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  • अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

    समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी।

    कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।

    वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।

    आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    नई दिल्ली। अदाणी समूह ने अपनी विकास रणनीति को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसमें स्थानीय रोजगार सृजन, कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन और कौशल विकास को केंद्रीय भूमिका दी गई है। समूह के चेयरमैन ने यह स्पष्ट किया है कि संगठन की प्रगति अब केवल आर्थिक विस्तार या बड़ी परियोजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि वह कितने लोगों के जीवन को बेहतर बना पा रहा है।

    कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जो किसी भी परियोजना से जुड़ा है, वह केवल एक श्रमिक नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा है। उनके अनुसार जब कोई परियोजना पूरी होती है तो वह सिर्फ एक संरचना नहीं होती, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि समूह की प्राथमिकता अब स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देना है। किसी भी परियोजना में सबसे पहले आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अवसर दिया जाएगा, उसके बाद राज्य स्तर पर और आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों पर विचार किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को सीधे विकास प्रक्रिया से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

    कर्मचारियों के कल्याण को लेकर भी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दूरस्थ और बड़े प्रोजेक्ट स्थलों पर कार्यरत लोगों के लिए बेहतर आवास और सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन जी सकें। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे काम करने वालों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिलना केवल सुविधा नहीं बल्कि एक मूलभूत आवश्यकता है। इसी सोच के साथ संगठन अपने सभी प्रोजेक्ट्स में मानव केंद्रित विकास को प्राथमिकता दे रहा है।

    संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सके। नई प्रणाली के तहत साइट स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होगी और गति में सुधार आएगा। यह कदम बड़े पैमाने पर चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में सहायक होगा।

    इसके अलावा साझेदारी के मॉडल में भी बदलाव किया गया है, जिसमें सीमित लेकिन अधिक सक्षम और विश्वसनीय भागीदारों के साथ काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य बेहतर समन्वय, गुणवत्ता नियंत्रण और तेज निष्पादन सुनिश्चित करना है। यह मॉडल दीर्घकालिक सहयोग और स्थिर विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

    कौशल विकास को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और उन्नति के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं ताकि वे अपने करियर में आगे बढ़ सकें और अधिक जिम्मेदार भूमिकाएं निभा सकें। इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि लोगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

    बड़ी परियोजनाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि ये केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की मजबूती का आधार हैं। इनके माध्यम से देश की ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नया आकार दिया जा रहा है।

  • वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    नई दिल्ली। वाराणसी इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और विकासात्मक आयोजन की तैयारियों का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दो दिवसीय दौरे को लेकर पूरे शहर में गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसमें शामिल विकास परियोजनाओं के कारण स्थानीय स्तर पर भी बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

    दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा, जिनका कुल मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल, शहरी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहर की कनेक्टिविटी और जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि इस पूरे दौरे को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न विभाग लगातार कार्यों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। शहर के प्रमुख मार्गों और आयोजन स्थलों पर विशेष व्यवस्था की जा रही है, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

    इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण जनभागीदारी भी होगा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से महिला सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए अलग से कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, जिससे सामाजिक समावेशन को भी मजबूती मिलेगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों को कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस निगरानी प्रणाली के साथ-साथ सुरक्षा बलों की तैनाती बड़े स्तर पर की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण के लिए पूरे क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटा गया है। मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और प्रवेश-निकास बिंदुओं को नियंत्रित तरीके से संचालित किया जाएगा। इससे कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था की संभावना को कम किया जा सकेगा।

    महिला सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत सुरक्षा व्यवस्था में महिला कर्मियों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। आयोजन स्थल के अंदरूनी हिस्सों की जिम्मेदारी विशेष रूप से महिला सुरक्षा बल को सौंपी गई है, जबकि बाहरी सुरक्षा की निगरानी अन्य बलों द्वारा की जाएगी।

    इसके साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा टीमें भी तैनात की गई हैं, जो हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह दौरा शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले समय में इन परियोजनाओं का प्रभाव आम जनता के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

  • सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?

    सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?


