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  • Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय

    Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय


    दोहा।
    कतर (Qatar) के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स (Ras Laffan LNG complex) में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने भी इस घटना पर चिंता जताई है. ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था।

    कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।

    दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया।

    ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।

    सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।

  • अमेरिका के ग्रीन कार्ड नियमों में बदलाव पर सस्पेंस खत्म: DHS का स्पष्ट संदेश, प्रवासियों को नहीं छोड़ना होगा देश

    अमेरिका के ग्रीन कार्ड नियमों में बदलाव पर सस्पेंस खत्म: DHS का स्पष्ट संदेश, प्रवासियों को नहीं छोड़ना होगा देश

    नई दिल्ली । अमेरिका में ग्रीन कार्ड नियमों को लेकर हाल ही में फैली असमंजस की स्थिति पर अब अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्टता देते हुए बड़ा बयान जारी किया है, जिससे वहां रह रहे लाखों प्रवासियों, विशेषकर भारतीय समुदाय को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों में जारी एक प्रशासनिक घोषणा के बाद यह धारणा बन गई थी कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश लोगों को प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना पड़ सकता है, लेकिन अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई नया या व्यापक नीति परिवर्तन नहीं है, बल्कि मौजूदा प्रक्रियाओं की सामान्य व्याख्या है। इस स्पष्टीकरण के बाद स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है और प्रवासियों के बीच बनी अनिश्चितता समाप्त होती दिख रही है।

    दरअसल विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं से जुड़ी एक हालिया जानकारी के बाद यह आशंका फैल गई कि ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति नहीं मिलेगी और उन्हें अपने देश लौटकर इंतजार करना होगा। इस खबर ने प्रवासी समुदायों में चिंता बढ़ा दी थी, खासकर उन लोगों के बीच जो लंबे समय से अमेरिका में नौकरी और परिवार के साथ स्थायी निवास की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। कई आव्रजन विशेषज्ञों ने भी इस सूचना को लेकर सवाल उठाए और अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की।

    अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा है कि अधिकारियों के पास पहले से ही यह अधिकार मौजूद है कि वे प्रत्येक मामले का अलग-अलग मूल्यांकन करें और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लें। विभाग के अनुसार हालिया निर्देश केवल मौजूदा अधिकारों की याद दिलाने के लिए जारी किए गए थे, न कि किसी नए नियम को लागू करने के लिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश ग्रीन कार्ड आवेदकों को पहले की तरह ही अमेरिका में रहकर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मिलती रहेगी और इसमें कोई व्यापक बदलाव नहीं किया गया है।

    व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस पूरे मामले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसे किसी बड़े नीतिगत बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल पहले से मौजूद नियमों और प्रक्रियाओं की पुनः पुष्टि है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अधिकारियों को अपने विवेकाधिकार के उपयोग में मदद मिल सके।

    हालांकि विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे वीजा शर्तों का उल्लंघन या आव्रजन नियमों का पालन न करना, अलग निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन यह हर मामले पर लागू होने वाला कोई सार्वभौमिक नियम नहीं होगा। इसी वजह से विशेषज्ञ अब भी कुछ अतिरिक्त स्पष्टता की आवश्यकता बता रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव भारतीय प्रवासियों पर देखने को मिल रहा है, जो अमेरिका में बड़ी संख्या में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस स्पष्टता के बाद उन्हें राहत मिली है कि उन्हें आवेदन के दौरान देश छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी और वे अपने काम, परिवार और जीवन को बिना बाधा जारी रख सकेंगे। लंबे समय से चली आ रही प्रतीक्षा अवधि को देखते हुए यह निर्णय उनके लिए स्थिरता और सुरक्षा का संकेत माना जा रहा है।

  • देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय

    देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय


    नई दिल्ली।
    देश में पाचन संबंधी बीमारियां (Digestive diseases) तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोग गंभीर बीमारियों को लेकर अब भी जागरूकता नहीं हैं। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट (National Survey Perception Audit) में पता चला कि दिल्ली (Delhi) के 80% लोग नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal cancer) (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने यह सर्वे 14 बड़े भारतीय शहरों में किया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में एक कार्यक्रम में साझा किए गए। दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है।


