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  • छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

    छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छह दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए, जिसके तहत वह फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ कई देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर बातचीत करेंगे। यह अवसर भारत को वैश्विक आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों पर अपनी भूमिका और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह फ्रांस दौरा विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी सातवीं फ्रांस यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का विशेष स्थान है और दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

    फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता इस वर्ष फरवरी में हुई चर्चाओं के बाद विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, उभरती तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस मुलाकात को भारत-फ्रांस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। यह पहल भारत और फ्रांस के बीच नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक, नवप्रवर्तक और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधि एक मंच पर आएंगे। माना जा रहा है कि इससे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और अवसर प्राप्त होंगे। नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों का विशेष फोकस रहेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी 17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। यह सातवां अवसर होगा जब वह इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच का हिस्सा बनेंगे। इसके साथ ही वह लगातार सात बार जी-7 बैठक में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

    जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई प्रमुख विश्व नेताओं से मुलाकात हो सकती है। इनमें अमेरिका सहित अन्य प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव स्लोवाकिया होगा। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह संपूर्ण यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रिय उपस्थिति को और मजबूत करेगी।

  • Steve Jobs और Tim Cook की प्रेरणादायक कहानी: लीडरशिप का अनोखा सबक

    Steve Jobs और Tim Cook की प्रेरणादायक कहानी: लीडरशिप का अनोखा सबक



    नई दिल्ली। जब भी आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की बात होती है, तो Steve Jobs और Tim Cook का नाम सबसे पहले लिया जाता है। Apple जैसी दिग्गज कंपनी की नींव मजबूत करने में इन दोनों नेताओं की भूमिका बेहद अहम रही है। साल 2011 में जब Steve Jobs ने Apple की जिम्मेदारी Tim Cook को सौंपने का निर्णय लिया, तब यह केवल एक पद परिवर्तन नहीं था, बल्कि एक ऐतिहासिक लीडरशिप ट्रांजिशन था।

    घर बुलाकर दी गई खास सलाह
    2011 में Steve Jobs ने Tim Cook को अपने घर बुलाया और उन्हें बताया कि वे Apple के अगले CEO बनें। यह बातचीत बेहद भावनात्मक और महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी समय Steve Jobs की सेहत भी खराब चल रही थी।टिम कुक के अनुसार, उस मुलाकात में Jobs ने उन्हें एक बेहद सरल लेकिन गहरा संदेश दिया। कभी यह मत सोचो कि मैं क्या करता। बस वही करो जो सही हो।यह एक छोटी सी लाइन थी, लेकिन इसका प्रभाव Tim Cook के पूरे नेतृत्व जीवन पर पड़ा।

    सलाह के पीछे की सोच
    Steve Jobs चाहते थे कि Apple सिर्फ उनके विचारों पर निर्भर न रहे। वे जानते थे कि अगर कोई कंपनी हर फैसले में अपने फाउंडर को कॉपी करने लगे, तो वह आगे नहीं बढ़ सकती।

    उन्होंने Tim Cook को समझाया कि, हर नेता को अपने निर्णय खुद लेने चाहिए। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र सोच जरूरी है। सिर्फ स्टीव जॉब्स क्या करते यह सोच कंपनी को रोक सकती है

    डिज़्नी का उदाहरण

    बातचीत के दौरान स्टीव जॉब्स ने The Walt Disney Company का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि Walt Disney की मृत्यु के बाद कई लोग हर फैसले में यह सोचने लगे कि “Walt क्या करते,” जिससे कंपनी में रचनात्मकता पर असर पड़ा।स्टीव जॉब्स नहीं चाहते थे कि Apple के साथ भी ऐसा हो। इसलिए उन्होंने Tim Cook को स्वतंत्र निर्णय लेने की सलाह दी।

    Tim Cook का नेतृत्व और Apple का विकास
    Tim Cook ने अगस्त 2011 में Apple के CEO के रूप में पद संभाला। शुरुआत में लोगों को संदेह था कि क्या Apple Steve Jobs के बिना भी उसी गति से आगे बढ़ पाएगा या नहीं।
    लेकिन Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने  सर्विस सेक्टर में बड़ा विस्तार किया। 

