Tag: Indore land dispute

  • 64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपए की संपत्तियों को लेकर जांच के घेरे में आए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान का नाम अब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से भी जुड़ गया है। इंदौर उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव में स्थित इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में दर्ज हैं। जमीन को लेकर एक परिवार ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के अस्पताल की आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। अब परिवार ने रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत का रुख किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

    दस्तावेजों के मुताबिक मगरखेड़ा गांव में कस्तूरी बाई के नाम दर्ज करीब 11.403 हेक्टेयर यानी 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम की गई थी। दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन करीब 8.97 करोड़ रुपए और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। कस्तूरी बाई के पोते दीपक शर्मा का कहना है कि यह परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। परिवार के मुताबिक कस्तूरी बाई की तबीयत खराब होने पर उन्हें रतलाम से इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि वृद्धा के आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कस्तूरी बाई की अस्पताल में मौत हो गई।

    इस जमीन की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि इंदौर उज्जैन रोड पर स्थित जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है। वहीं 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से इस जमीन का मूल्य करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए बैठता है। स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने के कारण जमीन की बाजार कीमत सरकारी गाइडलाइन से कई गुना अधिक हो सकती है। हालांकि 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा परिवार और स्थानीय जानकारों का अनुमान है।

    रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज है। दस्तावेजों के पेज 12 और 25 पर उनका नाम पता फोटो और हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इस सौदे को लेकर एक और कारोबारी संबंध चर्चा में है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर बताई गई हैं। कंपनी का नाम लोकायुक्त की जांच में जमीनों की खरीद फरोख्त के मामलों में सामने आया है। इन संबंधों के कारण सौदे में फिरोज खान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनकी भूमिका और किसी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    जमीन के नामांतरण को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया है। परिवार की अपील के बाद एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि नामांतरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। इनमें सिविल कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने और जमीन नहीं बेचने के अंतरिम आदेश के बाद नामांतरण किया जाना तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना शामिल है। हालांकि नामांतरण निरस्त होने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी कारण परिवार ने अब सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है।

    लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रही है। जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मगरखेड़ा की जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फिरोज खान और उनसे जुड़ी कंपनियों की इस सौदे में क्या भूमिका रही। दूसरी ओर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार ने कहा कि वह कस्तूरी बाई के कानूनी सलाहकार थे। उन्होंने दावा किया कि कस्तूरी बाई अपनी जमीन परिवार को नहीं देना चाहती थीं। अब इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही विवादित रजिस्ट्री की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • इंदौर जमीन केस: सूरज रजक का आरोप, रेमन का परिवार एकतरफा FIR कराने में शामिल

    इंदौर जमीन केस: सूरज रजक का आरोप, रेमन का परिवार एकतरफा FIR कराने में शामिल

    इंदौर। शहर में एक विवाद ने नया मोड़ लिया है जहां कारोबारी और क्रिकेट टीम मालिक सूरज रजक ने रेमन कक्कर और उनके परिवार पर जमीन को लेकर FIR दर्ज कराने के आरोपों का जवाब दिया है। सूरज रजक का कहना है कि उक्त जमीन के सौदे में परिवार ने उन्हें 50 लाख रुपये सालाना किराए पर देने की सहमति दी थी और उनके दोनों भाई उनकी मां और पत्नी भी इस डील के गवाह थे। सूरज ने कहा कि एफआईआर करने से पहले मेरा पक्ष नहीं सुना गया और यह एकतरफा एफआईआर दर्ज की गई।

    सूरज रजक ने बताया कि जमीन पर कब्जे का आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि यह पूरा परिवार पहले भी जमीन के विवादों में शामिल रहा है और कई मामलों में पैसे हड़पने के आरोपों पर कोर्ट में केस चल रहे हैं। सूरज के अनुसार परिवार ने पहले किसी और के साथ जमीन का सौदा किया और उसके पैसे हड़प लिए। उन्होंने कहा कि जमीन पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं था बल्कि परिवार की सहमति से काम शुरू किया गया।

    सूरज ने दैनिक भास्कर को चैटिंग और बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेमन के भाई रणधीर सलूजा ने खुद उन्हें जमीन दिखाने के लिए ले जाया। जमीन देखने के बाद उन्होंने नक्शा बनाने के लिए कहा। नक्शा तैयार होने के बाद सूरज ने इसे परिवार को भेजा और काम शुरू किया। तभी अचानक रेमन कक्कर ने एफआईआर दर्ज करवा दी जो उनके परिवार के आपसी विवाद का हिस्सा है।

    सूरज ने कहा कि रेमन के पति ने भी उनसे कहा कि बंटी सलूजा से बात कर लें। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने रेमन की मां से मुलाकात की तो उन्होंने जमीन बेचने की इच्छा जाहिर की। सूरज ने आरोप लगाया कि रेमन मानसिक रूप से अस्थिर हैं और उनका परिवार पहले भी कई लोगों से करोड़ों रुपए हड़प चुका है। उन्होंने कहा कि आज भी उक्त जमीन पर नगर निगम का कुर्की बोर्ड लगा हुआ है।

    सूरज ने आगे बताया कि FIR की जानकारी उन्हें रात को मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना है कि पुलिस को FIR दर्ज करने से पहले उनका पक्ष लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पता होता कि रेमन की सहमति नहीं है तो वे जमीन पर काम ही नहीं करते।

    इस मामले में रेमन के भाई रणधीर सलूजा और उनका परिवार सूरज रजक के आरोपों को खारिज कर रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी कोई सहमति नहीं दी और उनका कोई संपर्क नहीं था। परिवार का कहना है कि यह पूरी कहानी झूठ पर आधारित है और FIR करने का निर्णय कानूनी रूप से सही था।

    यह विवाद इंदौर में जमीन के सौदों परिवारिक मतभेद और सरकारी जमीन के मसलों को लेकर उत्पन्न हुआ है। सूरज रजक का दावा है कि उनके खिलाफ आरोप झूठे हैं और परिवार ने उन्हें जमीन के उपयोग की अनुमति दी थी। वहीं रेमन और उनका परिवार इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्णय से ही सच्चाई सामने आएगी।