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  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी

    इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के हालिया इजराइल दौरे के बाद ईरान पर हुए हमलों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल के दौरे पर थे और ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक की। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत को पहले से इस ऑपरेशन की जानकारी थी।

    भारत में इजराइल के राजदूतरूवेन अजार ने इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीएम मोदी को इस हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन की मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई तब तक प्रधानमंत्री मोदी अपना दौरा पूरा कर भारत लौट चुके थे।

    न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना लक्ष्य
    राजदूत अजार ने कहा कि इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। उनका आरोप है कि ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित करने की कोशिश कर रहा है और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग हथियार और तकनीक मुहैया कराता है। इजराइल के अनुसार ईरान ने 2027 तक इजराइल को खत्म करने की धमकी दी थी। जून में भी इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे और अब सहयोग से इनकार के बाद फिर ऑपरेशन शुरू किया गया।

    भारत से हुई बातचीत

    राजदूत ने बताया कि इजराइल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से फोन पर बात की थी। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संवाद और स्थिरता का समर्थन किया।

    भारत लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि मौजूदा संकट का हल केवल बातचीत और डिप्लोमेसी से ही संभव है।

    नेतन्याहू की भूमिका
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका भी चर्चा में है। इजराइल ने इन हमलों को प्रिएंपटिव स्ट्राइक बताया है। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इन हमलों में अमेरिका की भागीदारी की पुष्टि की।

    इजराइल में माहौल
    राजदूत अजार के मुताबिक इजराइल में सुरक्षा को लेकर गंभीर माहौल है। उनका कहना है कि देश लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर भी इजराइल में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। भारत ने साफ किया है कि वह शांति और स्थिरता का पक्षधर है तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा

    खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा


    नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में हलचल मची हुई है। अमेरिकी सहयोगी इसे जायज ठहरा रहे हैं जबकि विरोधी इसे क्रूर हत्या बता रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। विपक्षी दलों ने इस चुप्पी को लेकर मोदी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न

    कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाती है। उनका कहना था आयतुल्ला खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कुछ भी कहने की उसकी अनिच्छा को दर्शाती है। यह भारत के मूल सिद्धांतों और विदेश नीति से समझौता है। इतिहास में भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत की मौन नीति उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

    समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को प्रभावित कर रहे हैं सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

    मोदी सरकार की मौन नीति और विदेश मंत्रालय का बयान
    ईरान की तरफ से रविवार को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर एक सामान्य बयान जारी किया। इसमें कहा गया भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

  • 2025: 5 बड़ी राजनीतिक घटनाएँ जिन्होंने भारत की सियासत और समाज को बदल दिया

    2025: 5 बड़ी राजनीतिक घटनाएँ जिन्होंने भारत की सियासत और समाज को बदल दिया


    नई दिल्ली। साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए कई बदलावों और महत्वपूर्ण घटनाओं का साल रहा। दिल्ली और बिहार के चुनावों से लेकर वक्फ संशोधन विधेयक और उपराष्ट्रपति चुनाव तक, इन घटनाओं ने न सिर्फ देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया, बल्कि विपक्ष और सरकार के बीच खींचतान को भी बढ़ावा दिया। आइए जानते हैं उन पांच अहम घटनाओं के बारे में, जिन्होंने भारतीय राजनीति का रंग और रुख बदल दिया।

    1. दिल्ली विधानसभा चुनाव (फरवरी 2025)

    2025 में दिल्ली की राजनीति में एक बड़े बदलाव ने सबको चौंका दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हराकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। इस जीत ने दिल्ली में 10 साल तक सत्ता में रही केजरीवाल सरकार को सत्ता से बाहर किया और बीजेपी ने नए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चुना। बीजेपी की यह जीत न केवल दिल्ली की सियासत में बदलाव लेकर आई, बल्कि विपक्षी एकता को भी बड़ा झटका दिया।

    2. वक्फ संशोधन विधेयक (अप्रैल 2025)

    अप्रैल में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे मुस्लिम धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना था, लेकिन इसे लेकर विवाद बढ़ गया। इस विधेयक को पारित कराकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया, लेकिन यह मुद्दा आगामी चुनावों में गर्माता रहेगा।

    3. पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर (अप्रैल-मई 2025)

    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादियों द्वारा 27 पर्यटकों की हत्या ने देश को झकझोर दिया। भारत ने इस हमले का जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को तबाह किया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारत ने 10 मई को अचानक इस ऑपरेशन को रोक दिया, जिससे कूटनीतिक संकट पैदा हुआ। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया था।

    4. उपराष्ट्रपति चुनाव (सितंबर 2025)

    14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कार्यकाल के बीच इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीति में हलचल मच गई। सरकार ने सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया, और उन्होंने 452 वोट प्राप्त कर बी सुदर्शन रेड्डी को हराया। यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद का अहम फैसला था, बल्कि सरकार की ताकत और विपक्ष की कमजोरी को भी दर्शाता है।

    5. बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025)

    बिहार विधानसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा तय की। एनडीए (नीतीश कुमार) और महागठबंधन (तेजस्वी यादव) के बीच यह मुकाबला था। एनडीए ने 202 सीटों के साथ भारी जीत हासिल की, जिसमें बीजेपी ने 89 सीटें और जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। वहीं, महागठबंधन को केवल 30 सीटें ही मिलीं, जिससे विपक्षी गठबंधन में गहरी दरारें पैदा हुईं। इस परिणाम ने न केवल बिहार में सत्ता को बनाए रखा, बल्कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में फिर से स्थापित किया और 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर दी।

    साल 2025 ने भारतीय राजनीति को कई अहम मोड़ों से गुजरते हुए नया आकार दिया। इन घटनाओं ने न केवल सत्तारूढ़ दलों को नई दिशा दी, बल्कि विपक्ष की रणनीति और एकजुटता को भी परख लिया। आगामी चुनावों में इन घटनाओं के प्रभाव को महसूस किया जाएगा, जो भारतीय राजनीति के अगले अध्याय का निर्धारण करेंगे।