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  • सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की बरसी से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। लेह में 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटना में मारे गए लोगों की याद में कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान वांगचुक ने कहा कि आने वाले दिनों में लद्दाख की लंबित मांगों और पिछले साल की घटना की जवाबदेही को लेकर कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    वांगचुक के मुताबिक 24 अगस्त से 24 सितंबर तक का समय पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए रखा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती कार्यक्रम को सीमित रखा गया है, क्योंकि इस समय दलाई लामा लद्दाख में हैं। उनके लद्दाख से जाने के बाद बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू करने का संकेत दिया गया है।

    24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने समेत कई मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया था। इस दौरान सरकारी और राजनीतिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, वाहनों में आगजनी हुई और सुरक्षा बलों के साथ झड़प की स्थिति बनी। हिंसा के दौरान कई लोगों की मौत हुई और सुरक्षा बलों के जवान भी घायल हुए थे।

    इस घटना से पहले वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में लद्दाख को राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र के प्रशासन में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाना शामिल रहा है।

    24 सितंबर की घटना के बाद केंद्र सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग का उद्देश्य हिंसा की परिस्थितियों, घटनाक्रम और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करना है। वांगचुक और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की प्रमुख मांग अब यह है कि आयोग की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाए।

    वांगचुक ने कहा है कि घटना को एक साल पूरा होने के करीब है, लेकिन जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 24 सितंबर को परिस्थितियां किस तरह बिगड़ीं और हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई के पीछे क्या घटनाक्रम रहा।

    लद्दाख की राजनीतिक मांगों को लेकर केंद्र और क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी जारी रही है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लंबे समय से राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची जैसी मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं। मई 2026 में भी केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

    मई की बातचीत में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर चर्चा हुई थी। बातचीत के दौरान कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार सामने आया, लेकिन राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग अब भी आंदोलनकारी पक्ष के प्रमुख मुद्दों में बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत को लेकर भी उम्मीद बनी हुई है।

    सोनम वांगचुक की भूमिका इस आंदोलन में महत्वपूर्ण रही है। सितंबर 2025 की घटनाओं के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत रद्द कर दी, जिसके बाद वह दोबारा सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय हुए। इसके बाद उन्होंने बातचीत और शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

    अब सितंबर की बरसी के दौरान लद्दाख में होने वाले कार्यक्रमों पर सबकी नजर रहेगी। वांगचुक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कैंडल मार्च केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप बड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने का रास्ता शांतिपूर्ण होना चाहिए। जांच रिपोर्ट, राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के केंद्र में रहेंगे।

  • पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने लोकसभा में अंतिम रिपोर्ट पेश की

    पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने लोकसभा में अंतिम रिपोर्ट पेश की

    नई दिल्ली ।हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश कर दी। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सिद्ध पाया है। रिपोर्ट में अघोषित नकदी, साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही तथा जांच के दौरान दिए गए टालमटोल वाले और असंतोषजनक जवाब से जुड़े आरोप शामिल हैं।

    जांच समिति ने मामले से संबंधित कार्यवाही का रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य सक्षम प्राधिकारी को भी सौंप दिए हैं। अब समिति की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच का औपचारिक चरण पूरा हो गया है।

    पहले आरोप के तहत नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले की जांच की गई। समिति के अनुसार, वहां 500 रुपये के नोटों के रूप में रखी गई नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।

    समिति ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अघोषित नकदी से संबंधित आरोप को सिद्ध माना। जांच में नकदी के संबंध में स्पष्ट और संतोषजनक जवाब का अभाव महत्वपूर्ण आधारों में शामिल रहा। इस निष्कर्ष के साथ समिति ने पहले आरोप को अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रमाणित माना है।

    दूसरा आरोप मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण में कथित लापरवाही से संबंधित था। समिति ने पाया कि संबंधित स्टोररूम की स्थिति को कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले बदले जाने की बात सामने आई। इसके अलावा बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने को लेकर भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिल सका।

    समिति ने इस स्थिति को साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता के रूप में देखा। हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही का यह मतलब नहीं है कि जज ने स्वयं किसी नोट को हटाया था। आरोप का आधार साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित रखने में हुई विफलता से जुड़ा रहा।

    तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और जांच के दौरान उनके रुख से संबंधित था। समिति ने विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार, उनके जवाब में अपेक्षित स्पष्टता का अभाव था और उनका रुख टालमटोल वाला पाया गया।

