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  • इंदौर में पानी की बर्बादी अब नहीं चलेगी, दो-तीन बार चेतावनी के बाद कटेगा चालान, जानें निगम की नई तैयारी

    इंदौर में पानी की बर्बादी अब नहीं चलेगी, दो-तीन बार चेतावनी के बाद कटेगा चालान, जानें निगम की नई तैयारी


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम ने जागरूकता के साथ सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब घरों में जरूरत से ज्यादा पानी बहाने और पीने योग्य पानी का अनावश्यक इस्तेमाल करने वालों को सावधान रहना होगा। नगर निगम की ओर से ऐसे लोगों को पहले दो से तीन बार समझाइश दी जाएगी। इसके बावजूद यदि पानी की बर्बादी जारी रहती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वीडियो बनाकर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सोमवार को शहर की अलग-अलग कॉलोनियों में पहुंचकर लोगों से पानी बचाने की अपील की और जरूरत के मुताबिक पानी इस्तेमाल करने की सलाह दी।

    महापौर पार्श्वनाथ विनय नगर जैन कॉलोनी और लोकमान्य नगर सहित कई इलाकों में पहुंचे। यहां उन्होंने रहवासियों से बातचीत कर पानी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है और ऐसे समय में पानी की बर्बादी पूरे शहर के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। पानी की कमी का असर आखिरकार शहर के लोगों पर ही पड़ता है। इसलिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पानी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।

    पहले समझाइश फिर होगी चालानी कार्रवाई

    नगर निगम की योजना के मुताबिक पानी की बर्बादी करते पाए जाने वाले लोगों को शुरुआत में दो से तीन बार समझाया जाएगा। इसके लिए अभियान से जुड़ी एनजीओ की टीम को भी निर्देश दिए गए हैं। यदि बार-बार समझाने के बाद भी कोई व्यक्ति पानी व्यर्थ बहाता है तो उसकी गतिविधि का वीडियो बनाया जाएगा और नियमों के अनुसार चालान काटने की कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं बल्कि लोगों को पानी बचाने के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है। निगम चाहता है कि लोग कार्रवाई के डर से ही नहीं बल्कि पानी की अहमियत समझकर भी इसकी बर्बादी रोकें।

    आरओ के बचे हुए पानी को फेंकने से बचें

    महापौर ने घरों में इस्तेमाल होने वाले आरओ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को भी उपयोगी बनाने की सलाह दी। आमतौर पर कई घरों में आरओ से निकलने वाला पानी बिना इस्तेमाल किए नाली में बहा दिया जाता है। जबकि इस पानी का उपयोग कई दूसरे कामों में किया जा सकता है। इसे पौधों में डालने गाड़ी धोने और कपड़े धोने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि पानी की गुणवत्ता के अनुसार ही उसका उपयोग करना चाहिए। इस तरह पीने योग्य पानी को गैरजरूरी कामों में खर्च होने से बचाया जा सकता है।

    दीपावली तक होगी निगरानी

    नगर निगम ने इस अभियान को दीपावली तक नियमित रूप से चलाने की तैयारी की है। महापौर ने एनजीओ की टीम को अभियान का कार्यक्रम तैयार कर लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिन स्थानों पर हरी घास दिखाई दे रही है वहां भी दो-दो दिन की समय-सीमा तय कर घास की कटाई कराने को कहा गया है। अभियान के दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू पार्षद योगेश गेदर और निगम के जोनल अधिकारी भी मौजूद रहे।

    इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने की यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भविष्य में जल संकट से बचने के लिए पानी का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है। यदि नागरिक घरों में नल खुला छोड़ने से बचें आरओ के अतिरिक्त पानी का दोबारा उपयोग करें और जरूरत के अनुसार ही पानी खर्च करें तो काफी हद तक बर्बादी रोकी जा सकती है। अब देखना होगा कि जागरूकता और निगरानी का यह अभियान शहर में पानी बचाने की आदत को कितना मजबूत बना पाता है।

  • इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी

    इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी


    इंदौर । इंदौर में अक्टूबर का महीना खत्म होने से पहले ही जलसंकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर के कई प्रमुख तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और कुछ तालाब लगभग सूख चुके हैं। इसका असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवारों को निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कुछ लोग पानी के लिए हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि एक टैंकर के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।

    सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।

    क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।

    शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

    सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।

  • गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित

    गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित


    इंदौर । इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इस बार सामान्य से कम बारिश होने और कई ट्यूबवेल बंद होने के कारण आने वाले महीनों में जलापूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल 6040 ट्यूबवेल हैं जिनमें से 361 फिलहाल बंद पड़े हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या सामने आई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने नए जलस्रोत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
    शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसके साथ ही बंद पड़े ट्यूबवेल को दोबारा चालू करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की योजना के तहत पंपों की मरम्मत और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए 10 विशेष टीमें लगाने की तैयारी है। इससे उन क्षेत्रों में राहत मिल सकती है जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भरता अधिक है।
    जलसंकट की चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल कम बारिश होना है। इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश दर्ज की जाती है लेकिन इस बार लगभग 23 इंच बारिश ही हुई है। इस तरह सामान्य के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। कम बारिश का असर भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल खोदने से पहले संबंधित क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता का तकनीकी सर्वे करना जरूरी होगा। यदि किसी इलाके में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है तो वहां बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं होगी। इसलिए नए जलस्रोत विकसित करने के साथ वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान देना होगा।
    नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 टंकियों के जरिए रोजाना जलापूर्ति की जा रही है। बाकी 10 टंकियों से नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करने और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करने की आवश्यकता है। यदि इन क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो गर्मी के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए निगम ने टैंकर व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत 71 नए हाइड्रेंट स्थान चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा 12 मौजूदा समप और हाइड्रेंट स्थानों को आपातकालीन जल भराव केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। जरूरत के अनुसार नए समप विकसित करने और उन्हें ट्यूबवेल या पाइपलाइन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
    एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा के मुताबिक नगर निगम गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से बचने के लिए योजना बना रहा है। नए ट्यूबवेल खोदने और मौजूदा जलस्रोतों को दुरुस्त करने पर काम किया जाएगा ताकि लोगों को पानी की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के बीच केवल नए ट्यूबवेल खोदना ही पर्याप्त नहीं होगा। समय पर मरम्मत और जलापूर्ति की निगरानी के साथ पानी का संरक्षण भी जरूरी रहेगा। आने वाले महीनों में नगर निगम की तैयारियों और जलस्रोतों की स्थिति से तय होगा कि शहर के प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता कितनी बेहतर हो पाती है।

  • सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग

    सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण जलसंकट की आशंका अभी से गहराने लगी है। गर्मी का मौसम आने से पहले ही शहर के हजारों परिवारों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इंदौर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 85 हजार परिवारों की पानी संबंधी जरूरतें पूरी करने में परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम का यह सर्वे 14 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
    सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी अरंडिया निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में पानी की समस्या अधिक गंभीर बताई गई है। इन क्षेत्रों में करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा जल के कनेक्शन नहीं हैं। मायाखेड़ी और निपानिया में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों में गर्मी शुरू होने से पहले ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है। वार्ड नंबर 16 में भी करीब साढ़े सात हजार परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित बताए गए हैं।
    नगर निगम की रिपोर्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है जिनके क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को भी टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। सर्वे के अनुसार शहर में 33 हजार 37 परिवार इस श्रेणी में आते हैं। वार्ड नंबर 37 में करीब दो हजार परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 45 में 1800 परिवार वार्ड 51 में 1300 और वार्ड 28 में 1200 परिवारों को टैंकर से पानी देने की जरूरत बताई गई है। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जलापूर्ति की चुनौती केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां नर्मदा पाइपलाइन नहीं पहुंची है। कुछ इलाकों में नेटवर्क होने के बावजूद जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
    जलसंकट की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और टैंकरों में पानी भरने की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। महापौर ने यह भी बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को मांग भेजी गई है। इससे उन इलाकों में पानी की सप्लाई बेहतर करने की कोशिश की जा रही है जहां लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।
    इस बार इंदौर में कम बारिश को भी जलसंकट की आशंका की बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। इस स्थिति को देखते हुए महापौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।
    जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और टैंकर व्यवस्था मजबूत करने के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में बारिश की कमी और मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था के बीच इंदौर के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।

