Tag: Indore Lokayukta Raid

  • हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला

    हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला


    इंदौर । मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में हेड कॉन्स्टेबल के पास करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का अनुमान सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार यह संपत्ति उनकी आंकी गई आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल टीम बैंक खातों निवेश संपत्तियों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    फिरोज खान वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में ड्राइवर के पद पर पदस्थ हैं। इससे पहले वह देवास के औद्योगिक थाने और बागली में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी करीब 20 साल की सरकारी सेवा बताई जा रही है। लोकायुक्त के मुताबिक वेतन के रूप में उनकी आय करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर कुल आय लगभग 1.93 करोड़ रुपये मानी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में 6.26 करोड़ रुपये की संपत्ति का अनुमान सामने आने के बाद मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

    प्रारंभिक जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म होने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के अनुसार इस फर्म के खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। वहीं उनकी परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से फर्म संचालित किए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में कथित भूमिका सामने आने के बाद रोशनी वर्मा को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश किए जाने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।

    जांच में इंदौर जिले की सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़े सौदे का मामला भी सामने आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे और उसके पिता के बीच विवाद बताया गया है। आरोप है कि इस विवाद का फायदा उठाकर फिरोज खान ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर शिकायतकर्ता के पिता से कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवाया। लोकायुक्त की टीम इस सौदे से संबंधित दस्तावेजों और भूमिका की पड़ताल कर रही है।

    कार्रवाई के दौरान देवास में 11 और इंदौर में चार ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। इनमें मकान फ्लैट कृषि भूमि प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। देवास के आदर्श नगर सहित कई कॉलोनियों में संपत्तियों की जांच की जा रही है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रोशनी वर्मा के निवास के अलावा स्कीम नंबर 94 के मनोरमा अपार्टमेंट और श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट स्थित फ्लैट भी जांच के दायरे में हैं। स्कीम नंबर 94 स्थित बड़े बंगले के निचले हिस्से को किराए पर दिए जाने और उससे आय मिलने की जानकारी भी जांच में शामिल है। वीआईपी नंबर 9000 वाली स्कॉर्पियो की भी पड़ताल की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम बैंक खातों फर्मों के वित्तीय लेन-देन निवेश और संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार तलाशी पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और शुरुआती आंकड़ों के आधार पर संपत्ति तथा आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।

  • पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर लोकायुक्त ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर लोकायुक्त की करीब 20 सदस्यीय टीम ने सुबह लगभग 6 बजे उनके घर और उनकी पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज हॉस्टल समेत दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की वैध आय और सामने आई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होने की बात कही गई है।

    लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। उनके पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये वेतन के रूप में मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ प्रारंभिक जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 1.73 करोड़ रुपये का अंतर है। प्रारंभिक गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि अभी यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। दस्तावेजों और संपत्तियों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त की टीम ने पांडेय की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान और निरीक्षक आशुतोष मिठास तथा सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच का मुख्य फोकस अधिकारी की आय के स्रोत और उनके परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों के बीच तालमेल पर है।

    प्रारंभिक जांच में पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम दो इमारतें सामने आने की बात कही गई है। पहली इमारत आनंद नगर एक्सटेंशन में बताई गई है। नवलखा-चितावद क्षेत्र में 40×50 फीट के प्लॉट पर इस भवन का निर्माण हुआ है। यह G+3 इमारत है और इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगा रही है कि इस संपत्ति के निर्माण और खरीद के लिए रकम का स्रोत क्या था।

    दूसरी इमारत गजाधर नगर चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम बताई गई है। यह G+2 बिल्डिंग है और इसमें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। दोनों संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके निर्माण की लागत और मौजूदा मूल्य का भी सत्यापन किया जा रहा है।

    लोकायुक्त की जांच में पांडेय के परिवार के नाम कई वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी बेटे और बेटी के नाम चार पहिया और दोपहिया वाहन होने की बात कही गई है। इन वाहनों पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक आकलन है। अब जांच एजेंसी यह देख रही है कि इन संपत्तियों और वाहनों की खरीद के लिए इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या रहा।

    अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति का अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा। यानी फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक माना जा रहा है और जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का कुल मूल्य बढ़ या घट सकता है।

    इंदौर की इस कार्रवाई के बीच जबलपुर लोकायुक्त की एक अन्य कार्रवाई भी चर्चा में है। सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित पांच ठिकानों पर छापे में करोड़ों रुपये की जमीन प्लॉट फार्महाउस और मकानों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।