ऊपर निर्भर करेगा।

    बता दें, अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन शुरुआत से ही दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों के लिए सख्त नियम अपना रहा है। पिछले दो सालों से ट्रंप सरकार ने अप्रवासियों को लेकर काफी कड़े नियम अपनाए हैं। कभी दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों की दम पर बसा अमेरिका, ट्रंप सरकार में गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में आ रहे लोगों को हवाईजहाज में भरकर उनके देश भेजने के लिए भी जाना जाता है। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ऐसा कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की जन्म आधारित नागरिकता संबंधी नियम को भी बदलने की कोशिश की है।

    वर्तमान नियमों के मुताबिक अमेरिका में आने वाले लोगों को अब सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें कमर्शियल प्लेन सर्विस और अमेरिकी सीमा शुल्क और प्री क्लीयरेंस सर्विस का उपयोग करना होगा। इसके अलावा वह सामान्य चार्टर विमानन, चार्टर विमानों, समुद्री बंदरगाहों का उपयोग नहीं कर सकते।

  • सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    नई दिल्ली ।सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन की जा रही नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने कहा है कि किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह को स्वीकार्य या सामान्य बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणियों को केवल सामान्य ऑनलाइन बातचीत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री वोंग ने रविवार, 6 सितंबर को यह टिप्पणी नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ सामने आईं नफरत भरी टिप्पणियों के संदर्भ में की। इस बाढ़ के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली टिप्पणियों की लहर देखने को मिली थी। नेपाल में आई इस बाढ़ में नौ सिंगापुरी नागरिक लापता हुए थे।

    सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के विचार पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नस्लीय पूर्वाग्रह से जुड़ी टिप्पणियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि ऐसी बयानबाजी को बिना रोक-टोक जारी रहने देने से नस्लीय पूर्वाग्रह धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन सकता है।

    गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस को भारतीय समुदाय के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। षणमुगम के अनुसार, हाल के दिनों में सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों में बढ़ोतरी देखी गई है।

    भारतीय मूल के गृह मंत्री ने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस नस्लीय और विदेशी-विरोधी टिप्पणियों की जांच कर रही है। सरकार का रुख है कि ऐसी बयानबाजी को बिना कार्रवाई के आगे बढ़ने देना समाज में नस्लीय पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकता है।

    प्रधानमंत्री वोंग ने कहा कि सिंगापुर में अलग-अलग मुद्दों पर मजबूत बहस हो सकती है और लोगों को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है। लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह या विदेशियों के प्रति दुश्मनी फैलाने के लिए वैध तर्कों की आड़ नहीं ली जानी चाहिए।

    सिंगापुर एक बहुसांस्कृतिक देश है और ऐसे माहौल में सरकार ने नस्लीय सद्भाव को लेकर चिंता जताई है। भारतीय समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर सामने आई टिप्पणियों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार की ओर से पुलिस जांच के निर्देश दिए जाने के बाद ऑनलाइन की जा रही आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियों पर निगरानी बढ़ने की बात सामने आई है।

    मामले को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत या पूर्वाग्रह को सामान्य व्यवहार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री वोंग ने यह भी कहा कि सिंगापुर में होने वाली बहस और असहमति को किसी समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण या विदेशियों के प्रति शत्रुतापूर्ण बयानबाजी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन टिप्पणियों की जांच पुलिस कर रही है। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि नस्लीय और विदेशी-विरोधी बयानबाजी को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामने आए इस विवाद ने सिंगापुर में नस्लीय पूर्वाग्रह और सामाजिक सद्भाव से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।

  • सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश

    सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश


    सिंगापुर।
    सिंगापुर (Singapore ) के गृह मंत्री के. शनमुगम (Home Minister K. Shanmugam) ने भारतीयों (Indians) को लेकर इंटरनेट पर की जा रही नस्ली और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चीन-नेपाल (China-Nepal) में आई भीषण बाढ़ और एयर इंडिया (Air India) में सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines- SIA) के निवेश से जुड़े मामलों को लेकर कुछ लोगों ने बेहद घटिया और नस्ली टिप्पणियां की हैं। शनमुगम ने कहा कि उन्होंने पुलिस से इन टिप्पणियों की जांच करने को कहा है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को इंटरनेट की गुमनामी के पीछे छिपने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    शनमुगम ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जब कई सिंगापुरवासी लापता हैं, तब भी सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नस्ली टिप्पणियां की गईं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ लोगों ने लापता सिंगापुरवासियों को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। शनमुगम ने कहा कि ज्यादातर सिंगापुरवासी ऐसी सोच नहीं रखते। उन्होंने बताया कि सिंगापुर रेड क्रॉस ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए 30 लाख सिंगापुर डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। सिंगापुर के लोग अलग-अलग समुदायों से होने के बावजूद जरूरत के समय एक-दूसरे और दूसरे देशों के लोगों की मदद करते हैं।


