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  • रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    नई दिल्ली ।भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यात्रा बीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब तक ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुक करने वाले यात्रियों को मामूली प्रीमियम पर यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता था, लेकिन रेलवे के आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्री इस सुविधा से बाहर थे। अब इस अंतर को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। दिए गए विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर 2026 से काउंटर से आरक्षित टिकट लेने वाले यात्रियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाने के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है।

    मौजूदा ऑनलाइन रेलवे यात्रा बीमा योजना की खास बात इसका कम प्रीमियम है। टिकट बुक करते समय यात्री केवल 45 पैसे देकर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्ध बीमा विकल्प और संबंधित शर्तों के अनुसार मिलती है। काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए प्रीमियम, बीमा चुनने की प्रक्रिया और दावा करने के विस्तृत नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आना जरूरी है। इसलिए फिलहाल यह मानना सही नहीं होगा कि प्रत्येक काउंटर टिकट पर बीमा अपने आप लागू हो चुका है।

    यात्रा बीमा का उद्देश्य ट्रेन दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों या उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। दुर्घटना में यात्री की मृत्यु होने या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर मौजूदा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जा सकता है। यह राशि दुर्घटना के परिणाम और बीमा पॉलिसी में निर्धारित शर्तों के आधार पर मिलती है।

    स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 7.5 लाख रुपये तक के बीमा कवर का प्रावधान है। वहीं, गंभीर रूप से घायल होने पर दो लाख रुपये और मामूली चोट लगने की स्थिति में 10,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है। हालांकि, इन सभी मामलों में वास्तविक भुगतान पॉलिसी की शर्तों, चोट की प्रकृति और संबंधित पात्रता पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को बीमा को हर प्रकार की दुर्घटना या परेशानी के लिए मिलने वाला सामान्य मुआवजा नहीं समझना चाहिए।

    काउंटर टिकट लेने वाले यात्रियों को भी बीमा सुविधा के दायरे में लाने का मुख्य उद्देश्य टिकट खरीदने के माध्यम के आधार पर होने वाले अंतर को समाप्त करना है। देश में बड़ी संख्या में यात्री अब भी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर से टिकट लेते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी, बुजुर्ग और ऐसे लोग शामिल हैं जो ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा का नियमित इस्तेमाल नहीं करते। नई व्यवस्था लागू होने पर इन यात्रियों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार यात्रा बीमा लेने का अवसर मिल सकेगा।
    इस बदलाव को लागू करने के लिए रेलवे को अपने यात्री आरक्षण सिस्टम यानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम में जरूरी तकनीकी और प्रक्रियागत संशोधन करने होंगे। काउंटर पर टिकट खरीदने के दौरान बीमा का विकल्प कैसे उपलब्ध कराया जाएगा, यात्रियों की सहमति किस तरह दर्ज होगी और पॉलिसी की जानकारी कैसे दी जाएगी, इन पहलुओं पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

    यात्रियों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि बीमा का लाभ लेने के लिए बुकिंग के समय नियमों और शर्तों की जानकारी रखना आवश्यक है। ऑनलाइन टिकट लेते समय बीमा का विकल्प चुनने के बाद पॉलिसी से संबंधित संदेश और दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। जहां लागू हो, वहां नामांकित व्यक्ति यानी नॉमिनी का विवरण भी सही भरना चाहिए। दुर्घटना की स्थिति में दावा करते समय ये जानकारियां उपयोगी हो सकती हैं।

    काउंटर से आरक्षित टिकट खरीदने वाले यात्रियों को नई व्यवस्था लागू होने के बाद रेलवे की आधिकारिक सूचना और बीमा पॉलिसी की शर्तें जांचनी चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा लिया गया है या नहीं और उसका प्रमाण उपलब्ध है। केवल टिकट खरीद लेने से बीमा कवर मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसका लाभ संबंधित नियमों और प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

  • मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    नई दिल्ली । नई कार या बाइक खरीदते समय ज्यादातर ग्राहक इंश्योरेंस भी उसी डीलर से करा लेते हैं, जहां से वाहन खरीदा जाता है। ऐसे में अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसी, कीमत और उपलब्ध विकल्पों की तुलना करना हमेशा आसान नहीं होता। अब मोटर इंश्योरेंस की बिक्री व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव से ग्राहकों को डीलर के अलावा दूसरे माध्यमों से बीमा खरीदने का विकल्प मिल सकता है।

    भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन व्यवस्था को लेकर एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें मोटर इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। नियामक के अनुसार अलग-अलग मामलों में मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन 13 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि औसत करीब 24 प्रतिशत बताया गया है।

    नए और पुराने वाहनों की बिक्री से जुड़े ब्रोकर्स और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से वित्त वर्ष 2025 में करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया गया। इसमें करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर गया। प्रस्ताव में इस बात पर विचार किया गया है कि अपेक्षाकृत सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर इतनी ऊंची कमीशन लागत कितनी उचित है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए और पुराने वाहनों के इंश्योरेंस उत्पादों तक पहुंच देने की बात कही गई है। इससे ग्राहक अलग-अलग विकल्पों की जानकारी ले सकेंगे और डीलर से अलग माध्यम के जरिए पॉलिसी खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे गैर-लाभकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागत वसूलने के लिए प्रीमियम का अधिकतम पांच प्रतिशत शुल्क रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

    अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो वाहन डीलरों को ग्राहकों के सामने डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प और क्यूआर कोड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य ग्राहक को यह जानकारी देना है कि इंश्योरेंस खरीदने के लिए केवल डीलर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।

    वाहन लोन के साथ इंश्योरेंस की बिक्री को लेकर भी प्रस्ताव में ध्यान दिया गया है। लोन और बीमा की बंडलिंग से जुड़े मामलों में करीब 16 प्रतिशत कमीशन देखे जाने का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित बदलावों में ग्राहक को लोन लेते समय इंश्योरेंस की कीमत और उसे खरीदने के माध्यम की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर है।

    पुराने वाहनों के बीमा में भी कमीशन व्यवस्था की समीक्षा की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कई डीलरों के पास सर्विस और रिपेयर की सुविधाएं होने के बावजूद पुराने वाहनों के इंश्योरेंस पर मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स को औसतन करीब 12 प्रतिशत कमीशन मिलता है।

    कैशलेस रिपेयर को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। यदि ग्राहक ने किसी दूसरे बीमाकर्ता से पॉलिसी खरीदी है और उसमें कैशलेस रिपेयर की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल इस आधार पर डीलर सुविधा से इनकार नहीं कर सकेगा कि बीमा उसी डीलर से नहीं लिया गया।

    इसके अलावा पॉलिसी बिक्री के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव देने वाली कुछ व्यवस्थाओं पर रोक का प्रस्ताव है। अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा और सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर कम कमीशन रखने की भी बात कही गई है।

    हालांकि, ये बदलाव अभी लागू नहीं हुए हैं। संबंधित प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसलिए फिलहाल मोटर इंश्योरेंस की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता।

  • भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिम बढ़ने के बीच भारत समुद्री बीमा पूल ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए युद्ध-जोखिम बीमा की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके तहत अब तक 3000 से अधिक माल युद्ध-जोखिम बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी हैं। पश्चिम एशिया में टकराव के बाद युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में करीब 35 से 40 प्रतिशत की गिरावट आने की जानकारी भी सामने आई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक भारत समुद्री बीमा पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम पॉलिसी जारी की थीं। इसके अलावा 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम पॉलिसी और तीन संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसी भी जारी की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े भारतीय पक्षकारों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    भारत समुद्री बीमा पूल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन जहाजों से जुड़े जोखिमों के लिए समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने या भारत से शुरू होने वाले माल को ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं।

    इस पूल की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ की गई थी। इसके जरिए जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसका एक उद्देश्य विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और वैश्विक व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को निरंतर बीमा सुरक्षा देना है।

    इस व्यवस्था के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का प्रावधान रखा गया है।

    भारत समुद्री बीमा पूल के माध्यम से तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां भी जारी की गई हैं। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ बीमा लागत को नियंत्रित रखना और देश की समुद्री वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

    बीमा कवरेज के तहत जहाज के मुख्य ढांचे, उसे चलाने वाली मशीनरी और उसमें लगे उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों में लगी पूंजी को बीमा सुरक्षा मिलती है और इस तरह के जोखिमों के लिए घरेलू बीमा व्यवस्था मजबूत होती है।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले माल को नुकसान या खराब होने के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से ऐसे समुद्री रास्तों पर यह कवरेज महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक रहता है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अपने माल की सुरक्षा के लिहाज से सहायता मिलती है।

