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  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और नवाचार आधारित बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जहां अनुसंधान, नई तकनीक और उन्नत चिकित्सा समाधानों को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही आम लोगों तक किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    हाल ही में इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में फार्मा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल ने किया। बैठक में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करने तथा भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया गया।

    बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास, क्लीनिकल रिसर्च और उन्नत उपचार तकनीकों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। चर्चा में यह भी माना गया कि यदि इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित किया जाता है तो भारत का फार्मा इनोवेशन इकोसिस्टम और मजबूत होगा तथा नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास को गति मिलेगी। इससे देश की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ मिलकर ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहती है, जहां नवाचार को प्रोत्साहन मिले और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़े। उनका मानना है कि अनुसंधान आधारित विकास ही भविष्य में भारतीय फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास की इस प्रक्रिया में आम नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना समान रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

    भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग पहले से ही दुनिया के प्रमुख दवा उद्योगों में गिना जाता है। विशेष रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुनिया के अनेक देशों में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी कारण सरकार घरेलू विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार पहल कर रही है।

    फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के हालिया कारोबारी आंकड़े भी इस उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाते हैं। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे दर्ज किए गए। बड़े विदेशी अधिग्रहण को अलग रखने के बाद भी कुल सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक रहा, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

    इसी अवधि में विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। कुल 35 एमएंडए सौदों का मूल्य 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेनदेन की संख्या में तिमाही आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल सौदों का मूल्य अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि कुल एमएंडए मूल्य में लगभग 96 प्रतिशत योगदान विदेशी अधिग्रहणों का रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत कर रही हैं।

  • एआई और इनोवेशन से बढ़ेगी ऑफिस स्पेस की मांग, भारत में जीसीसी की हिस्सेदारी 50% के करीब पहुंचने के संकेत

    एआई और इनोवेशन से बढ़ेगी ऑफिस स्पेस की मांग, भारत में जीसीसी की हिस्सेदारी 50% के करीब पहुंचने के संकेत

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक कंपनियों के लिए केवल लागत आधारित संचालन का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि अब नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। इसी बदलाव का असर देश के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में भी साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दो वर्षों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग का सबसे बड़ा आधार बनने की ओर बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि वर्ष 2026 और 2027 के दौरान देश में होने वाली कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीजिंग का लगभग 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले जीसीसी के खाते में जाएगा। इससे भारत की वैश्विक कारोबारी और तकनीकी क्षमता को नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    बीते कुछ वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने परिचालन और रणनीतिक केंद्रों का लगातार विस्तार किया है। वर्ष 2021 से अब तक देश के सात प्रमुख शहरों में जीसीसी ने लगभग 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। यह इसी अवधि के दौरान हुई कुल ऑफिस स्पेस मांग का करीब 37 प्रतिशत हिस्सा है। केवल वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही जीसीसी द्वारा 1.66 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो कुल ग्रेड-ए लीजिंग का लगभग 46 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब जीसीसी की भूमिका पारंपरिक बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं रह गई है। वर्तमान समय में ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे उच्च मूल्य वाले कार्यों का संचालन कर रहे हैं। कुशल मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत, मजबूत तकनीकी क्षमता, अनुकूल कारोबारी माहौल और नीतिगत समर्थन ने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित नवाचार और तकनीकी निवेश ऑफिस स्पेस की मांग को और अधिक गति देने की उम्मीद है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 से अब तक जीसीसी लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक करीब 39 प्रतिशत रही है। हालांकि अब अन्य क्षेत्रों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र ने कुल लीजिंग में लगभग 22 प्रतिशत योगदान दिया है, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही। वर्ष 2021 से 2025 के बीच बीएफएसआई क्षेत्र की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, वहीं इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मांग 2.5 गुना से अधिक बढ़ने का अनुमान दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि जीसीसी मॉडल अब विभिन्न उद्योगों में तेजी से अपनाया जा रहा है।

