Tag: Indonesia

  • इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही

    इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही


    जकार्ता।
    इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 6.9 तीव्रता का एक और तेज झटका महसूस किया गया। भूकंप और उसके बाद हुए भूस्खलन में अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

    भूकंप के तेज झटकों से कई मकान और अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें भूस्खलन के मलबे से बंद हो गईं। दहशत के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो के अनुसार राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

    भूस्खलन में दबे लोग, कई इलाकों में तबाही

    भूकंप के बाद फ्लोरेस के कई हिस्सों में भूस्खलन हुआ। सिक्का, वेस्ट मंग्गाराई और ईस्ट मंग्गाराई क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए जाने की जानकारी है। इनमें रेओके गांव में भूस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले आठ लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में छह लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो ग्रामीणों के मलबे में दबकर लापता होने की सूचना भी सामने आई है। राहत दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

    सड़कें मलबे से बंद, इमारतों को नुकसान

    भूकंप के कारण फ्लोरेस में कई घरों और सरकारी समेत अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त और गिरी हुई दिखाई दे रही हैं। भूकंप के झटकों के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए।

    भूस्खलन के कारण कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    सुनामी की चेतावनी से मचा डर

    शक्तिशाली भूकंप के बाद अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी। इससे समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, बाद में समुद्र के जलस्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।

    फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं और भूकंप से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

  • मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    नई दिल्ली । इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के निकट समुद्र में रविवार को एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया, जब यात्रियों से भरी एक फेरी में अचानक भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापक स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। कई बचाव जहाजों और राहत दलों को मौके पर भेजा गया है, जो लापता लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त फेरी पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया शहर से दक्षिण सुलावेसी के मकासर के लिए रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान जावा के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित मदुरा द्वीप के पास अचानक जहाज में आग भड़क उठी। आग तेजी से फैलने के कारण जहाज पर सवार यात्रियों और चालक दल के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही समुद्री बचाव एजेंसियों को सक्रिय किया गया और आसपास मौजूद जहाजों को भी राहत कार्य में शामिल किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि फेरी में यात्रियों और चालक दल सहित कुल 271 लोग सवार थे। अब तक 225 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बचाए गए यात्रियों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं लापता 41 लोगों की तलाश के लिए समुद्र के विस्तृत क्षेत्र में खोज अभियान चलाया जा रहा है। राहत दल समुद्री परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लगातार तलाशी अभियान संचालित कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित खोजा जा सके।

    घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने आसपास के समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। बचाव कार्य में कई जहाजों के अलावा अन्य समुद्री संसाधनों का भी उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फेरी में आग कैसे लगी, इसका पता लगाने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आग लगने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।

    इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े द्वीपीय देशों में शामिल है, जहां हजारों द्वीपों के बीच आवागमन के लिए फेरी सेवाएं प्रमुख परिवहन माध्यम हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन समुद्री मार्गों का उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री दुर्घटना का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता है और राहत एजेंसियों के सामने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

    देश में इससे पहले भी कई समुद्री दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2025 में उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास एक यात्री जहाज में आग लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इससे पहले वर्ष 2021 में मोलुक्का सागर में एक अन्य फेरी में आग लगने के बाद सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया था। इन घटनाओं के बाद समुद्री सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है।

    मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि लापता लोगों की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत अभियान लगातार जारी है और जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

  • इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा तकनीक पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई अपनी इंडोनेशिया यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते भारत की रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश स्वदेशी तकनीक के दम पर मित्र देशों के लिए भी एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास और निर्यात में भारत की बढ़ती भागीदारी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी मजबूत कर रही है।

    इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी दोनों देशों ने साझा रूपरेखा तैयार की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता को नई पहचान दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि इसी दिन भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए कारगिल की चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश अपने वीर सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता और नई पीढ़ी तक उनकी गाथाएं पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से इस वर्ष विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह मोटरसाइकिल अभियान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से शुरू होकर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास तक पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान देशवासियों को सैनिकों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाने का माध्यम बनेगा।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना में शामिल आधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है तथा इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। उनके अनुसार यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट प्रणाली और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और नवाचार की भावना है। उन्होंने हाल में सफल रहे स्वदेशी मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक और सशक्त बना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और सुरक्षित, सक्षम तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के साहस और स्वदेशी तकनीक की शक्ति के बल पर वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।

  • पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संग प्रम्बानन मंदिर में किए दर्शन, संरक्षण परियोजना का भी हुआ शुभारंभ

    पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संग प्रम्बानन मंदिर में किए दर्शन, संरक्षण परियोजना का भी हुआ शुभारंभ


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का दर्शन किया। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू स्थापत्य कला का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं की यह संयुक्त यात्रा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि साझा विरासत और द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय का भी प्रतीक बनी।

    प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी क्रम में प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़ी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया, जिसमें भारत तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग प्रदान करेगा।

    प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है और इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जबकि परिसर में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के भी भव्य मंदिर मौजूद हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण महाकाव्य के प्रसंगों को दर्शाने वाली उत्कृष्ट नक्काशी इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो ने मंदिर परिसर का अवलोकन करते हुए इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी ली। दोनों नेताओं ने इस विरासत को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी पहचान सुरक्षित पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और इंडोनेशिया के बीच मंदिर संरक्षण परियोजना इसी साझा दृष्टिकोण का परिणाम मानी जा रही है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर भी प्रम्बानन मंदिर की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भव्य और ऐतिहासिक धरोहर बताया। उन्होंने राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ मंदिर की यात्रा को दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण क्षण बताया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता भी देखने को मिली, जिसने द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का संदेश दिया।

    भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संपर्क भी मौजूद हैं। इंडोनेशिया में आज भी रामायण और महाभारत से जुड़ी परंपराएं, कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां व्यापक रूप से दिखाई देती हैं। ऐसे में प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना दोनों देशों की साझा विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सांस्कृतिक साझेदारी न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि पर्यटन, शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को भी नई गति देगी। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने और इंडोनेशिया के साथ दीर्घकालिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

  • इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    इंडोनेशिया दौरे का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी को पांच फाइटर जेट्स की विशेष एस्कॉर्ट के साथ दी गई राजकीय विदाई

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रस्थान किया। यात्रा के समापन पर उन्हें विशेष राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के पांच लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट करते हुए विदाई दी, जिसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री की यात्रा की शुरुआत भी विशेष सम्मान के साथ हुई थी। इंडोनेशिया पहुंचने से पहले वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया था। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं हवाई अड्डे पर मौजूद रहकर उनका स्वागत किया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास का संकेत माना गया।

    यात्रा के समापन के अवसर पर भी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को विदा करने पहुंचे। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ मुलाकात की और भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस सम्मानजनक विदाई ने भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को एक बार फिर रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के बाद संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और वहां की जनता का आत्मीय स्वागत और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इस यात्रा ने दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने का काम किया है।

    यात्रा के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

    भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से समुद्री सहयोग, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, डिजिटल तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी सहयोग को नई गति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    प्रधानमंत्री की इस यात्रा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। भारत लगातार क्षेत्रीय सहयोग, मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री मार्ग, आर्थिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता देता रहा है। ऐसे में इंडोनेशिया के साथ बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साझा हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने अगले कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो गए। उनकी आगामी बैठकों में भी क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक भागीदारी, सुरक्षा, तकनीक और बहुपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरी यात्रा से भारत की इंडो-पैसिफिक नीति और क्षेत्रीय साझेदारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देते हुए योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित यह परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं उनके साथ मंदिर परिसर पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना की प्रतीकात्मक पट्टिका का अनावरण कर इस सहयोग की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

    प्रम्बानन मंदिर परिसर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह मंदिर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है तथा हिंदू त्रिमूर्ति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के कारण यह परिसर विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह संरक्षण परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस समय भारत द्वारा प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में तकनीकी सहयोग देने पर सहमति बनी थी। अब इस परियोजना की शुरुआत के साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को व्यावहारिक रूप दिया गया है।

