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  • ‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठी आपत्तियां; 23 जून को होगी अगली सुनवाई

    ‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठी आपत्तियां; 23 जून को होगी अगली सुनवाई


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर स्थित Madhya Pradesh High Court में शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके जन्म और पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की गई, जिससे उनकी वैध शादी को विवादित बनाया जा सके। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका में मौजूद कमियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवश्यक सुधार करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित कर दी।

    याचिका में दावा किया गया है कि उनके जन्म रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके पिता द्वारा जन्म संबंधी अभिलेखों में छेड़छाड़ कर उन्हें वास्तविक उम्र से कम दिखाने का प्रयास किया गया। याचिका के अनुसार छोटे भाई के दस्तावेजों को उनके दस्तावेज बताकर प्रस्तुत किया गया, जिससे उनकी आयु को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बालिग हैं और उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में कथित हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

    मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ा जब मार्च 2026 में विवाह के बाद उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया। याचिका में कहा गया है कि फिल्म शूटिंग के सिलसिले में केरल प्रवास के दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। विवाह के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस संबंध को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    इसी बीच National Commission for Scheduled Tribes की ओर से विवाह के समय याचिकाकर्ता की उम्र को लेकर आशंका व्यक्त की गई थी। इसके बाद मामले में पुलिस जांच शुरू हुई और उपलब्ध शिकायतों एवं दस्तावेजों के आधार पर युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि उम्र संबंधी विवाद और दस्तावेजों की सत्यता का मुद्दा अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाह को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता और उनके पति ने अदालत से अनुरोध किया है कि मूल जन्म प्रमाण पत्र को बहाल किया जाए तथा रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता P. V. Dinesh वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने याचिका में तकनीकी खामियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि की स्पष्टता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद अदालत के समक्ष जन्म प्रमाण पत्र की मूल प्रति प्रस्तुत की गई।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को निर्देश दिया कि वे याचिका में मौजूद त्रुटियों को दूर करें और दस्तावेजों की स्पष्ट एवं प्रमाणित प्रतियां रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। अदालत ने इसके लिए 10 दिन का समय प्रदान किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी, जहां संशोधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।

  • भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश

    भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश


    मध्य प्रदेश/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनसे मामले की जांच और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया है कि 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पक्षों को वीडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी जाए, ताकि वे अपने तर्क और दावे इन साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत कर सकें।

    इस मामले में भोजशाला परिसर के अधिकार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है और अदालत में इस विषय पर नियमित सुनवाई हो रही है। याचिका मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिस पर डबल बेंच में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने कानूनी तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न न्यायिक निर्णयों और पूर्व मामलों का उल्लेख भी शामिल है।

    सुनवाई के दौरान कानूनी बहस मुख्य रूप से टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की वैधता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत दलीलों में यह कहा गया कि एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायालयों द्वारा कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें इस मामले में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान कुछ पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई खुदाई और रिकॉर्डिंग में कुछ अवशेषों को लेकर असमानता देखने को मिली है, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अदालत के समक्ष सभी पक्षों के दावों का सही मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

    दूसरी ओर, पक्षकारों का कहना है कि सर्वे के दौरान विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक अवशेषों को रिकॉर्ड किया गया है और इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने अपने दावों को मजबूत करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित दलीलें पेश कर रहे हैं।

    अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक संबंधित वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद मामले की आगे की सुनवाई में इन साक्ष्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। यह निर्णय मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट हो सकेगी।

  • MP: पाकिस्तानी पति-पति का पारिवारिक विवाद पहुंचा इंदौर HC, पत्नी ने लगाई पति को वापस भेजने की गुहार

    MP: पाकिस्तानी पति-पति का पारिवारिक विवाद पहुंचा इंदौर HC, पत्नी ने लगाई पति को वापस भेजने की गुहार


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में पारिवारिक विवाद का एक बेहद खास मामला सुनवाई के लिए आया है, जिसमें पति-पत्नी दोनों पाकिस्तान (Husband and Wife Pakistani) के रहने वाले हैं, हालांकि पति बीते कुछ सालों से भारत में रह रहा है। अब इस कपल ने पारिवारिक सुलह के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल इस हिंदू जोड़े की शादी साल 2020 में पाकिस्तान में हुई थी, और शादी के कुछ समय बाद से ही यह दोनों अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। इस दौरान सुलह-समझौते की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद दोनों के बीच विवाद का यह मुद्दा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। महिला ने पति पर आरोप लगाया है कि वह दूसरी शादी करने की तैयारी कर रहा है, वहीं पति का कहना है कि उसकी पत्नी उससे धन ऐंठने के लिए यह सब कर रही है।


