Tag: Indore Municipal Corporation

  • इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग

    इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग


    मध्यप्रदेश । इंदौर में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल, पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क निर्माण में बाधक बताए जा रहे मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 से अधिक मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि कुल करीब 85 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे।

    नगर निगम के रिमूवल विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है तथा प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे।

    हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्षों पुराने उनके मकानों को बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किया जा रहा है। प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई प्लॉट या फ्लैट दिया गया और न ही पर्याप्त मुआवजे की जानकारी दी गई।

    65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने दावा किया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में रह रहा था। उनका कहना है कि उनका जन्म भी इसी मकान में हुआ और अब जीवन के इस पड़ाव पर उनका आशियाना टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई सदस्य एक ही मकान में रहते थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचा है।

    कुछ अन्य प्रभावित लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। 47 वर्षीय राजकुमारी मिश्रा ने दावा किया कि वह और उनके पति निराश्रित हैं तथा उनके कोई संतान भी नहीं है। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया और अब बची हुई जगह में रहना भी मुश्किल हो गया है।

    रहवासियों का यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन खाली होने के बावजूद केवल आवासीय मकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और कई स्थानों पर मुनादी भी कराई गई थी। इसी कारण कुछ लोगों ने अपने निर्माणों के हिस्से स्वयं भी हटा लिए थे। निगम का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने मकानों को टूटते हुए देखते रहे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से को तोड़ा गया है, जबकि कुछ रहवासियों का कहना था कि उनके मकान के सामने पहले से पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़क मौजूद थी, फिर भी उनका निर्माण हटाया गया।

    फिलहाल सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवारों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और मुआवजे की मांग उठाते हुए प्रशासन से राहत देने की अपील की है।

  • छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते

    छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। कुछ दिन पहले तक जहां क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगाए गए पोस्टर चर्चा का केंद्र बने हुए थे, वहीं अब उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत छावनी और जिंसी क्षेत्र की सड़कों को 60 फीट चौड़ा करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस दौरान कई मकानों और दुकानों के हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए थे कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया तथा कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़े गए। इन आरोपों के चलते क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया था।

    कार्रवाई के बाद कई मकानों और दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए संदेश लिखे गए थे। कुछ पोस्टरों में भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई अन्य क्षेत्रों में होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जैसे संदेश भी दिए गए थे। इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं।

    अब उसी क्षेत्र में नए पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। पोस्टरों में मधुमिलन चौराहे से छावनी तक सड़क को 60 फीट चौड़ा किए जाने को व्यापारियों और रहवासियों के हित में बताया गया है। जानकारी के अनुसार ये पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता पलक जैन की ओर से लगाए गए हैं।

    सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान एक हादसा भी चर्चा में रहा था। 22 मई को निगम की कार्रवाई के बीच बिजली का एक पोल गिर गया था, जिससे एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल डॉक्टर की सर्जरी भी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे थे।

    इसके अलावा कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले मकानों पर लगाए गए निशानों में बदलाव किया गया, जिसके कारण कुछ भवनों को अपेक्षा से अधिक नुकसान पहुंचा। वहीं निगम कर्मचारियों पर बदसलूकी और दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई थी।

    सड़क चौड़ीकरण के विरोध में जनहित पार्टी ने क्षेत्र में ‘न्याय रैली’ भी निकाली थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और उचित राहत नहीं दी गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए थे तथा राहत और मुआवजे की मांग की थी।

    फिलहाल छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नए पोस्टरों के सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है और स्थानीय स्तर पर इसकी राजनीतिक एवं सामाजिक गूंज लगातार बनी हुई है।

  • इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी

    इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी


    नई दिल्ली| इंदौर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की किल्लत ने एक बार फिर हालात बिगाड़ दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच वार्ड 75 से एक अनोखी और गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां पार्षद ने खुद ही महापौर और नगर निगम कमिश्नर से पानी की मांग कर दी है।
    वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम महापौर Pushyamitra Bhargav और निगम कमिश्नर Kshitij Singhal को पत्र लिखकर 10 पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वार्ड का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, जहां नर्मदा जल आपूर्ति ठीक से नहीं पहुंच पा रही है।
    पार्षद के मुताबिक, स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में बोरिंग भी सूखने लगे हैं, जिससे लोगों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि गर्मी के चलते पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई बेहद सीमित है।
    हालांकि, प्रशासन की ओर से समय पर टैंकर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण पार्षद ने खुद ही कुछ अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन वह भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि यह व्यवस्था केवल आंशिक राहत दे पा रही है, जबकि समस्या व्यापक है।
    पार्षद कुणाल सोलंकी ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे वार्ड के लोगों के साथ महापौर और नगर निगम कमिश्नर के घर जाकर पानी की मांग करेंगे। इस बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस बार भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं और लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
    अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या को कितनी जल्दी हल करता है या फिर इंदौर के इस वार्ड में पानी संकट और गहराता है।

  • इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

    इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।

    सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

    दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं।

    हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है?

    उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें?

    मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।

    कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।


    माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारे

    भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।


    हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारित

    सभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

  • एमपी विधानसभा में गूंजा भागीरथपुरा का मुद्दा, दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस ने किया सांकेतिक प्रदर्शन

    एमपी विधानसभा में गूंजा भागीरथपुरा का मुद्दा, दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस ने किया सांकेतिक प्रदर्शन


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

    विधानसभा परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस विधायकों ने गंदे पानी से भरी बोतलें और नारे लिखी तख्तियां हाथ में लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। सिंघार ने मांग की कि जिम्मेदार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा दें और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रदेशवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में जनता को दूषित और मलयुक्त पानी मिलना गंभीर चिंता का विषय है। राज्यपाल के अभिभाषण में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जनता की आवाज उठाते हुए सदन में प्रस्ताव रखा है और सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इस विषय पर गंभीर चर्चा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि हर नागरिक तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, क्योंकि हर व्यक्ति महंगा आरओ पानी खरीदने में सक्षम नहीं है। स्वच्छ पानी जनता का बुनियादी अधिकार है।

    सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बावजूद सरकार विधानसभा में चर्चा से बच रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा।

  • पॉवर गॉसिप: शिवालय में गुप्त पूजा से इंदौर नगर में फेरबदल तक, अफसरशाही के हलकों में हलचल

    पॉवर गॉसिप: शिवालय में गुप्त पूजा से इंदौर नगर में फेरबदल तक, अफसरशाही के हलकों में हलचल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश  की प्रशासनिक और नगरीय सत्ता के गलियारों में इन दिनों चर्चा का एक नया माहौल बन रहा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जहां पूरे प्रदेश में भोलेनाथ की भक्ति और साधना का दौर जारी है, वहीं सत्ता गलियारों में भी ‘गुप्त पूजा’ और अफसरशाही की हलचल सुर्खियों में है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के एक बड़े अफसर ने शिवालय में गुप्त अनुष्ठान आयोजित किया है, जो महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। यह साधना आठ घंटे तक चलेगी और अफसर को उम्मीद है कि पूजा सिद्ध होने के बाद उनका डेढ़ साल से अटका हुआ नर्मदा क्षेत्र का प्रोजेक्ट पूरी तरह से पूरा हो जाएगा। प्रशासनिक हलकों में इसे महाशिवरात्रि के दिन शक्ति और करिश्मा दोनों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    इसी बीच आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम के प्रमुख पदों पर फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। कुछ समय पहले गंदे पानी के मुद्दे के चलते नगर निगम के कई पदों में बदलाव हुए थे, लेकिन अब नए संकेत मिलने लगे हैं कि बजट सत्र समाप्त होते ही शीर्ष पदों पर नए चेहरों की ताजपोशी की जाएगी। अफसरशाही के इन फेरबदल के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों का गहरा प्रभाव माना जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी और कर्मचारी इस बदलाव की संभावित दिशा पर निगाह लगाए हुए हैं।

    प्रदेश के प्रमुख नगर निगम क्षेत्र में तैनात कार्यपालिक मजिस्ट्रेट भी इन दिनों चर्चाओं में हैं। अफसरशाही में प्रोटोकॉल का पालन हर अधिकारी करता है, लेकिन इस मामले में साहब का अंदाज अलग बताया जा रहा है। अपने पद के प्रभाव को दिखाने के लिए उन्होंने निजी वाहन पर भी बड़े अक्षरों में ‘कार्यपालिक मजिस्ट्रेट’ लिखवाया है। इसके अलावा बच्चों के स्कूल, मेमसाहब की किटी पार्टी या अन्य सामाजिक आयोजनों में भी उनके पद और प्रभाव की झलक दिखाई देती है। प्रशासनिक हलकों में इसे अपने अधिकार और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन माना जा रहा है।

    वहीं, पदोन्नति के लिए प्रयासरत कलेक्टर भी चर्चा में हैं। आम तौर पर पदोन्नति की चाह रखने वाले अधिकारी नए-नए नवाचार और काम के जरिए अपनी छवि मजबूत करते हैं, लेकिन महाराज के प्रभाव वाले जिले में पदस्थ कलेक्टर अपने काम को सीमित रखते हैं। वे उतना ही काम करते हैं जितना उन्हें स्पष्ट रूप से कहा जाए। माना जा रहा है कि कलेक्टर इस रणनीति के जरिए पदोन्नति के बाद कमिश्नर बनने की राह आसान करना चाहते हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच यह रणनीति अफसरशाही की परंपराओं और महत्वाकांक्षा का एक दिलचस्प उदाहरण है।