    एप्पल म्यूजिक, आईक्लाउड और ऐप स्टोर  को मजबूत किया

    कंपनी को ट्रिलियन डॉलर वैल्यू तक पहुंचाया । ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ और मजबूत कीस्टीव जॉब्स और टिम कुक  की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी ट्रांजिशन नहीं, बल्कि नेतृत्व की असली परिभाषा है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा नेता वह नहीं होता जो सिर्फ निर्देश देता है, बल्कि वह होता है जो आने वाली पीढ़ी को स्वतंत्र सोच और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।Steve Jobs की दी गई यह सलाह आज भी दुनियाभर के लीडर्स के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।

  • मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

    मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने वाले “शक्ति दीदी” नवाचार को अब प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। राज्य शासन ने इस अनूठी पहल को “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया है।

    आज मंगलवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में आयोजित भव्य समारोह में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत कलेक्टर रुचिका चौहान, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन और सहायक संचालक (महिला एवं बाल विकास) राहुल पाठक को संयुक्त रूप से एक लाख रुपये की नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

    जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्वालियर जिले को यह पुरस्कार “सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण” कैटेगरी में दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार, समाज की अंतिम पंक्ति की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान ने 2 जनवरी 2025 को इस नवाचार का आगाज़ किया था।

    पेट्रोल पंपों पर कमान संभाल रहीं ‘शक्ति दीदियाँ’

    उन्होंने बताया कि “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिले की ऐसी महिलाओं को चुना गया जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थीं, अपनों द्वारा उपेक्षित थीं या विधवा थीं। जिला प्रशासन ने इन महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर ‘फ्यूल डिलीवरी वर्कर’ के रूप में सम्मानजनक रोजगार दिलाया। पिछले साल 2 जनवरी 2025 को महज पांच महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां मौजूदा अप्रैल माह तक 112 “शक्ति दीदियों” तक पहुँच गया है। शुरुआत में झिझक रहे पेट्रोल पंप संचालक अब इन महिलाओं की मेहनत और ईमानदारी देखकर स्वयं प्रशासन से “शक्ति दीदी” की मांग कर रहे हैं।

    शक्ति दीदियों की सुरक्षा व सुविधा का पूरा ध्यान

    जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिला प्रशासन द्वारा जरूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर केवल सम्मानजनक रोजगार ही नहीं दिलाया गया है बल्कि उनकी सुरक्षा व सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी नवाचार के लिये एक वॉट्सएप ग्रुप तैयार कराया है, जिस पर जिला प्रशासन, पुलिस, पेट्रो पंप के संचालक एवं शक्ति दीदी जुड़ी हैं। जिस पर शक्ति दीदी अपनी समस्याएं बता सकती हैं। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी व संबंधित पुलिस थाने की पुलिस भी पेट्रोल पंपों पर लगातार गश्त कर शक्ति दीदियों को भरोसा दिलाती हैं कि आप सब बेखौफ होकर अपना काम करें। हम सब आपकी सुरक्षा के लिये 24 घंटे सजग हैं। पेट्रोल पंप पर महिला फ्यूल डिलेवरी वर्कर की ड्यूटी का समय प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक रखा गया है।

    शक्ति दीदियों का कहना है – हमें सम्मान के साथ मिला रोजगार

    “शक्ति दीदी” बनी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले को महिला कलेक्टर देकर उनके दु:ख-दर्द को समझने वाला सहारा प्रदान किया है। महिलाएं कहती हैं कि इस नवाचार ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज में हमारा मान-सम्मान भी बढ़ाया है।

  • राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    इंदौर में सेज यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा फार्मा अन्वेषण 2026 का भव्य और सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुदान से 20 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने शिक्षा अनुसंधान और उद्योग के बीच समन्वय को एक नई दिशा प्रदान की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन बना दिया।

