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  • इंदिरा गांधी चाहती थीं कपूर परिवार से रिश्ता, राजीव गांधी के लिए देखी थी राज कपूर की बेटी

    इंदिरा गांधी चाहती थीं कपूर परिवार से रिश्ता, राजीव गांधी के लिए देखी थी राज कपूर की बेटी

    नई दिल्ली ।  फिल्म कलाकार और नेताओं के बीच दोस्ती और रिश्तेदारी का रिश्ता आम बात है। लेकिन क्या आप कपूर परिवार और गांधी परिवार की दोस्ती के बारे में जानते हैं? ये 60 के दशक के कुछ आखिरी सालों की बात है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राज कपूर के बीच दोस्ती और सम्मान का रिश्ता हुआ करता था। इंदिरा गांधी इस रिश्ते को इतना सम्मान देतीं थीं कि वो राजकपूर की बड़ी बेटी ऋतू कपूर को अपने घर की बहू बनाना चाहती थीं।
    बेटे राजीव गांधी की शादी राज कपूर की बेटी के साथ चाहती थीं इंदिरा
    सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई ने अपनी किताब ‘नेता अभिनेता: बॉलीवुड स्टार पॉवर इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में इंदिरा गांधी की इस ख्वाहिश का ज़िक्र किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया कि राज कपूर और इंदिरा गांधी के परिवार के बीच दोस्ती का रिश्ता था। लेकिन इंदिरा गांधी इस रिश्ते को रिश्तेदारी में बदलना चाहती थीं। वो बेटे राजीव गांधी की शादी राज कपूर की बड़ी बेटी ऋतू कपूर से करवाना चाहती थीं।

    ऋतू कपूर को बहू बनाना चाहती थीं इंदिरा गांधी
    रशीद किदवई ने अपनी किताब में आगे लिखा है कि इंदिरा गांधी को बॉलीवुड की बहू की तलाश नहीं थी और ना ही वो स्टार पॉवर से प्रभावित थीं। उनके मन में बस कपूर परिवार के लिए सम्मान और प्यार था। इसलिए वो दोस्ती रिश्तेदारी में बदलना चाहती थी। लेकिन ऋतू कपूर, इंदिरा गांधी की बहू नहीं बन सकी। इसकी वजह राजीव गांधी की जिंदगी में सोनिया की एंट्री थी।

    राजीव गांधी ने की सोनिया से शादी
    राजीव गांधी जब ब्रिटेन में अपनी पढ़ाई पूरी करने गए थे तब उनकी मुलाकात सोनिया गांधी से हुई। दोनों में प्यार हुआ और फरवरी 1968 में सोनिया और राजीव ने शादी कर ली। इस शादी के बाद हैदराबाद हाउस में ग्रैंड पार्टी रखी गई थी जिसमें राजीव के स्कूल और कॉलेज के दोस्त शामिल हुए। दूसरी तरफ 1969 में राज कपूर ने अपनी बेटी ऋतू कपूर की शादी उद्योगपति राजन नंदा से हो गई।
    कपूर परिवार
    राज कपूर ने अपने तीनों बेटों रंधीर, ऋषि और राजीव कपूर फिल्मों की राह दिखाई। तीनों बेटों ने सालों तक ऑडियंस को एंटरटेन किया। शानदार फिल्मों में काम किया। लेकिन सफल सिर्फ ऋषि कपूर ही हुए। वहीं एक्टर की दोनों बेटियां ऋतू और रीमा फिल्मों से दूर रही। शादी के बाद बच्चों और फिर ग्पोता-पोतियों में जीवन बीता। आज राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर, राजीव कपूर और बेटी ऋतू नंदा इस दुनिया में नहीं रहे। रणबीर कपूर फिल्मों में एक्टिव हैं। करिश्मा और करीना कपूर ने फिल्मों में अपनी कागा पहचान बनाई।
  • फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल

    फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया “सोना न खरीदने” जैसी अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना राजनीतिक दावा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कथित 1967 की अखबार कटिंग शेयर की जा रही है। इस दावे के जरिए कहा जा रहा है कि इंदिरा गांधी ने भी आर्थिक संकट के दौरान लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन जांच में यह दावा फर्जी पाया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कथित “द हिंदू” अखबार की कटिंग 6 जून 1967 की बताई जा रही है, जिसमें इंदिरा गांधी के नाम से “सोना न खरीदने” की अपील का दावा किया गया है। लेकिन खुद अखबार “द हिंदू” ने इस कटिंग को पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से एडिटेड बताया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई पेज उनके आर्काइव में मौजूद नहीं है।

    अखबार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। तथ्य यह है कि 1960 के दशक में भारत विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से गुजर रहा था, लेकिन उस समय सोना खरीदने पर ऐसी कोई राष्ट्रीय स्तर की औपचारिक रोक या सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी।

    इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं द्वारा भी इस कथित कटिंग को शेयर किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस दावे का हवाला देते हुए पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।

    कांग्रेस का कहना है कि आज की आर्थिक अपील को ऐतिहासिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि अतीत में भी आर्थिक अनुशासन की बातें होती रही हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक और राजनीतिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।

  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।