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  • भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल की एक झुग्गी बस्ती से निकलकर मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहीं 22 वर्षीय प्रीति प्रजापति की कहानी मेहनत, पारिवारिक सहयोग और बड़े सपने देखने के हौसले की मिसाल है। लहारपुर के रामेश्वरम एक्सटेंशन की तंग गलियों में रहने वाली प्रीति के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। उनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। इसके बावजूद परिवार ने प्रीति के सपनों को आगे बढ़ने से नहीं रोका। आज वह मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप पर अपनी प्रतिभा दिखाने का सपना देख रही हैं।

    प्रीति के पास शुरुआत में न तो मॉडलिंग के लिए कोई बड़ा स्टूडियो था और न ही महंगे डिजाइनर कपड़े खरीदने के पर्याप्त संसाधन। ऐसे में उन्होंने अपने घर के सामने की गली को ही अभ्यास का स्थान बना लिया। वहीं रैंप वॉक की तैयारी की और अपने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उनकी मेहनत को पहचान मिलने लगी। जिस गली में उन्होंने अपने मॉडलिंग सफर की शुरुआत की थी, वहां से आगे बढ़कर अब वह बड़े रैंप वॉक कार्यक्रमों में भी नजर आने लगी हैं।

    बहन ने अपने हुनर से पूरा किया बहन का सपना

    प्रीति की इस यात्रा में उनकी बहन रेखा प्रजापति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मॉडलिंग के लिए महंगे कपड़े खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में रेखा ने अपनी सिलाई के हुनर का इस्तेमाल करते हुए प्रीति के लिए कपड़े तैयार किए। इससे प्रीति को अपने अभ्यास और कार्यक्रमों के लिए जरूरी परिधान मिल सके।

    रेखा का भी फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना है। वह फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं। इस तरह दोनों बहनें अपने-अपने हुनर के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। एक बहन मॉडलिंग में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत कर रही है, जबकि दूसरी कपड़े सिलने की कला को फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र तक ले जाना चाहती है। उनका साथ दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के भीतर मौजूद प्रतिभा और सहयोग बड़े सपनों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    मिस्त्री पिता और गृहिणी मां ने बढ़ाया हौसला

    प्रीति के पिता मोतीलाल प्रजापति मिस्त्री का काम करते हैं और उनकी मां कलिंदा प्रजापति गृहिणी हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। सभी तीन कमरों के छोटे से मकान में रहते हैं। आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने प्रीति की महत्वाकांक्षाओं पर पाबंदी नहीं लगाई।

    प्रीति की मां अपनी बेटी को आगे बढ़ते देखकर खुश हैं। वहीं पिता भी उसका पूरा सहयोग करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी मेहनत से परिवार का नाम रोशन करे। परिवार का यह समर्थन प्रीति के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बना हुआ है।

    गली में अभ्यास से बड़े रैंप तक का सफर

    जब प्रीति घर के सामने की गली में रैंप वॉक का अभ्यास करती थीं, तब आसपास के लोग उनसे पूछते थे कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। उस समय उनके मॉडलिंग के सपने को लेकर लोगों के मन में सवाल थे। हालांकि, प्रीति ने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। अब उनके प्रयासों को देखकर पड़ोसी भी उनकी तारीफ करते हैं।

    प्रीति ने पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने के बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर रैंप वॉक करना और अपनी प्रतिभा को व्यापक पहचान दिलाना है।

    प्रीति के लिए यह सफर केवल मॉडल बनने तक सीमित नहीं है। वह अपने परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

  • सर्जरी के निशानों के साथ आत्मविश्वास की नई परिभाषा बनीं राजश्री देशपांडे, कहा- जख्म नहीं, ये मेरी जीत हैं

    सर्जरी के निशानों के साथ आत्मविश्वास की नई परिभाषा बनीं राजश्री देशपांडे, कहा- जख्म नहीं, ये मेरी जीत हैं

    नई दिल्ली। जीवन कई बार ऐसे मोड़ पर ले आता है, जहां इंसान को अपनी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से और अपने हालात से लड़नी पड़ती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है अभिनेत्री राजश्री देशपांडे की, जिन्होंने ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए न सिर्फ उसे मात दी, बल्कि अपने अनुभव को खुलकर साझा कर हजारों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी है।

