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  • Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण

    Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण


    नई दिल्ली।
    एच1एन1 (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू (Swine Flu), इन दिनों खूब चर्चा में है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई राज्य इस संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित देखे जा रहे हैं। दिल्ली में इस साल अब तक 2700 से ज्यादा लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी-जुकाम और सांस की समस्याओं के शिकार मरीजों को संख्या भी बढ़ती देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इन दिनों श्वसन रोगों से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। कुछ लोगों में ये संक्रमण गंभीर और जानलेवा समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    हालिया जानकारियों के मुताबिक बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी भी स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 से संक्रमित हो गए हैं। उनका स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में शूटिंग के सिलसिले में लगातार यात्रा करने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

    डॉक्टर कहते हैं, पहले से ही कमजोर इम्युनिटी वालों और कोमोरबिडिटी (व्यक्ति में एक ही समय पर दो या दो से अधिक बीमारियां) के शिकार लोगों में स्वाइन फ्लू से निमोनिया होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसकी पहचान कैसे की जा सकती है?

    डॉक्टर कहते हैं, एच1एन1 फ्लू के खतरों को देखते हुए इन दिनों अगर आपको तेज बुखार के साथ सिर और मांसपेशियों में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। फ्लू कुछ लोगों में गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों तक संक्रमण पहुंचने पर निमोनिया जैसी जटिलता पैदा हो सकती है।

    अच्छी बात यह है कि वैसे तो ज्यादातर लोग फ्लू से करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा ज्यादा रहता है। फ्लू के दौरान सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो, हालत तेजी से बिगड़ रही हो या ठीक होने के बाद फिर तेज बुखार शुरू हो जाए, तो इसे चेतावनी का संकेत मानना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क जरूरी है।


    कैसे पहचानें कि फ्लू गंभीर हो रहा है?

    डॉक्टर कहते हैं, सिर्फ बुखार या खांसी देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि फ्लू गंभीर है या नहीं? अगर आपके लक्षण लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सांस से जुड़ी परेशानी हो रही है तो इसे अनदेखा न करें। सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर या भ्रम की स्थिति हो तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।

    संक्रमण बढ़ने पर बच्चों में तेज सांस लेने, होंठ या त्वचा का नीला पड़ने, सुस्ती या ठीक से प्रतिक्रिया न देने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ये गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इसमें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी माना जाता है।


    स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा

    स्वाइन फ्लू का संक्रमण निमोनिया का कारण बन सकता है, जो गंभीर स्थिति मानी जाती है। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है इसमें फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी हवा की थैलियां (एल्वियोली) में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या मवाद भर सकता है। निमोनिया में खांसी और सांस की परेशानी बढ़ जाती है। मरीज को सीने में दर्द, थकान, सांस लेने में दिक्कत होने के साथ बुखार और ठंड लगने की समस्या भी हो सकती है। अगर फ्लू के मरीज में निमोनिया का संदेह हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। वायरल फ्लू के लिए एंटीवायरल दवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। समय रहते उपचार हो जाए तो इससे जान जाने को खतरा कम किया जा सकता है।

    डॉक्टर कहते हैं, गंभीर फ्लू या निमोनिया के लक्षण होने पर घर पर केवल बुखार की दवा लेकर इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते डॉक्टरी सलाह और उपचार जरूरी हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गंभीर लक्षणों या हाई-रिस्क लोगों में एंटीवायरल दवा जल्द शुरू करना जरूरी है। इंफ्लूएंजा वायरस या किसी बैक्टीरिया के कारण होने वाली निमोनिया जैसी गंभीर समस्या से बचे रहने के लिए विशेषज्ञ सभी लोगों को सालाना फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

  • डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दोनों संक्रामक बीमारियों के लक्षणों और बचाव के तरीके बताए।

    डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दोनों संक्रामक बीमारियों के लक्षणों और बचाव के तरीके बताए।