  • जल संकट के बीच इंदौर में लाखों लीटर पानी सड़क पर बहा, ट्रक की टक्कर से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त, टैंकरों से हो रही सप्लाई

    जल संकट के बीच इंदौर में लाखों लीटर पानी सड़क पर बहा, ट्रक की टक्कर से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त, टैंकरों से हो रही सप्लाई


    इंदौर । इंदौर में नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज होने से बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होने का मामला सामने आया है। शहर में जहां एक ओर जल संकट और पानी की जरूरत को लेकर चिंता बनी हुई है वहीं दूसरी ओर बायपास स्थित भंडारी रिसोर्ट के पास पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी सड़क पर बहने लगा। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान एक ट्रक के वॉल से टकराने के कारण पाइपलाइन में लीकेज हुआ। पानी का दबाव इतना अधिक था कि तेज धार सड़क से ऊपर उठकर पास के ब्रिज तक पहुंच गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और नगर निगम की टीम को मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचना पड़ा।

    नगर निगम के एमआईसी सदस्य के मुताबिक पाइपलाइन में लीकेज के कारण करीब तीन से चार एमएलडी पानी बर्बाद होने का अनुमान है। एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी की मात्रा मापने की इकाई है। इस अनुमान के अनुसार नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। हालांकि पानी की वास्तविक बर्बादी का आकलन संबंधित अधिकारियों की जांच और मरम्मत की स्थिति के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और सुधार कार्य शुरू कर दिया गया। टीम का प्रयास है कि लीकेज को जल्द से जल्द बंद कर जलापूर्ति व्यवस्था को सामान्य किया जा सके।

    इस घटना का असर शहर के करीब आठ क्षेत्रों की जलापूर्ति पर पड़ा है। पाइपलाइन में खराबी के चलते प्रभावित इलाकों में पानी कम दबाव और कम मात्रा में पहुंच रहा है। इससे स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं ताकि लोगों को पीने और अन्य जरूरी कामों के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक पाइपलाइन की मरम्मत पूरी होने के बाद जलापूर्ति को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल लोगों को नियमित आपूर्ति बहाल होने तक वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान ट्रक के वॉल से टकराने को पाइपलाइन में लीकेज की वजह बताया जा रहा है। इस घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान भूमिगत और मुख्य जल पाइपलाइनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में विकास कार्यों के साथ जरूरी सेवाओं से जुड़ी पाइपलाइनों की स्थिति और उनकी सुरक्षा पर ध्यान देना भी अहम है। यदि निर्माण स्थल पर पाइपलाइन की सही पहचान और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों तो इस तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस मामले में जिम्मेदारी और घटना की परिस्थितियों से जुड़ी पूरी जानकारी संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    जल संकट के बीच पानी की इतनी बड़ी मात्रा के बर्बाद होने की आशंका ने जल संरक्षण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। नर्मदा का पानी इंदौर की जलापूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मुख्य पाइपलाइन में खराबी का असर कई इलाकों तक पहुंच सकता है। ऐसे में मरम्मत कार्य को समय पर पूरा करना और प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक जलापूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए अहम है। फिलहाल निगम की टीम लीकेज सुधारने में जुटी है और टैंकरों के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पाइपलाइन की मरम्मत कब तक पूरी होती है और आठ प्रभावित क्षेत्रों में पानी की नियमित आपूर्ति कब बहाल हो पाती है।

  • इंदौर में RE-2 सड़क का रास्ता साफ करने उतरा प्रशासन, 130 मकानों पर कार्रवाई से मचेगी हलचल, अब पूरी होगी अधूरी सड़क