    भारत को ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई महत्वपूर्ण विरासत स्थलों के संरक्षण कार्य में योगदान दे चुका है। इंडोनेशिया के प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी भारतीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया था। इसी अनुभव के आधार पर अब प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भी भारत अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा।

    यह पहल केवल एक संरक्षण परियोजना नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक संबंधों और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शोध के नए अवसर भी विकसित होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध समुद्री व्यापार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराओं के माध्यम से विकसित हुए हैं। प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना इन ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक सहयोग के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को नई गति मिलने और साझा विरासत के संरक्षण में दीर्घकालिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • PM मोदी ने इंडोनेशिया में छेड़ा बॉलीवुड कनेक्शन, ‘कुछ कुछ होता है’ के जिक्र से खुश हुए करण जौहर

    PM मोदी ने इंडोनेशिया में छेड़ा बॉलीवुड कनेक्शन, ‘कुछ कुछ होता है’ के जिक्र से खुश हुए करण जौहर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंडोनेशिया के जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक रिश्तों का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच बॉलीवुड के खास जुड़ाव को भी याद किया और शाहरुख खान की साल 1998 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ का उल्लेख किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में भारतीय फिल्मों और संगीत की लोकप्रियता काफी गहरी है। उन्होंने बताया कि आज भी वहां ‘कुछ कुछ होता है’ के गाने लोगों के बीच काफी पसंद किए जाते हैं। उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे सदियों पुराने सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव का हिस्सा बताया।

    पीएम मोदी ने अपने अंदाज में जोड़ा बॉलीवुड कनेक्शन
    भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बॉलीवुड के इस रिश्ते को खास अंदाज में पेश किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ कुछ होता है’ काफी लोकप्रिय है। उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया जैसे दो बड़े देश साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो यह सिर्फ ‘कुछ कुछ’ नहीं रहता, बल्कि ‘बहुत कुछ होता है’ बन जाता है। इस दौरान पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए धन्यवाद भी दिया।

    करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी ने जताई खुशी
    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपनी फिल्म का अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिक्र किए जाने से फिल्ममेकर करण जौहर भी काफी उत्साहित नजर आए। उनकी प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पीएम मोदी के भाषण की एक वीडियो क्लिप साझा की।

    वीडियो के साथ धर्मा प्रोडक्शंस ने लिखा कि सिनेमा और संगीत में सीमाओं को पार कर दुनिया के लोगों को जोड़ने की अनोखी ताकत होती है। कंपनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जकार्ता में फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ को दुनियाभर में मिले प्यार और सराहना का उल्लेख करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है।

    ‘कुछ कुछ होता है’ रही थी बड़ी ब्लॉकबस्टर
    गौरतलब है कि करण जौहर ने साल 1998 में फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी। शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी अभिनीत यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही।

    फिल्म के गाने दुनियाभर में लोकप्रिय हुए और शाहरुख-काजोल की जोड़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। भारत के अलावा यह फिल्म ब्रिटेन, अमेरिका और इंडोनेशिया समेत कई देशों में काफी पसंद की गई और इसने बॉलीवुड को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • भारत की स्वदेशी Astra Mk1 मिसाइल को मिला पहला विदेशी खरीदार, इंडोनेशिया सौदे से वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ी भारतीय तकनीक की ताकत

    भारत की स्वदेशी Astra Mk1 मिसाइल को मिला पहला विदेशी खरीदार, इंडोनेशिया सौदे से वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ी भारतीय तकनीक की ताकत


    नई दिल्ली ।
    भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। इंडोनेशिया भारत द्वारा विकसित Astra Mk1 मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश बनने जा रहा है। इस संभावित रक्षा सौदे को केवल हथियार निर्यात के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी सैन्य तकनीक पर बढ़ते वैश्विक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    Astra Mk1 एक आधुनिक बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे ऐसे हवाई मुकाबलों के लिए विकसित किया गया है जहां पायलट को दुश्मन का विमान आंखों से दिखाई भी नहीं देता। यह मिसाइल रडार और उन्नत सेंसर प्रणाली की सहायता से लंबी दूरी पर लक्ष्य की पहचान कर उसे सटीक रूप से नष्ट करने में सक्षम है। आधुनिक वायु युद्ध में ऐसी मिसाइलों को निर्णायक बढ़त देने वाली तकनीक माना जाता है।