    एयर इंडिया से जुड़ा क्या है मामला

    एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश को लेकर भी सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्ली टिप्पणियों की नई लहर देखने को मिली। शनमुगम ने कहा कि कुछ लोगों ने भारतीयों को लेकर सांप, करी, पराठा और काले जादू जैसी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर टेमासेक के सीईओ और सीनियर अधिकारियों को भी उनकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह कहना कि किसी अधिकारी की भारतीय मूल की वजह से वह एयर इंडिया के पक्ष में फैसला करेगा, गलत और बदनाम करने वाली बात है।

    के. शनमुगम ने जोर देकर कहा कि संबंधित अधिकारी सिंगापुर में पैदा हुए, वहीं पढ़े और पूरी तरह सिंगापुरवासी हैं। किसी व्यक्ति को उसकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एयर इंडिया की ओर से अपने शेयरधारकों से करीब 1.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी मांगे जाने की खबरों के बीच सिंगापुर एयरलाइंस को निवेश पर फैसला करना है। शनमुगम ने साफ कहा कि एयर इंडिया में निवेश जारी रखना है या नहीं, इसका फैसला सिंगापुर एयरलाइंस के निदेशक मंडल और मैनेजमेंट को करना चाहिए।

  • भारतीयों पर दोहरी मार! अमेरिका में ग्रीन कार्ड की राह और मुश्किल

    भारतीयों पर दोहरी मार! अमेरिका में ग्रीन कार्ड की राह और मुश्किल


    वाशिंगटन/दुबई।
    अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि भारी मांग के कारण भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता यानी ईबी-1 श्रेणी के ग्रीन कार्ड आने वाले हफ्तों में अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हो सकते। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान तनाव ने खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

    एक तरफ अमेरिका में ग्रीन कार्ड की लंबी कतार और कोटा खत्म होने का खतरा है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, यात्रा और रोजगार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।

    ईबी-1 ग्रीन कार्ड पर कोटा खत्म होने का खतरा

    अमेरिकी विदेश विभाग के सितंबर वीजा बुलेटिन के मुताबिक, भारतीय आवेदकों की भारी संख्या के कारण वित्त वर्ष के 30 सितंबर को समाप्त होने से पहले ईबी-1 श्रेणी में भारत के लिए उपलब्ध वीजा संख्या खत्म हो सकती है।

    विभाग ने हालांकि कहा है कि वह वीजा उपलब्धता पर लगातार नजर रख रहा है। परिस्थितियों के अनुसार वीजा संख्या और तारीखों में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।

    ईबी-1 श्रेणी में आमतौर पर असाधारण क्षमता वाले पेशेवरों, प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों के अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधिकारियों को शामिल किया जाता है। भारतीय पेशेवरों के बीच इस श्रेणी की काफी मांग रहती है।

    अक्टूबर 2022 तक की प्राथमिकता तारीख वालों को मौका

    सितंबर के लिए भारत की ईबी-1 श्रेणी की अंतिम कार्रवाई तारीख 15 अक्टूबर 2022 तय की गई है। इसका सीधा मतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में उन्हीं भारतीय आवेदकों के मामलों पर अंतिम कार्रवाई की जा सकती है, जिनकी प्राथमिकता तारीख 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है।

    इससे नई प्राथमिकता तारीख वाले आवेदकों के लिए इंतजार और लंबा होने की आशंका है। हालांकि, वीजा उपलब्धता बदलने के साथ आगे तारीखों में भी बदलाव संभव है।

    खाड़ी में करीब 90 लाख भारतीयों की बढ़ी चिंता

    ग्रीन कार्ड की परेशानी के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के सामने एक अलग संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय प्रवासियों की चिंता बढ़ गई है।

    पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनने के बाद अमेरिका ने क्षेत्र के लिए दूसरी सबसे ऊंची श्रेणी की यात्रा चेतावनी जारी की है। वहीं, यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के लिए अपनी विमानन चेतावनी को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है।

    अमेरिका-ईरान तनाव से क्या हो सकता है असर?