    समिति ने स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस आरोप को भी सिद्ध माना। उसके अनुसार, मामले में जज से संस्थागत जिम्मेदारी के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक जवाब की अपेक्षा थी, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण उस कसौटी पर खरा नहीं उतरा।

    तीनों आरोपों के सिद्ध पाए जाने के बाद समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट संबंधित प्रक्रिया के लिए सक्षम प्राधिकारी को सौंप दी है। अब रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी तथा संस्थागत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अंतिम कदम संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होंगे।

  • EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'

    EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) की व्यापारिक नीतियों की औपचारिक जांच शुरू करने का ऐलान किया है। ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने गूगल, एप्पल, मेटा और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों पर अरबों डॉलर के जुर्माने लगाकर उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है।

    यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा (एंटीट्रस्ट) नियमों के उल्लंघन के मामले में गूगल पर 89 करोड़ यूरो (करीब एक अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया था। ईयू का आरोप है कि गूगल ने अपने प्ले स्टोर और सर्च इंजन के जरिए अपनी सेवाओं और ऐप्स को प्राथमिकता देकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया।

    ‘अमेरिका किसी का गुल्लक नहीं’
    डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने पहले भी यूरोपीय संघ को अमेरिकी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं है। हम अपनी कंपनियों को लूटने नहीं देंगे।”

    ट्रंप ने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ का रवैया “अवैध और अनैतिक” है और इसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कंपनियों से वसूले गए जुर्माने अंततः वापस लिए जाएंगे।

    टैरिफ बढ़ाने के भी दिए संकेत
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि उनकी सरकार जल्द ही यूरोपीय संघ से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। उनका कहना है कि अमेरिकी कारोबारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

    पहले भी बढ़ाए जा चुके हैं आयात शुल्क
    ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब व्हाइट हाउस हाल ही में 60 से अधिक देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर दोहरे अंकों वाले नए टैरिफ लागू करने का ऐलान कर चुका है। अमेरिका का आरोप है कि कई देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों पर प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं।

    ये नए शुल्क पहले से लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगे। ट्रंप प्रशासन इन कदमों को ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत आगे बढ़ा रहा है, जो अमेरिका को किसी देश की कथित अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक नीतियों के जवाब में आयात शुल्क और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।

  • कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई

    कार्य परिषद का सख्त फैसला, उत्पीड़न मामले में डॉ. नईम पर गिरी गाज; प्रशासनिक अधिकारी की वेतनवृद्धि भी रोकी गई


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के उत्पीड़न के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद समाज कार्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच में लगाए गए आरोप सही पाए गए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

    विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान महिला और पुरुष शोधार्थियों द्वारा डॉ. मोहम्मद नईम के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट परिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसके अलावा शिक्षक आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले की रिपोर्ट पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    कार्य परिषद ने उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. नईम की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकृति प्रदान की। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षित, पारदर्शी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से संबंधित एक अन्य जांच रिपोर्ट भी रखी गई। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारी पुष्पा गौतम के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी एक वर्ष की वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। परिषद ने माना कि संस्थान की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना जरूरी है।

    कार्य परिषद की बैठक में आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। परिषद ने 13 अगस्त को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रसिद्ध चित्रकार दिनेश सोनी को मानद डी.लिट. उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा जाएगा।

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने बताया कि कार्य परिषद के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में डॉ. मोहम्मद नईम के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति को स्वीकार किया गया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी के मामले में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया।

    विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में छात्रों और शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने संकेत दिया कि भविष्य में भी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन, जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    नई दिल्ली । मणिपुर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे सेवानिवृत्त जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद न्यायिक आचार संहिता और संवैधानिक पदों की गरिमा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आरोप है कि न्यायिक सेवा में रहते हुए उनका नाम एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा रहा। मामले की जांच के बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने संबंधित एलपीजी डीलरशिप को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल का नाम ‘किचन फ्लेम’ नामक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा होने का आरोप लगाया गया है। कहा गया कि न्यायिक पद पर रहते हुए भी एजेंसी का संचालन उनके नाम से जारी रहा। न्यायिक सेवा के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या संविदात्मक संबंधों को लेकर लागू आचार संहिता के संदर्भ में इस मामले को गंभीर माना जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान बीपीसीएल ने संबंधित तथ्यों की समीक्षा की। कंपनी के अनुसार, संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी व्यवसाय से जुड़े रहने के आरोपों को ध्यान में रखते हुए संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने पर कंपनी ने छह जुलाई को डीलरशिप रद्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद संबंधित एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया।