    नई दिल्ली । मौसम में बदलाव और संक्रामक बीमारियों के प्रसार के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में डेंगू और स्वाइन फ्लू अर्थात एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आ रहे हैं। दोनों ही बीमारियों में तेज बुखार, सिरदर्द और शारीरिक दर्द जैसे शुरुआती लक्षण एक समान प्रतीत होते हैं। इस कारण आम नागरिकों के लिए शुरुआती चरण में इनके बीच अंतर समझ पाना कठिन हो जाता है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इन दोनों बीमारियों के फैलने के कारण और इनके संक्रमण का माध्यम पूरी तरह से भिन्न हैं।

    डेंगू और स्वाइन फ्लू के बीच सबसे बड़ा बुनियादी अंतर इनके संचरण की प्रक्रिया में निहित है। डेंगू का प्रसार संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होता है, जो मुख्य रूप से साफ और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। इसके विपरीत, स्वाइन फ्लू एक श्वसन संबंधी वायरस संक्रमण है जो किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने अथवा छींकने से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से हवा में आसानी से फैलता है। इसी वजह से दोनों बीमारियों की रोकथाम के लिए अलग-अलग सावधानियां बरतनी आवश्यक होती हैं।

    स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, डेंगू के मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, आंखों के पिछले हिस्से में तीव्र दर्द, मांसपेशियों तथा जोड़ों में ऐंठन, उल्टी आना और त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना शामिल हैं। इसके लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के चार से दस दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं और यह स्थिति एक सप्ताह तक बनी रह सकती है। गंभीर स्थिति में पेट दर्द, मसूड़ों या नाक से रक्तस्राव और सांस लेने में तकलीफ जैसे चेतावनी संकेत भी उभर सकते हैं।

    दूसरी ओर, स्वाइन फ्लू के लक्षणों में अचानक बुखार के साथ सूखी खांसी, गले में खराश, ठंड लगना, अत्यधिक थकान और नाक बहना शामिल हैं। कुछ मरीजों में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे उल्टी या दस्त भी देखे जा सकते हैं। यदि समय पर इस स्थिति का प्रबंधन न किया जाए तो यह बढ़कर निमोनिया का रूप ले सकती है, जिससे श्वसन तंत्र पर गंभीर असर पड़ता है।

    दोनों ही बीमारियों के उपचार में सटीक चिकित्सीय परीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डेंगू की पुष्टि के लिए विशिष्ट रक्त जांच की आवश्यकता होती है, जिससे प्लेटलेट्स की संख्या और एंटीजन की स्थिति का पता चलता है। वहीं स्वाइन फ्लू का निदान रोगी के क्लिनिकल मूल्यांकन और स्वाब टेस्ट के आधार पर किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रकार का लक्षण उभरने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तत्काल योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। डेंगू से बचने के लिए घरों और आसपास जलभराव न होने देना और मच्छर रोधी उपायों का प्रयोग करना प्रभावी होता है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वाइन फ्लू से सुरक्षा के लिए हाथों की नियमित सफाई, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार टीकाकरण कराने की सलाह दी जाती है।

  • अमेरिका में साइक्लोस्पोरा संक्रमण से दो मौतें दूषित लेट्यूस और पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बढ़ा खतरा

    अमेरिका में साइक्लोस्पोरा संक्रमण से दो मौतें दूषित लेट्यूस और पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बढ़ा खतरा


    नई दिल्ली । हरी पत्तेदार सब्जियों और सलाद के सेवन को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। अमेरिका के मिशिगन में साइक्लोस्पोरा नामक सूक्ष्म परजीवी के प्रकोप से दो लोगों की मौत की खबर के बाद आंतों के इस संक्रमण को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार साइक्लोस्पोरियासिस एक आंतों का संक्रमण है जो साइक्लोस्पोरा नामक सूक्ष्म परजीवी के कारण होता है। यह परजीवी मुख्य रूप से दूषित पानी, फलों और कच्ची पत्तेदार सब्जियों के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है।

