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  • गरीबी नहीं तोड़ सकी हौसला ड्राइवरी कर पढ़ाई करने वाला छात्र बना आंदोलन की पहचान 26 दिन तक छात्रों के हक के लिए डटा रहा

    गरीबी नहीं तोड़ सकी हौसला ड्राइवरी कर पढ़ाई करने वाला छात्र बना आंदोलन की पहचान 26 दिन तक छात्रों के हक के लिए डटा रहा


    इंदौर । सपने पूरे करने के लिए संघर्ष करना हर युवा की मजबूरी होती है लेकिन कुछ लोग अपने सपनों के साथ दूसरों के भविष्य की लड़ाई भी लड़ते हैं। बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले ऐसी ही मिसाल बनकर सामने आए हैं। आर्थिक तंगी परिवार की जिम्मेदारियां और पढ़ाई के दबाव के बावजूद उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य के लिए आवाज उठाई। इंदौर में नीट पेपर लीक के विरोध में चले आंदोलन के दौरान अरुण 26 दिनों तक छात्रों के संघर्ष का चेहरा बने रहे और लगातार धरने पर डटे रहे।

    अरुण का परिवार आज भी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। उनकी मां प्रेमबाई खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करती हैं जबकि पिता मांगीलाल की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से काफी कमजोर हो चुकी है जिससे वे पहले की तरह काम नहीं कर पाते। परिवार में तीन बहनें हैं और घर की जिम्मेदारियां भी कम नहीं हैं। इन सबके बीच अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रहकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।

    अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए अरुण ड्राइवरी का काम भी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे तब अरुण ने तय किया कि वे भी इस लड़ाई का हिस्सा बनेंगे।

    30 जून को इंदौर में आंदोलन की शुरुआत हुई। शुरुआत आसान नहीं थी। पहले दस से बारह दिनों तक उनके साथ केवल चार पांच साथी ही मौजूद रहे। कई बार धरना स्थल लगभग खाली नजर आता था लेकिन अरुण और उनके साथियों का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने लगातार छात्रों से संवाद किया लोगों को आंदोलन का उद्देश्य समझाया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहे। धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के नागरिकों का समर्थन बढ़ने लगा और आंदोलन मजबूत होता गया।

    अरुण का कहना है कि वे स्वयं एक छात्र हैं और यदि वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है और इसके लिए संघर्ष करना जरूरी है। उनका मानना है कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची शिक्षा की पहचान है।

    26 दिनों तक लगातार चले इस आंदोलन ने अरुण को छात्रों के बीच एक नई पहचान दिलाई। हालांकि आंदोलन समाप्त हो चुका है लेकिन उनका संकल्प अब भी कायम है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में किसी भी परीक्षा या शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के साथ अन्याय होगा तो वे फिर मैदान में उतरेंगे और विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि इरादे मजबूत हों तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और आवाज बन सकता है। उनका संघर्ष केवल एक आंदोलन की कहानी नहीं बल्कि जिम्मेदारी साहस और बदलाव की सोच का प्रेरक उदाहरण है।

  • बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा

    बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा


    इंदौर इंदौर में बारिश के मौसम से पहले नगर निगम ने अतिक्रमण और जर्जर भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को निगम की टीम ने शहर के दो अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए एक ओर नगर निगम की बगीचे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया तो दूसरी ओर लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक जर्जर मकान के खतरनाक हिस्से को हटाया। दोनों स्थानों पर पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

    पहली कार्रवाई जोन क्रमांक 16 के छोटा बांगड़दा क्षेत्र में की गई। नगर निगम को शिकायत मिली थी कि उद्यान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया है। शिकायत की जांच के बाद निगम ने कार्रवाई का निर्णय लिया। मंगलवार सुबह नगर निगम की टीम जेसीबी मशीनों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण को हटाकर जमीन को कब्जामुक्त कराया।

    रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरिया ने बताया कि नगर निगम की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई और सरकारी जमीन को मुक्त कराया गया।

    इसके बाद नगर निगम का अमला छोटी ग्वालटोली इलाके में पहुंचा जहां एक मकान का ऊपरी हिस्सा काफी जर्जर हो चुका था। भवन की स्थिति को देखते हुए उसके गिरने का खतरा बना हुआ था जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा था। इसी कारण निगम ने एहतियात के तौर पर भवन के ऊपरी हिस्से में बने दो कमरों और छज्जे को हटाने की कार्रवाई की।

    अधिकारियों ने बताया कि इस स्थान पर मशीनों की बजाय मैन्युअल तरीके से तोड़फोड़ की गई ताकि आसपास की इमारतों और दुकानों को कोई नुकसान न पहुंचे। कार्रवाई शुरू करने से पहले सुरक्षा के मद्देनजर नीचे संचालित दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया गया।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार दोनों स्थानों पर कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई। निगम का कहना है कि मानसून के दौरान जर्जर भवनों के गिरने और अतिक्रमण से होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए शहरभर में लगातार सर्वे किया जा रहा है। जहां भी अवैध कब्जे या खतरनाक भवन चिन्हित किए जा रहे हैं वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई जर्जर भवन या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा दिखाई दे तो इसकी सूचना प्रशासन को दें ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर जनहानि और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।