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  • महंगाई का नया वार: पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब ब्रेड भी हुई महंगी, आम जनता की जेब पर बढ़ा दबाव

    महंगाई का नया वार: पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब ब्रेड भी हुई महंगी, आम जनता की जेब पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर असर डाला है। पहले पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं को परेशान किया था और अब रोजमर्रा की जरूरत मानी जाने वाली ब्रेड भी महंगी हो गई है। बाजार में ब्रेड की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को और ज्यादा दबाव में ला दिया है।

    ताजा हालात में कई प्रमुख शहरों में ब्रेड के अलग-अलग वेरिएंट्स की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड के पैकेट की कीमत कुछ जगहों पर 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह होल व्हीट ब्रेड और मल्टीग्रेन ब्रेड के दामों में भी 5 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। छोटी ब्राउन और सफेद ब्रेड की कीमतों में भी हल्का लेकिन लगातार असर डालने वाला इजाफा देखा जा रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों और कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार ब्रेड की कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण उत्पादन लागत में हुआ इजाफा बताया जा रहा है। ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल, पैकेजिंग सामग्री और परिवहन खर्च लगातार महंगे होते जा रहे हैं। खासतौर पर प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले आयातित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण आयात लागत भी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार में दिख रहा है।

    उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल कच्चा माल ही नहीं बल्कि ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। डिलीवरी और सप्लाई से जुड़ी लागत बढ़ने के कारण बेकरी उत्पादों की कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो गया है। कई बेकरी संचालकों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में अगर लागत में राहत नहीं मिली तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    स्थानीय बाजारों में उपभोक्ताओं ने इस बढ़ोतरी पर नाराजगी जताई है। आम लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के उपयोग की चीजों के दाम लगातार बढ़ने से घर का मासिक बजट बिगड़ रहा है। पहले जहां छोटे-छोटे अंतर से कीमतों में बदलाव होता था, वहीं अब एक ही बार में 4 से 5 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो सीधे तौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग को प्रभावित कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल, ईंधन और आयात से जुड़ी लागतों में स्थिरता नहीं आई तो आने वाले समय में अन्य खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ेगा तथा आम उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर और असर पड़ेगा। वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।

  • आम आदमी को एक और झटका, पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब ब्रेड भी हुई महंगी

    आम आदमी को एक और झटका, पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब ब्रेड भी हुई महंगी

    नई दिल्ली। देश में महंगाई का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर साफ दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल और दूध के दाम बढ़ने के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। हाल ही में 14 मई को दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड के दामों में भी 5 रुपये प्रति पैकेट तक का इजाफा किया गया है।

    ब्रेड की कीमतों में यह बढ़ोतरी बढ़ती परिवहन लागत, प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले आयातित कच्चे माल की कीमतों में उछाल और रुपये में गिरावट को जिम्मेदार बताया जा रहा है। मॉडर्न ब्रेड ने अपने बेसिक वेरिएंट्स के दाम एकमुश्त 5 रुपये तक बढ़ा दिए हैं, जिसे अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है।

    बाजार में चर्चा है कि आने वाले दिनों में ब्रिटानिया और विब्स जैसी अन्य कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मॉडर्न ब्रेड की मालिक कंपनी ग्रुपो बिम्बो की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये हो गई है। होल व्हीट ब्रेड 55 से 60 रुपये, मल्टीग्रेन ब्रेड 60 से 65 रुपये, छोटे ब्राउन ब्रेड के पैकेट 28 से 30 रुपये और व्हाइट ब्रेड 20 से बढ़कर 22 रुपये हो गए हैं। वहीं ब्राउन ब्रेड की कीमत भी 45 से बढ़कर 50 रुपये तक पहुंच गई है।

    बेकरी संचालकों का कहना है कि प्लास्टिक पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अधिकतर आयातित होता है, जिसकी कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट खर्च, प्रिजर्वेटिव्स और नमक जैसी जरूरी चीजों की लागत भी बढ़ी है, जिससे ब्रेड के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया बेकर्स एसोसिएशन के सदस्य और क्वालिटी बेकर्स के निदेशक सलाहुद्दीन खान ने बताया कि लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले 2-3 रुपये की बढ़ोतरी भी भारी लगती थी, लेकिन अब एक बार में 5 रुपये तक का इजाफा आम बात हो गई है।

    इधर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी जारी है। मंगलवार, 19 मई 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले शुक्रवार को भी ईंधन के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। सीएनजी की कीमतों में भी पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है।

    नई कीमतों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये, कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये तथा चेन्नई में पेट्रोल 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से सब्जी, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

  • आम आदमी पर बढ़ा बोझ: दिल्ली-एनसीआर में CNG के दाम बढ़े, कई शहरों में असर..

    आम आदमी पर बढ़ा बोझ: दिल्ली-एनसीआर में CNG के दाम बढ़े, कई शहरों में असर..