    कुल मिलाकर महाशिवरात्रि की आध्यात्मिकता और अफसरशाही की रणनीति एक साथ चल रही है। गुप्त पूजा से लेकर नगर निगम में संभावित फेरबदल और पदोन्नति की चाल तक, प्रशासनिक गलियारों में हलचल और उत्सुकता लगातार बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना रोचक होगा कि कौन-सी साधना और कौन-सा रणनीतिक कदम प्रशासनिक समीकरण बदलता है।

  • इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में

    इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में


    इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार रात बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की मौत के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 32 हो गई है। अनिता पिछले एक महीने से वेंटिलेटर पर थीं और उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    एक महीने तक चला संघर्ष, फेल हुई किडनी अनिता के बेटे नीलेश ने बताया कि उनकी मां को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को दूषित पानी के कारण उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हुए। भाग्यश्री अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अरबिंदो और फिर बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। संक्रमण इतना घातक था कि उनकी किडनी फेल हो गई और उन्हें कार्डियक अरेस्ट दिल का दौरा भी आया। लंबे समय तक डायलिसिस और वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

    450 मरीज ठीक हुए, पर खतरा अभी टला नहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, अब तक 450 से ज्यादा लोग इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। हालांकि, अभी भी तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 2 की हालत अत्यंत नाजुक है और वे आईसीयू में जीवन रक्षक प्रणालियों पर हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे खुला रखा है और दो एम्बुलेंस तैनात की हैं।

    निगम के दावों पर अविश्वास: 30% हिस्से में ही सप्लाई नगर निगम का दावा है कि अब पानी साफ आ रहा है और पाइप लाइन के लीकेज दुरुस्त कर लिए गए हैं, लेकिन क्षेत्र के निवासी अभी भी डरे हुए हैं। वर्तमान में केवल 30% हिस्से में ही पानी की सप्लाई की जा रही है। लोग निगम के पानी के बजाय आरओ और टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं। 70% हिस्से में अभी भी नई पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है, जिसके बाद लीकेज टेस्टिंग और सैंपल जांच की जाएगी। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनके परिवार में पति, एक बेटा और दो बेटियां हैं। यह घटना इंदौर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

  • इंदौर में मौत का तांडव: दूषित पानी ने ली 26वीं जान, भागीरथपुरा में हाहाकार

    इंदौर में मौत का तांडव: दूषित पानी ने ली 26वीं जान, भागीरथपुरा में हाहाकार


    इंदौर। स्वच्छता में देश का सिरमौर रहने वाला इंदौर शहर इन दिनों एक भीषण जल-त्रासदी के दौर से गुजर रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को इस जानलेवा जल संकट ने एक और बुजुर्ग की बलि ले ली, जिससे क्षेत्र में अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 26 हो गया है। प्रशासन की तमाम कोशिशों और दावों के बीच लगातार हो रही ये मौतें अब शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

    ताजा मामला 63 वर्षीय बद्री प्रसाद का है, जो पिछले कई दिनों से मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दूषित पानी के कारण उन्हें गंभीर उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके बाद 17 जनवरी को उन्हें अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बद्री प्रसाद पहले से ही टीबी की बीमारी से जूझ रहे थे और दूषित पानी के संक्रमण ने उनके शरीर को इतना कमजोर कर दिया कि शुक्रवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही भागीरथपुरा क्षेत्र में मातम के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ आक्रोश और गहरा गया है।

    क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल अरविंदो अस्पताल में 10 और मरीज भर्ती हैं, जो दूषित पानी के दुष्प्रभाव से जूझ रहे हैं। इनमें से एक मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है, जिसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि भर्ती मरीजों में से 8 ऐसे हैं जो पहले से ही किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, जिससे उन पर संक्रमण का असर अधिक घातक साबित हो रहा है।

    लगातार हो रही इन मौतों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी बेकाबू नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जल निकासी और पाइपलाइनों में लीकेज की समस्या को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। भागीरथपुरा की गलियों में अब भी डर का साया है और लोग नल से आने वाले पानी की हर बूंद को संदेह की नजर से देख रहे हैं।

  • दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित

    दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित


     इंदौर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ आम नागरिकों की जान ली, बल्कि ‘देश के सबसे स्वच्छ शहर’ के रूप में पहचान बना चुके इंदौर की छवि को भी गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों की सिविल के साथ-साथ आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

    हाईकोर्ट में दूषित पेयजल से संबंधित पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि पीड़ित परिवारों को दिया गया मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसे बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब के साथ नई और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार की अनदेखी को अदालत ने गंभीर अपराध की श्रेणी में माना। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 110 मरीज फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 15 मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने होने के बावजूद ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।