    पत्नी का आरोप- पति करने जा रहा दूसरी शादी

    प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी महिला निकिता देवी (28) ने उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में रिट याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता निकिता पाकिस्तान के कराची शहर की रहने वाली है। उसने अपने पति विक्रम कुमार नागदेव (35) पर बिना तलाक दिए दूसरी शादी की तैयारी करने का आरोप लगाया है और अदालत से उसे भारत से वापस पाकिस्तान भेजने की गुहार लगाई है।


    लॉन्ग टर्म वीजा पर इंदौर में रह रहा पाकिस्तानी शख्स

    अधिकारियों के मुताबिक पति-पत्नी पाकिस्तान के नागरिक हैं और उनकी शादी 26 जनवरी 2020 को वहां के सिंध प्रांत में हुई थी। फिलहाल महिला का पति लंबी अवधि के वीजा (LTV) के आधार पर इंदौर में रह रहा है। पाकिस्तानी महिला ने याचिका में आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया है और वह भारत में रहने वाली एक महिला से मार्च 2026 में गैरकानूनी तौर पर दूसरी शादी की तैयारी कर रहा है।

    याचिकाकर्ता के वकील दिनेश रावत ने गुरुवार को बताया कि पाकिस्तान में अपने मायके में रह रही निकिता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की है जिस पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों के मामलों में अलग-अलग रिट (औपचारिक आदेश) जारी करने की शक्ति देता है।


    महिला की गुहार- पति उठा रहा बेजा फायदा

    पाकिस्तानी महिला के वकील ने बताया, ‘मेरी मुवक्किल ने याचिका में उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि कानूनी जटिलताओं का बेजा फायदा उठा रहे उनके पति को भारत में दूसरी शादी करने से रोका जाए और वापस पाकिस्तान भेज दिया जाए।’


    पति बोला- वह अपनी मर्जी से पाकिस्तान लौटी थी

    उधर, निकिता के पति ने अपनी पत्नी के आरोपों को खारिज किया है। नागदेव ने कहा, ‘पाकिस्तान में शादी के बाद हम भारत आ गए थे। इसके थोड़े समय बाद मेरी पत्नी अपनी मर्जी से पाकिस्तान लौट गई थी। वह भारत आने या आपसी सहमति से तलाक लेने को राजी नहीं हुई। मैंने अपने समुदाय की पंचायतों के जरिए भी पारिवारिक विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी।’


    शख्स ने कहा- अब पत्नी को तलाक देना चाहता हूं

    शख्स ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी पारिवारिक विवाद के बहाने उससे धन ऐंठने की कोशिश कर रही है। नागदेव का कहना है कि वह एलटीवी के आधार पर इंदौर में रह रहा है और तमाम भारतीय कानूनों का पालन कर रहा है। उसने कहा, ‘अब मैं अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता हूं। उसने मुझे देश-विदेश में बदनाम करके मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।’


    सिंधी पारिवारिक परामर्श केंद्र भी पहुंचा था मामला

    पाकिस्तानी दंपति का यह पारिवारिक विवाद उच्च न्यायालय से पहले, इंदौर के ‘सिंधी पंच मध्यस्थता एवं विधिक परामर्श केंद्र’ पहुंचा था, लेकिन वहां कोई समझौता नहीं हो सका। केंद्र के प्रमुख और सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने बताया, ‘मेरी कई कोशिशों के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौता नहीं हो सका। इसके बाद मैंने जिला प्रशासन के सामने पेश अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की कि नागदेव को वापस पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए क्योंकि वह और उसकी पत्नी दोनों पाकिस्तानी नागरिक हैं तथा उनके पारिवारिक विवाद का न्याय क्षेत्र पाकिस्तान है।’

    मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर में लंबी अवधि के वीजा (एलटीवी) या रेजिडेंशियल परमिट के आधार पर सिंधी हिंदू समुदाय के उन शरणार्थियों की बड़ी आबादी रहती है जो कथित प्रताड़ना के चलते पाकिस्तान से पलायन कर भारत आए हैं।