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  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    बुंदेलखंड की रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत, खैराड़ा-मानिकपुर डबल लाइन परियोजना का उच्च अधिकारियों ने लिया जायजा

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में रेलवे आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित खैराड़ा-मानिकपुर रेलवे दोहरीकरण परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करने तथा गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण दल में झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुरुद्ध कुमार, मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त प्रंजीव सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजीत यादव तथा प्रमुख मुख्य विद्युत अभियंता संजीत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

    संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीम ने खैराड़ा से मानिकपुर रेलखंड के अंतर्गत आने वाले खुरहंड, अतर्रा और बदौसा रेलवे स्टेशनों का दौरा किया। यहां रेलवे भवनों, प्लेटफॉर्मों, नई रेल लाइनों और अन्य निर्माणाधीन संरचनाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुधार संबंधी सुझाव दिए।

    निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना से जुड़े प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं और सभी गतिविधियां तय समयसीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य ही परियोजना की सफलता का आधार होगा।

    रेलवे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोहरीकरण कार्य पूरा होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुचारु और तेज होगा। वर्तमान में एकल लाइन होने के कारण कई स्थानों पर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है। दोहरीकरण के बाद ऐसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

    इस परियोजना के पूरा होने से यात्रियों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी गति मिलेगी। रेल यातायात की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था में सुधार होगा और परिचालन अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकेगा। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलने की संभावना है।

    रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के परिवहन ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा, जबकि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्राप्त होगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निर्धारित समय में परियोजना पूरी होने के बाद यह रेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत उपलब्धि साबित होगा।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    नई दिल्ली । दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के राजस्थान स्थित दौसा खंड पर लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के वर्षों में इस हिस्से पर दुर्घटनाओं और मौतों की बढ़ती संख्या के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी स्वयं मौके का निरीक्षण करने जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर मौजूद संभावित तकनीकी और यातायात संबंधी कमियों का आकलन करना तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुधारों की दिशा तय करना है।

    दौसा जिले की सीमा में आने वाले एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 35 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में इस मार्ग पर 61 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    हाल ही में इसी मार्ग पर हुई एक भीषण बस दुर्घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि मार्ग पर दिशा-सूचक संकेत स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे चल रहे वाहन के चालक को सही निकास बिंदु समझने में परेशानी हुई। इसके बाद वाहन की गति अचानक कम होने से पीछे आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।

    प्रारंभिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में लगे दिशा-सूचक बोर्ड तेज गति से चल रहे वाहनों के चालकों के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं। कई स्थानों पर टर्न से पहले लगाए गए संकेत छोटे दिखाई देते हैं, जिससे चालक समय रहते सही लेन नहीं चुन पाते। कुछ मामलों में वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति कम कर देते हैं या वापस मुड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल चौड़ी सड़क बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साइनेज, पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत, स्पष्ट लेन मार्गदर्शन और सुरक्षित निकास व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि संकेत समय पर और स्पष्ट दिखाई दें तो चालक पहले ही आवश्यक निर्णय ले सकते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।

    केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के दौरान सड़क की डिजाइन, साइनेज, लेन प्रबंधन, निकास बिंदुओं और अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके आधार पर आवश्यक सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या कम हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंजीनियरिंग, स्पष्ट संकेतक, नियमित सुरक्षा ऑडिट और यातायात नियमों का सख्ती से पालन ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। गडकरी के इस निरीक्षण से एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई

    धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी भोजशाला का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

    सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के साथ हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे।

    भोजशाला मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं। 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में सर्वेक्षण, जांच और सीमित उत्खनन किया। टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् और रसायनविद् समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पहले ही रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

    एचएसआई रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत शिलालेख, नागरी लिपि और अरबी-फारसी लेख शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। साथ ही 12वीं–16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख हैं। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल के संकेत भी देखे गए।

    रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में रहा। ब्रिटिश काल से अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया है कि वे 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जानी है। ट्रांसफर के कारण पहले जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में चली सुनवाई अब फिर से इंदौर खंडपीठ पर आ गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश कर दी जाएंगी।

    मुख्य बिंदु: 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जस्टिस भोजशाला का निरीक्षण करेंगे, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, ASI ने 100 दिन तक सर्वे किया, 12वीं से 20वीं सदी के शिलालेख मिले।