    हाल ही में उन्होंने अपने कुछ ऐसे चित्र साझा किए, जिनमें उनके शरीर पर सर्जरी के निशान साफ नजर आ रहे थे। आमतौर पर लोग ऐसे निशानों को छुपाने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजश्री ने इन्हें अपनी पहचान और अपनी जीत का हिस्सा मानते हुए पूरी ईमानदारी के साथ दुनिया के सामने रखा। उनके इस कदम ने लोगों के बीच एक गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर दी।

    अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर बने ये निशान उनकी कहानी को बयां करते हैं। हर निशान उस संघर्ष की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने दर्द, डर और अनिश्चितता का सामना करते हुए खुद को मजबूत बनाए रखा। उन्होंने यह भी कहा कि यह बीमारी उनके शरीर तक सीमित रही, लेकिन उनकी आत्मा और हिम्मत को कभी कमजोर नहीं कर पाई।

    राजश्री ने अपने संदेश में महिलाओं को खास तौर पर संबोधित करते हुए उन्हें आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कोई भी जख्म किसी की खूबसूरती को कम नहीं करता, बल्कि वह उस साहस की पहचान बन जाता है, जिसने कठिन समय में भी हार नहीं मानी। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में असली ताकत बाहरी रूप से नहीं, बल्कि अंदर की सोच और आत्मबल से आती है।

    अपने वर्तमान जीवन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आज वह पूरी तरह से अपने काम और जीवन को नए नजरिए से देख रही हैं। उनके अंदर एक नई ऊर्जा है, जो उन्हें हर दिन आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने अनुभवों को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत मानती हैं और उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

    उनकी यह भावुक और साहसी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों में चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों ने इसे साहस और आत्मस्वीकृति का बेहतरीन उदाहरण बताया। खासकर उन लोगों के लिए यह कहानी बेहद प्रेरणादायक बन गई है जो किसी गंभीर बीमारी या जीवन की कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं।

    राजश्री देशपांडे का यह कदम केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश है कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि मजबूत बनाने के लिए आती हैं। उनका यह आत्मविश्वास भरा संदेश यह साबित करता है कि जब इंसान अपने दर्द को स्वीकार कर लेता है, तभी वह असली जीत की ओर बढ़ता है।

  • सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत

    सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत


    नई दिल्ली :अभिनेता और फिल्ममेकर सौरभ शुक्ला ने जीवन और रिश्तों को लेकर एक गहरा और विचारोत्तेजक दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस दुनिया में परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती और इंसान स्वभाव से अपूर्ण होता है। उनके अनुसार यही अपूर्णता जीवन को आगे बढ़ने का अवसर देती है और इसमें सुधार की हमेशा गुंजाइश बनी रहती है।

    आईएएनएस से बातचीत में सौरभ शुक्ला ने कहा कि अगर कोई चीज पूरी तरह से परफेक्ट हो जाए तो उसमें आगे बढ़ने या कुछ नया सीखने की संभावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि अपूर्णता ही वह तत्व है जो इंसान को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। उनके मुताबिक परफेक्शन भले ही सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन वास्तव में यह एक स्थिर और बोरिंग स्थिति है, जबकि अपूर्णता जीवन को गतिशील बनाए रखती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि इंसान अक्सर अपने जीवन में परफेक्ट रिश्तों या परफेक्ट शादी की तलाश करता है, लेकिन यह एक भ्रम है। वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अपूर्ण होता है और उसकी असली खूबसूरती भी इन्हीं खामियों को स्वीकार करने में है। जब हम अपने साथी की कमियों को समझते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं, तभी एक मजबूत और गहरा रिश्ता बनता है।

    सौरभ शुक्ला ने रिश्तों में ईमानदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि किसी भी रिश्ते में पारदर्शिता और सच्चाई का होना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्ते में सच को छुपाता है, तो भले ही वह बात उस समय संभल जाए, लेकिन भविष्य में यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि जब सच्चाई सामने आती है तो सबसे ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि आपको पहले ही यह नहीं बताया गया।

