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  • दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा जांच और सरकारी निरीक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में इमारतों से जुड़े हादसों के बाद ऑडिट के आदेश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बाद निरीक्षण के नाम पर कथित वसूली का सिलसिला शुरू हो जाता है। उन्होंने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।

    भारद्वाज के मुताबिक, दिल्ली में जब भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तब इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच और ऑडिट कराने के निर्देश दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बाद कुछ विभागों के अधिकारी निरीक्षण प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच और ऑडिट के नाम पर कारोबारियों से अवैध रूप से पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    आप नेता ने कहा कि यह समस्या केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। उन्होंने नगर निगम दिल्ली और पुलिस पर पहले से लगते रहे भ्रष्टाचार तथा वसूली के आरोपों का उल्लेख करते हुए अग्निशमन विभाग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि होटल, रेस्टोरेंट, जिम, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निरीक्षण के दौरान कथित वसूली का सामना करना पड़ रहा है।

    भारद्वाज ने इस मुद्दे को कारोबारियों के सामने आने वाली गंभीर समस्या के रूप में पेश किया। उनके अनुसार, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। नियमित निरीक्षण और ऑडिट लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इन्हीं प्रक्रियाओं का इस्तेमाल रिश्वत लेने के लिए किया जाता है, तो कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और सरकारी व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा कमजोर होता है।

    उन्होंने व्यापारी समुदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वर्ग ऐतिहासिक रूप से जनसंघ और भाजपा का समर्थक रहा है। इसके बावजूद, उनके आरोप के अनुसार, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर व्यापारियों की परेशानियां बढ़ रही हैं। भारद्वाज ने दिल्ली की भाजपा सरकार को घेरते हुए ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर एक ही राजनीतिक दल के होने के बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत बनी हुई है।

    आप नेता ने यह सवाल भी उठाया कि जब हर बड़ी दुर्घटना के बाद इमारतों के ऑडिट और निरीक्षण के आदेश दिए जाते हैं, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देते। उन्होंने सरकारी विभागों की जवाबदेही और निरीक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया।

    दिल्ली में भवन सुरक्षा का मुद्दा सार्वजनिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, जिम और कोचिंग सेंटर जैसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए नियमित जांच के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई भी जरूरी है। वहीं, निरीक्षण प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    फिलहाल, सौरभ भारद्वाज के बयान में लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों के समर्थन में किसी जांच के निष्कर्ष या संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।

  • बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    बैरागढ़ ब्रिज के निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां, मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारियों को 15 दिन का दिया समय

    मध्यप्रदेश: के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में निर्माणाधीन ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और आसपास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में सामने आई लापरवाही को लेकर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान विधायक रामेश्वर शर्मा भी मंत्री के साथ मौजूद रहे। मंत्री ने निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास की सड़क व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि कुछ स्थानों पर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है और स्ट्रीट लाइट भी बंद हैं। निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल और आसपास की सभी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों की समयसीमा दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मंत्री ने निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित कंपनी पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी बेहतर तरीके से करने के लिए अधिकारियों को कहा गया।

    बैरागढ़ में निर्माणाधीन ब्रिज के आसपास यातायात और आम लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया। मंत्री ने कहा कि निर्माण स्थल पर काम के दौरान जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन होना चाहिए। सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान सिविल अस्पताल के पास फैली अव्यवस्था का मुद्दा भी सामने आया। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को अस्पताल के आसपास की व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में लोगों को होने वाली असुविधाओं को देखते हुए आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

    मंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की समयसीमा को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली। जिन कार्यों को अक्टूबर तक पूरा किए जाने की उम्मीद थी, उनके अब तक अधूरे रहने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों के लिए समयसीमा निर्धारित है, उन्हें तय अवधि में पूरा करने के लिए प्रभावी निगरानी की जाए।

    राकेश सिंह ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित कंपनी और अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा कराने पर जोर दिया गया।

    बैरागढ़ ब्रिज का निर्माण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माण की गति के साथ-साथ सड़क, रोशनी और सुरक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि निरीक्षण में सामने आई कमियों का समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित करें।

  • भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी समेत तीन लोग फंस गए। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद होटल की लिफ्ट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई, जिसमें कई कमियां सामने आईं।

    यह घटना अरेरा हिल्स स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में रविवार सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए होटल पहुंची थीं। उनके साथ एक डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का सदस्य भी था।

    करीब 10:40 बजे तीनों लिफ्ट में सवार हुए। इसी दौरान लिफ्ट बीच में रुक गई और सभी अंदर फंस गए। करीब 20 से 25 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने के बाद मदद के लिए प्रयास किए गए। लिफ्ट में उपलब्ध संपर्क नंबर पर फोन किया गया, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद महिला ने अपने पति को घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलने के बाद नगर निगम का फायर ब्रिगेड, विद्युत विभाग और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त अमला होटल पहुंचा। टीम ने लिफ्ट खोलकर अंदर फंसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद अधिकारियों ने केवल घटना की जांच तक सीमित न रहते हुए होटल में लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण शुरू किया।