    नई दिल्ली।देश के विभिन्न राज्यों के लिए वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक रणनीति का केंद्र सार्वजनिक निवेश बना रहेगा। अनुमान है कि राज्य सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देती रहेंगी। हालांकि, इस खर्च की वृद्धि दर अपेक्षाकृत सीमित रह सकती है और इसके 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्यों को विकास और वित्तीय संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बनाना होगा।

    आर्थिक आकलनों के अनुसार, राज्यों का पूंजीगत व्यय सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 2.3 से 2.4 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। यह संकेत देता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं जैसे सड़क, परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास में निवेश जारी रहेगा। इस तरह के निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, जो दीर्घकाल में राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    दूसरी ओर, राज्यों के सामने राजस्व व्यय को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ता खर्च और ऊर्जा तथा कमोडिटी की ऊंची लागत से वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके चलते राज्यों के कुल खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे उनके बजट संतुलन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि दर भी सीमित रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में करीब 7.9 प्रतिशत तक रह सकती है। यह वृद्धि दर नाममात्र के आर्थिक विस्तार की तुलना में कम मानी जा रही है।

    राज्यों की आय पर केंद्र से मिलने वाले संसाधनों की गति में संभावित कमी का भी प्रभाव पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती सब्सिडी आवश्यकताओं के कारण केंद्र सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे राज्यों को मिलने वाले हस्तांतरणों की वृद्धि धीमी हो सकती है। इस स्थिति में राज्यों को अपने संसाधनों का अधिक कुशल प्रबंधन करना होगा ताकि विकास परियोजनाओं को जारी रखा जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देने के बावजूद इसकी वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है, जिसका असर राजकोषीय घाटे और ऋण स्तर पर दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि राजस्व घाटा धीरे-धीरे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति राज्यों के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना देती है, ताकि वे अपने विकास लक्ष्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

    उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख राज्यों ने पहले भी सीमित राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है। यह रुझान बताता है कि राज्यों का ध्यान दीर्घकालिक आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में भी यह रणनीति आर्थिक स्थिरता और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • समृद्धि और विकास का संतुलित खाका मध्यप्रदेश बजट 2026 27 में महिलाओं किसानों और गांवों पर बड़ा फोकस

    समृद्धि और विकास का संतुलित खाका मध्यप्रदेश बजट 2026 27 में महिलाओं किसानों और गांवों पर बड़ा फोकस


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 27 के बजट के माध्यम से समग्र और संतुलित विकास की स्पष्ट दिशा प्रस्तुत की है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में तैयार इस बजट को आर्थिक समृद्धि का रोडमैप माना जा रहा है जिसमें सामाजिक सुरक्षा महिला सशक्तिकरण कृषि विकास और आधारभूत संरचना को समान रूप से प्राथमिकता दी गई है यह बजट न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है बल्कि भविष्य के विकास की मजबूत नींव भी तैयार करता है

    सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना के लिए 23883 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया है इसके साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना और पोषण कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित किया गया है यह कदम महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पोषण और सशक्तिकरण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी बजट में कई अहम प्रावधान किए गए हैं अटल कृषि ज्योति योजना के तहत किसानों को बिजली सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बड़ी राशि रखी गई है वहीं छोटे कृषि पंपों और घरेलू कनेक्शन के लिए मुफ्त बिजली की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किसानों को सीधी राहत देगा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और फसल बीमा योजना के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित कर किसानों की आय और सुरक्षा दोनों पर ध्यान दिया गया है

    ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना के विकास को गति देने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है वहीं ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए भी महत्वपूर्ण राशि का प्रावधान किया गया है शहरी क्षेत्रों में मेट्रो परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं जिससे यातायात व्यवस्था और बेहतर होगी

    जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा

    शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है प्राथमिक शिक्षा और समग्र शिक्षा अभियान के लिए बड़ी राशि निर्धारित की गई है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को सशक्त किया गया है

    प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए भी बड़ा बजट रखा गया है उज्जैन में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ के लिए आधारभूत संरचना और व्यवस्थाओं को विकसित करने की दिशा में अभी से काम शुरू किया जा रहा है साथ ही वेदांत पीठ की स्थापना के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है

    रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निवेश प्रोत्साहन और एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में पर्याप्त राशि निर्धारित की है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है

    कुल मिलाकर यह बजट सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है और मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर तथा विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होता नजर आ रहा है

  • डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

    डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में किसान हित और आधारभूत संरचना विकास को लेकर सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में किसानों को राहत देने के साथ साथ सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निर्णय लिए गए

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में सार्थक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं इसी क्रम में कृषि कार्य में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करेगा और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसानों को टोल शुल्क देना पड़ता था जिससे लागत बढ़ती थी अब टोल से छूट मिलने के बाद परिवहन खर्च में कमी आएगी और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन की लागत और अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ेगा यह निर्णय किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन दोनों के रूप में देखा जा रहा है