    युद्ध-जोखिम बीमा में सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक मार्गों के लिए इस तरह की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    भारत समुद्री बीमा पूल को देश की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को भरोसेमंद संचालन, प्रतिस्पर्धी बीमा दरों और दावों के निपटान की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

  • NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा

    NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा


    नई दिल्ली ।
    रिटायरमेंट के लिए बचत करने वालों के साथ अब स्वास्थ्य सुरक्षा को जोड़ने की दिशा में NPS Swasthya योजना महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत पेंशन अकाउंट के साथ सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस कवर जोड़ा गया है। योजना के नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। इसमें निवेश और हेल्थ इंश्योरेंस को दो अलग हिस्सों के तौर पर रखा गया है।

    NPS Swasthya में शामिल होने के लिए NPS में प्रवेश की पात्रता रखने वाले नागरिक आवेदन कर सकते हैं। योजना में फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प है, जिसके तहत खाताधारक के साथ पति या पत्नी और दो बच्चों को कवर किया जा सकता है। माता-पिता को इस स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत शामिल नहीं किया गया है।

    इस योजना की शुरुआत के लिए तीन तरह की राशि जरूरी होगी। इसमें पहले साल का इंश्योरेंस प्रीमियम, ₹200 का सालाना मेंटेनेंस चार्ज और NPS Swasthya खाते में कम से कम ₹1,000 का निवेश शामिल है। शुरुआती निवेश के बाद न्यूनतम ₹10 का योगदान भी किया जा सकता है।

    योजना में 18 से 70 वर्ष की उम्र के लोग प्रवेश ले सकते हैं। इसे 85 वर्ष की उम्र तक रिन्यू कराया जा सकता है। जमा राशि का निवेश केंद्र सरकार की पेंशन योजना से जुड़े निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसके अलावा पेंशन फंड सालाना कॉर्पस पर 0.08 प्रतिशत तक चार्ज ले सकता है।

    हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए अलग-अलग डिडक्टिबल विकल्प दिए गए हैं। ₹10,000 के डिडक्टिबल पर ₹1 लाख का सम इंश्योर्ड, ₹50,000 डिडक्टिबल पर ₹5 लाख का कवर और ₹1 लाख डिडक्टिबल पर ₹10 लाख का सम इंश्योर्ड उपलब्ध है। वहीं ₹3 लाख के डिडक्टिबल विकल्प के साथ फैमिली फ्लोटर के तहत ₹30 लाख तक का बीमा कवर मिल सकता है।

    डिडक्टिबल उस शुरुआती राशि को कहा जाता है, जिसे बीमा क्लेम से पहले खाताधारक को खुद या किसी दूसरी पॉलिसी के जरिए वहन करना होता है। इसके बाद की पात्र अस्पताल संबंधी लागत बीमा कवर के दायरे में आती है।

    योजना में इलाज और अस्पताल से जुड़े खर्च के लिए कुल जमा योगदान का 25 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा भी दी गई है। इसके लिए किसी वेटिंग पीरियड की जरूरत नहीं बताई गई है और निकासी की संख्या पर भी कोई सीमा नहीं है। हालांकि निकाली जाने वाली राशि सीधे खाताधारक के बैंक खाते में देने के बजाय अस्पताल या हेल्थकेयर सेंटर को ट्रांसफर की जाएगी।

    इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। रिन्यूअल के समय खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने पर पेंशन फंड की ओर से 90, 60 और 30 दिन पहले अलर्ट भेजे जाएंगे। अगर ग्रेस पीरियड समाप्त होने तक प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो हेल्थ इंश्योरेंस बंद हो जाएगा और NPS Swasthya खाता सामान्य ऑल सिटिजन मॉडल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

  • कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।

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    नई दिल्ली ।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

  • सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना देश में उपलब्ध कम प्रीमियम वाली सरकारी दुर्घटना बीमा योजनाओं में शामिल है। इस योजना की सबसे खास बात इसका बेहद कम सालाना प्रीमियम है। इसके लिए पात्र व्यक्ति को केवल 20 रुपये प्रति वर्ष का भुगतान करना होता है। अगर इस रकम को रोजाना के खर्च के हिसाब से देखा जाए तो यह करीब 5.5 पैसे प्रतिदिन बैठती है। यानी इसका दैनिक खर्च 50 पैसे से भी काफी कम है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमित व्यक्ति को दुर्घटना से जुड़े मामलों में आर्थिक सुरक्षा मिलती है। योजना के अंतर्गत अधिकतम 2 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध है। यदि बीमित व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो 2 लाख रुपये की बीमा राशि का प्रावधान है।