    जांच में सामने आया कि संबंधित लिफ्ट में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस यानी ARD की व्यवस्था नहीं थी। यह उपकरण बिजली जाने या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से नजदीकी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है।

    लिफ्ट के नियमित रखरखाव को लेकर भी कमी मिली। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि 31 अगस्त 2026 को निर्धारित मासिक मेंटेनेंस नहीं कराया गया था। जिस लिफ्ट में लोग फंसे थे, उसका पिछला निर्धारित निरीक्षण 29 मई 2026 को हुआ था।

    नगर निगम की टीम ने लिफ्ट के अलावा होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और एग्जिट गेट की स्थिति की जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।

    इन कमियों के सामने आने के बाद नगर निगम ने होटल की तीन लिफ्टों को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही होटल के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।

    नगर निगम के अनुसार होटल का पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद लिफ्ट रखरखाव और फायर सेफ्टी से संबंधित कमियां मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

    घटना के बाद भोपाल में अन्य बहुमंजिला इमारतों, होटलों और अस्पतालों की लिफ्टों की जांच कराने की तैयारी भी की गई है। इस अभियान में लिफ्टों के नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षा उपकरणों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

    नगर निगम प्रशासन ने संबंधित संस्थानों को लिफ्टों का समय पर रखरखाव कराने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े 592 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, लाइसेंस और रसोई की स्वच्छता से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं। कार्रवाई के बाद 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।

    नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह अभियान ‘फूड सेफ्टी वीक’ के तहत चलाया गया। इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा से पहले शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों की व्यवस्था और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच करना था। अभियान के दायरे में होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजारों में संचालित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को शामिल किया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण, निर्माण, बिक्री, गुणवत्ता और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई जैसे कई पहलुओं की जांच की।

    निरीक्षण के दौरान करीब 1,224 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट किया गया। अधिकारियों को कई स्थानों पर ऐसी खाद्य सामग्री मिली, जिसे खाने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। कुछ प्रतिष्ठानों में भंडारित छेना में फफूंद पाई गई, जबकि कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खराब मांस बरामद हुआ। एक बड़े स्वीट शॉप के रेफ्रिजरेटर के अंदर कॉकरोच मिलने की बात भी सामने आई। इन स्थितियों को देखते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जांच में लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों के पास खाद्य सामग्री बेचने के लिए रिटेल लाइसेंस मौजूद था, लेकिन जरूरी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था। इसका मतलब था कि संबंधित प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए अधिकृत थे, लेकिन उसके निर्माण से जुड़ी आवश्यक अनुमति उनके पास नहीं थी। अधिकारियों ने ऐसी कमियों को भी निरीक्षण और कार्रवाई का हिस्सा बनाया।

    नगर निगम प्रशासन की ओर से बताया गया कि निलंबित किए गए प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन करना होगा। यदि संबंधित प्रतिष्ठान आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं और कमियों को दूर करते हैं, तो उनके लाइसेंस की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य कारोबारियों को नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार बनाना भी है।

    नगर निगम की म्यूनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटर स्मिता पांडे ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पहले लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई नियमित रूप से नहीं की जाती थी, लेकिन अब विभाग को ऐसी कार्रवाई करने की पूरी छूट है। उनके अनुसार शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया गया।

    दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का रुख करते हैं। ऐसे में त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम को उम्मीद है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण और रसोई की स्वच्छता को लेकर अधिक सावधानी बरतेंगे।

  • दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    मध्य प्रदेश: के दमोह जिले के हटा विकासखंड में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चंडी जी वार्ड स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र में सोमवार को बच्चों के लिए तैयार की गई आलू की सब्जी में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। घटना के बाद बच्चों को दिया जाने वाला खाना वापस भेज दिया गया।

    बताया गया कि सोमवार दोपहर जब बच्चों के परिजन उन्हें लेकर आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे, उसी दौरान भोजन की जांच करने पर सब्जी में कीड़े दिखाई दिए। बच्चों की माताओं ने तत्काल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की मांग की।

    बच्चे को केंद्र लेकर पहुंचीं दीपा प्रजापति ने बताया कि उनका बच्चा नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताते हुए कहा कि बच्चों को साफ और अच्छा खाना मिलना जरूरी है। सोमवार को आलू की सब्जी में इल्ली मिलने के बाद उन्होंने चिंता जताई कि यदि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य और विकास पर इसका क्या असर पड़ेगा।

    दीपा ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही बच्चों के अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन जाती है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    एक अन्य महिला अनीता प्रजापति ने भी भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत की। उनका कहना है कि इस तरह की समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी आंगनवाड़ी केंद्र में दिए जाने वाले भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आ चुकी है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।