    बताया गया है कि यह मामला सबसे पहले एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की पत्नी द्वारा मालिकाना अधिकार को लेकर उठाए गए विवाद के बाद सामने आया। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के दौरान यह मुद्दा व्यापक रूप से चर्चा में आया। शिकायत मिलने के बाद कंपनी ने अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की।

    न्यायिक आचार संहिता के अंतर्गत यह स्पष्ट माना जाता है कि किसी भी संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी व्यापार, व्यवसाय या लाभकारी गतिविधि से नहीं जुड़ना चाहिए। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना है। इसी सिद्धांत के आधार पर न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक हितों से दूर रहें।

    बताया गया कि वर्ष 2025 में कंपनी को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। कंपनी का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण नियमानुसार डीलरशिप समाप्त करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस पूरे मामले में न्यायिक या अन्य सक्षम प्राधिकरण की ओर से आगे की किसी कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों में आचार संहिता का पालन संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और नियमों के अनुरूप कार्रवाई को न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जोड़कर देखा जाता है। फिलहाल यह मामला न्यायिक नैतिकता और संवैधानिक पदों से जुड़े आचरण को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • भोपाल: मिलन स्वीट्स पर इनकम टैक्स की रेड, टैक्स चोरी के शक में दस्तावेज खंगाले, संचालक से पूछताछ जारी

    भोपाल: मिलन स्वीट्स पर इनकम टैक्स की रेड, टैक्स चोरी के शक में दस्तावेज खंगाले, संचालक से पूछताछ जारी


     

    भोपाल भोपाल के एमपी नगर स्थित प्रतिष्ठित मिलन स्वीट्स और रेस्टोरेंट पर रविवार सुबह इनकम टैक्स विभाग की टीम ने अचानक सर्वे कार्रवाई की, जिससे रेस्टोरेंट में हड़कंप मच गया। टीम ने टैक्स चोरी की आशंका को लेकर रेस्टोरेंट में मौजूद दस्तावेजों और रिटर्न से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले और संचालक से पूछताछ की। जानकारी के मुताबिक, टीम इस जांच में कर चोरी के सबूत जुटाने में जुटी है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, आईटी विभाग की टीम के आने के बाद रेस्टोरेंट में अफरातफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। इनकम टैक्स विभाग का उद्देश्य इस कार्रवाई के माध्यम से कर से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की आर्थिक गड़बड़ी पर नज़र रखना है।

    गौरतलब है कि जून 2024 में भी मिलन स्वीट्स में भीषण आग लगी थी। आग पर काबू पाने के लिए एक दर्जन से अधिक दमकल की गाड़ियां मौके पर आई थीं और लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। इस घटना में रेस्टोरेंट को बड़ा नुकसान हुआ था, जिसमें मिठाइयां, अन्य खाद्य सामग्री और कई दस्तावेज जलकर खाक हो गए थे।

    इस बार की सर्वे कार्रवाई में आईटी टीम ने वही दस्तावेज और रिटर्न रिकॉर्ड खंगाले, जो पहले आग में नष्ट हो चुके थे, ताकि वित्तीय जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और सटीक हो सके। टीम रेस्टोरेंट संचालक से विस्तृत पूछताछ कर रही है और कर चोरी या किसी भी नियम उल्लंघन की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है ताकि किसी तरह की अफरातफरी या सुरक्षा संबंधी समस्या न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रतिष्ठित रेस्टोरेंटों में भी अगर टैक्स नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो विभाग कठोर कार्रवाई करेगा।

    इस मामले में कर विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार इन्वेस्टिगेशन और दस्तावेज़ जांच से न केवल कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि अन्य व्यापारियों के लिए भी नैतिक और कानूनी उदाहरण स्थापित होगा।

    यदि जांच में सबूत मिलते हैं, तो मिलन स्वीट्स संचालक के खिलाफ विभाग आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल, आईटी टीम पूरे रेस्टोरेंट में दस्तावेजों की पड़ताल और पूछताछ जारी रखे हुए है, ताकि सभी वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन हो सके और कर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।