    सर्वे में शामिल शहर

    सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिये से सर्वे किया गया।


    सर्वे का परिणाम

    – करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं।
    – 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है।
    – 80% फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते।
    – 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। 35.5% लोग नियमित व्यायाम करते हैं।


    डॉक्टर की सलाह

    – बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी जरूरी।

    डॉक्टरों ने दी चेतावनी
    ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम कम कर सकते हैं।

  • ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी: आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते निकाले गए सैकड़ों नागरिक, सरकार ने दी जानकारी

    ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी: आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते निकाले गए सैकड़ों नागरिक, सरकार ने दी जानकारी

    तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान तेजी से जारी है। भारत सरकार ने बताया कि अब तक सैकड़ों नागरिक पड़ोसी देशों के जरिए ईरान से बाहर निकल चुके हैं।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंटर-मिनिस्ट्री ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए कहा कि करीब 550 भारतीय जमीनी रास्ते से आर्मेनिया पहुंचे हैं, जबकि लगभग 90 नागरिक अजरबैजान में प्रवेश कर चुके हैं।

    तीर्थयात्री और छात्र भी सुरक्षित निकाले गए
    सरकार के मुताबिक, 284 भारतीय तीर्थयात्रा के लिए ईरान गए थे, जिनमें से कुछ पहले ही भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी को जल्द वापस लाने की तैयारी है। इसके अलावा तेहरान में मौजूद भारतीय छात्रों को भी एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

    दूतावास कर रहा लगातार समन्वय
    तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय कर रहा है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के संपर्क में है, जबकि हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों की सहायता जारी है।

    खाड़ी देशों से बढ़ाई गई उड़ानें
    अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान और कतर से सोमवार को ही 45 उड़ानें भारत पहुंचने वाली हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 2.2 लाख भारतीय इन क्षेत्रों से वापस लौट चुके हैं।

    कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के बाद वहां से उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं, जबकि कुवैत का एयरस्पेस अभी भी बंद है। आने वाले दिनों में और विशेष उड़ानें शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

    अन्य देशों से भी निकासी जारी
    बहरीन और इराक में फंसे भारतीयों को सऊदी अरब के रास्ते निकाला जा रहा है।

    इस बीच सोहर में दो भारतीय नागरिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास पीड़ित परिवारों के संपर्क में है और जल्द ही शव भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विदेश में फंसे हर भारतीय की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

  • ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद

    ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत सरकार (Indian Government) अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सरकार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो ईरान से बाहर निकलना चाहते हैं। इसके लिए आर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के रास्ते लोगों को सुरक्षित बाहर लाने की व्यवस्था की जा रही है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। दूतावास भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों और अन्य नागरिकों से लगातार संपर्क में है। जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं उन्हें जमीन के रास्ते आर्मेनिया और अजरबैजान भेजा जा रहा है, जहां से वे व्यावसायिक उड़ानों के जरिए भारत लौट सकते हैं।


    ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं?

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरान में करीब नौ हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और तीर्थयात्री शामिल हैं। सरकार ने कहा कि कई भारतीय पहले ही सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए स्वदेश लौट चुके हैं। बाकी लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।


    सरकार ने सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए हैं?

    सरकार ने बताया कि कुछ छात्रों और आगंतुकों को सुरक्षा कारणों से ईरान के अलग-अलग शहरों में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है। यहां परिवार के लोग फोन या ईमेल के जरिए जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अधिकारियों से मदद ले सकते हैं।


    खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा क्यों अहम है?

    विदेश मंत्रालय के अनुसार खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। सरकार ने कहा कि इन सभी भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार क्षेत्र के कई नेताओं के संपर्क में हैं और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।


    संघर्ष में भारतीयों को कितना नुकसान हुआ?

    सरकार ने बताया कि हालिया घटनाओं में दो भारतीय नागरिकों की मौत हुई है और एक व्यक्ति लापता है। ये तीनों एक व्यापारी जहाज पर मौजूद थे, जो हमले का शिकार हुआ था। इसके अलावा कुछ भारतीय घायल भी हुए हैं। एक भारतीय इस्राइल में और एक दुबई में घायल हुआ है। दोनों का इलाज चल रहा है और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है।

  • Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील

    Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।

    एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।


    भारत और ईयू में हुई बड़ी डील

    भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।

    करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।