    प्रारंभिक जांच में मैक्सिको से आपूर्ति किए गए आइसबर्ग लेट्यूस यानी सलाद के पत्ते को इस संक्रमण का मुख्य जरिया माना गया था। यद्यपि बाद की प्रयोगशाला जांच में कुछ विरोधाभासी परिणाम सामने आए, लेकिन महामारी विज्ञान के साक्ष्य इसी आपूर्ति श्रृंखला की ओर संकेत कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण सामान्यतः जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके कारण मरीज को गंभीर दस्त, पेट दर्द, मतली, थकान और अत्यधिक निर्जलीकरण की समस्या हो सकती है। पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी साबित हो सकती है।

    भारत में भी विशेषकर मानसून के मौसम में दूषित पानी और सब्जियों के जरिए इस प्रकार के परजीवी संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। दिल्ली, मुंबई और मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरी इलाकों के बाजारों में लेट्यूस और कच्ची सब्जियों की भारी मांग के चलते सावधानी बरतने की आवश्यकता जताई जा रही है।

    चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि ताजी सब्जियों का सेवन पूरी तरह बंद करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन करना जरूरी है। कच्चे सलाद और सब्जियों को पकाने या खाने से पहले स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना बेहद आवश्यक है।

    खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार होटलों, रेस्तरां और घरों में उपयोग किए जाने वाले सलाद पत्ता, बर्गर और रैप्स में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। संक्रमण के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

  • रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा

    रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के जाने-माने और दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा की तबीयत अचानक बेहद खराब होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त चल रहे अभिनेता को सेट पर किसी बेहद जहरीले कीड़े ने काट लिया, जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समय डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खतरनाक संक्रमण उनके फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच गया, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    ‘भूत बंगला’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘भूल भुलैया 3’, ‘क्रू’, ‘लक्ष्मी’ और ‘डार्लिंग्स’ जैसी कई सुपरहिट और कद्दावर फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा चुके राजेश शर्मा को फिलहाल पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में वेंटिलेशन और गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी में रखा गया है। अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति (हेल्थ अपडेट) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें किसी सांप, बिच्छू या मकड़ी में से किसने काटा है, लेकिन इस बाइट का असर पूरी बॉडी पर बेहद घातक साबित हुआ।

    यह दर्दनाक हादसा हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में हुआ, जहां राजेश शर्मा सुपरस्टार प्रभास की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग का पैकअप होने के बाद राजेश फिल्म सिटी के पास स्थित घने जंगलों से घिरे एक सुनसान इलाके में स्थानीय तकनीशियनों के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें अपने पैर में किसी जीव के काटने का तीखा अहसास हुआ। शुरुआती पलों में यह मामला बहुत गंभीर नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने सेट पर मौजूद टीम से कोई तात्कालिक मेडिकल सपोर्ट नहीं लिया और लगातार अपना काम करते रहे। उनकी यही लापरवाही बाद में उन पर भारी पड़ गई।

    हादसे के करीब 6 घंटे बीत जाने के बाद अभिनेता राजेश शर्मा को अपने दाएं पैर में असहनीय और तेज दर्द महसूस होने लगा, जिसके साथ ही उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। सेहत में आ रही इस गिरावट के बावजूद उन्होंने कोलकाता वापस लौटने के लिए फ्लाइट पकड़ी। हवाई सफर के दौरान ही उन्हें अत्यधिक तेज बुखार ने जकड़ लिया और शरीर में भारी बेचैनी होने लगी। अगले दिन सुबह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर उन्हें आनन-फानन में कोलकाता के ढाकुरिया स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनका तेज बुखार कम नहीं हो रहा है और उन्हें सांस लेने में भी भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश। अस्पताल से आ रही ताजा चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला इन्फेक्शन अब उनके दाएं पैर की उंगलियों से लेकर घुटने तक बहुत तेजी से फैल चुका है। शरीर के जिस-जिस हिस्से में यह जहर और संक्रमण पहुंच रहा है, वहां त्वचा पर बड़े-बड़े और दर्दनाक छाले पड़ गए हैं। मुख्य चिकित्सक डॉ. अविजित भट्टाचार्य और उनकी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार अभिनेता की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजेश शर्मा खतरे से पूरी तरह बाहर हैं, क्योंकि संक्रमण के चलते उनके शरीर के भीतर ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बनने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये ब्लड क्लॉट्स खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकता है जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और उनके पारिवारिक सदस्य लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सुदीपा चटर्जी की इस भावुक पोस्ट के वायरल होने के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सह-कलाकार, निर्देशक और फैंस राजेश शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके सुरक्षित दीर्घायु जीवन के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

  • हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट

    हंता वायरस से दहशत: क्रूज पर संक्रमण की पुष्टि, 17 अमेरिकी यात्रियों को इमरजेंसी फ्लाइट से अमेरिका शिफ्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका में हंता वायरस को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है, जब डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर सवार एक अमेरिकी यात्री में संक्रमण की पुष्टि हुई। एक अन्य यात्री में हल्के लक्षण पाए गए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार स्थिति को देखते हुए जहाज पर मौजूद 17 अमेरिकी नागरिकों को तुरंत विशेष विमान के जरिए अमेरिका वापस लाया जा रहा है।

    सभी यात्रियों को बायोकंटेनमेंट यूनिट में रखा गया है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। प्रोटोकॉल के तहत इन यात्रियों को पहले नेब्रास्का के ओमाहा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के विशेष उपचार केंद्र में ले जाया जाएगा, जहां सभी की विस्तृत जांच होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हें दूसरे केंद्रों में शिफ्ट किया जाएगा और उपचार दिया जाएगा।

    जानकारी के मुताबिक शनिवार तक इस प्रकोप से जुड़े 8 संदिग्ध मामले और 3 मौतें भी दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।

    अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार हंता वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 8 सप्ताह तक हो सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों जैसे रोडेंट्स से फैलता है, हालांकि दुर्लभ मामलों में मानव से मानव संक्रमण भी संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित मामलों में मृत्यु दर एक-तिहाई से भी अधिक हो सकती है।

    इसी बीच ब्रिटेन में भी इसी जहाज से निकाले गए 20 यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें मैनचेस्टर से अस्पताल ले जाकर 72 घंटे की निगरानी में रखा गया है। यदि लक्षण नहीं दिखते हैं तो उन्हें घर भेजा जाएगा, लेकिन 42 दिन तक सेल्फ-आइसोलेशन अनिवार्य रहेगा।

    ब्रिटिश सरकार ने अपने दूरस्थ क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा में भी मेडिकल और सैन्य टीम भेजी है, जहां एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने ऐसे मानवीय मिशन के लिए पैराशूट के जरिए डॉक्टरों को भेजा है।

    हालांकि स्वास्थ्य एजेंसियों ने साफ किया है कि आम जनता के लिए इस वायरस का खतरा बेहद कम है, लेकिन क्रूज और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य सतर्कता को फिर से बढ़ा दिया है।

  • क्रूज शिप पर हंतावायरस का अलर्ट: 3 की मौत, कई संदिग्ध; WHO ने दी राहत घबराने की जरूरत नहीं

    क्रूज शिप पर हंतावायरस का अलर्ट: 3 की मौत, कई संदिग्ध; WHO ने दी राहत घबराने की जरूरत नहीं



    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में चल रहे एमवी होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक ब्रिटिश नागरिक गंभीर हालत में ICU में भर्ती है।

    क्या है स्थिति?
    क्रूज ऑपरेटर के अनुसार, मृतकों में एक डच दंपती और एक जर्मन यात्री शामिल हैं। कुछ मामलों में हंतावायरस की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है।69 वर्षीय एक ब्रिटिश नागरिक को जोहान्सबर्ग के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। और कितने लोग जांच के दायरे में
    एक ब्रिटिश क्रू मेंबर समेत 5 अन्य संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इसके अलावा दो क्रू मेंबर्स में सांस से जुड़ी समस्या के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि उनमें वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।

    WHO का बयान
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मामले को लेकर कहा है कि हंतावायरस एक दुर्लभ संक्रमण है और यह आमतौर पर इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। इसलिए आम जनता के लिए खतरा फिलहाल कम है और किसी तरह के यात्रा प्रतिबंध की जरूरत नहीं है।