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर आम जनता को महंगाई का झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब CNG के दाम भी 2 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र में ईंधन के खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी और परिवहन लागत पर पड़ने की संभावना है।

    नई दरों के अनुसार, दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर लगभग 79 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है। वहीं नोएडा और गाजियाबाद में यह दर बढ़कर करीब 87.70 रुपये प्रति किलो हो गई है। गुरुग्राम में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यहां CNG लगभग 84 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है। इसके अलावा आसपास के कई शहरों में भी अलग-अलग दरों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में ईंधन की लागत बढ़ गई है।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे शहरों में भी CNG के दाम बढ़कर लगभग 87 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। वहीं कानपुर, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे क्षेत्रों में यह कीमत 90 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर जा चुकी है। राजस्थान और यूपी के अन्य कई शहरों में भी 85 से 88 रुपये प्रति किलो के बीच नई दरें लागू हो गई हैं।

    इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में बदलाव बताया जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित गैस से पूरा करता है और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी तथा मांग में वृद्धि के कारण लागत बढ़ गई है। इसी कारण इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और महानगर गैस लिमिटेड जैसी कंपनियों की खरीद लागत बढ़ी, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के समय में वैश्विक तनाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे ईंधन महंगा हो रहा है।

    सरकार की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। लेकिन CNG की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन या गैस आधारित वाहनों का उपयोग करते हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आने वाले दिनों में परिवहन लागत और सेवाओं के दामों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • दूध हुआ और महंगा: अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें, जानिए नया रेट

    दूध हुआ और महंगा: अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें, जानिए नया रेट


    नई दिल्ली। महंगाई का असर एक बार फिर आम जनता की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। अमूल के बाद अब प्रमुख डेयरी ब्रांड Mother Dairy ने भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने 14 मई 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर और अन्य बाजारों में दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया है।

    कंपनी के अनुसार, यह निर्णय बढ़ती उत्पादन लागत और किसानों से दूध खरीदने की बढ़ी हुई कीमतों को संतुलित करने के लिए लिया गया है। पिछले एक साल में दूध उत्पादन की लागत में लगभग 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर कंपनियों के खर्चों पर पड़ा है।

    नई दरों के बाद अब उपभोक्ताओं को फुल क्रीम दूध के लिए 72 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि टोंड दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, गाय के दूध की कीमत भी बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। डबल टोंड दूध 54 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहेगा।

    कंपनी ने बताया कि वह अपने कुल रेवेन्यू का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को भुगतान करती है। ऐसे में जब कच्चे दूध की खरीद कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर अंतिम उत्पाद की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक हो जाता है।

    Mother Dairy का कहना है कि यह मूल्य वृद्धि केवल आंशिक है और उपभोक्ताओं पर बोझ को न्यूनतम रखने की कोशिश की गई है। कंपनी प्रतिदिन दिल्ली-एनसीआर में लाखों लीटर दूध की आपूर्ति करती है, जिससे यह बदलाव बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा।

    गौरतलब है कि इसी समय देश की एक और बड़ी डेयरी कंपनी Amul ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। दोनों प्रमुख ब्रांडों द्वारा एक साथ कीमतें बढ़ाने से बाजार में दूध महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बजट और महंगाई पर पड़ने की संभावना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पशु आहार, ईंधन, पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत ने डेयरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई हैं।

    दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव चिंता का विषय बन गया है क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा है और इसकी कीमत बढ़ने से मासिक खर्च में सीधा इजाफा होता है।

    कुल मिलाकर, Mother Dairy और Amul दोनों के फैसलों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में डेयरी उत्पादों की कीमतें और महंगी हो सकती हैं।

  • 1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे

    1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 की शुरुआत आम जनता के लिए महंगाई का बड़ा झटका लेकर आ रही है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कई अहम क्षेत्रों में बदलाव होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। बिजली से लेकर प्रॉपर्टी खरीद तक और हाईवे पर सफर से लेकर एटीएम से पैसे निकालने तक लगभग हर क्षेत्र महंगा होने जा रहा है।

    सबसे पहले बात करें बिजली की तो 2026-27 के लिए नया टैरिफ लागू किया जा रहा है। बिजली दरों में औसतन 4.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जारी रहेगी लेकिन जैसे-जैसे खपत बढ़ेगी बिल भी तेजी से बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को हर महीने औसतन 150 रुपए तक अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।

    प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी यह समय भारी पड़ने वाला है। राज्य में कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। करीब 65 हजार स्थानों पर नई दरें लागू होंगी जिससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण पक्के मकानों का निर्माण भी पहले से ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।

    हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। फास्टैग के सालाना पास की कीमत में भी करीब 75 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है जिससे रोजाना सफर करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

    बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं। एटीएम से पैसे निकालना अब पहले से महंगा हो जाएगा। पहले की तरह महीने में पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा जारी रहेगी लेकिन इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब 23 रुपए तक शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स भी अलग से लगेगा जिससे बार-बार पैसे निकालना महंगा सौदा साबित होगा।

    नगर निगम और स्थानीय निकायों ने कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत अब कचरे को चार हिस्सों में अलग करना अनिवार्य होगा जिसमें गीला सूखा सैनिटरी और खतरनाक कचरा शामिल है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा जिससे लोगों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना पड़ेगा।

    रेलवे यात्रियों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा जबकि पहले यह सीमा 4 घंटे थी। 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर करीब 50 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी वहीं 24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 75 प्रतिशत तक रिफंड मिलेगा। इसके अलावा यात्रियों को ट्रेन रवाना होने से आधे घंटे पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा भी दी जाएगी।

    कुल मिलाकर 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव आम आदमी के बजट को प्रभावित करेंगे। ऐसे में लोगों को अपनी आर्थिक योजना को नए सिरे से तैयार करना होगा ताकि बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।