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  • हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    नई दिल्ली ।हरियाणा के गठन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में शिक्षा, नवाचार और वैश्विक विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की गई है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी जनवरी 2027 में अपने पहले वर्ल्ड आइडियाज फोरम का आयोजन करेगी। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 23 से 25 जनवरी 2027 तक सोनीपत स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा। इसका विषय ‘वियर द वर्ल्ड आइडिया मीट’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है।

    इस सम्मेलन में सार्वजनिक जीवन, विश्वविद्यालयों, उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और नागरिक समाज से जुड़े प्रमुख लोगों के शामिल होने की योजना है। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करेंगे। इसे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक वर्ष नए विषयों और विचारों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाया जा सके।

    हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ था। राज्य के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह पहल उसकी विकास यात्रा को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य हरियाणा को शिक्षा, शोध, रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देना है। इसके साथ ही सोनीपत को वैश्विक स्तर पर विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के प्रमुख स्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति एवं संरक्षक नवीन जिंदल ने कहा कि हरियाणा की छह दशक की यात्रा उसके लोगों की उद्यमशीलता, दृढ़ संकल्प और आकांक्षाओं को दर्शाती है। कृषि, उद्योग और खेल के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां उसे शिक्षा, नवाचार और ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ने का आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे भी यही सोच थी कि हरियाणा में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान विकसित हों और उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत हो।

    उन्होंने बताया कि वर्ल्ड आइडियाज फोरम के माध्यम से दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख आवाजों को सोनीपत तक लाने और युवाओं को भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    फोरम के पहले संस्करण में शासन व्यवस्था, आर्थिक विकास, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, संस्कृति और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीकी बदलावों के प्रभाव, सार्वजनिक संस्थाओं की मजबूती, रोजगार और अवसरों के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ियों की तैयारी जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा बनेंगे।

    कार्यक्रम में मुख्य भाषण, नेतृत्व संवाद, सार्वजनिक व्याख्यान, साहित्यिक चर्चाएं, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है। इसके साथ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी, छात्र वाद-विवाद, नीति आधारित सिमुलेशन तथा कला, संगीत, रंगमंच और डिजाइन से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विद्यार्थियों और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर सी. राज कुमार के अनुसार, इस मंच का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां लोग स्वतंत्र रूप से विचार रख सकें, एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझें और अलग-अलग विषयों के बीच संवाद स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज और भविष्य से जुड़े सवालों पर सार्थक चर्चा के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए।

    फोरम को दीर्घकालिक संस्थागत पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके तहत वर्ल्ड आइडियाज लेक्चर, वर्ल्ड आइडियाज अवॉर्ड, वर्ल्ड आइडियाज बुक प्राइज और ग्लोबल यंग आइडियाज फेलोशिप जैसी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा इंडिया आइडियाज लेक्चर, फ्यूचर लीडर्स डायलॉग और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज राउंडटेबल के माध्यम से सार्वजनिक नेतृत्व, उच्च शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की योजना है।

    इस पहल के तहत वर्ल्ड आइडियाज डिक्लेरेशन, ग्लोबल फ्यूचर्स रिपोर्ट और वर्ल्ड आइडियाज इंडेक्स भी प्रस्तावित हैं। इनके जरिए सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं को व्यापक सार्वजनिक विमर्श और भविष्य की साझेदारियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    जनवरी 2027 में होने वाला पहला सम्मेलन हरियाणा की 60वीं वर्षगांठ और वर्ष 2047 तक भारत के विकास लक्ष्यों के बीच भविष्य की दिशा पर चर्चा का अवसर बनेगा। आयोजन से सोनीपत में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ने तथा नई संस्थागत साझेदारियों के अवसर बनने की उम्मीद है।

  • मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गिनाए देशवासियों के प्रयास, खेती से स्वास्थ्य और तकनीक तक की उपलब्धियां

    मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गिनाए देशवासियों के प्रयास, खेती से स्वास्थ्य और तकनीक तक की उपलब्धियां

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें एपिसोड में देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की ओर से किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले विजयदशमी के अवसर पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में देशवासियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए मन की बात किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को समझने के साथ उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

