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  • MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल

    MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल


    इंदौर । इंदौर में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पार्षद कमलेश कालरा ने जीतू यादव की मेयर इन काउंसिल यानी MIC में दोबारा नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को कालरा अपनी पत्नी अरुणा मां देवकी और बेटे के साथ राजबाड़ा पहुंचे और देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। हाथों में तख्तियां लेकर परिवार ने न्याय की मांग की। कालरा का कहना है कि जिस व्यक्ति पर उनके परिवार से जुड़े गंभीर मामले में आरोप लगे थे उसे दोबारा पार्टी में जगह देने के बाद MIC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

    दरअसल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर जीतू यादव को एक बार फिर MIC का सदस्य नियुक्त किया है। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। जीतू यादव की वापसी के साथ ही करीब डेढ़ साल पुराना कालरा और जीतू विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस विवाद के बाद भाजपा ने जीतू यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया था और उनकी MIC सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी। बाद में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी भाजपा में वापसी हुई और अब उन्हें MIC में भी दोबारा जिम्मेदारी मिल गई है।

    कमलेश कालरा का कहना है कि जनवरी 2025 में उनके घर पर हमला हुआ था और इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आए थे। कालरा ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके परिवार को डराया गया और उनके बच्चे के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने लगातार न्याय की मांग की है लेकिन अब जीतू यादव को पार्टी में वापस लाने के साथ ही MIC में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है।

    कालरा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी मामले में पुलिस ने चालान पेश किया है तो अंतिम निर्णय अदालत को करना होता है। उनका कहना है कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। अब वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर जीतू यादव को पार्टी में वापसी और MIC की जिम्मेदारी देने का फैसला किन आधारों पर किया गया।

    कालरा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत दुश्मनी के तौर पर नहीं है बल्कि वे इसे न्याय की लड़ाई मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। उनके मुताबिक यदि एक पक्ष की बात सुनी जा रही है तो पीड़ित पक्ष की शिकायतों और सवालों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

    राजबाड़ा पर परिवार के साथ धरने पर बैठने के बाद कालरा ने संकेत दिया कि उनका विरोध अभी खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बात पार्टी और सरकार के जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंचती तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वे प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की बात भी कह चुके हैं।

    जीतू यादव की MIC में वापसी के बाद शुरू हुआ यह नया विवाद इंदौर भाजपा की राजनीति में आने वाले दिनों में और हलचल पैदा कर सकता है। एक तरफ संगठन ने जीतू यादव को फिर से जिम्मेदारी दी है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही निर्वाचित पार्षद कमलेश कालरा खुले तौर पर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व कालरा के विरोध और उनकी न्याय की मांग पर क्या रुख अपनाता है।

  • इंदौर की राजनीति में जुबानी जंग चरम पर, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, अंदरूनी विवाद और नेतृत्व पर उठाए सवाल

    इंदौर की राजनीति में जुबानी जंग चरम पर, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, अंदरूनी विवाद और नेतृत्व पर उठाए सवाल


    इंदौर । इंदौर की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके शहर और प्रदेश नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक हो चुकी है और पार्टी का संगठन आंतरिक विवादों में उलझा हुआ है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं का व्यवहार राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और पार्टी का नेतृत्व अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते विवादों पर कार्रवाई करने में विफल रहा है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान सुमित मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच चल रहे विवाद अब शहरभर में चर्चा का विषय बन चुके हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बीच लगातार टकराव हो रहा है और कई बार वरिष्ठ नेताओं को बीच-बचाव तक करना पड़ रहा है। भाजपा नेता का कहना था कि कांग्रेस संगठन में अनुशासन की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

    उन्होंने शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका व्यवहार किसी जिम्मेदार राजनीतिक पदाधिकारी जैसा नहीं बल्कि गुंडा प्रवृत्ति वाले व्यक्ति जैसा दिखाई देता है। मिश्रा ने दावा किया कि कभी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ विवाद होता है तो कभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कांग्रेस की ओर से इन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    भाजपा नगर अध्यक्ष ने हाल ही में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के घर पर कथित रूप से हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां पार्टी नेताओं के बीच मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं हुईं। उनका कहना था कि मामला प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से जुड़ा होने के बावजूद पार्टी ने अब तक कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा क्यों नहीं कर पा रही है।

    सुमित मिश्रा ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश और शहर कांग्रेस में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है जिनकी वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है। इसी दौरान उन्होंने शहर कांग्रेस अध्यक्ष पर स्टेरॉयड लेने का आरोप भी लगाया और कहा कि इसी कारण उनका व्यवहार आक्रामक रहता है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

    भाजपा नेता के इन बयानों के बाद इंदौर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी गतिविधियों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी और अधिक तीखी हो सकती है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से भाजपा के इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।