Tag: Indore demolition drive

  • इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग

    इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग


    मध्यप्रदेश । इंदौर में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल, पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क निर्माण में बाधक बताए जा रहे मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 से अधिक मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि कुल करीब 85 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे।

    नगर निगम के रिमूवल विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है तथा प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे।

    हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्षों पुराने उनके मकानों को बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किया जा रहा है। प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई प्लॉट या फ्लैट दिया गया और न ही पर्याप्त मुआवजे की जानकारी दी गई।

    65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने दावा किया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में रह रहा था। उनका कहना है कि उनका जन्म भी इसी मकान में हुआ और अब जीवन के इस पड़ाव पर उनका आशियाना टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई सदस्य एक ही मकान में रहते थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचा है।

    कुछ अन्य प्रभावित लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। 47 वर्षीय राजकुमारी मिश्रा ने दावा किया कि वह और उनके पति निराश्रित हैं तथा उनके कोई संतान भी नहीं है। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया और अब बची हुई जगह में रहना भी मुश्किल हो गया है।

    रहवासियों का यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन खाली होने के बावजूद केवल आवासीय मकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और कई स्थानों पर मुनादी भी कराई गई थी। इसी कारण कुछ लोगों ने अपने निर्माणों के हिस्से स्वयं भी हटा लिए थे। निगम का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने मकानों को टूटते हुए देखते रहे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से को तोड़ा गया है, जबकि कुछ रहवासियों का कहना था कि उनके मकान के सामने पहले से पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़क मौजूद थी, फिर भी उनका निर्माण हटाया गया।

    फिलहाल सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवारों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और मुआवजे की मांग उठाते हुए प्रशासन से राहत देने की अपील की है।