    प्रधानमंत्री ने पंजाब में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती विरासत मिशन नाम की संस्था पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए नव-त्रिन्जन पहल शुरू की गई है। इसके तहत बिना रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के जैविक कपास उगाई जाती है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से धागे और कपड़े तैयार करने में भी मदद मिलती है, जिससे उन्हें रंगने के लिए अलग से रसायनों की जरूरत कम होती है।

    उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख रहे थे। इसके बाद नदी को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। वर्षा जल को रोकने, जमीन में पानी के पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे उपाय अपनाए गए। इन प्रयासों से हेवल नदी को फिर से जीवन देने में मदद मिली और कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन का रास्ता भी खुला।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में हो रहे कामों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव भेजी जा रही है। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है। शबरी नेचुरल्स के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है, जिसे जापान के प्रतिष्ठित गुड डिजाइन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

    डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप के उदाहरण दिए। बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हुई थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क किया। बच्चे को निमोनिया होने का पता चला और विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी स्थिति में सुधार हुआ।

    इसी तरह, लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ने पर ई-संजीवनी के जरिए कवरत्ती में मौजूद अनुभवी डॉक्टरों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने स्थानीय चिकित्सा दल को मार्गदर्शन दिया, जिससे मरीज को राहत पहुंचाने में मदद मिली। इन उदाहरणों के जरिए दूरदराज के इलाकों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता सामने आई।

    प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास में स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का भी उल्लेख किया। इस केंद्र ने मस्तिष्क की उच्च रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल त्रिआयामी तस्वीरें तैयार करने के लिए एक तकनीकी मंच विकसित किया है। इसका उद्देश्य आने वाले समय में 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना और उनका विस्तृत अध्ययन करना है। इस पहल को मस्तिष्क अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया।

  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण संयंत्रों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए ऐसी प्रतिभाओं की आवश्यकता है, जो जटिल तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनमें सुधार करने की क्षमता रखती हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व केवल मशीनों की बढ़ती क्षमता में नहीं, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करके बेहतर भविष्य तैयार करने में है।

    अहमदाबाद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (चिप्स) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों, तकनीकी चुनौतियों और आवश्यक कौशल पर चर्चा करना था। इसमें विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर इस क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

    सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कानूनी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया। विचार-विमर्श के दौरान वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी ढांचे से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कार्यक्रम में तीन प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की संभावनाओं और देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर केंद्रित रही। दूसरी परिचर्चा में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, जरूरी कौशल और भविष्य में करियर बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई। इन सत्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को कम करने पर जोर दिया गया।

    इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से किया गया। इसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चर्चाओं में शोध को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने आई।

    भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल चिप बनाने वाले संयंत्रों तक सीमित नहीं है। चिप डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता विकसित करना भी देश की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने इस दिशा में प्रयासों को गति दी है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं भी राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से जुड़ी हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से विस्तार ने उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में सेमीकंडक्टर तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

    अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करने की योजना घोषित की है। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग में कार्यरत पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना तथा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है।

  • पीयूष गोयल ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश का दिया न्योता, विनिर्माण और नवाचार में बताए बड़े अवसर

    पीयूष गोयल ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश का दिया न्योता, विनिर्माण और नवाचार में बताए बड़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकों के दौरान भारत में निवेश, विनिर्माण और नवाचार की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी विकसित करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। गोयल ने दोनों देशों के उद्योग जगत से सहयोग बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर तलाशने का आह्वान किया।

    बर्लिन दौरे के दौरान गोयल ने फ्रेसेनियस ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल सेन के साथ बैठक की। इसमें भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग तथा मजबूत विनिर्माण क्षमताओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने विचार किया कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है।