    दुर्घटना के कारण आंशिक रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में बीमा कवर की राशि 1 लाख रुपये है। इस तरह योजना दुर्घटना से होने वाली मृत्यु के साथ-साथ पूर्ण और आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान करती है।

    इस योजना का लाभ लेने के लिए आयु संबंधी पात्रता भी तय है। 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष की उम्र तक के व्यक्ति इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति का बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी है। योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति के खाते से निर्धारित प्रीमियम की राशि ऑटो-डेबिट माध्यम से तय समय पर काटी जाती है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की बीमा अवधि एक जून से अगले वर्ष 31 मई तक रहती है। यह वार्षिक आधार पर नवीनीकृत होने वाली योजना है। यानी योजना के तहत बीमा कवर एक साल की अवधि के लिए रहता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसे आगे जारी रखा जा सकता है।

    इस बीमा योजना को सरकारी स्तर पर किफायती दुर्घटना बीमा सुविधा के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। योजना के तहत बीमा सेवाएं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों के माध्यम से उपलब्ध होती हैं। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम में दुर्घटना से संबंधित बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को समझने के लिए इसके प्रीमियम और कवर के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है। केवल 20 रुपये सालाना प्रीमियम के बदले पात्र व्यक्ति को दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। वहीं आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये का कवर निर्धारित है।

    इस योजना की पात्रता में उम्र और बचत बैंक खाते की शर्त प्रमुख है। 18 से 70 वर्ष के बचत बैंक खाताधारक इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। योजना की अवधि एक जून से 31 मई तक रहती है और प्रीमियम की राशि बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के जरिए काटी जाती है।

  • मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर

    मोदी सरकार की गजब की बीमा स्कीम…. सिर्फ 20 रुपये प्रीमियम और 2 लाख रुपये का कवर


    नई दिल्ली।
    आप बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) लेते हैं, तो हजारों रुपये का प्रीमियम आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोदी सरकार सिर्फ 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर देती है. जी हां, ये सच है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana) खासी पॉपुलर है, जो एक एक्सीडेंटल बीमा स्कीम है. सरकार ने निम्न आय वर्ग वालों को बीमा का लाभ देने के लिए PMSBY की शुरुआत की थी।

    PMSBY मोदी सरकार की पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर स्कीम है, इसमें सालाना प्रीमियम देना होता है, जो सिर्फ 20 रुपये का है और 2 लाख रुपये की Insurance Cover मिल जाता है. किसी भी दुर्घटना में मृत्यु होने या फिर विकालांग होने पर सरकार तय कवरेज मुहैया कराती है।


    बीमा योजना का ये नियम जान लें

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में बीमाधारक व्यक्ति की अगर एक्‍सीडेंट में मृत्यु हो जाती है या फिर वो पूरी तरह से विकलांग हो जाता है, तो फिर दो लाख रुपये का कवर दिया जाता है. वहीं अगर व्यक्ति किसी दुर्घटना के दौरान आंशिक विकलांग होता है, तो भी सरकार एक लाख रुपये का कवर देती है।


    ये है बीमा योजना की ऐज लिमिट

    आज के समय में 20 रुपये में सिर्फ एक प्याली चाय आती है, लेकिन आप इस एक चाय का पैसा बचाकर 2 लाख रुपये का बीमा करा सकते हैं और भी सरकार की गारंटी के साथ. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का लाभ लेना संकट के समय परिवार को आर्थिक रूप से मदद कर सकता है. इस स्कीम को सालाना आधार पर रिन्यू किया जाता है. इस योजना का लाभ 18 से 70 साल तक की उम्र के लोग ले सकते हैं।


    PMSBY में ऑटो डेबिट की सर्विस

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए आपके पास एक्टिव बैंक खाता होना अनिवार्य है. एक से ज्यादा बैंक खाते होने पर भी सिर्फ एक ही बैंक से इस योजना के तहत बीमा कवर ले सकते हैं. हर साल 1 जून को या इससे पहले ‘ऑटो डेबिट’ सुविधा के जरिए आपके बैंक खाते से 20 रुपये के प्रीमियम की कटौती की जाएगी. बैंक खाते से बीमा प्रीमियम का पैसा सीधे डेबिट होता है. इसलिए अपने बैंक खाते में कम से कम 20 रुपये की राशि जरूर रखें. PMSBY के तहत एनरोलमेंट पीरियड 1 जून से 31 मई तक होता है।