    इस कार्यक्रम में चार सौ से अधिक विद्यार्थियों और लगभग दो सौ शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की भारी उपस्थिति ने यह दर्शाया कि फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को लेकर गहरी रुचि और उत्साह है। पूरे आयोजन में सीखने और सृजन की ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मोंटू पटेल उपस्थित रहे। उनके साथ फाइनेंस चेयरमैन डॉ विभु साहनी। मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ संजय जैन। सेंट्रल मेंबर डॉ नीरज उपमन्यु। सेंट्रल मेंबर डॉ शैलेश जैन। तथा सेज यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डॉ प्रशांत जैन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनोवेटिव प्रोडक्ट प्रस्तुतियाँ। रिसर्च पोस्टर प्रदर्शन। और पेटेंट आधारित प्रोजेक्ट्स ने छात्रों की प्रतिभा को उजागर करने का अवसर दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं पर काम करने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान पैनल चर्चा और विशेषज्ञों के मुख्य वक्तव्यों ने सभी प्रतिभागियों को गहराई से सोचने और नए विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों को यह समझने में मदद की कि तकनीकी हस्तांतरण कैसे किया जाता है और नियामक प्रक्रियाएँ किस प्रकार कार्य करती हैं। साथ ही कौशल विकास और उभरते करियर अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण उद्घाटन सत्र में प्राप्त वर्चुअल संदेश रहा। जिसमें मध्यप्रदेश शासन के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का संदेश शामिल था। इस संदेश ने विद्यार्थियों और आयोजकों का उत्साह और बढ़ा दिया।

    समापन समारोह में सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया। उनके नवाचार और प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े सभी लोगों ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की। चांसलर इंजीनियर संजीव अग्रवाल ने भी इस आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया और इसे शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    फार्मा अन्वेषण 2026 ने यह सिद्ध किया कि यदि शिक्षा संस्थान और उद्योग मिलकर कार्य करें तो नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति संभव है। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए सीखने का मंच बना बल्कि फार्मेसी शिक्षा के भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी साबित हुआ।

  • इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी


    नई दिल्ली। 17 फरवरी 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित केसबुक का विमोचन किया गया। यह पहल इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूएन वीमेन की संयुक्त पहल है जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसका समर्थन किया। इस केसबुक में ग्लोबल साउथ के 23 चुनिंदा एआई समाधानों को शामिल किया गया है जो महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण में ठोस प्रभाव दिखाते हैं।

    विमोचन समारोह में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक और यूएन वीमेन की एशिया पैसिफिक क्षेत्रीय निदेशक सुश्री क्रिस्टीन अरब उपस्थित थीं।

    इस केसबुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली। 20 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जनएआई एक्सपो में यूएन वीमेन के स्टॉल का दौरा किया। इस अवसर पर महासचिव ने वी एसटीईएम परियोजना के तहत ग्रामीण युवाओं को एसटीईएम करियर में प्रशिक्षित करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह परियोजना मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों यूरोपीय संघ माइक्रोन नोकिया और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है।

    महिलाओं ने बताया कि वे एआई का उपयोग करके नए कौशल सीख रही हैं शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही हैं और रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। केसबुक की एक प्रति यूएन वीमेन की एआई कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने महासचिव को भेंट की। अवर महासचिव और प्रौद्योगिकी मामलों पर महासचिव के दूत अमनदीप सिंह गिल भी उपस्थित थे।

    यह केसबुक 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 आवेदनों में से चयनित 23 एआई समाधानों को शामिल करती है। चयन प्रक्रिया बहु स्तरीय मूल्यांकन पर आधारित थी जिसमें उपयोगिता लैंगिक प्रभाव और साक्ष्य आधारित परिणामों को परखा गया। इसमें स्वास्थ्य आर्थिक सशक्तिकरण डिजिटल सुरक्षा जलवायु लचीलापन न्याय शिक्षा और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

    केसबुक नीति निर्माताओं शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं के लिए व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई सिस्टम नैतिक समावेशी और महिलाओं की वास्तविकताओं के प्रति उत्तरदायी हों। यह प्रकाशन भारत के लोकतांत्रिक एआई प्रसार दृष्टिकोण और इंडियाएआई मिशन के लिंग संवेदनशील सिद्धांतों को भी सुदृढ़ करता है।

    इस पहल में भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की प्रभावी साझेदारी दिखाई देती है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रणनीतिक दिशा प्रदान की यूएन वीमेन ने वैश्विक समन्वय और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच हुआ। इसका उद्देश्य जिम्मेदार समावेशी और प्रभावशाली एआई को प्रोत्साहित करना था जिससे भारत वैश्विक एआई शासन ढांचे के सह निर्माता के रूप में स्थापित हो सके।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।

  • मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद

    मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है।

    आयुक्त एमएसएमई श्री दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।