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  • अमिताभ बच्चन का बड़ा खुलासा, शुरुआती दिनों में लंबाई के कारण मिलते थे ताने, सेट से निकाल दिया गया था

    अमिताभ बच्चन का बड़ा खुलासा, शुरुआती दिनों में लंबाई के कारण मिलते थे ताने, सेट से निकाल दिया गया था

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने शुरुआती करियर के दौरान झेले गए कड़े संघर्ष और रिजेक्शन के दिनों को याद किया है। आज भले ही वे अपनी अभिनय क्षमता, विशिष्ट आवाज और व्यक्तित्व के लिए विश्व भर में जाने जाते हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी लंबी कद-काठी और डायलॉग डिलीवरी को लेकर निर्देशकों द्वारा उन्हें खारिज कर दिया जाता था। इस बात का खुलासा उन्होंने टेलीविजन शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के एक विशेष एपिसोड के दौरान किया।

    शो के दौरान एक प्रतियोगी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें फिल्म सेट पर काफी डांट का सामना करना पड़ता था। कई बार निर्देशक और निर्माता उनकी लंबाई को लेकर टिप्पणी करते थे और कहते थे कि अभिनय उनके बस की बात नहीं है, इसलिए उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। इस तरह के तानों और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सुधार करने का प्रयास जारी रखा।

    अमिताभ बच्चन ने एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि जब उन्हें धीरे-धीरे काम मिलना शुरू हुआ, तब भी संवाद अदायगी के तरीकों को लेकर उन्हें सेट पर खरी-खोटी सुननी पड़ती थी। उन्हें निर्देशित किया जाता था कि वे किस प्रकार खड़े होकर संवाद बोलें। वे लगातार अपनी कमियों को दूर करते रहे और निर्देशकों के मार्गदर्शन के अनुसार अपने प्रदर्शन में सुधार लाते रहे।

    अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने एक अन्य किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि वे हमेशा समय से सेट पर पहुंचने का प्रयास करते थे, लेकिन एक दिन जब वे किसी अन्य की गाड़ी से देरी से पहुंचे, तो फिल्म के निर्देशक ने उनके साथ बहुत सख्त व्यवहार किया। निर्देशक ने उन्हें स्पष्ट रूप से कह दिया कि शूटिंग का काम समाप्त हो चुका है और वे तुरंत वहां से चले जाएं। उस समय खुद की कार न होने के कारण उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

    वर्तमान में 80 वर्ष से अधिक की आयु पार कर चुके अमिताभ बच्चन आज भी मनोरंजन उद्योग में पूरी लगन के साथ सक्रिय हैं। हाल के दिनों में उनके लंबे शूटिंग शेड्यूल और काम के प्रति समर्पण की व्यापक रूप से प्रशंसा की जा रही है। वे आने वाले समय में कई बड़ी बजटीय फिल्मों और बहुचर्चित प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    सिनेमा विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई से लेकर मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक अमिताभ बच्चन का जीवन संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। शुरुआती दौर में मिले गंभीर रिजेक्शन के बाद भी जिस तरह से उन्होंने अपनी पहचान बनाई, वह उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम है।

  • सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी

    सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी


    नई दिल्ली । 
    हिंदी सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट जीवनशैली और स्पष्टवादी रवैये के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता जैकी श्रॉफ से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम हाल ही में चर्चा में आया है। अपने शांत और सहयोगात्मक व्यवहार के लिए जाने जाने वाले इस कलाकार का एक समय ऐसा भी था जब सेट पर उनका प्रभाव और कड़ा रुख देखने को मिलता था। हास्य अभिनेता और कलाकार सुरेश मेनन ने एक कार्यक्रम के दौरान जैकी श्रॉफ के साथ हुए अपने एक विशेष संस्मरण को साझा किया है।

    घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए सुरेश मेनन ने जानकारी दी कि अपने शुरुआती करियर के दौरान वे एक बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्म में काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें मुंबई में एक अन्य अनिवार्य शूटिंग प्रतिबद्धता के सिलसिले में कुछ समय की अनुमति चाहिए थी। जब उन्होंने इस संबंध में संबंधित निर्माता से केवल एक घंटे की छूट देने का अनुरोध किया, तो निर्माता ने इसे अनुशासनहीनता माना और उनके साथ अनुचित व्यवहार करते हुए उन्हें अचानक परियोजना से बाहर कर दिया।

    सुरेश मेनन के अनुसार, निर्माता ने न केवल उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया बल्कि बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए सेट से जाने को कह दिया। इस अचानक हुए अपमान और काम से निकाले जाने के कारण वे काफी परेशान हो गए थे और सेट के एक कोने में चुपचाप बैठ गए थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की भनक मुख्य भूमिका निभा रहे जैकी श्रॉफ को लग चुकी थी।

