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  • इंदौर-देवास बायपास पर हादसों का खतरा बरकरार? हाईकोर्ट में आज खुलेगी सड़क सुधार के दावों की पोल

    इंदौर-देवास बायपास पर हादसों का खतरा बरकरार? हाईकोर्ट में आज खुलेगी सड़क सुधार के दावों की पोल


    इंदौर । इंदौर-देवास बायपास की बदहाल स्थिति और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में आज एक बार फिर जनहित याचिका पर सुनवाई होगी। इस सुनवाई में सबसे अहम बात यह रहेगी कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की ओर से गड्ढे भरने और सड़क की समस्याएं दूर करने के दावे कितने सही साबित होते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर बायपास की मौजूदा स्थिति देखने और अगली सुनवाई में वास्तविक हालात की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। अब याचिकाकर्ता की रिपोर्ट से सड़क पर हुए सुधार की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने वर्ष 2021 में दायर की थी। इसमें इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत के साथ वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर जगह-जगह बड़े गड्ढे मौजूद रहे हैं। सर्विस रोड की हालत भी खराब बताई गई है। इसके अलावा खुले ड्रेनेज जलभराव और खराब या बंद स्ट्रीट लाइट के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के चलते दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।

    याचिकाकर्ता ने पहले की सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बायपास की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उनका आरोप था कि सड़क पर गड्ढों और अन्य खामियों के कारण हादसों का खतरा बना हुआ है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। याचिकाकर्ता ने सड़क सुरक्षा से जुड़े न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए संबंधित एजेंसियों से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

    पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने NHAI से यह जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके जवाब में NHAI ने तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया था कि सड़क के गड्ढे भर दिए गए हैं और समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी काम किए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने केवल इन दावों के आधार पर स्थिति को अंतिम रूप से स्पष्ट मानने के बजाय याचिकाकर्ता को स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करने को कहा था।

    आज की सुनवाई में सड़क की वास्तविक स्थिति और प्राधिकरण की ओर से किए गए सुधार कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि गड्ढों की समस्या कितनी दूर हुई है और सर्विस रोड जल निकासी तथा प्रकाश व्यवस्था जैसी समस्याओं में कितना सुधार हुआ है। हालांकि सुनवाई से पहले यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी समस्याएं दूर हो चुकी हैं या अभी भी पहले जैसी स्थिति बनी हुई है।

    याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देशों के पालन का मुद्दा भी शामिल है। इसमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अवैध पार्किंग अवैध ढाबों और व्यावसायिक अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण तथा आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    याचिकाकर्ता की मांग है कि संबंधित एजेंसियां बायपास की सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं। जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए और दुर्घटना संभावित स्थानों पर जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि NHAI के सुधार संबंधी दावों और मौके पर सामने आने वाली स्थिति में कितना अंतर है।

  • इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत

    इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत


    इंदौर। इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने अदालत में तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया कि बायपास पर मौजूद गड्ढों को भर दिया गया है और अब वहां पहले जैसी समस्या नहीं है। हालांकि सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी सवाल उठाए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर सड़क का निरीक्षण करने और वास्तविक स्थिति से अदालत को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच में हुई। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान NHAI से यह बताने को कहा था कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
    इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर मातृ फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर इस याचिका में सड़क की खराब स्थिति और वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर बड़े-बड़े गड्ढे और खराब सर्विस रोड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। इसके अलावा खुले ड्रेनेज और जलभराव की समस्या भी सामने रखी गई है। कुछ स्थानों पर स्ट्रीट लाइट खराब या बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि इससे रात के समय वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। याचिका में दुर्घटना संभावित स्थानों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है।
    तीन दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि बायपास की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। उनका कहना था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होने के कारण सड़क पर हादसों का खतरा बना हुआ है। हालांकि NHAI ने शुक्रवार को तस्वीरें पेश कर दावा किया कि गड्ढों को भरने का काम पूरा कर लिया गया है और समस्या दूर हो चुकी है। अब अदालत के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता मौके पर जाकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखेंगे। उनका निरीक्षण और उसके आधार पर अदालत में दी जाने वाली जानकारी अगली सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
    इस मामले में सड़क सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी प्रमुख मुद्दा है। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अवैध ढाबों के साथ व्यावसायिक अतिक्रमण पर नियंत्रण की मांग की गई है। इसके अलावा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। प्रकाश व्यवस्था बेहतर बनाने और यातायात की निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी उठाई गई है। आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना भी याचिका में उठाए गए मुद्दों में शामिल है।
    अब 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में बायपास की मौजूदा हालत और सुधार कार्यों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। NHAI के दावे और याचिकाकर्ता के मौके पर किए जाने वाले निरीक्षण के बाद अदालत के सामने सड़क की वास्तविक स्थिति से जुड़ी जानकारी आएगी। ऐसे में इंदौर-देवास बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों की नजर अब अगली सुनवाई पर रहेगी।