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  • आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    नई दिल्ली । आम का फल गर्मियों में लगभग हर घर की पसंद होता है, लेकिन इसके साथ आने वाले आम के पत्तों को अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। भारतीय संस्कृति में आम के पत्तों का इस्तेमाल पूजा-पाठ, शुभ कार्यों, गृह प्रवेश और त्योहारों के दौरान तोरण बनाने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, इनका उपयोग केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है। घर में सजावट से लेकर बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू इस्तेमाल तक आम के पत्ते कई तरह से उपयोगी हो सकते हैं।

    आम के पत्तों में पॉलीफेनॉल्स और टेरपेनॉइड्स जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों की मौजूदगी का अध्ययन किया गया है। यही वजह है कि आम की पत्तियों और उनके अर्क को लेकर त्वचा, ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म से जुड़े संभावित फायदों पर भी शोध हुआ है। हालांकि, इनमें से कई दावे शुरुआती या पशु-अध्ययनों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं होगा।

    त्वचा की देखभाल के लिए भी आम के पत्तों का पारंपरिक इस्तेमाल देखने को मिलता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक त्वचा को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। आम के पत्तों से बने पाउडर या अन्य घरेलू नुस्खों को त्वचा पर लगाने की सलाह कई जगह दी जाती है, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सीधे इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    आम के पत्तों को ब्लड शुगर और पाचन के लिए भी पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। कुछ पशु अध्ययनों में आम की कोमल पत्तियों के अर्क में मौजूद यौगिकों के संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। इसी तरह आम के पत्तों के अर्क में मौजूद मैंगीफेरिन जैसे यौगिकों को मेटाबॉलिज्म और फैट से जुड़े प्रभावों के संदर्भ में भी शोधा गया है। लेकिन वजन घटाने या डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए आम के पत्तों की चाय या काढ़े पर निर्भर रहना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं है। खासकर डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को किसी भी हर्बल सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    बालों के लिए भी आम के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों को संभावित रूप से उपयोगी माना जाता है। हालांकि, बालों की ग्रोथ या झड़ना रोकने के संबंध में मजबूत मानव-आधारित प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना बेहतर है।

    घर के कामों में आम के पत्तों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत आसान है। ताजे पत्तों को फूलों के साथ पानी से भरे बड़े कटोरे में सजाकर प्राकृतिक डेकोरेशन तैयार की जा सकती है। त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में इनसे बना तोरण घर को पारंपरिक लुक देता है। वहीं, सूखे आम के पत्तों को सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय कंपोस्ट में शामिल किया जा सकता है। इनके धीरे-धीरे सड़ने से जैविक खाद तैयार होती है, जिसका इस्तेमाल पौधों और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में किया जा सकता है।

    आम के पत्तों को लेकर यह भी पारंपरिक धारणा है कि इन्हें जलाने से निकलने वाला धुआं मच्छरों और छोटे कीट-पतंगों को दूर रख सकता है। हालांकि, घर के अंदर पत्ते जलाने से धुआं और सूक्ष्म कण पैदा होते हैं, जो सांस के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए कीड़े भगाने के लिए धुआं करने के बजाय सुरक्षित और प्रमाणित उपायों को प्राथमिकता देना बेहतर है। इस तरह आम के पत्ते पूजा की सामग्री से आगे बढ़कर सजावट, बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू उपयोगों में काम आ सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ ही देखना चाहिए।

  • ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के दौर में जहां मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बेजुबान जानवरों के सामने भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ब्रिटेन में तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण काटने वाले जहरीले कीड़ों की तादाद में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इन मक्खियों और कीड़ों के लगातार हमलों के कारण जानवरों की त्वचा पर दर्दनाक घाव, जलन और खुजली की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस विकट स्थिति से रेस्क्यू किए गए गधों को बचाने के लिए ब्रिटेन के डेवोन स्थित द डॉन्की सैंक्चुअरी ने एक बेहद व्यावहारिक और अनोखा तरीका अपनाया है। संस्था ने कीड़ों के सीधे संपर्क को रोकने के लिए लगभग चालीस गधों को विशेष रूप से तैयार किए गए ढीले पायजामे, लेगिंग्स और कॉटन के वस्त्र पहनाना शुरू किया है। पहली नज़र में यह पहल भले ही कौतूहल पैदा करती हो, लेकिन इसके पीछे की वैज्ञानिक सोच और संवेदनशीलता की व्यापक स्तर पर सराहना हो रही है।

    इस अनूठे सुरक्षा उपाय के विकास की प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध रही है। शुरुआत में संस्था के विशेषज्ञों ने जानवरों के पैरों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक मोजे पहनाने का प्रयास किया था, लेकिन खेतों में निरंतर विचरण के कारण मोजे बार-बार फिसल कर निकल जाते थे। इसके बाद कर्मचारियों ने बड़े आकार के पायजामे, मैटरनिटी ट्राउज़र और लेगिंग्स का उपयोग कर नए सिरे से परीक्षण किया। कपड़े का आवरण इतना आरामदायक और ढीला रखा गया है कि जानवरों को चलने-फिरने, घास चरने और दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ये वस्त्र कीड़ों के डंक और गधों की संवेद्य त्वचा के बीच एक अभेद्य भौतिक अवरोधक का कार्य करते हैं। रासायनिक कीटनाशक स्प्रे के बार-बार छिड़काव की तुलना में यह उपाय अधिक दीर्घकालिक और सुरक्षित सिद्ध हो रहा है।

    संस्था द्वारा गधों के शारीरिक नाप और आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से तैयार किए गए इन परिधानों को ‘डॉन-गेरी’ नाम दिया गया है, जो ‘डॉन्की’ और ‘डंगरी’ शब्दों का एक रचनात्मक संयोजन है। यह प्रयोग केवल जानवरों के स्वास्थ्य संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। कपड़ों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संस्था ने पुराने और अप्रयुक्त सूती कपड़ों के दान की अपील की है। इस अभियान में स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज की री-यूज शॉप ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई है। छात्रों और स्थानीय नागरिकों द्वारा दान किए गए वस्त्रों को पुनर्चक्रित कर बेजुबान जानवरों के लिए सुरक्षात्मक पोशाक में परिवर्तित किया जा रहा है।

    वर्ष 1969 में स्थापित द डॉन्की सैंक्चुअरी वैश्विक स्तर पर उपेक्षित और प्रताड़ित जानवरों के कल्याण के लिए समर्पित एक प्रमुख वैश्विक संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। संस्था का मानना है कि जानवरों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हमेशा अत्यधिक जटिल या खर्चीली तकनीकों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और नवोन्मेषी सोच से बड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जा सकता है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बेजुबान गधों को कीड़ों के जानलेवा संक्रमण और असहनीय दर्द से मुक्त रखने वाली यह मानवीय पहल वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पशु कल्याण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।