    जब जैकी श्रॉफ को अपने सहयोगी कलाकार के साथ हुई इस बदसलूकी के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत सुरेश मेनन को अपने पास बुलवाया। पूरा मामला समझने के बाद वे काफी नाराज हुए और उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया। जैकी श्रॉफ स्वयं सुरेश मेनन को साथ लेकर सीधे संबंधित निर्माता के पास पहुंचे और उनके इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

    सेट पर मौजूद सभी लोगों के सामने जैकी श्रॉफ ने निर्माता को चेतावनी दी कि किसी भी जूनियर कलाकार या सहयोगी के साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने सह-कलाकारों के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं करेंगे। जैकी श्रॉफ के इस कड़े रुख के बाद निर्माता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्हें सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी पड़ी। इसके बाद सुरेश मेनन को सम्मानपूर्वक काम जारी रखने की अनुमति दी गई।

    सिनेमा उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कई नए और जूनियर कलाकारों को अक्सर इस तरह की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्थापित अभिनेताओं का अपने सह-कर्मियों के पक्ष में खड़ा होना एक मिसाल बनता है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद एक बार फिर जैकी श्रॉफ के सहयोगी रवैये और उनके बिंदास व्यक्तित्व की सराहना की जा रही है।

  • उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल स्थानीय आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वैश्विक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में उद्योग, निर्यात और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्योगों, किसानों, कारीगरों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते देश के विभिन्न राज्यों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के निर्यातकों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानपुर का प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग उत्तर प्रदेश की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब व्यापार समझौतों और बेहतर वैश्विक पहुंच के कारण इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि चमड़ा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा पहुंच सकता है।

    उन्होंने नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    पीयूष गोयल ने सहारनपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ रही है और व्यापारिक बाधाएं कम होने से छोटे कारीगरों और लघु उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर व्यापार व्यवस्था और निर्यात के नए रास्ते खुलने से कृषि उत्पादकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम तेज हुआ है। कानपुर का चमड़ा उद्योग, नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, सहारनपुर का हस्तशिल्प और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज

    इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज


    इंदौर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखने लगा है। इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रियल बेल्ट में उत्पादन घटने और रोजगार पर असर पड़ने के मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी के तहत राज्य सरकार ने उद्योग संगठनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जिसे अब प्रस्तुत कर दिया गया है। अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एमएसएमई और बड़ी इकाइयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है।

    एमएसएमई पर सबसे ज्यादा मार

    पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में हालात को आर्थिक आपातकाल जैसे बताया है। कई छोटे और मध्यम उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। भुगतान चक्र बिगड़ने से पूंजी संकट गहराता जा रहा है जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर भारी दबाव पड़ रहा है। उद्योगों को कच्चे माल गैस और अन्य संसाधनों के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ रहा है जबकि तैयार माल का भुगतान देरी से मिल रहा है। इससे आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है।

    कच्चे माल की कमी लागत में बढ़ोतरी

    रिपोर्ट के अनुसार उद्योग करीब 70% कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। पीएनजी और एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एलपीजी की कमी बनी हुई है जबकि पीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। पहले दी जा रही रियायतें भी वापस ले ली गई हैं जिससे उद्योगों की परेशानी और बढ़ गई है।

    निर्यात पर भी पड़ा असर


    पीथमपुर से होने वाला निर्यात भी प्रभावित हुआ है। बड़ी मात्रा में तैयार माल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है जिससे उद्योगों की पूंजी अटक गई है और वित्तीय दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्रेट लागत बढ़कर करीब 2400 डॉलर तक पहुंच गई है जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके अलावा युद्ध सरचार्ज भी अतिरिक्त रूप से देना पड़ रहा है।

    सरकार से राहत की मांग तेज

    विभिन्न औद्योगिक संगठनों फार्मा प्लास्टिक ऑटो एंसिलरी और पैकेजिंग सेक्टर ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने एलपीजी और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और वैट घटाने की मांग उठाई है। वर्तमान में वैट 14% है जबकि अन्य राज्यों में यह करीब 5% है। इसके अलावा बिजली दरों में बढ़ोतरी रोकने और पावर टैरिफ पर सब्सिडी देने की भी मांग की गई है ताकि उत्पादन लागत कम हो सके।

    रोजगार बचाने पर जोर

    उद्योगों ने सरकार से वर्किंग कैपिटल के लिए ब्याज सहायता पूंजी समर्थन और रोजगार बनाए रखने के लिए इम्प्लॉयमेंट सब्सिडी देने की भी मांग की है जिससे उद्योग और श्रमिक दोनों को राहत मिल सके।

  • मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये

    मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये


    भोपाल । मध्यप्रदेश ने अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों और योजनाबद्ध विकास रणनीतियों के जरिए संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए कहा कि राज्य योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि, उद्योग, सेवा, सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है।

    देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पूरी क्षमता से योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने जो आर्थिक सुधारात्मक कदम उठाए, उनके परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

    आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। स्थिर 2011-12 भाव पर GSDP 7,81,911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भाव में 1,69,050 रुपये और स्थिर भाव में 76,971 रुपये तक बढ़ गई है।

    प्राथमिक क्षेत्र में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जिसमें फसलें 30.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं खनन ने भी योगदान दिया। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि हुई। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन और 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ।

    द्वितीयक क्षेत्र का GSVA 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जिसमें निर्माण, विनिर्माण और उपयोगी सेवाओं का योगदान प्रमुख रहा। इस क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजित हुए। वर्ष 2024-25 में MSME सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। स्टार्टअप्स और इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि CSR व्यय 600.47 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज वृद्धि दिखाई। वर्ष 2025-26 में इसका GSVA 5,85,588 करोड़ रुपये रहा, जिसमें व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, होटल-रेस्टोरेंट और पर्यटन प्रमुख योगदानकर्ता रहे। 13.18 करोड़ पर्यटकों की आवक इस क्षेत्र की गति को दिखाती है।

    वित्तीय अनुशासन में सुधार भी दिखा; राजस्व 618 करोड़ रुपये बढ़ा और ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहा। नगरीय विकास के तहत AMRUT 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8.75 लाख आवास पूरे हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में 34,112 करोड़ रुपये खर्च किए गए और मातृ मृत्यु दर घटकर 142 प्रति लाख जन्म रह गई।

    शिक्षा एवं कौशल विकास में बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित किया गया। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट शून्य और कक्षा 6-8 में 6.3 प्रतिशत रह गया। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई और 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। देवड़ा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित रही, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी संतुलित विस्तार हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश ने संतुलित विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है।

  • बिग बॉस 19 विजेता गौरव खन्ना, 50 लाख रुपए का इनाम, सलमान ने धर्मेंद्र को याद कर किया भावुक, पवन सिंह धमकी के बावजूद शामिल

    बिग बॉस 19 विजेता गौरव खन्ना, 50 लाख रुपए का इनाम, सलमान ने धर्मेंद्र को याद कर किया भावुक, पवन सिंह धमकी के बावजूद शामिल

    नई दिल्ली।  रियलिटी शो बिग बॉस 19 का ग्रैंड फिनाले रविवार को मुंबई में संपन्न हुआ। इस सीजन के विजेता बने गौरव खन्ना जिन्हें 50 लाख रुपए का कैश प्राइज और बिग बॉस की ट्रॉफी मिली। रनर-अप रहीं फरहाना भट्ट जबकि तीसरे चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमशः प्रणीत मोरे तान्या मित्तल और अमाल मलिक रहे।

    विजेता गौरव खन्ना टीवी के जाना-माना चेहरा हैं और उन्होंने CID और अनुपमा जैसे लोकप्रिय शो में काम किया है। फिनाले में कार्तिक आर्यन अनन्या पांडे अरमान मलिक और करण कुंद्रा सहित कई बॉलीवुड सितारे मौजूद थे। इस सीजन की खास बात रही भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह जिन्हें बिग बॉस के फिनाले से पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से धमकी मिली थी। कॉल करने वाले ने पवन सिंह को चेतावनी दी कि अगर वे सलमान खान के साथ मंच साझा करेंगे तो उन्हें इंडस्ट्री में काम नहीं करने दिया जाएगा। बावजूद इसके पवन सिंह ने हिम्मत दिखाई और शो में शामिल हुए। सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

    फिनाले के दौरान सलमान खान भावुक हो गए जब उन्होंने धर्मेंद्र को याद किया। शो में धर्मेंद्र के पुराने वीडियो दिखाए गए जिन्हें देखकर सलमान की आंखों से आंसू निकल आए। सलमान ने बताया कि धर्मेंद्र का निधन उनके पिता सलीम खान के जन्मदिन पर हुआ था। उन्होंने यह भी साझा किया कि 8 दिसंबर धर्मेंद्र का जन्मदिन उनकी मां सलमा का जन्मदिन भी है। फिनाले में सनी लियोनी और करण कुंद्रा ने अपने शो स्प्लिट्सविला X6 के प्रमोशन के लिए स्टेज पर मजेदार सेगमेंट किया। सलमान ने तान्या मित्तल की तारीफ करते हुए कहा कि वह बिग बॉस के इतिहास की सबसे वायरल कंटेस्टेंट्स में से हैं। वहीं बसीर अली के शो को लेकर बयानों पर सलमान ने उन्हें चेतावनी दी कि ऐसा प्रोफेशनल करियर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    बिग बॉस का इतिहास: इस रियलिटी शो का आइडिया 1997 में नीदरलैंड में शुरू हुए शो बिग ब्रदर से लिया गया। भारत में यह शो 2006 में आया। पहले सीजन के होस्ट थे अरशद वारसी इसके बाद शिल्पा शेट्टी और अमिताभ बच्चन ने होस्ट किया। 2010 से लगातार सलमान खान शो के होस्ट हैं। बिग बॉस आज भारत का सबसे चर्चित और लोकप्रिय रियलिटी शो बन चुका है।

  • सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत

    सिमोन टाटा का निधन: टाटा परिवार की सौतेली मां और लेक्मे की शख्सियत रही प्रेरणा का स्रोत


    नई दिल्ली । भारतीय उद्योग जगत और टाटा परिवार के लिए एक दुःखद खबर है। रतन टाटा की सौतेली मां और नोएल टाटा की मां, सिमोन दुनोयर टाटा का 95 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया। स्विट्जरलैंड में जन्मीं सिमोन ने न केवल टाटा परिवार में अपनी जगह बनाई, बल्कि भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग में भी एक नई पहचान स्थापित की।

    सिमोन दुनोयर टाटा का जन्म स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुआ था। उनका पूरा नाम सिमोन नेवल दुनोयर था। 1953 में भारत यात्रा पर आईं सिमोन ने टाटा परिवार से जुड़ाव बनाया और 1955 में जेआरडी टाटा के सौतेले भाई, नवल एच. टाटा से विवाह किया। नवल टाटा की पहली पत्नी सूनी कॉमिस्सैरिएट से दो बेटे थे, रतन और जीमी टाटा। सिमोन ने परिवार में संतुलन बनाए रखा और नवजात टाटा परिवार को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके और नवल टाटा के बेटे नोएल टाटा आज टाटा ट्रस्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

    सिमोन टाटा ने 1960 के दशक में टाटा ग्रुप के व्यवसाय में सक्रिय योगदान देना शुरू किया। उन्होंने टाटा ऑयल मिल्स की सब्सिडियरी कंपनी लेक्मे के बोर्ड में शामिल होकर इसकी रणनीति और विकास में अहम भूमिका निभाई। उस समय लेक्मे एक छोटी कंपनी थी, जो हमाम, ओके और मोदी सोप्स जैसे उत्पाद बनाती थी। लेकिन सिमोन ने इसे भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद कॉस्मेटिक ब्रांड बनाने का विजन दिया।

    1982 में सिमोन टाटा लेक्मे की चेयरपर्सन बनीं। उन्होंने भारतीय बाजार में महिलाओं की त्वचा और बालों की देखभाल के लिए विशेष उत्पाद विकसित कर ब्रांड को मजबूत किया। 1996 में भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद, लेक्मे ने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के साथ 50:50 साझेदारी की और लेक्मे यूनिलीवर लिमिटेड की स्थापना हुई। 1998 में सिमोन ने HUL को अपने 50 प्रतिशत शेयर 200 करोड़ रुपए में बेच दिए। इसके बाद लेक्मे ने कॉस्मेटिक्स से रिटेलिंग की दिशा में कदम बढ़ाया।

    सिमोन टाटा को भारतीय कॉस्मेटिक्स उद्योग की ‘जैज़ीनेरा’ कहा जाता है। उन्होंने लेक्मे को केवल घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय महिलाओं की जरूरतों और समस्याओं को समझते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में लेक्मे ने मार्केट में नई रणनीतियों और साझेदारियों के माध्यम से तेजी से विकास किया।

    1998 में, सिमोन टाटा ने UK की लिटिलवुड्स इंटरनेशनल (इंडिया) कंपनी को खरीदा, जो रेडी-टू-वियर गारमेंट्स बेचती थी। इसी कदम के साथ उन्होंने ट्रेंट लिमिटेड की नींव रखी। लेक्मे लिमिटेड का नाम बदलकर ट्रेंट कर दिया गया और यह टाटा ग्रुप का प्रमुख रिटेल आर्म बन गया। आज ट्रेंट वेस्टसाइड, जुडियो और अन्य रिटेल फॉर्मेट्स चला रहा है। नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और सिमोन टाटा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सिमोन टाटा न केवल एक व्यवसायिक दृष्टिकोण रखने वाली महिला थीं, बल्कि उन्होंने टाटा परिवार में पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों को भी मजबूती से संभाला। उनका जीवन भारतीय उद्योग जगत और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उनके योगदान ने न केवल महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उद्योग में बदलाव लाया, बल्कि रिटेलिंग और ब्रांड निर्माण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए।

    उनकी यह विरासत आज भी टाटा समूह के कार्यों और समाज में उनके प्रभाव में देखी जा सकती है। सिमोन टाटा के निधन से टाटा परिवार और भारतीय उद्योग जगत को एक अनमोल व्यक्तित्व खोना पड़ा है।