    मामला सामने आने के बाद केंद्र में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन वापस भेज दिया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच किस स्तर पर की जाती है। छोटे बच्चों के लिए तैयार भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन मां लक्ष्मी स्वसहायता समूह की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। भोजन तैयार करने और केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में गुणवत्ता तथा स्वच्छता के मानकों का पालन होना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में कीड़े भोजन में किस स्तर पर पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    हटा के एसडीएम राकेश कुसरे ने मामले की जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उस समय वह बैठक में थे और पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही किस स्तर पर हुई।

    घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अब परिजनों को प्रशासन की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में रेलवे आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित खैराड़ा-मानिकपुर रेलवे दोहरीकरण परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करने तथा गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण दल में झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुरुद्ध कुमार, मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त प्रंजीव सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजीत यादव तथा प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता संजीत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

    संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीम ने खैराड़ा से मानिकपुर रेलखंड के अंतर्गत आने वाले खुरहंड, अतर्रा और बदौसा रेलवे स्टेशनों का दौरा किया। यहां रेलवे भवनों, प्लेटफॉर्मों, नई रेल लाइनों और अन्य निर्माणाधीन संरचनाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुधार संबंधी सुझाव दिए।

    निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना से जुड़े प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं और सभी गतिविधियां तय समयसीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य ही परियोजना की सफलता का आधार होगा।

    रेलवे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोहरीकरण कार्य पूरा होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुचारु और तेज होगा। वर्तमान में एकल लाइन होने के कारण कई स्थानों पर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है। दोहरीकरण के बाद ऐसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

    इस परियोजना के पूरा होने से यात्रियों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी गति मिलेगी। रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था में सुधार होगा और परिचालन अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकेगा। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलने की संभावना है।

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के परिवहन ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा, जबकि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्राप्त होगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निर्धारित समय में परियोजना पूरी होने के बाद यह रेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत उपलब्धि साबित होगा।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    नई दिल्ली । दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के राजस्थान स्थित दौसा खंड पर लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के वर्षों में इस हिस्से पर दुर्घटनाओं और मौतों की बढ़ती संख्या के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी स्वयं मौके का निरीक्षण करने जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर मौजूद संभावित तकनीकी और यातायात संबंधी कमियों का आकलन करना तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुधारों की दिशा तय करना है।

    दौसा जिले की सीमा में आने वाले एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 35 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में इस मार्ग पर 61 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    हाल ही में इसी मार्ग पर हुई एक भीषण बस दुर्घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि मार्ग पर दिशा-सूचक संकेत स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे चल रहे वाहन के चालक को सही निकास बिंदु समझने में परेशानी हुई। इसके बाद वाहन की गति अचानक कम होने से पीछे आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।

    प्रारंभिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में लगे दिशा-सूचक बोर्ड तेज गति से चल रहे वाहनों के चालकों के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं। कई स्थानों पर टर्न से पहले लगाए गए संकेत छोटे दिखाई देते हैं, जिससे चालक समय रहते सही लेन नहीं चुन पाते। कुछ मामलों में वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति कम कर देते हैं या वापस मुड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल चौड़ी सड़क बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साइनेज, पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत, स्पष्ट लेन मार्गदर्शन और सुरक्षित निकास व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि संकेत समय पर और स्पष्ट दिखाई दें तो चालक पहले ही आवश्यक निर्णय ले सकते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।

    केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के दौरान सड़क की डिजाइन, साइनेज, लेन प्रबंधन, निकास बिंदुओं और अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके आधार पर आवश्यक सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या कम हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंजीनियरिंग, स्पष्ट संकेतक, नियमित सुरक्षा ऑडिट और यातायात नियमों का सख्ती से पालन ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। गडकरी के इस निरीक्षण से एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई

    धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी भोजशाला का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

    सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के साथ हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे।

    भोजशाला मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं। 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में सर्वेक्षण, जांच और सीमित उत्खनन किया। टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् और रसायनविद् समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पहले ही रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

    एचएसआई रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत शिलालेख, नागरी लिपि और अरबी-फारसी लेख शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। साथ ही 12वीं–16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख हैं। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल के संकेत भी देखे गए।

    रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में रहा। ब्रिटिश काल से अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया है कि वे 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जानी है। ट्रांसफर के कारण पहले जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में चली सुनवाई अब फिर से इंदौर खंडपीठ पर आ गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश कर दी जाएंगी।

    मुख्य बिंदु: 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जस्टिस भोजशाला का निरीक्षण करेंगे, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, ASI ने 100 दिन तक सर्वे किया, 12वीं से 20वीं सदी के शिलालेख मिले।