    गोयल ने भारत की कुशल प्रतिभा और उत्पादन क्षमता को जर्मन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, कंपनियां भारत में उपलब्ध योग्य कर्मचारियों और विश्वस्तरीय विनिर्माण सुविधाओं का लाभ उठाकर घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में अपनी पहुंच मजबूत कर सकती हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं के विकास में भी सहयोग की संभावनाएं हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने बेयर के फार्मास्यूटिकल्स प्रभाग के अध्यक्ष स्टीफन ओएलरिख के साथ भी चर्चा की। इस बैठक में भारत में बेयर की विस्तार योजनाओं और देश के विकसित होते स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश की संभावनाओं पर विचार किया गया। बातचीत में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने से जुड़े अवसर भी शामिल रहे। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।

    गोयल ने बर्लिन में नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिलदिज के साथ बैठक में भी भाग लिया। इसमें भारत में कंपनी के विनिर्माण विस्तार, टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आर्थिक बदलावों के बीच निर्माण क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया। टिकाऊ निर्माण सामग्री और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े अवसर इस बातचीत के प्रमुख विषय रहे।

    इससे पहले गोयल ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) के इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे भी मौजूद थीं। गोयल ने कहा कि यह केंद्र भारत-जर्मनी संबंधों की बढ़ती मजबूती और आपसी सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

    अपने संबोधन में गोयल ने दोनों देशों की पूरक क्षमताओं को महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों के लिए मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता आर्थिक साझेदारी को नई गति दे सकता है। उनके अनुसार, भारत और जर्मनी मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत और लचीली मूल्य शृंखलाएं विकसित कर सकते हैं। इसके लिए दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को पारस्परिक लाभ वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

    बर्लिन स्थित ईएसएमटी बर्लिन की ओर से आयोजित बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल में भी गोयल ने प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक तथा आर्थिक संबंधों के भविष्य को लेकर विश्वास जताया। इन बैठकों के जरिए निवेश, उत्पादन, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण सामग्री और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को सामने रखा गया।

  • लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    भोपाल ।  सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन छह अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में युवा शक्ति से जुड़े विषयों पर संवाद और मार्गदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। कार्यक्रम में पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कॉन्क्लेव में युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसमें रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के साथ उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।

    कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और नवोदित उद्यमों की सहभागिता रहेगी। इनके माध्यम से युवाओं को रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में बदलती जरूरतों तथा उपलब्ध अवसरों से परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही युवा प्रतिभागियों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया है, जिसमें जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी।

    आयोजन में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा से जुड़े विभाग इसमें शामिल होंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी युवाओं को देंगे। इस तरह कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, उद्यमिता, नवाचार और तकनीक से जुड़े विषयों के साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    नई दिल्ली ।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन सिंगापुर इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के प्रमुख उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा में भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हरियाणा और सिंगापुर के बीच आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हरियाणा को केवल एक औद्योगिक शक्ति तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इसे भारत की इनोवेशन कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर मिल रहे हैं। सैनी ने उन्हें अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन का आभार भी व्यक्त किया।

    सैनी ने कहा कि यह मंच दो ऐसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है, जिनके बीच विश्वास, मित्रता और सहयोग का संबंध लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा ने सिंगापुर की कंपनियों और संस्थाओं के साथ पांच बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य उत्तर भारत के बड़े उपभोक्ता और विनिर्माण बाजार के बीच स्थित है।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, हरियाणा में प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। उनके अनुसार, ये सुविधाएं राज्य में उद्योगों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और उसके आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कमर्शियल डेवलपमेंट और आधुनिक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने सिंगापुर की कंपनियों से हरियाणा में अपने टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का भी आह्वान किया।

    सैनी ने बताया कि हाल ही में हरियाणा ने सिंगापुर स्थित एक ग्लोबल स्कूल ग्रुप के साथ साझेदारी की है। इसके तहत राज्य में विश्वस्तरीय के-12 शिक्षा का बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जिसमें कारोबार तेजी से आगे बढ़े और उसके साथ रोजगार, निवेश तथा इनोवेशन के नए अवसर भी पैदा हों। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के साथ सहयोग हरियाणा के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारत को अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ते हुए कहा कि देश में जिस चीज का निर्माण संभव है, उसे घरेलू स्तर पर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

    राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सोच स्पष्ट है कि जो वस्तु देश में बनाई जा सकती है, उसके लिए आयात पर निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाजों तक और छोटे स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक घरेलू उत्पादन की क्षमता विकसित करना भारत को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