    शहरों की बात करें तो बेंगलुरु और हैदराबाद अभी भी जीसीसी गतिविधियों के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। वर्ष 2021 से अब तक कुल लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके बावजूद अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में तेजी से रुचि दिखा रही हैं। इसके साथ ही ‘हब-प्लस-वन’ रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी विस्तार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। एआई-आधारित जीसीसी, नैनो और मिड-साइज कैपेबिलिटी सेंटर तथा नए कारोबारी मॉडल आने वाले वर्षों में भारत के ऑफिस स्पेस बाजार और वैश्विक निवेश परिदृश्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को नई उड़ान, सरकार ने लॉन्च किया ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’, युवाओं और बुनकरों को मिलेगा साझा मंच

    हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को नई उड़ान, सरकार ने लॉन्च किया ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’, युवाओं और बुनकरों को मिलेगा साझा मंच

    नई दिल्ली । भारत के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’ की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का उद्देश्य तकनीक, डिजाइन, उद्यमिता और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से हथकरघा उद्योग को नई गति देना है। सरकार का मानना है कि देश की समृद्ध बुनाई परंपरा को आधुनिक सोच और नवाचार के साथ जोड़कर इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

    यह पहल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त को आयोजित होगा, जहां चयनित प्रतिभागी अपने नवाचारी विचार और समाधान विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। शिक्षा, उद्योग, डिजाइन, प्रौद्योगिकी और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेंगे और सबसे प्रभावी समाधानों का चयन करेंगे।

    हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य युवाओं की रचनात्मक सोच को देश की पारंपरिक बुनाई कला से जोड़ना है। सरकार चाहती है कि आधुनिक तकनीकी ज्ञान और पारंपरिक शिल्प कौशल के मेल से ऐसे समाधान विकसित हों, जो हथकरघा क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में भारतीय हथकरघा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

    इस प्रतियोगिता में वस्त्र, फैशन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न विषयों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। इसके अलावा हथकरघा बुनकर, कारीगर, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्यमी, नवाचारकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर भी इसमें अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह यह मंच पारंपरिक अनुभव और आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करेगा।

    प्रतियोगिता के लिए कई महत्वपूर्ण विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें उत्पाद एवं डिजाइन नवाचार, टिकाऊ विकास, सर्कुलर इकोनॉमी, डिजिटल तकनीक का उपयोग, बाजार तक पहुंच, ब्रांडिंग, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता, उत्पादकता में वृद्धि, व्यवसाय विकास और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन विषयों पर प्रस्तुत होने वाले नए विचार हथकरघा उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित अवधि तक खुली रहेगी, जिसके दौरान इच्छुक प्रतिभागी अपने विचार और परियोजनाएं प्रस्तुत कर सकेंगे। चयनित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की ओर से मार्गदर्शन, मेंटरशिप और आवश्यकता पड़ने पर इनक्यूबेशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे नवाचारों को व्यावसायिक रूप देने और उन्हें व्यवहार में लागू करने का मार्ग आसान होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का हथकरघा क्षेत्र न केवल लाखों लोगों की आजीविका का आधार है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, डिजिटल समाधान और नवाचार से जोड़ा जाता है तो इससे रोजगार, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।

    सरकार की यह पहल पारंपरिक शिल्प और आधुनिक नवाचार के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिलने के साथ-साथ देश के नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी पारंपरिक उद्योगों के साथ जुड़कर नए अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

  • नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नई दिल्ली । भारत के नए मुक्त व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलेगी। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों को तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देश के उद्योगों को नए बाजार मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इनोवेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ाएगा।

    उन्होंने छात्रों से पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे।

    डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने का अवसर प्रदान करती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकती है, जिससे भौगोलिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने ऑनलाइन द्विभाषी प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच मौजूद अवसरों की खाई को कम करेंगे। अब छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के छात्र भी घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा पाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध पाठ्यक्रम देश के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करेंगे। इससे भाषा संबंधी बाधाएं कम होंगी और अधिक संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी प्रभावी मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उनका कहना था कि ऑनलाइन अध्ययन के साथ समय-समय पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी आवश्यक है। इससे छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, विचारों के आदान-प्रदान और नेटवर्किंग जैसे महत्वपूर्ण प्रबंधन कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास की संयुक्त रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से देश की उत्पादन क्षमता, नवाचार और आर्थिक विकास को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

    छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छह दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए, जिसके तहत वह फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ कई देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर बातचीत करेंगे। यह अवसर भारत को वैश्विक आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों पर अपनी भूमिका और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह फ्रांस दौरा विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी सातवीं फ्रांस यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का विशेष स्थान है और दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

    फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता इस वर्ष फरवरी में हुई चर्चाओं के बाद विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, उभरती तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस मुलाकात को भारत-फ्रांस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। यह पहल भारत और फ्रांस के बीच नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक, नवप्रवर्तक और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधि एक मंच पर आएंगे। माना जा रहा है कि इससे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और अवसर प्राप्त होंगे। नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों का विशेष फोकस रहेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी 17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। यह सातवां अवसर होगा जब वह इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच का हिस्सा बनेंगे। इसके साथ ही वह लगातार सात बार जी-7 बैठक में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

    जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई प्रमुख विश्व नेताओं से मुलाकात हो सकती है। इनमें अमेरिका सहित अन्य प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव स्लोवाकिया होगा। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह संपूर्ण यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रिय उपस्थिति को और मजबूत करेगी।

  • Steve Jobs और Tim Cook की प्रेरणादायक कहानी: लीडरशिप का अनोखा सबक

    Steve Jobs और Tim Cook की प्रेरणादायक कहानी: लीडरशिप का अनोखा सबक



    नई दिल्ली। जब भी आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की बात होती है, तो Steve Jobs और Tim Cook का नाम सबसे पहले लिया जाता है। Apple जैसी दिग्गज कंपनी की नींव मजबूत करने में इन दोनों नेताओं की भूमिका बेहद अहम रही है। साल 2011 में जब Steve Jobs ने Apple की जिम्मेदारी Tim Cook को सौंपने का निर्णय लिया, तब यह केवल एक पद परिवर्तन नहीं था, बल्कि एक ऐतिहासिक लीडरशिप ट्रांजिशन था।

    घर बुलाकर दी गई खास सलाह
    2011 में Steve Jobs ने Tim Cook को अपने घर बुलाया और उन्हें बताया कि वे Apple के अगले CEO बनें। यह बातचीत बेहद भावनात्मक और महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी समय Steve Jobs की सेहत भी खराब चल रही थी।टिम कुक के अनुसार, उस मुलाकात में Jobs ने उन्हें एक बेहद सरल लेकिन गहरा संदेश दिया। कभी यह मत सोचो कि मैं क्या करता। बस वही करो जो सही हो।यह एक छोटी सी लाइन थी, लेकिन इसका प्रभाव Tim Cook के पूरे नेतृत्व जीवन पर पड़ा।

    सलाह के पीछे की सोच
    Steve Jobs चाहते थे कि Apple सिर्फ उनके विचारों पर निर्भर न रहे। वे जानते थे कि अगर कोई कंपनी हर फैसले में अपने फाउंडर को कॉपी करने लगे, तो वह आगे नहीं बढ़ सकती।

    उन्होंने Tim Cook को समझाया कि, हर नेता को अपने निर्णय खुद लेने चाहिए। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र सोच जरूरी है। सिर्फ स्टीव जॉब्स क्या करते यह सोच कंपनी को रोक सकती है

    डिज़्नी का उदाहरण

    बातचीत के दौरान स्टीव जॉब्स ने The Walt Disney Company का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि Walt Disney की मृत्यु के बाद कई लोग हर फैसले में यह सोचने लगे कि “Walt क्या करते,” जिससे कंपनी में रचनात्मकता पर असर पड़ा।स्टीव जॉब्स नहीं चाहते थे कि Apple के साथ भी ऐसा हो। इसलिए उन्होंने Tim Cook को स्वतंत्र निर्णय लेने की सलाह दी।

    Tim Cook का नेतृत्व और Apple का विकास
    Tim Cook ने अगस्त 2011 में Apple के CEO के रूप में पद संभाला। शुरुआत में लोगों को संदेह था कि क्या Apple Steve Jobs के बिना भी उसी गति से आगे बढ़ पाएगा या नहीं।
    लेकिन Tim Cook के नेतृत्व में Apple ने  सर्विस सेक्टर में बड़ा विस्तार किया। 