    उन्होंने आगे कहा कि रिश्तों में झूठ या छुपाव धीरे धीरे भरोसे को कमजोर करता है। इससे शक पैदा होता है और व्यक्ति हर बात पर संदेह करने लगता है। ऐसे में रिश्ता कमजोर हो जाता है और उसकी नींव हिल जाती है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए ईमानदारी और खुलापन सबसे जरूरी तत्व हैं।

    उन्होंने एक दार्शनिक दृष्टिकोण रखते हुए यह भी कहा कि इंसान के नजरिए से इस जीवन में एक ही चीज को पूरी तरह परफेक्ट माना जा सकता है और वह है मृत्यु। उनके अनुसार जीवन के बाद क्या होता है, यह किसी को नहीं पता, लेकिन जीवन में अपूर्णता ही हमें आगे बढ़ने और सीखने का अवसर देती है।

    सौरभ शुक्ला ने अपने फिल्मी करियर का जिक्र करते हुए भी कहा कि उनकी हाल ही में रिलीज फिल्म में भी यही थीम देखने को मिलती है, जहां रिश्तों में छिपे सच और उससे पैदा होने वाले बदलावों को दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन की तरह फिल्मों में भी असली कहानी तब शुरू होती है जब किरदार अपनी कमजोरियों और सच्चाइयों का सामना करते हैं।

    उनके विचार जीवन के इस सरल लेकिन गहरे सत्य को उजागर करते हैं कि परफेक्शन की तलाश छोड़कर जब हम अपनी अपूर्णताओं को अपनाते हैं, तभी जीवन में असली संतुलन और संतोष संभव होता है।

  • जयपुर फुट ने बदली किस्मत सुधा चंद्रन बनीं इंटरनेशनल सेलिब्रिटी…

    जयपुर फुट ने बदली किस्मत सुधा चंद्रन बनीं इंटरनेशनल सेलिब्रिटी…


    नई दिल्ली: प्रसिद्ध अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन की जीवन यात्रा संघर्ष, हिम्मत और प्रेरणा की मिसाल है। एक समय ऐसा भी आया जब एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने साहस और दृढ़ संकल्प से नई शुरुआत की। आज वह अपनी सफलता का बड़ा श्रेय जयपुर फुट को देती हैं, जिसने उन्हें फिर से खड़े होकर आगे बढ़ने का हौसला दिया

    एक पुराने वीडियो में सुधा चंद्रन भावुक होकर डॉ. पी.के. सेठी और राजस्थान का आभार व्यक्त करती नजर आती हैं। वह कहती हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें जयपुर फुट का सबसे बड़ा योगदान है। इसी कृत्रिम पैर की मदद से उन्होंने न केवल चलना सीखा, बल्कि नृत्य और अभिनय की दुनिया में भी दमदार वापसी की

    सुधा चंद्रन की यह कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है। उनका मानना है कि यदि व्यक्ति के अंदर मजबूत इच्छाशक्ति हो और सही समर्थन मिले, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। जयपुर फुट जैसी सुलभ और प्रभावी तकनीक ने न केवल उनका जीवन बदला, बल्कि देश-विदेश में कई लोगों को नई उम्मीद भी दी है

    उन्होंने समाज में दिव्यांगता को लेकर बने नजरिए पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि वह ‘हैंडिकैप’ या ‘दिव्यांग’ जैसे शब्दों को समाज की सोच से हटाना चाहती हैं और लोगों को यह समझाना चाहती हैं कि किसी भी शारीरिक कमी के बावजूद व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है

    उनकी संघर्षपूर्ण कहानी को नाचे मयूरी फिल्म के जरिए भी दर्शाया गया, जिसमें उन्होंने खुद अपनी भूमिका निभाई थी। इस फिल्म ने उनकी जिंदगी के उस दौर को सामने रखा, जब उन्होंने एक हादसे के बाद फिर से अपने सपनों को जिया

    टेलीविजन पर भी सुधा चंद्रन ने अपनी अलग पहचान बनाई। कहीं किसी रोज में ‘रमोला सिकंद’ के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उनका अनोखा अंदाज और स्टाइल दर्शकों को बेहद पसंद आया

     सुधा चंद्रन की कहानी यह सिखाती है कि जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न आए, हिम्मत और सही सहयोग से उसे हराया जा सकता है। ‘जयपुर फुट’ उनके लिए सिर्फ एक कृत्रिम पैर नहीं, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हुआ

