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  • इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी नेता हिरासत में, जांच तेज

    इंदौर हनी ट्रैप केस में बड़ा खुलासा: बीजेपी नेता हिरासत में, जांच तेज


    नई दिल्ली। इंदौर का चर्चित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामला लगातार नए खुलासों के साथ और गहराता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल केस में अब पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी के रूप में सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह आरोपी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी मानी जा रही है और वह बीजेपी के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी रह चुकी है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    इससे पहले पुलिस ने इस केस में मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। अब जांच का फोकस इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल सबूतों पर है, जहां पुलिस मोबाइल फोन से वीडियो, ऑडियो और अन्य फाइलें रिकवर करने में जुटी हुई है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रेशू, अलका और श्वेता मिलकर एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क चला रही थीं, जिसका मकसद प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलना था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी टारगेट किया था और उनके खिलाफ भी कथित रूप से ब्लैकमेलिंग की कोशिश की गई थी।

    इस पूरे मामले की शुरुआत जेल से जुड़ी दोस्ती से होने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की मुलाकात जेल में हुई थी, जहां से इस कथित हनी ट्रैप नेटवर्क की नींव रखी गई। बाद में कोर्ट पेशी के दौरान भी संपर्क बढ़ता गया और रेशू को इस नेटवर्क में शामिल किया गया।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी पक्ष ने कई नेताओं, प्रॉपर्टी कारोबारियों, फाइनेंसरों और अधिकारियों को फंसाने की रणनीति बनाई थी। कथित तौर पर इन लोगों के निजी वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस अब इसी डिजिटल सामग्री को रिकवर करने में जुटी है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।

    इसी बीच मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने पुलिस पूछताछ में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। बताया जा रहा है कि उसने यह भी स्वीकार किया है कि नेटवर्क के भीतर कई स्तर पर योजनाएं बनाई जाती थीं और कुछ मामलों में बड़े प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की तैयारी थी।

    पुलिस क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं है बल्कि एक संगठित अपराध नेटवर्क की तरह काम कर रहा था, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि इसमें जुड़े कुछ नाम और संबंध इसे और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर सच्चाई सामने लाना और सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित करना है।

  • इंदौर में फिर सुर्खियों में हनी ट्रैप केस: शराब कारोबारी को फंसाने का आरोप

    इंदौर में फिर सुर्खियों में हनी ट्रैप केस: शराब कारोबारी को फंसाने का आरोप


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बार फिर हनी ट्रैप गैंग का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने शहर में सनसनी फैला दी है। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में एक शराब कारोबारी को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की मांग करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। इस पूरे मामले में 2019 के चर्चित हनी ट्रैप केस से जुड़ी आरोपी श्वेता विजय जैन की भी गिरफ्तारी ने जांच को और गंभीर बना दिया है।

    पुलिस के अनुसार, इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र के रहने वाले शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें एक महिला और उसके साथियों द्वारा पहले जान-पहचान बढ़ाकर फंसाया गया और फिर निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई।

    जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह की मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है, जो पहले से ही कई आपराधिक मामलों में शामिल रही है और अवैध शराब व ड्रग नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही है। अलका ने कारोबारी को प्रॉपर्टी डीलिंग और पार्टनरशिप के बहाने जाल में फंसाया था, जिसके बाद दबाव बनाकर पैसे और हिस्सेदारी की मांग शुरू हो गई।

    गिरोह में शामिल अलका के बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और अन्य साथियों ने कथित रूप से कारोबारी पर हमला भी किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में एक पुलिसकर्मी का नाम सामने आया।

    इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा पर आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा था और पीड़ित के निजी वीडियो व फोटो साझा करने में भूमिका निभा रहा था। उसके मोबाइल और चैट रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।

    क्राइम ब्रांच ने गुप्त ऑपरेशन चलाकर एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी और अलका, जयदीप, लाखन चौधरी समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, भोपाल से श्वेता जैन को भी हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया, जिससे पुराने हनी ट्रैप नेटवर्क की कड़ियां फिर से खुलने की आशंका जताई जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो लंबे समय से हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जरिए लोगों से वसूली कर रहा था। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।

    इस पूरे मामले ने न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।