    बैठक में केवल किसान हित ही नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए संचालक मंडल ने इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है इन परियोजनाओं को नॉन एक्सेस कंट्रोल के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में कमी आएगी

    इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है इस परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी यह निर्णय आने वाले समय में भोपाल के यातायात ढांचे को नई दिशा देगा

    बैठक में वार्षिक लेखों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

    कुल मिलाकर यह बैठक किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है एक ओर जहां किसानों को सीधी आर्थिक राहत दी गई है वहीं दूसरी ओर सड़क परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के विकास को गति देने की मजबूत आधारशिला रखी गई है सरकार का यह कदम समृद्ध किसान और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है

  • कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड कायम भारत ने फिर रचा इतिहास ऊर्जा सुरक्षा को मिली नई मजबूती

    कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड कायम भारत ने फिर रचा इतिहास ऊर्जा सुरक्षा को मिली नई मजबूती


    नई दिल्ली: भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य पूरा कर लिया है यह उपलब्धि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत संकेत मानी जा रही है कोयला मंत्रालय के अनुसार यह लक्ष्य 20 मार्च को हासिल किया गया जो देश के औद्योगिक और ऊर्जा ढांचे के लिए बेहद अहम है

    इस उपलब्धि के पीछे कोयला क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों का समन्वित प्रयास और निरंतर मेहनत रही है बेहतर योजना प्रभावी कार्यान्वयन और आपूर्ति शृंखला में मजबूत तालमेल ने इस लक्ष्य को संभव बनाया है इससे न केवल बिजली उत्पादन में स्थिरता आई है बल्कि उद्योगों को भी निरंतर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित हुई है

    देश के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्तर का कोयला स्टॉक बनाए रखने में भी इस उपलब्धि ने अहम भूमिका निभाई है मंत्रालय के अनुसार यह स्थिति बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और संभावित संकटों से निपटने में सहायक साबित हो रही है

    वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है इसके बावजूद देश के थर्मल पावर प्लांट्स के पास लगभग 53.41 मिलियन टन कोयला स्टॉक उपलब्ध है जो मौजूदा खपत के अनुसार करीब 23 दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है इसके साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयला खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडारण किया जा रहा है

    आर्थिक दृष्टि से भी यह उपलब्धि सकारात्मक संकेत देती है वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का संयुक्त इंडेक्स 2.3 प्रतिशत बढ़ा है इसी अवधि में कोयला उत्पादन में भी 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि बिजली उत्पादन में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है

    कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह एक स्थिर पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है इसके तहत नीतिगत सुधार नियमित निगरानी और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार जोर दिया जा रहा है

    इस बीच कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे मध्यम और बड़े सभी उपभोक्ताओं को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है कंपनी की भूमिका देश में ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण मानी जाती है

    लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है जो यह दर्शाता है कि देश न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रहा है बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपने ऊर्जा ढांचे को मजबूत बनाए रखने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

  • सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी

    सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी


    नई दिल्ली। Indian Railways ने आम यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नॉन एसी कोचों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश के करोड़ों लोग कम खर्च में आरामदायक और सुलभ यात्रा कर सकें। इसी दिशा में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

    रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में कुल कोचों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है जो इस बात को दर्शाता है कि रेलवे आम जनता की जरूरतों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है। वर्ष 2024 25 में करीब 1250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025 26 में लगभग 860 और कोच जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की भीड़ को कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए किराए पर औसतन लगभग 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हर साल करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि आम आदमी की यात्रा सस्ती बनी रहे। वहीं मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त 3000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है।

    रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि रेलवे केवल यात्री सेवाओं में ही नहीं बल्कि माल ढुलाई में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रेट परिवहन 2013 14 के 1055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1650 मिलियन टन तक पहुंच गया है जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन चुका है।

    रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक लगभग 47000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही ट्रैक निर्माण में भी बड़ी वृद्धि हुई है और यह 15000 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 35000 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

    सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या 4000 से बढ़कर 14000 हो गई है जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1500 किलोमीटर से बढ़कर 4000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इसके अलावा एलएचबी कोचों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जो यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में तेजी आई है और अब तक लगभग 2800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है जहां प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। सरकार नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सहयोग से परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को भी मजबूत कर रही है इस तरह भारतीय रेलवे सस्ती सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।