    जहाज पर सतर्कता
    क्रूज शिप पर 23 देशों के 149 यात्री सवार हैं। डच अधिकारी गंभीर मरीजों को निकालने (मेडिकल इवैक्युएशन) की तैयारी कर रहे हैं।पाकिस्तान का बड़ा फैसला: 50 साल बाद फिर शुरू हुआ शराब निर्यात। पाकिस्तान ने करीब पांच दशकों बाद शराब के निर्यात को दोबारा शुरू कर दिया है। देश की एकमात्र स्थानीय ब्रेवरी मरी ब्रेवरी ने अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई शुरू कर दी है।

    किन देशों को भेजी जा रही शराब?
    कंपनी के अनुसार यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक पेय भेजे जा रहे हैं।हालांकि यह निर्यात केवल उन देशों तक सीमित है जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के सदस्य नहीं हैं।

    क्या है इसके पीछे की वजह?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान यह कदम विदेशी मुद्रा अर्जन बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए उठा रहा है।एक ओर जहां स्वास्थ्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का यह आर्थिक कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई रणनीति का संकेत दे रहा है।

  • ऋतिक रोशन की गर्लफ्रेंड सबा आजाद को हुआ खतरनाक इन्फेक्शन हालत हुई कमजोर..

    ऋतिक रोशन की गर्लफ्रेंड सबा आजाद को हुआ खतरनाक इन्फेक्शन हालत हुई कमजोर..


    नई दिल्ली:   ऋतिक रोशन की गर्लफ्रेंड और एक्ट्रेस सबा आजाद इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही हैं और अस्पताल में भर्ती हैं उन्होंने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल 14 दिनों का अनुभव साझा किया है इस दौरान उन्हें एक पैरासिटिक इन्फेक्शन ने बुरी तरह प्रभावित किया जिसकी वजह से उनका करीब 4 किलो वजन कम हो गया

    सबा आजाद ने बताया कि यह इन्फेक्शन Cyclospora cayetanensis नाम के पैरासाइट की वजह से हुआ जो आमतौर पर दूषित भोजन या पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करता है उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि वह हमेशा घर का खाना खाती हैं और अपनी पानी की बोतल भी साथ रखती हैं इसके बावजूद उन्हें इस तरह की बीमारी का सामना करना पड़ा

    उन्होंने इंस्टाग्राम पर अस्पताल के बेड से अपनी तस्वीर शेयर की जो ऋतिक रोशन ने खींची थी इस दौरान ऋतिक उनके साथ खड़े रहे और उनका पूरा ख्याल रखते नजर आए सबा ने लिखा कि कुछ दिन पहले तक वह पूरी तरह फिट थीं दिन में दो बार ट्रेनिंग कर रही थीं भारी वजन उठा रही थीं लेकिन अचानक उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वह चलने तक में असमर्थ हो गईं

    उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि यह बीमारी उनके लिए शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी कठिन रही एक समय ऐसा आया जब उनके शरीर में इतनी कमजोरी हो गई कि वह एक छोटी सी चीज उठाने में भी असमर्थ थीं यह अनुभव उनके लिए बेहद झकझोर देने वाला रहा

    सबा आजाद ने अपने फैंस और लोगों को खास सलाह भी दी उन्होंने कहा कि खाने से पहले फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है उन्होंने बताया कि अब वह बेकिंग सोडा और वेजी वॉश का इस्तेमाल करके ही सब्जियों को साफ करती हैं ताकि इस तरह के संक्रमण से बचा जा सके

    इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि साफ सफाई और हाइजीन को लेकर जरा सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है सबा की यह पोस्ट न सिर्फ उनके फैंस के लिए चिंता का विषय है बल्कि एक जरूरी हेल्थ अवेयरनेस मैसेज भी देती है

    फिलहाल फैंस उनके जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं और उम्मीद है कि वह जल्दी ही स्वस्थ होकर अपने काम पर वापस लौटेंगी