    एप्पल म्यूजिक, आईक्लाउड और ऐप स्टोर  को मजबूत किया

    कंपनी को ट्रिलियन डॉलर वैल्यू तक पहुंचाया । ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ और मजबूत कीस्टीव जॉब्स और टिम कुक  की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी ट्रांजिशन नहीं, बल्कि नेतृत्व की असली परिभाषा है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा नेता वह नहीं होता जो सिर्फ निर्देश देता है, बल्कि वह होता है जो आने वाली पीढ़ी को स्वतंत्र सोच और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।Steve Jobs की दी गई यह सलाह आज भी दुनियाभर के लीडर्स के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।

  • मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

    मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने वाले “शक्ति दीदी” नवाचार को अब प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। राज्य शासन ने इस अनूठी पहल को “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया है।

    आज मंगलवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में आयोजित भव्य समारोह में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत कलेक्टर रुचिका चौहान, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन और सहायक संचालक (महिला एवं बाल विकास) राहुल पाठक को संयुक्त रूप से एक लाख रुपये की नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

    जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्वालियर जिले को यह पुरस्कार “सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण” कैटेगरी में दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार, समाज की अंतिम पंक्ति की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान ने 2 जनवरी 2025 को इस नवाचार का आगाज़ किया था।

    पेट्रोल पंपों पर कमान संभाल रहीं ‘शक्ति दीदियाँ’

    उन्होंने बताया कि “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिले की ऐसी महिलाओं को चुना गया जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थीं, अपनों द्वारा उपेक्षित थीं या विधवा थीं। जिला प्रशासन ने इन महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर ‘फ्यूल डिलीवरी वर्कर’ के रूप में सम्मानजनक रोजगार दिलाया। पिछले साल 2 जनवरी 2025 को महज पांच महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां मौजूदा अप्रैल माह तक 112 “शक्ति दीदियों” तक पहुँच गया है। शुरुआत में झिझक रहे पेट्रोल पंप संचालक अब इन महिलाओं की मेहनत और ईमानदारी देखकर स्वयं प्रशासन से “शक्ति दीदी” की मांग कर रहे हैं।

    शक्ति दीदियों की सुरक्षा व सुविधा का पूरा ध्यान

    जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिला प्रशासन द्वारा जरूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर केवल सम्मानजनक रोजगार ही नहीं दिलाया गया है बल्कि उनकी सुरक्षा व सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी नवाचार के लिये एक वॉट्सएप ग्रुप तैयार कराया है, जिस पर जिला प्रशासन, पुलिस, पेट्रो पंप के संचालक एवं शक्ति दीदी जुड़ी हैं। जिस पर शक्ति दीदी अपनी समस्याएं बता सकती हैं। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी व संबंधित पुलिस थाने की पुलिस भी पेट्रोल पंपों पर लगातार गश्त कर शक्ति दीदियों को भरोसा दिलाती हैं कि आप सब बेखौफ होकर अपना काम करें। हम सब आपकी सुरक्षा के लिये 24 घंटे सजग हैं। पेट्रोल पंप पर महिला फ्यूल डिलेवरी वर्कर की ड्यूटी का समय प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक रखा गया है।

    शक्ति दीदियों का कहना है – हमें सम्मान के साथ मिला रोजगार

    “शक्ति दीदी” बनी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले को महिला कलेक्टर देकर उनके दु:ख-दर्द को समझने वाला सहारा प्रदान किया है। महिलाएं कहती हैं कि इस नवाचार ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज में हमारा मान-सम्मान भी बढ़ाया है।

  • राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    इंदौर में सेज यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा फार्मा अन्वेषण 2026 का भव्य और सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुदान से 20 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने शिक्षा अनुसंधान और उद्योग के बीच समन्वय को एक नई दिशा प्रदान की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन बना दिया।