    सरकार ने अब तक किया इतना पेमेंट
    PMSBY Scheme को मोदी सरकार ने 9 मई 2015 को लॉन्च किया था. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसकी शुरुआत से मई 2024 तक ही सरकार को कुल 1,80,812 दावे प्राप्त हुए और 1,37,404 दावों का क्लेम सेटलमेंट किया गया था. इस पर सरकार ने 2,728.85 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया. वहीं जून 2024 से बीते साल 16 अप्रैल 2025 तक योजना में 36.86 करोड़ नए नामांकन जोड़े गए. इस अवधि में 33,906 दावों में से 19,024 का सेटलमेंट हुआ और सरकार ने 377.73 करोड़ रुपये की राशि क्लेम पेमेंट में खर्च की थी।

  • रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व माना जाता है। समय के साथ इस त्योहार पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z अब केवल चॉकलेट, मिठाई, कपड़े या गैजेट देने के बजाय ऐसे उपहारों पर विचार कर रही है, जिनका लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके। इसी बदलाव के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के एक नए और उपयोगी उपहार के रूप में देखा जा रहा है।

    बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उपहारों पर त्योहार के दौरान कुछ हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित समय तक ही रहता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा ऐसा वित्तीय सुरक्षा साधन हो सकता है, जो बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक बोझ कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि युवा वर्ग त्योहार के उपहार को भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

    इस बदलाव को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति रक्षाबंधन पर करीब 7,000 रुपये चॉकलेट, मिठाई या किसी अन्य उपहार पर खर्च करता है, तो यह राशि कुछ समय बाद पूरी तरह खर्च हो जाती है। वहीं इसी स्तर के खर्च को उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर इस्तेमाल करने पर भाई या बहन के लिए स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा तैयार की जा सकती है।

    बताया गया है कि लगभग 7,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में परिस्थितियों और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शहर, बीमा कंपनी, कवरेज, पॉलिसी की शर्तों और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसके लाभ, सीमाएं, प्रतीक्षा अवधि और बहिष्करण को समझना जरूरी है।

    मासिक हिसाब से देखें तो 7,000 रुपये का सालाना खर्च 600 रुपये से भी कम बैठता है। युवा उपभोक्ताओं के लिए यह राशि नियमित छोटे खर्चों के मुकाबले कम या समान हो सकती है। इसी सोच के कारण हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमा उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के लिए जिम्मेदारी और आर्थिक सुरक्षा के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने, जांच, दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर अचानक दबाव डाल सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्चों का भुगतान बीमा के माध्यम से किया जा सकता है।

    हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बीमा राशि, नेटवर्क अस्पताल, कमरे के किराये की सीमा, सह-भुगतान, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े नियम और क्लेम प्रक्रिया जैसी बातों की जानकारी लेना जरूरी है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी हमेशा सबसे बेहतर विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

    रक्षाबंधन के अवसर पर उपहारों का यह बदलता स्वरूप बताता है कि युवा पीढ़ी भावनात्मक रिश्तों के साथ वित्तीय योजना को भी महत्व दे रही है। चॉकलेट या मिठाई जैसे पारंपरिक उपहार अपनी जगह कायम हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जैसा विकल्प लंबे समय की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला उपहार बन सकता है। सही पॉलिसी और पर्याप्त कवरेज का चुनाव भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा की भावना को आर्थिक रूप भी दे सकता है।

  • सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    सर्विस सेक्टर में कीमतों का मिला-जुला रुख, टेलीकॉम महंगाई 0.72 प्रतिशत रही, बैंकिंग सेवाओं के सूचकांक में गिरावट आई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का प्रोविजनल डेटा जारी किया है। आंकड़ों में अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में कीमतों के रुझान में अंतर देखने को मिला। इंश्योरेंस और टेलीकॉम सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंकिंग और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सेवाओं के मूल्य सूचकांक में गिरावट आई। हवाई यात्री सेवाओं में सबसे तेज वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की जून तिमाही में इंश्योरेंस सर्विस प्राइस इंडेक्स 102.9 रहा। इसमें सालाना आधार पर 0.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बीमा सेवाओं की कीमतों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी हुई। टेलीकॉम सर्विसेज प्राइस इंडेक्स 112.2 रहा और इसमें सालाना आधार पर 0.72 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सर्विस प्राइस इंडेक्स में इसके विपरीत गिरावट देखने को मिली। जून तिमाही में यह सूचकांक 89.9 रहा, जो सालाना आधार पर 1.32 प्रतिशत कम है। बैंकिंग सर्विस प्राइस इंडेक्स भी 100.9 पर रहा और इसमें सालाना आधार पर 3.35 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। हालांकि, बैंकिंग सर्विस कॉन्ट्रिब्यूशन इंडेक्स 134.8 रहा और इसमें सालाना आधार पर 6.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    पेंशन क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। मैनेजमेंट ऑफ पेंशन फंड्स सर्विस प्राइस इंडेक्स 113.3 रहा और इसमें सालाना आधार पर 5.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र से जुड़ी सेवाओं की कीमतों में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले वृद्धि हुई है।