    इस प्रकार की मिसाइल का संचालन पूरी तरह अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर आधारित होता है। लड़ाकू विमान पहले अपने रडार से लक्ष्य की पहचान करता है और उसके बाद मिसाइल को निर्धारित दिशा में प्रक्षेपित किया जाता है। उड़ान के अंतिम चरण में मिसाइल का सक्रिय रडार सीकर स्वयं लक्ष्य का पीछा करते हुए उसे भेदता है। यही कारण है कि वर्तमान समय के हवाई संघर्षों में पायलट कई बार एक-दूसरे को देखे बिना ही मुकाबला पूरा कर लेते हैं।

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित Astra Mk1 भारत की पहली स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता लगभग 110 किलोमीटर तक मानी जाती है, हालांकि यह दूरी प्रक्षेपण की स्थिति और ऊंचाई पर निर्भर करती है। यह ध्वनि की गति से चार गुना अधिक रफ्तार से उड़ सकती है तथा इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी लक्ष्य को सटीक रूप से भेदने की क्षमता रखती है। दिन और रात के साथ विभिन्न मौसम परिस्थितियों में भी इसका प्रभावी संचालन संभव है।

    भारतीय वायुसेना ने Astra Mk1 को अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया है। भविष्य में इसे नए स्वदेशी और उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ भी उपयोग में लाने की योजना है। इससे भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई मारक क्षमता और अधिक मजबूत होगी तथा स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता भी बढ़ेगी।

    दुनिया के कुछ ही देशों के पास इस श्रेणी की अत्याधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल विकसित करने की क्षमता है। ऐसे में Astra Mk1 का निर्यात भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करता है जो न केवल उन्नत रक्षा तकनीक विकसित करते हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में उसका सफल निर्यात भी कर सकते हैं। यह उपलब्धि भारतीय रक्षा उद्योग की तकनीकी परिपक्वता और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

    इंडोनेशिया के लिए यह मिसाइल उसकी हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशाल समुद्री क्षेत्र और विस्तृत हवाई सीमाओं वाले देश के रूप में उसे लंबी दूरी से संभावित खतरों का मुकाबला करने वाली आधुनिक हथियार प्रणाली की आवश्यकता है। वहीं भारत के लिए यह सौदा रक्षा निर्यात बढ़ाने, स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान दिलाने और रणनीतिक साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।

  • इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। नेताओं का कहना है कि यह सम्मान भारत की सक्रिय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते प्रभाव की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। उनके अनुसार यह सम्मान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावशाली कूटनीति और भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की वैश्विक पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यह सम्मान उसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। उनके अनुसार भारत आज विश्व समुदाय के बीच एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और भारत-इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास और साझा समृद्धि को भी बल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रदान किया। इसे इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी हो। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है।

    सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला यह सम्मान भारत के लोगों के प्रति इंडोनेशिया की सद्भावना और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, वहां की सरकार और जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग केवल राजनीतिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की विदेश नीति की बढ़ती स्वीकार्यता और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भूमिका का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को विस्तार दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। ऐसे सम्मान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि वैश्विक समुदाय में भारत की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी और सुदृढ़ बनाते हैं।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देना समय की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्ता के बाद कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में केवल मजबूती ही नहीं आई है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मौजूदा बैठक से रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसर तैयार होंगे।

    वार्ता के दौरान आर्थिक सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में साझेदारी को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सहयोग से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बैठक का प्रमुख केंद्र रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण समुद्री देशों के रूप में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा दृष्टिकोण दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक समन्वय और रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए समझौतों को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

    संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़ा सहयोग रहा, जिसके तहत भारत इंडोनेशिया को अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारतीय ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को खरीदने का निर्णय भी लिया है। इन समझौतों को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी का तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने साझा सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रम्बानन मंदिर का पुनर्निर्माण परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस परियोजना का शुभारंभ करेंगे।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, आर्थिक संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी विश्वास, साझा हितों और क्षेत्रीय शांति को आधार बनाकर सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।