    इंदौर में RE-2 सड़क का रास्ता साफ करने उतरा प्रशासन, 130 मकानों पर कार्रवाई से मचेगी हलचल, अब पूरी होगी अधूरी सड़क


    इंदौर । इंदौर में RE-2 रोड के अधूरे हिस्से का निर्माण पूरा करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। बंगाली चौराहा से पीपल्याहाना के बीच बनने वाली इस सड़क के रास्ते में बाधक मकानों को हटाया जा रहा है। गुरुवार सुबह से भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम कार्रवाई में जुटी हुई है। जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण में बाधा बन रहे शेष 130 मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। मौके पर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर और एसडीएम घनश्याम धनगर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। पिछले दिनों कार्रवाई के दौरान पथराव की घटना सामने आने के बाद इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनी रहे।

    RE-2 रोड इंदौर की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आवागमन को बेहतर बनाना और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है। सड़क निर्माण के लिए प्रशासन पहले भी कई चरणों में बाधक निर्माण हटाने की कार्रवाई कर चुका है। बिचौली कांकड़ शिव नगर और शिव दर्शन नगर क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया भी इस परियोजना से जुड़ी हुई है। अब सड़क के शेष हिस्से को निर्माण के लिए खाली कराने के उद्देश्य से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

    परियोजना के आंकड़ों के अनुसार RE-2 रोड की कुल लंबाई 4.25 किलोमीटर और चौड़ाई 45 मीटर है। इसमें से लगभग 3.20 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि करीब एक किलोमीटर हिस्सा बाधक निर्माण के कारण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इस परियोजना पर अब तक लगभग 55 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। शेष हिस्से का निर्माण पूरा होने के बाद सड़क को पूरी तरह उपयोग में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है।

    प्रशासन से पहले मिली जानकारी के अनुसार शिव नगर के 80 मकानों में 117 परिवार रहते हैं जबकि शिव दर्शन नगर के 55 मकानों में 72 परिवार निवासरत हैं। इन परिवारों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नीलगिरि परिसर में व्यवस्थापन किया जाना है। वहीं पीपल्याहाना और बिचौली कांकड़ क्षेत्र के कई परिवारों को पहले ही आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थापन की स्थिति और शेष परिवारों को मिलने वाली सुविधाएं भी अहम रहेंगी।

    RE-2 रोड का अधूरा हिस्सा पूरा होने से भूरी टेकरी पीपल्याहाना बंगाली चौराहा और नायता मुंडला आरटीओ क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल सड़क निर्माण में बाधक मकानों को हटाने की कार्रवाई जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद शहरवासियों को एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकता है जिससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। अब इस परियोजना की प्रगति और प्रभावित परिवारों के व्यवस्थापन पर नजर रहेगी।

  • इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल

    इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में सड़क धंसने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में मंगलवार को चैंबर के पास सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क की ऊपरी कांक्रीट परत टूटने के बाद जब मौके की जांच की गई तो उसके नीचे जमीन का बड़ा हिस्सा खोखला मिला। सड़क का एक स्लैब भी हवा में लटका हुआ दिखाई दिया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम के जनकार्य विभाग ने इंजीनियर को मौके पर भेजा और सड़क धंसने के कारणों की जांच शुरू कराई। खास बात यह है कि इसी जगह करीब एक साल पहले भी सड़क धंस चुकी है। ऐसे में दोबारा उसी स्थान पर सड़क बैठने से निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

    परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में सड़क के नीचे बने चैंबर के आसपास जमीन खोखली होने की जानकारी सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती तौर पर अधिकारियों को आशंका है कि पुराना ड्रेनेज चैंबर कमजोर होकर ढह गया होगा जिसके कारण सड़क के नीचे खाली जगह बनी और ऊपर का हिस्सा दबाव नहीं झेल सका। यहां ड्रेनेज लाइन पुरानी बताई जा रही है जबकि चैंबर का ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। हालांकि सड़क के नीचे इतना बड़ा खोखलापन किस वजह से बना यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले भी इसी स्थान पर सड़क धंस गई थी। उस समय चैंबर की मरम्मत कराने के बाद सड़क के नीचे मिट्टी का भराव किया गया था। अब एक बार फिर उसी जगह सड़क धंसने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछली मरम्मत के बाद समस्या पूरी तरह दूर क्यों नहीं हुई। क्या ड्रेनेज लाइन में लीकेज जारी रहा या फिर सड़क के नीचे मिट्टी का भराव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

