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  • पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

    पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    कौन था हमजा बुरहान?
    रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार:

    असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार

    उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर”

    मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी

    संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr

    उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

     भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थिति
    भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था

    उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे

    वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था

    किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?
    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह:

    युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था

    फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था

    CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था

    विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था

    हत्या को लेकर क्या दावा है?
    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि:

    PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया

    कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई

    हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

     आधिकारिक स्थिति अभी तक:

    किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है

    यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है

  • म्यांमार के खनिजों पर चीन की पकड़ से बढ़ी भारत की चिंता, गृहयुद्ध में बदला भू-राजनीतिक खेल

    म्यांमार के खनिजों पर चीन की पकड़ से बढ़ी भारत की चिंता, गृहयुद्ध में बदला भू-राजनीतिक खेल



    नई दिल्ली। म्यांमार 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से लगातार गृहयुद्ध जैसी स्थिति में फंसा हुआ है, जहां सेना और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष जारी है। इस अस्थिर माहौल के बीच देश के रणनीतिक खनिज संसाधनों, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन की बढ़ती भूमिका ने क्षेत्रीय भू-राजनीति को और जटिल बना दिया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार के उत्तरी राज्यों जैसे कचीन और शान में स्थित खनिज क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में रेयर अर्थ तत्वों का उत्पादन होता है, जिनका वैश्विक सप्लाई चेन में अहम स्थान है। इन खनिजों का बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात होता है, क्योंकि चीन दुनिया में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा केंद्र है।

    विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस क्षेत्र में सिर्फ आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय सशस्त्र समूहों और सीमावर्ती नेटवर्क के जरिए अपनी रणनीतिक पकड़ भी बनाए हुए है। इससे म्यांमार के भीतर संघर्ष और अधिक गहरा हुआ है और सीमावर्ती इलाकों में अस्थिरता बनी हुई है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए संवेदनशील है क्योंकि म्यांमार की करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगती है। इस क्षेत्र में पहले से ही उग्रवाद और तस्करी की चुनौतियां रही हैं, जो अब और जटिल हो गई हैं।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यांमार की अस्थिरता और चीन की सक्रिय मौजूदगी भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं जैसे त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट पर भी असर डाल रही है।

    कुल मिलाकर, म्यांमार का संकट अब केवल आंतरिक गृहयुद्ध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और संसाधन प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन चुका है, जिसमें भारत, चीन और स्थानीय समूहों के हित सीधे जुड़े हुए हैं।

  • पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान

    पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान

    पाकिस्तान समर्थक सेना अधिकारी से मिले तारिक रहमान, भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान
    ढाका। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अंतरिम अध्यक्ष तारिक रहमान ने पूर्व बांग्लादेश आर्मी अधिकारी और भारत-विरोधी ब्रिगेडियर जनरल अमन आजमी से मुलाकात की। अमन आजमी विवादास्पद जमात नेता गुलाम आजम के बेटे हैं, जिससे बीएनपी के चुनाव के बाद के लक्ष्यों पर सवाल उठ रहे हैं। बुधवार शाम ढाका में यह मुलाकात हुई। इससे बीएनपी के पाकिस्तान और उसकी जासूसी एजेंसी ISI के साथ भविष्य के संबंधों पर संदेह पैदा होता है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे कदम भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।

    तारिक रहमान ने हाल ही में अपनी नई छवि में भारत के प्रति स्वागत योग्य दिखाई है, जो यह संकेत देता है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री चुना जाता है तो वे सामान्य साझेदारी स्थापित करने के लिए इच्छुक हैं। हालांकि, जानकार कहते हैं कि उनके पुराने आईएसआई और जमात-ए-इस्लामी से संबंध फिर से उभर सकते हैं। रहमान के भविष्य के कदमों पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि जमात किसी भविष्य की सरकार में शामिल होने के लिए उतावली दिख रही है।
    अमन आजमी के पिता कौन थे

    गुलाम आजम 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख नेता थे। उन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का सक्रिय रूप से विरोध किया और पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग किया। उन्होंने प्रो-पाकिस्तान पीस कमेटियों का गठन और नेतृत्व किया, जो रजाकारों, अल-बद्र और अल-शम्स जैसे क्रूर अर्धसैनिक समूहों के लिए भर्ती करते थे। ये समूह युद्ध अपराधों, नरसंहार और बुद्धिजीवियों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।

    बाद में गुलाम आजम के खिलाफ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया और दोषी ठहराया गया। आजम को 90 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन 2013 में 91 साल की उम्र के कारण उन्हें मृत्युदंड से छूट दी गई। 2014 में उनकी मृत्यु हो गई। अमन आजमी शेख हसीना के शासन के अंतिम चरण में गुमनाम रहे, लेकिन उनके हटाए जाने के तुरंत बाद वे फिर से सक्रिय हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से उन्होंने कई सीनियर आर्मी अधिकारियों के खिलाफ अपहरण और हत्याओं में शामिल होने के आरोप लगाने में अहम भूमिका निभाई।
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    सऊदी अरब ने अमेरिकी ऐक्शन का किया स्वागत, मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं आतंकवादी संगठन घोषित
    रियाद । सऊदी अरब ने अमेरिका के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, जॉर्डन और लेबनान की शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि यह कदम उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करता है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और अरब देशों की समृद्धि को बढ़ावा देता है।

    अमेरिकी ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने 13 जनवरी 2026 को यह घोषणा की थी। अमेरिका ने मिस्र और जॉर्डन की मुस्लिम ब्रदरहुड शाखाओं को ‘स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट’ और लेबनान की शाखा (अल-जमाआ अल-इस्लामिया) को ‘फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ घोषित किया। अमेरिका का आरोप है कि ये शाखाएं हमास को समर्थन देती हैं, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं, हथियार बनाती हैं (जैसे रॉकेट और ड्रोन), लड़ाकों की भर्ती करती हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नवंबर 2025 में जारी कार्यकारी आदेश पर आधारित है, जिसके तहत मुस्लिम ब्रदरहुड की कुछ शाखाओं को निशाना बनाया गया।

    सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा- सऊदी अरब का विदेश मंत्रालय अमेरिका द्वारा मिस्र, जॉर्डन और लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाओं को आतंकवादी समूह घोषित करने का स्वागत करता है। मंत्रालय ने जोर दिया कि सऊदी अरब उग्रवाद और आतंकवाद की सभी रूपों की निंदा करता है तथा अरब देशों, क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा, स्थिरता एवं समृद्धि के लिए हर संभव सहयोग का समर्थन करता है।

    यह कदम मध्य पूर्व में मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रति विभाजित रुख को दर्शाता है। मिस्र ने 2013 से, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है, जबकि कतर और तुर्की जैसे देशों में इसका प्रभाव अधिक है। मिस्र ने भी इस अमेरिकी फैसले का स्वागत किया और इसे उग्र विचारधारा पर मजबूत प्रहार बताया। मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र शाखा ने इस फैसले को खारिज किया और कहा कि यह बिना किसी ठोस सबूत के लिया गया है।