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  • महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी…. लगातार पांचवें माह बढ़कर 16 माह के उच्च स्तर तक पहुंची

    महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी…. लगातार पांचवें माह बढ़कर 16 माह के उच्च स्तर तक पहुंची


    नई दिल्ली। इ
    स तपती गर्मी में सिर्फ मौसम का पारा ही नहीं चढ़ रहा है, आपके घर का मासिक बजट (Monthly Budget) और रसोई का खर्च (Kitchen Expenses) भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई (Consumer Price Index-based Inflation) के आधिकारिक आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आम आदमी की जेब पर चौतरफा बोझ बढ़ रहा है।

    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह चांदी और सोने के गहनों के साथ टमाटर एवं अदरक की कीमतों में तेल उछाल है। अगर खाद्य महंगाई के आंकड़े देखें, तो यह और भी डरावना है। खाद्य महंगाई बीते माह बढ़कर 4.78 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 4.20 फीसदी थी।


    महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह

    महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ खाने-पीने की चीजों और व्यक्तिगत रखरखाव के खर्च का है। आंकड़ों के मुताबिक, व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई में सालाना आधार पर 18.46 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट-होटल जैसी सेवाएं 5.75 फीसदी और पान-तंबाकू 4.83 फीसदी महंगे हुए हैं, जिसने आम आदमी का खर्च बढ़ा दिया है।


    इन चीजों ने बढ़ाया संकट

    – चांदी के गहने : यहां महंगाई का विस्फोट हुआ है और कीमतें एक साल पहले की तुलना में 155.23 फीसदी महंगी हो चुकी हैं।
    – टमाटर : रसोई के राजा टमाटर के दाम 48.43 फीसदी चढ़ चुके हैं।
    – सोने, हीरे और प्लेटिनम के आभूषण : इनकी महंगाई दर भी 40.93 फीसदी पहुंच गई है।
    – अदरक : चाय का स्वाद कड़वा करते हुए यह 32.49 फीसदी महंगा।
    – किशमिश-मुनक्का : सूखे मेवे भी 21.97 फीसदी महंगे बिक रहे हैं।


    यहां राहत

    बढ़ती महंगाई के बीच आलू (-23.71%), हरी मटर (-11.47), मोटर कार एवं जीप (-7.19%), जीरा (-4.59%) और मोटर साइकिल-स्कूटर (-3.56%) की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट आई है।


    इन राज्यों में सर्वाधिक महंगाई दर
    राज्य – महंगाई दर

    तेलंगाना – 6.15%
    तमिलनाडु – 5.11%
    आंध्र प्रदेश – 4.90%
    कर्नाटक – 4.59%
    ओडिशा – 4.54%
    उत्तर प्रदेश – 3.97%
    पंजाब – 3.34%
    हरियाणा – 3.09%
    हिमाचल प्रदेश – 3.05%
    दिल्ली – 2.50%


    शहरों से ज्यादा गांवों में बढ़ी महंगाई

    बीते माह ग्रामीण महंगाई 4.25 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि शहरों में यह 3.53 फीसदी दर्ज की गई। खाद्य महंगाई के मामले में भी गांवों का आंकड़ा 4.85 फीसदी है, जबकि शहरों में 4.66 फीसदी। ग्रामीण महंगाई बढ़ने से कपड़े, जूते, बाइक, मोबाइल और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी कम हेागी, जिससे कंपनियों की बिक्री-मुनाफे पर चोट पहुंचेगी।

  • दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची

    दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची


    नई दिल्ली । देश में थोक स्तर पर महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आई है। विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह सितंबर 2025 के बाद पहली बार है जब थोक महंगाई की दर शून्य से ऊपर दर्ज की गई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसारनवंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे रही थी और यह माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहींएक साल पहले दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तरह साल-दर-साल तुलना में थोक महंगाई अब भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैलेकिन हालिया बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव के संकेत मिलते हैं।

    विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाई महंगाई

    दिसंबर में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा रहा। विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा योगदान होता है और इनकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समग्र महंगाई दर को प्रभावित करती है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसारकच्चे माल की लागतपरिवहन खर्च और मांग में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    तीन महीने बाद राहत खत्म

    सितंबर 2025 के बाद से लगातार तीन महीनों तक थोक महंगाई दर शून्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थीजिससे उद्योग और व्यापार जगत को कुछ राहत मिली थी। हालांकि दिसंबर में दर के फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आने से यह संकेत मिलता है कि कीमतों में स्थिरता की अवधि अब खत्म हो सकती है।

    खुदरा महंगाई से अलग संकेत

    थोक महंगाई और खुदरा महंगाई CPI के रुझान अक्सर अलग-अलग होते हैं। थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिख सकता है। ऐसे में दिसंबर के आंकड़े आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर संभावित दबाव की ओर इशारा कर सकते हैंहालांकि इसका सीधा और त्वरित असर होना जरूरी नहीं है।

    आगे क्या संकेत

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी फिलहाल चिंताजनक नहीं हैलेकिन अगर विनिर्मित उत्पादों और कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहातो इसका असर उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर का 0.83 प्रतिशत पर पहुंचना यह दर्शाता है कि कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि मौजूदा स्तर अभी नियंत्रण में हैलेकिन सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि महंगाई के रुझानों पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।