    तकनीकी जानकारों के अनुसार पुरानी भूमिगत ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने पर पानी आसपास की मिट्टी को धीरे धीरे बहा सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर सड़क के नीचे खाली जगह बनती जाती है। ऊपर से सड़क पर लगातार वाहनों का दबाव पड़ता रहता है। जब जमीन का सहारा कमजोर हो जाता है तो कांक्रीट की परत टूटकर नीचे बैठ सकती है। इसी तरह किसी मरम्मत या निर्माण के बाद यदि मिट्टी का भराव ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो भी समय के साथ जमीन बैठने की समस्या सामने आ सकती है।

    परदेशीपुरा की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर में पिछले कुछ महीनों के दौरान सड़क धंसने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेघदूत गार्डन गोराकुंड गाड़ी अड्डा नासिया रोड और पंढरीनाथ क्षेत्र में भी सड़क धंसने के मामले सामने आए हैं। शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क चैंबर निर्माण कार्य और सड़क के नीचे किए जाने वाले भराव की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    फिलहाल नगर निगम की टीम मौके की स्थिति का परीक्षण कर रही है। सड़क के नीचे बने खोखले हिस्से की वजह स्पष्ट होने के बाद जरूरी सुधार कार्य किया जाएगा। लेकिन एक ही जगह पर एक साल के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली मरम्मत के दौरान समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल सतही सुधार किया गया था।

  • छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप

    छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप


    इंदौर। मास्टर प्लान के तहत रोड चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम की टीम शुक्रवार सुबह एक बार फिर छावनी क्षेत्र पहुंची। निगम के अमले ने छावनी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण में बाधक मकानों और प्रतिष्ठानों के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान मथुरावाला प्रतिष्ठान की पुरानी बिल्डिंग के बाधक हिस्से भी तोड़े गए। कार्रवाई के लिए नगर निगम की टीम तीन पोकलेन और दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

    सुबह निगम का अमला मशीनों के साथ छावनी चौराहे पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक पहले कुछ हिस्सों को मैन्युअल तरीके से हटाने का काम किया गया। इसके बाद भारी मशीनों की मदद से सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बनी रही। फिलहाल कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विवाद या विरोध की सूचना सामने नहीं आई है।

    नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर प्रखर सिंह के मुताबिक मास्टर प्लान में शामिल छावनी रोड के चौड़ीकरण के लिए जिन हिस्सों को हटाया जाना बाकी था उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मकानों के छज्जे और अन्य बाधक हिस्से हटाए गए हैं। निगम का कहना है कि पहले से लंबित कार्रवाई को पूरा करने के बाद रोड चौड़ीकरण के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।

    छावनी क्षेत्र में रोड चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम पहले भी कार्रवाई कर चुका है। मई में भी निगम का अमला क्षेत्र में पहुंचा था और सड़क के लिए जरूरी बाधक हिस्सों को हटाया गया था। इसके बाद रोड निर्माण और चौड़ीकरण से जुड़े काम को आगे बढ़ाया गया। उस समय कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से क्षेत्र में जन अधिकार यात्रा निकालकर कार्रवाई का विरोध किया गया था। अब कई महीने बाद निगम ने एक बार फिर लंबित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है।

    छावनी क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई के दौरान पहले हादसा भी हो चुका है। पिछली कार्रवाई के दौरान मशीन में बिजली के तार उलझ गए थे। तार हटाने के प्रयास में जेसीबी चालक ने जोर लगाया था जिसके बाद बिजली का खंभा उखड़कर नीचे गिर गया। हादसे में होम्योपैथिक डॉक्टर कपिल दीक्षित घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिजली लाइनों और मशीनों से जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी सावधानी जरूरी मानी गई थी।