    इन घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने पर हवाई यात्रा, कारोबार और आवाजाही प्रभावित हो सकती है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, ऐसे में किसी बड़े सैन्य टकराव का असर उनके रोजगार, यात्रा और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि एक महीने की शांति खत्म करने की वजह यह थी कि ईरान अपने रडार और मिसाइल सिस्टम को दोबारा तैयार करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेनाएं एक और हमले के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, ईरान की तरफ से भी लगातार जवाबी हमले किए जाने की बात कही गई है।

    आगे की तस्वीर क्यों अहम है?

    भारतीयों के लिए मौजूदा स्थिति दो मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण है। अमेरिका में ईबी-1 वीजा की उपलब्धता और प्राथमिकता तारीखों पर नजर रखना जरूरी होगा, जबकि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और उड़ानों से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।

    यदि अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर खाड़ी में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ वहां से जुड़े व्यापार और यात्रा पर भी पड़ सकता है। वहीं, अमेरिका में ग्रीन कार्ड चाहने वाले भारतीयों के लिए वीजा बुलेटिन में आने वाले बदलाव यह तय करेंगे कि उनकी प्रतीक्षा अवधि कितनी बढ़ती है।

  • US: ट्रंप प्रशासन का भारतीयों पर एक और प्रहार…. F-1 छात्र वीजा में की भारी कटौती

    US: ट्रंप प्रशासन का भारतीयों पर एक और प्रहार…. F-1 छात्र वीजा में की भारी कटौती


    वाशिंगटन।
    ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने बीते साल भारतीय और चीनी छात्रों को जारी किए जाने वाले एफ-1 छात्र वीजा (F-1 Student Visa) में भारी कटौती की है। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (Center for Immigration Studies) की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 2025 में भारतीय और चीनी नागरिकों को जारी किए छात्र वीजा की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

    2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों में 11,77,766 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे। इनमें भारत के 3,63,019 और चीन के 2,65,919 छात्र शामिल थे। दोनों देशों के छात्र मिलाकर कुल विदेशी छात्रों का 53 प्रतिशत हिस्सा थे।


    अमेरिका में ओपीटी योजना भी प्रभावित

    डिग्री पूरी करने के बाद ओपीटी कार्यक्रम के तहत विदेशी छात्रों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है। वीजा कटौती से ये योजना भी प्रभावित हुई। आईआईई के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में 2,94,253 विदेशी छात्र ओपीटी के तहत काम कर रहे थे। इनमें भारत के 1,43,740 और चीन के 61,981 छात्र शामिल थे। 2024 में ओपीटी के तहत काम करने वाले 1,65,524 विदेशी छात्रों में से 68 प्रतिशत भारत और चीन के नागरिक थे। इनमें 79,331 भारतीय और 33,807 चीनी छात्र शामिल थे।

    सीआईएस का कहना है कि यदि भारत और चीन से आने वाले छात्रों की संख्या घटती है तो ओपीटी के माध्यम से अमेरिकी श्रम बाजार में आने वाले विदेशी पेशेवरों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।


    22 हजार भारतीयों को बीते वर्ष जारी हुआ वीजा

    रिपोर्ट की मानें तो बीते साल मई से अगस्त के बीच 22149 भारतीयों को एफ-1 छात्र वीजा जारी किए गए। साल 2024 में इसी अवधि के दौरान अमेरिकी प्रशासन द्वारा 58,694 वीजा जारी किए गए थे, यानी 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। चीनी छात्रों की बात करें तो मई-अगस्त 2025 के दौरान चीनी छात्रों को 40,034 वीजा जारी किए गए। 2024 में ये संख्या 61,075 वीजा जारी हुए थे। इसमें 34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।


    OPT पर बड़े प्रस्ताव की तैयारी

    खबर है कि अगर अब अगर कोई छात्र ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका में ही रहकर काम करना चाहता है, तो उसे 1 लाख डॉलर की मोटी फीस सरकार को देनी होगी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा के बाद काम की फीस के अलावा नए वीजा नियम भी जारी किए गए हैं। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ाई के बाद लंबे समय तक अमेरिका में नहीं रह सकेंगे। हालांकि, इस पर अब तक अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है।

    OPT का मतलब एक अस्थायी नौकरी से है, जो F-1 वीजा पर अमेरिका पहुंचे छात्र के पढ़ाई के क्षेत्र से जुड़ी होती है। पात्र छात्र 12 महीने का ओपीटी काम हासिल कर सकते हैं।

    मौजूदा व्यवस्था है कि जब तक पढ़ाई चल रही है और वीजा के नियमों का पालन किया जा रहा है, तब तक छात्र अमेरिका में रह सकता है। अगर उसकी पढ़ाई लंबी चलती है, तो समय को नियमों का पालन कर बढ़ाया जाता है। अब यह व्यवस्था खत्म होने जा रही है।

  • चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे

    चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे


    नई दिल्ली। चीन में रह रहे भारतीय समुदाय ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी सामग्री, कार्य वीजा में कमी और भारतीयों के जीवनसाथियों के रोजगार पर प्रतिबंध जैसे कई अहम मुद्दे उठाए। भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने इन चिंताओं पर चर्चा करते हुए समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया।

    सोशल मीडिया और वीजा से जुड़े मुद्दे प्रमुख
    शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बीजिंग में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों ने भाग लिया। उन्होंने चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों, उनके खान-पान और संस्कृति के खिलाफ बढ़ती आपत्तिजनक सामग्री पर चिंता जताई।

    इसके अलावा भारतीय पेशेवरों को कार्य वीजा मिलने में कमी, उनके जीवनसाथियों के रोजगार पर लगी पाबंदियों और दूतावास संबंधी सेवाओं में आने वाली दिक्कतों को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

    चीनी अधिकारियों से लगातार संवाद
    मई में चीन में भारत के राजदूत का कार्यभार संभालने वाले विक्रम दुरईस्वामी ने बताया कि उन्होंने इन मुद्दों पर चीनी अधिकारियों के साथ संवाद बढ़ाया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगले सप्ताह से भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले चीनी नागरिकों के दस्तावेजों की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा और संपर्क को बढ़ावा मिल सके।

    भ्रामक प्रचार का तथ्यात्मक जवाब
    भारत-विरोधी और भ्रामक सामग्री के मुद्दे पर राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार भी इस तरह की सामग्री को लेकर चिंतित है और उस पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के जरिए तथ्यात्मक जानकारी साझा कर गलत सूचनाओं का जवाब दे रहा है।

    भारतीय संस्कृति के प्रचार की तैयारी
    दुरईस्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और व्यंजनों की विविधता को बढ़ावा देने के लिए दूतावास भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। उन्होंने बताया कि वसंत मेला जैसे आयोजनों को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इस दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएंगे।

    कानूनी सहायता और नियमित संवाद
    राजदूत ने बताया कि कार्यस्थल से जुड़े विवादों या अन्य समस्याओं का सामना कर रहे भारतीयों की मदद के लिए दूतावास कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक सहयोग तंत्र विकसित कर रहा है। साथ ही भारतीय समुदाय की समस्याओं के समाधान और बेहतर दूतावास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

  • सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ

    सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का भारतीयों ने बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज की प्रति व्यक्ति औसत राशि में 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 1.96 लाख रुपये तक पहुंच गई है। तीन साल पहले यानी वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 98,000 रुपये था। इस तरह लोगों द्वारा लिए जा रहे गोल्ड लोन की औसत राशि लगभग दोगुनी हो गई है।

    क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों के सूचकांक में 144 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों के पास मौजूद सोने का मूल्य काफी बढ़ गया, जिसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान उसी सोने के बदले 200 प्रतिशत तक अधिक लोन राशि स्वीकृत कर रहे हैं।

    गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में तेज उछाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें पर्सनल लोन और कार लोन जैसे अन्य खुदरा ऋण भी शामिल हैं। यह वृद्धि बताती है कि लोग अब अपनी पारंपरिक संपत्ति सोने को नकदी में बदलने के लिए अधिक सक्रिय हो गए हैं।

    कारोबार तीन गुना तक पहुंचा
    देश में गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेज गति से बढ़ा है। यह मार्च 2023 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 19.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

    देशभर में बढ़ी मांग
    गोल्ड लोन अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    बार-बार गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब इसे एक नियमित वित्तीय विकल्प की तरह उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही अब लोग लंबी अवधि की बजाय कम समय के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने की प्रवृत्ति अपना रहे हैं।

    चुकौती में सुधार, डिफॉल्ट में कमी
    तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार के बावजूद ऋण चुकौती की स्थिति में सुधार देखा गया है। 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट के मामले मार्च 2023 में 0.4 प्रतिशत थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 0.2 प्रतिशत रह गए हैं। यह संकेत देता है कि लोन बाजार का विस्तार सुरक्षित और अनुशासित तरीके से हो रहा है।

    खुदरा ऋण में बढ़ती हिस्सेदारी
    वित्त वर्ष 2023-24: 20%
    वित्त वर्ष 2024-25: 30%
    वित्त वर्ष 2025-26: 41%

  • Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय

    Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय


    दोहा।
    कतर (Qatar) के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स (Ras Laffan LNG complex) में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने भी इस घटना पर चिंता जताई है. ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था।

    कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।

    दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया।

    ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।

    सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।