    इस कार्यक्रम में चार सौ से अधिक विद्यार्थियों और लगभग दो सौ शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की भारी उपस्थिति ने यह दर्शाया कि फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को लेकर गहरी रुचि और उत्साह है। पूरे आयोजन में सीखने और सृजन की ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मोंटू पटेल उपस्थित रहे। उनके साथ फाइनेंस चेयरमैन डॉ विभु साहनी। मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ संजय जैन। सेंट्रल मेंबर डॉ नीरज उपमन्यु। सेंट्रल मेंबर डॉ शैलेश जैन। तथा सेज यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डॉ प्रशांत जैन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनोवेटिव प्रोडक्ट प्रस्तुतियाँ। रिसर्च पोस्टर प्रदर्शन। और पेटेंट आधारित प्रोजेक्ट्स ने छात्रों की प्रतिभा को उजागर करने का अवसर दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं पर काम करने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान पैनल चर्चा और विशेषज्ञों के मुख्य वक्तव्यों ने सभी प्रतिभागियों को गहराई से सोचने और नए विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों को यह समझने में मदद की कि तकनीकी हस्तांतरण कैसे किया जाता है और नियामक प्रक्रियाएँ किस प्रकार कार्य करती हैं। साथ ही कौशल विकास और उभरते करियर अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण उद्घाटन सत्र में प्राप्त वर्चुअल संदेश रहा। जिसमें मध्यप्रदेश शासन के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का संदेश शामिल था। इस संदेश ने विद्यार्थियों और आयोजकों का उत्साह और बढ़ा दिया।

    समापन समारोह में सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया। उनके नवाचार और प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े सभी लोगों ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की। चांसलर इंजीनियर संजीव अग्रवाल ने भी इस आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया और इसे शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    फार्मा अन्वेषण 2026 ने यह सिद्ध किया कि यदि शिक्षा संस्थान और उद्योग मिलकर कार्य करें तो नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति संभव है। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए सीखने का मंच बना बल्कि फार्मेसी शिक्षा के भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी साबित हुआ।

  • इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक जारी


    नई दिल्ली। 17 फरवरी 2026 को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित केसबुक का विमोचन किया गया। यह पहल इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूएन वीमेन की संयुक्त पहल है जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसका समर्थन किया। इस केसबुक में ग्लोबल साउथ के 23 चुनिंदा एआई समाधानों को शामिल किया गया है जो महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण में ठोस प्रभाव दिखाते हैं।

    विमोचन समारोह में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक और यूएन वीमेन की एशिया पैसिफिक क्षेत्रीय निदेशक सुश्री क्रिस्टीन अरब उपस्थित थीं।

    इस केसबुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली। 20 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जनएआई एक्सपो में यूएन वीमेन के स्टॉल का दौरा किया। इस अवसर पर महासचिव ने वी एसटीईएम परियोजना के तहत ग्रामीण युवाओं को एसटीईएम करियर में प्रशिक्षित करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह परियोजना मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों यूरोपीय संघ माइक्रोन नोकिया और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है।

    महिलाओं ने बताया कि वे एआई का उपयोग करके नए कौशल सीख रही हैं शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही हैं और रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। केसबुक की एक प्रति यूएन वीमेन की एआई कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह ने महासचिव को भेंट की। अवर महासचिव और प्रौद्योगिकी मामलों पर महासचिव के दूत अमनदीप सिंह गिल भी उपस्थित थे।

    यह केसबुक 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 आवेदनों में से चयनित 23 एआई समाधानों को शामिल करती है। चयन प्रक्रिया बहु स्तरीय मूल्यांकन पर आधारित थी जिसमें उपयोगिता लैंगिक प्रभाव और साक्ष्य आधारित परिणामों को परखा गया। इसमें स्वास्थ्य आर्थिक सशक्तिकरण डिजिटल सुरक्षा जलवायु लचीलापन न्याय शिक्षा और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

    केसबुक नीति निर्माताओं शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं के लिए व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई सिस्टम नैतिक समावेशी और महिलाओं की वास्तविकताओं के प्रति उत्तरदायी हों। यह प्रकाशन भारत के लोकतांत्रिक एआई प्रसार दृष्टिकोण और इंडियाएआई मिशन के लिंग संवेदनशील सिद्धांतों को भी सुदृढ़ करता है।

    इस पहल में भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की प्रभावी साझेदारी दिखाई देती है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रणनीतिक दिशा प्रदान की यूएन वीमेन ने वैश्विक समन्वय और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की।

    इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच हुआ। इसका उद्देश्य जिम्मेदार समावेशी और प्रभावशाली एआई को प्रोत्साहित करना था जिससे भारत वैश्विक एआई शासन ढांचे के सह निर्माता के रूप में स्थापित हो सके।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।