    रक्षा मंत्री ने स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और देश की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के अहम हिस्सों का निर्माण देश में करने और उन पर नियंत्रण रखने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी।

    सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करना और पूरे विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए कई संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं।

    रक्षा मंत्री ने युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह दूरसंचार तकनीक 2जी से 5जी तक पहुंची, उसी तरह युद्ध भी तकनीक के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आधुनिक संघर्षों में तकनीकी क्षमता सैन्य अभियानों और उनके परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन रही हैं। भारत इन क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा नवाचार के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

    सिंह के अनुसार, भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों से निपटने की क्षमता बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के समय निर्भरता कम रहे।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों में फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करने वाले देशों के पास बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम साधन होंगे।

    रक्षा मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक युवा केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि देश की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करने में भी योगदान दे रहे हैं।

  • चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार भारी निवेश, तकनीकी अनुसंधान और औद्योगिक विकास के जरिए एआई को अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इस रणनीति का उद्देश्य आने वाले वर्षों में चीन को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में एक प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स और एआई से जुड़ी कई परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान उन्होंने रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल को देखा और कहा कि उन्नत रोबोटिक्स तथा उच्चस्तरीय विनिर्माण चीन की अगली आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चीन की सरकार एआई को केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है।

    जिस प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया गया, वहां सैकड़ों कंपनियां अत्याधुनिक चिप्स और एआई मॉडल विकसित करने में लगी हैं। स्थानीय प्रशासन इन कंपनियों को बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य एआई अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास की गति को बढ़ाना है।

    चीन में एआई से जुड़े अनुसंधान का दायरा भी लगातार विस्तृत किया जा रहा है। तकनीकी प्रदर्शनों में ऐसे चिप्स और उपकरण शामिल हैं जिनका इस्तेमाल अत्याधुनिक प्रणालियों में किया जा सकता है। इसके अलावा लकवाग्रस्त मरीजों को संवाद करने में मदद करने वाली ब्रेन-इम्प्लांट तकनीक जैसे प्रयोग भी सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि चीन एआई और रोबोटिक्स को औद्योगिक उपयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आगे बढ़ाना चाहता है।

    इस अभियान में सरकारी पूंजी की भूमिका काफी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2000 से 2023 के बीच सरकार के नेतृत्व वाले फंडों ने एआई कंपनियों में 184 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया। इसके अलावा पिछले साल सरकार और सरकारी बैंकों की ओर से एआई क्षेत्र में सैकड़ों अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि निजी क्षेत्र से चीन में होने वाला एआई निवेश अभी अमेरिका की तुलना में कम बताया गया है।

    चीन की बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी रोबोटिक्स के विकास की एक बड़ी वजह है। देश में ऐसे बुद्धिमान रोबोट तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है जो भविष्य में कामगारों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकें। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई आधारित डिजिटल तकनीक के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

    सरकार का लक्ष्य 2030 तक एआई टूल्स और एआई एजेंट्स की पहुंच चीनी समाज के 90 प्रतिशत हिस्से तक बढ़ाने का है। हालांकि इस लक्ष्य को किस तरह मापा जाएगा, इसकी स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है।

    एआई के विस्तार के साथ चीन के सामने कुछ जोखिम भी हैं। उन्नत चैटबॉट और सूचना आधारित तकनीक सरकारी सूचना नियंत्रण की व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। वहीं अत्याधुनिक विदेशी एआई मॉडल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसके बावजूद चीन सरकार एआई, रोबोटिक्स और उन्नत तकनीक में निवेश तथा अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

  • पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजधानी स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन और प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। आयोजन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 की इस वर्ष की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इको सिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला से जुड़े भारतीय और वैश्विक उद्योगों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके अलावा नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और छात्र भी आयोजन में शामिल होंगे।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग, निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। आयोजन के दौरान विभिन्न विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिस्प्ले उद्योग की प्रगति से जुड़े सत्र, सहयोग और संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए छह कंट्री राउंडटेबल तथा महिला नेतृत्व पर केंद्रित एक मंच भी शामिल है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला को एक साथ प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है। इसमें सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक की पूरी प्रक्रिया को प्रस्तुत किया जाएगा।