    छावनी की खास बात यह है कि यहां कई मकान और प्रतिष्ठान सौ साल से भी अधिक पुराने बताए जाते हैं। पुराने निर्माण और घनी आबादी वाले इलाके में रोड चौड़ीकरण की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। शुक्रवार को जिन हिस्सों पर निगम ने कार्रवाई की उनमें मथुरावाला बिल्डिंग भी शामिल रही। यह पुरानी इमारत पांच मंजिला बताई जा रही है और इसमें बेसमेंट भी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके बाधक हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब छावनी रोड चौड़ीकरण के काम में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में शेष बाधक हिस्सों को हटाने और सड़क से जुड़े निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

  • 395 जगह ट्रैफिक में रोड़ा बनी छोटी-बड़ी बाधाएं: इंदौर में 66 अतिक्रमण हटेंगे, 16 पेड़ शिफ्ट होंगे और संकरे लेफ्ट टर्न होंगे चौड़े

    395 जगह ट्रैफिक में रोड़ा बनी छोटी-बड़ी बाधाएं: इंदौर में 66 अतिक्रमण हटेंगे, 16 पेड़ शिफ्ट होंगे और संकरे लेफ्ट टर्न होंगे चौड़े


    इंदौर । इंदौर शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने सड़कों पर मौजूद छोटी से लेकर बड़ी बाधाओं का सर्वे कराया है। निगम के 22 जोन में किए गए सर्वे के दौरान कुल 395 ऐसे स्थान सामने आए हैं जहां सड़क पर मौजूद अलग अलग रुकावटों के कारण वाहनों की रफ्तार प्रभावित हो रही है। इनमें बिजली के पोल और डीपी से लेकर ऊंचे नीचे चैंबर खराब सड़क अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग जैसी समस्याएं शामिल हैं। निगम ने इन स्थानों पर सुधार के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक 93 स्थानों पर काम शुरू हो चुका है जबकि 197 जगह मामूली सुधार कर यातायात व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।

    सर्वे में सामने आया है कि कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई कम होने या लेफ्ट टर्न संकरा होने के कारण वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। ऐसे स्थानों पर सड़क की संरचना में जरूरी बदलाव करने के साथ बिजली के पोल भी दूसरी जगह शिफ्ट किए जाएंगे। कुल 51 स्थानों पर बिजली के पोल हटाने या शिफ्ट करने की जरूरत बताई गई है। वहीं 66 जगह अस्थायी अतिक्रमण को यातायात में बाधा माना गया है। इन स्थानों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है। इसके अलावा 65 स्थानों पर सिविल वर्क किए जाने की जरूरत सामने आई है।

    निगम के सर्वे में पेड़ों को लेकर भी कई स्थान चिन्हित किए गए हैं। कुल 16 पेड़ों को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की जरूरत बताई गई है। अहिल्या नगर में सड़क के लिए बाधक दो पेड़ों को दूसरी जगह लगाया जाएगा। मदन मोहन मालवीय चौराहे की रोटरी में मौजूद पेड़ को भी शिफ्ट करने की योजना है। शिवाजी नगर रोड पर तुलजा भवानी मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास यातायात में बाधक पेड़ों को हटाया जाएगा। इसी तरह सुभाष मार्ग रामबाग क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई में बाधक पुराने पेड़ों को विस्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    मारुति नगर चौराहे पर संकरे लेफ्ट टर्न की समस्या सामने आई है। यहां लेफ्ट टर्न चौड़ा करने के साथ बिजली के पोल शिफ्ट किए जाएंगे। उज्जैन नाका पर भी तीन बिजली के पोल लेफ्ट टर्न को संकरा कर रहे हैं। यहां भी टर्न चौड़ा करने और पोल हटाने की योजना है। राजेंद्र नगर ब्रिज के पास एबी रोड की ओर जाने वाले लेफ्ट टर्न पर बिजली का पोल और ट्रैफिक बोर्ड बाधा बन रहे हैं। दोनों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।