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर किया पुण्य स्मरण


    भोपाल । भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनका पुण्य स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज ने धर्म और देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और उनका शौर्य एवं पराक्रम आज भी सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

    डॉ. यादव ने जोर देते हुए कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज की गौरव गाथा सदैव भारतीय इतिहास और मराठा गौरव का प्रतीक बनी रहेगी। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे महाराज के साहस, बलिदान और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को अपनाएं और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया और महाराज के सम्मान में पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर प्रदेश में शौर्य और वीरता की भावना को जागरूक रखने पर जोर दिया गया।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन


    भोपाल । मध्य प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री समाजसेवी और राजनीति की प्रखर हस्ती भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उन्हें गहन श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन को न केवल भारत की आजादी के संघर्ष के लिए समर्पित किया बल्कि साहित्यिक प्रतिभा और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी अपरिमेय योगदान दिया।

    मुख्यमंत्री के अनुसार सरोजिनी नायडू न केवल एक बड़ा कवि और स्वतंत्रता सेनानी थीं बल्कि उन्होंने महिलाओं को शिक्षा नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कविताएँ तथा विचार सदैव राष्ट्र सेवा की भावना को उज्जवल बनाते रहेंगे।

    चर्चाओं में आज सरोजिनी नायडू का नाम भारत की कोकिला के रूप में विदित है जिन्होंने अंग्रेज़ों के शासन के विरोध में अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण अधिवेशनों में भाग लिया और 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं। स्वतंत्रता के पश्चात् वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल भी रहीं और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से कहा कि सरोजिनी नायडू की कविताओं में देशभक्ति मानवीय संवेदनाओं और महिला अधिकारों की गूढ़ अभिव्यक्ति है जो आज भी युवाओं के हृदय में उमंग भरती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरोजिनी नायडू के आदर्शों को अपनाते हुए हर स्तर पर महिला सशक्तिकरण को और भी व्यापक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरोजिनी नायडू के विचार उनकी लेखनी और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा के अनंत स्रोत हैं। आज हम उनके बलिदान और योगदान को नमन करते हैं और आशा करते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके सिद्धांतों से प्रेरित होंगी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन


    मध्य प्रदेशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. पर्रिकर के जीवन और उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र सेवा, अनुशासन, और सादगी का प्रतीक था, जो हमेशा युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।

    स्व. मनोहर पर्रिकर एक आदर्श नेता थे जिनका जीवन उच्च नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा से ओत-प्रोत था। उनका कार्यकाल न केवल गोवा की जनता के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक था। उन्होंने रक्षा मंत्री के रूप में देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की और हमेशा अपनी सादगी और ईमानदारी से पहचाने गए। उनका शासनकाल देश की रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण था, जिसमें उन्होंने कई अहम निर्णय लिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “स्व. पर्रिकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा का मतलब केवल कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना और जनता की समस्याओं को दूर करना है। उनका व्यक्तिगत जीवन भी अत्यंत साधारण और अनुशासनप्रिय था, जो उनकी महानता का प्रतीक है। वे हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणा बनकर रहते थे।”

    उन्होंने आगे कहा, “स्व. पर्रिकर का समर्पण देश और समाज के प्रति अनमोल था। उन्होंने हमेशा अपनी कर्तव्यनिष्ठा से देश की सेवा की। चाहे वह रक्षा मंत्रालय का कार्यकाल हो या गोवा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल, उन्होंने हमेशा अपने फैसलों में पारदर्शिता और सादगी का पालन किया।”

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. पर्रिकर के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय राजनीति और रक्षा क्षेत्र में अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने बताया कि स्व. पर्रिकर का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनकी सरलता, ईमानदारी और अनुशासन को हम सभी को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

    स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं से अपील की कि वे स्व. पर्रिकर के अनुशासन और देश सेवा के मार्ग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि उनकी महानता को आगे बढ़ाया जा सके।

    स्व. पर्रिकर का योगदान न केवल उनकी राजनीतिक उपलब्धियों में, बल्कि उनके दृढ़ नायकत्व और देशभक्ति में भी नजर आता है। उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता और उनका आदर्श हमेशा हमारे साथ रहेगा।