    आयोजन में ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ नाम से एक नया मूल्य श्रृंखला अनुभव भी शामिल होगा। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कच्चे स्तर से तैयार सिस्टम तक की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

    आयोजकों के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी होगी और करीब 50,000 आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधियों के साथ 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे।

    प्रदर्शनी में कई देशों के लिए अलग पवेलियन भी बनाए जाएंगे। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन की भागीदारी वाले छह कंट्री पवेलियन इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा 12 स्टेट बूथ भी लगाए जाएंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में स्टार्टअप पवेलियन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित किया जाएगा। इसके साथ स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे सम्मेलन में उद्योग, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    17 सितंबर से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े वैश्विक तथा भारतीय हितधारक एक साथ जुटेंगे। सम्मेलन के जरिए सहयोग, निवेश और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी तथा सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों को प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा।

  • भारत की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र और तकनीकी क्षमता वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है: आईएमएफ

    भारत की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र और तकनीकी क्षमता वैश्विक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है: आईएमएफ

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप-प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने कहा है कि भारत के पास दुनिया की आर्थिक वृद्धि की अगली बड़ी लहर का नेतृत्व करने की क्षमता है। पांच दिवसीय भारत यात्रा पूरी करने के बाद जारी उनके बयान में देश की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र की प्रगति और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को इसकी प्रमुख वजह बताया गया।

    क्लार्क ने अपनी यात्रा के दौरान नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। आईएमएफ में उप-प्रबंध निदेशक का पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी से मुलाकात की।

    क्लार्क ने कहा कि भारत दुनिया की अगली आर्थिक वृद्धि को गति देने की क्षमता रखता है और आईएमएफ इस यात्रा में देश का करीबी साझेदार बना रहेगा। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया और वैश्विक आर्थिक विकास में देश की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार और अच्छी नीतियों के कारण भारत वैश्विक विकास के प्रमुख इंजनों में बना हुआ है। भारतीय नीति-निर्माताओं के साथ हुई बातचीत में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव और टिकाऊ तथा समावेशी आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा हुई।

    क्लार्क के मुताबिक, दुनिया में बढ़ती अनिश्चितताओं और बदलते जोखिमों के बीच आर्थिक स्थिरता और मजबूती बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नीतियों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप लचीला बनाए रखने, महंगाई को नियंत्रण में रखने तथा ऐसे सुधार आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई, जो उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकें।

    उन्होंने मध्यम अवधि में तेज आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही क्लार्क ने भारत सरकार को बहुपक्षीय सहयोग का समर्थन करने और क्षेत्र के अन्य देशों की मदद करने के लिए धन्यवाद दिया।

    भारत यात्रा के दौरान आईएमएफ के उप-प्रबंध निदेशक ने उद्योग जगत के कई नेताओं और कारोबारियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य यह समझना था कि देश का निजी क्षेत्र आर्थिक प्रगति में किस तरह योगदान दे रहा है।

    क्लार्क ने भारतीय निजी क्षेत्र की ऊर्जा और देश में मौजूद प्रतिभाओं की सराहना की। उन्होंने तेजी से विकसित हो रही तकनीकी और विनिर्माण क्षमताओं को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारत में निजी क्षेत्र की गतिविधियां आर्थिक विकास की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    उन्होंने नवाचार, डिजिटल बदलाव, उन्नत विनिर्माण और नई तकनीकों को अपनाने को उत्पादकता बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों के रूप में रेखांकित किया। क्लार्क के मुताबिक इन क्षेत्रों में प्रगति से प्रतिस्पर्धा मजबूत हो सकती है और अधिक मूल्य वाले आर्थिक कार्यों को बढ़ावा मिल सकता है।

    उनकी यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं में भारत की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकास को टिकाऊ बनाए रखने के उपायों पर भी ध्यान दिया गया। क्लार्क ने कहा कि आईएमएफ भारत के साथ साझेदारी जारी रखेगा और देश की आर्थिक वृद्धि से जुड़े प्रयासों में करीबी सहयोगी बना रहेगा।