    कुछ जगहों पर सड़क की स्थिति और ड्रेनेज से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं। मेघदूत गार्डन के पास ऊंचा ड्रेनेज चैंबर पानी की निकासी में परेशानी पैदा कर रहा है। यहां पेवर ब्लॉक हटाकर सड़क का लेवल सुधारा जाएगा। जवाहर मार्ग पर कुल्फी की दुकान के पास सड़क से नीचे धंसा चैंबर भी यातायात में बाधा बन रहा है। ऐसे स्थानों पर सड़क और चैंबर के स्तर को व्यवस्थित करने की जरूरत बताई गई है।

    पार्किंग भी कई इलाकों में जाम का कारण बन रही है। कलश चौराहे पर मिठाई की दुकान के पास सड़क किनारे वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित होता है। राखोड़ी धर्मशाला क्षेत्र में दो बैंक कार्यालय होने के कारण नियमित पार्किंग की समस्या है। सियागंज में सड़क पर ऑटो की पार्किंग को यातायात बाधा माना गया है जबकि रेलवे स्टेशन के बाहर भी ऑटो की बेतरतीब पार्किंग की समस्या सामने आई है। दोनों स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था तय करने की योजना है।

    द्वारकापुरी में फुटपाथ पर दुकानदारों के अतिक्रमण के कारण सड़क संकरी हो रही है। यहां फुटपाथ से अतिक्रमण हटाया जाएगा। गौरी नगर में होटल के पास बिजली का खंभा सड़क पर यातायात में बाधक है और इसे हटाने के लिए एमपीईबी को पत्र लिखा गया है। बाणगंगा जय हिंद नगर मेन रोड पर भी सड़क के अतिक्रमण को बाधा के रूप में चिन्हित किया गया है।

    निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक शहर में 395 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां सुधार होने से ट्रैफिक जाम की समस्या कम हो सकती है। अधिकारियों को इन स्थानों पर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। अब अलग अलग स्थानों पर अतिक्रमण हटाने पोल शिफ्ट करने सड़क सुधारने और पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने की कार्रवाई के जरिए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।

  • फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील

    फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील


    इंदौर । इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र अपोलो टावर पर नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी इमारत को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का सीधा असर टावर में संचालित 600 से अधिक दुकान और ऑफिस पर पड़ रहा है। नगर निगम की टीम के अचानक पहुंचते ही पूरे परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही दुकानदार और ऑफिस संचालक अपने सामान को सुरक्षित करने में जुट गए और कई लोगों ने निगम की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अपोलो टावर प्रबंधन को करीब तीन महीने पहले फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। भवन में सुरक्षा मानकों को लेकर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन तय समय सीमा के बाद भी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया। इसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और फायर सेफ्टी जैसी गंभीर व्यवस्था में लापरवाही भारी पड़ सकती है।

    अपोलो टावर इंदौर की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों में शामिल है और इसे शहर के शुरुआती बड़े व्यावसायिक परिसरों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें और कार्यालय संचालित होते हैं। ऐसे में एक साथ पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई होने से सैकड़ों कारोबारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। निगम की टीम के पहुंचने की खबर फैलते ही टावर में काम कर रहे लोगों और व्यापारियों के बीच हलचल तेज हो गई। कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने लगे जबकि कुछ लोग जरूरी सामान को सुरक्षित करने में जुटे दिखाई दिए।

    नगर निगम की इस कार्रवाई को शहर में फायर सेफ्टी नियमों को लेकर कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बड़े व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है और नोटिस मिलने के बावजूद यदि कमियों को दूर नहीं किया जाता है तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में अन्य व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की जा सकती है।

    अपोलो टावर पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर शहर की व्यावसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। आग लगने जैसी किसी आपात स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने से बड़े हादसे की आशंका रहती है। ऐसे में नगर निगम अब केवल नोटिस देकर कार्रवाई सीमित रखने के बजाय सीधे सख्त कदम उठाता दिखाई दे रहा है। फिलहाल अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकान और ऑफिस प्रभावित होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है जबकि निगम की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया जा सकता है।