    हवाई यात्री सेवाओं में सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही में एयर पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 126.4 रहा, जो सालाना आधार पर 31.94 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि अन्य प्रमुख सेवा क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे हवाई यात्री सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बदलाव का पता चलता है।

    रेलवे सेवाओं के सूचकांक में भी सीमित बढ़ोतरी दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रेलवे सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.4 रहा और इसमें सालाना आधार पर 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रेलवे फ्रेट सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.3 रहा, जो सालाना आधार पर 0.10 प्रतिशत बढ़ा। वहीं रेलवे पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स 103.5 रहा और इसमें 3.50 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

    सरकार के अनुसार सर्विस पीपीआई में सात प्रकार की सेवाओं को शामिल किया जाता है और इसका बेस ईयर 2022-23 निर्धारित है। हालांकि, इन सूचकांकों में सेवाओं के भारांक को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि यह पूरे सर्विस सेक्टर को कवर नहीं करते हैं। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के लिए सर्विस पीपीआई का अगला प्रोविजनल डेटा 25 नवंबर 2026 को जारी किया जाएगा।

  • E20 पेट्रोल को लेकर फैली गलतफहमियों पर सरकार ने दी सफाई, इंश्योरेंस और इंजन से जुड़े दावों का किया खंडन

    E20 पेट्रोल को लेकर फैली गलतफहमियों पर सरकार ने दी सफाई, इंश्योरेंस और इंजन से जुड़े दावों का किया खंडन


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैली एक बड़ी आशंका को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल इस ईंधन के उपयोग के आधार पर किसी वाहन का इंश्योरेंस क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा है कि इस तरह के दावे पूरी तरह भ्रामक हैं और वाहन मालिक बिना किसी चिंता के E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़े इंजन खराब होने, ईंधन की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर फैल रही गलतफहमियों पर भी विस्तार से स्थिति स्पष्ट की गई है।

    सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे और भ्रम फैलाए जा रहे थे। इन्हीं दावों के बीच यह चर्चा भी सामने आई कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों का इंश्योरेंस क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल E20 ईंधन के उपयोग को आधार बनाकर किसी भी इंश्योरेंस दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।

    इससे पहले भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर एक विस्तृत जानकारी जारी कर विभिन्न भ्रांतियों का जवाब दिया था। मंत्रालय ने बताया कि वाहन बीमा, इंजन की कार्यक्षमता और ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े जिन दावों को सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा रहा है, उनका वैज्ञानिक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, इन दावों की जांच की गई और उन्हें तथ्यहीन पाया गया।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन के प्रदर्शन पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ने जैसी बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसी तरह यह दावा भी निराधार बताया गया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से कीड़े अधिक आकर्षित होते हैं। सरकार का कहना है कि इस प्रकार की बातें अफवाहों पर आधारित हैं और इनका तकनीकी परीक्षणों में कोई आधार नहीं मिला है।

    मंत्रालय के अनुसार, देश में लागू इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसे लागू करने से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं और ईंधन परीक्षण से जुड़ी विशेषज्ञ संस्थाओं के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद आवश्यक मानकों को ध्यान में रखते हुए E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से बाजार में उपलब्ध कराया गया।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2023 में E20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन खराब होने या बड़ी संख्या में वाहनों के बंद पड़ने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है। इससे संकेत मिलता है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया E20 ईंधन सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है।

    मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला इथेनॉल स्थापित औद्योगिक प्रक्रियाओं के तहत तैयार किया जाता है और मिश्रण से पहले यह कई गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरता है। निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के बाद ही इसे ईंधन के रूप में उपयोग में लाया जाता है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। ऐसे में उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे E20 पेट्रोल से जुड़ी अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।