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  • क्या हंता वायरस भारत में पहुंच चुका है? डॉक्टरों ने बताया सच्चाई और सावधानियां..

    क्या हंता वायरस भारत में पहुंच चुका है? डॉक्टरों ने बताया सच्चाई और सावधानियां..


    नई दिल्ली ।
    हाल ही में वैश्विक स्तर पर कुछ संक्रमण मामलों की खबरों के बाद Hantavirus को लेकर आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या यह वायरस भारत में भी प्रवेश कर चुका है और क्या यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस विषय पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों को राहत दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में भारत में हंता वायरस के फैलने जैसी कोई स्थिति नहीं है। न तो देश में इसके बड़े स्तर पर मामले सामने आए हैं और न ही किसी प्रकार की महामारी जैसी स्थिति बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जानकारी और सावधानी ही सबसे प्रभावी उपाय है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह वायरस नया नहीं है और लंबे समय से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके मामले दर्ज होते रहे हैं। यह मुख्य रूप से उन जानवरों, विशेषकर चूहों और कृंतकों के माध्यम से फैलता है, जो संक्रमण के वाहक माने जाते हैं। इनसे संपर्क या उनके द्वारा दूषित स्थानों के संपर्क में आने पर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

    इस वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाता है कि यह शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में यह फेफड़ों पर असर डाल सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं कुछ परिस्थितियों में यह किडनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर में रक्तचाप और अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

    हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि आमतौर पर यह वायरस इंसान से इंसान में बहुत सीमित परिस्थितियों में ही फैलता है, जिससे इसके व्यापक प्रसार की संभावना कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे कोविड जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के किसी भी संक्रमण से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता है। घरों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखना, भोजन को सुरक्षित रखना और चूहों जैसे वाहकों से दूरी बनाना आवश्यक है। इसके अलावा हाथ धोने और बुनियादी स्वच्छता आदतों का पालन करने से भी संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल चिकित्सा विशेषज्ञों का एकमत मत है कि भारत में हंता वायरस को लेकर किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। ऐसे में लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय विश्वसनीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी तरह की अनावश्यक चिंता से बचना चाहिए।

  • नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नई दिल्ली । नहाते समय या बाल धोते वक्त कान में पानी चला जाना एक आम समस्या हैजिसे अधिकतर लोग हल्के में ले लेते हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी-सी परेशानी समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। कान में फंसा पानी न सिर्फ असहजता पैदा करता हैबल्कि संक्रमणदर्द और सुनने की क्षमता पर असर जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि सही और सुरक्षित तरीकों से ही इस समस्या से राहत पाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसारजब नहाते समय तेज दबाव के साथ पानी कान में प्रवेश करता हैतो वह ईयर कैनाल में फंस सकता है। कान की बनावट और अंदर मौजूद ईयर वैक्स कान का मैल कई बार पानी को बाहर निकलने से रोक देता है।
    इससे कान भारी लगने लगता हैआवाजें साफ सुनाई नहीं देतीं और एक अजीब-सी झनझनाहट महसूस होती है। लंबे समय तक नमी बनी रहने से कान के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता हैजो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। यही कारण है कि लापरवाही करने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) का इस्तेमाल करना है। जिस कान में पानी गया होउस तरफ सिर झुकाकर कुछ मिनट तक लेटना कई बार पानी को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त होता है। इसी दौरान कान की लोब को हल्के से नीचे और बाहर की ओर खींचने से ईयर कैनाल सीधी होती है और फंसा हुआ पानी बाहर निकल सकता है।

    कुछ मामलों में हेयर ड्रायर का उपयोग भी मददगार हो सकता है। ड्रायर को कम गर्मी या ठंडी हवा के मोड पर रखकर कान से सुरक्षित दूरी पर इस्तेमाल किया जाए तो अंदर की नमी सूख सकती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ड्रायर को बहुत पास लाना या ज्यादा देर तक गर्म हवा देना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर साफ तौर पर बताते हैं कि कान में कॉटन बडपिनमाचिस की तीली या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे कान की अंदरूनी त्वचा को चोट लग सकती है और ईयर ड्रम के फटने का भी खतरा रहता है। इसी तरह जबरदस्ती फूंक मारना या किसी तरल पदार्थ को कान में डालना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

    यदि 24 घंटे से अधिक समय तक कान में पानी भरा हुआ महसूस होदर्दखुजली या जलन शुरू हो जाएया कान से पीले रंग का स्राव निकलने लगेतो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जिन लोगों का पहले कान का ऑपरेशन हो चुका हो या जिनके कान के पर्दे में छेद की समस्या रही होउन्हें घरेलू उपाय करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि नहाते समय या तैराकी के दौरान ईयर प्लग का इस्तेमाल किया जाए। जरूरत पड़ने पर कॉटन पर हल्की वैसलीन लगाकर कान में रखा जा सकता हैताकि पानी अंदर न जाए। साथ ही बार-बार कान साफ करने की आदत से भी बचना चाहिएक्योंकि इससे ईयर वैक्स का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।