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  • एक लाख रुपये के निवेश में FD और RD का फर्क, जानिए ब्याज, परिपक्वता राशि और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें

    एक लाख रुपये के निवेश में FD और RD का फर्क, जानिए ब्याज, परिपक्वता राशि और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें

    नई दिल्ली ।बैंक में सुरक्षित निवेश की बात आती है तो फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट आम निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय विकल्प हैं। दोनों योजनाओं में पैसा बैंक में जमा किया जाता है और उस पर तय दर के अनुसार ब्याज मिलता है, लेकिन दोनों में निवेश करने का तरीका अलग होता है। इसी अंतर की वजह से समान ब्याज दर होने के बावजूद मिलने वाला अंतिम रिटर्न अलग हो सकता है।

    फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में निवेशक एकमुश्त रकम बैंक में निश्चित अवधि के लिए जमा करता है। जमा की गई पूरी राशि पर निवेश शुरू होने के बाद से ही निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज मिलता है। FD की अवधि बैंक और योजना के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। वहीं रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD में निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम जमा करता है। इस वजह से पूरी निवेश राशि शुरुआत में बैंक के पास नहीं रहती और ब्याज की गणना भी उसी हिसाब से होती है।

    रिटर्न के अंतर को एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी निवेश पर सालाना ब्याज दर 6.5 प्रतिशत है और निवेश की अवधि पांच साल है। अगर कोई व्यक्ति एक लाख रुपये की FD करता है तो पांच साल की अवधि पूरी होने पर उसे लगभग 1,38,042 रुपये मिल सकते हैं। इसमें मूलधन के साथ ब्याज भी शामिल होगा।

    दूसरी तरफ, यदि वही व्यक्ति पांच साल तक हर महीने लगभग 1,666 रुपये की RD करता है तो कुल जमा रकम करीब एक लाख रुपये होगी। इसी उदाहरण में परिपक्वता राशि लगभग 1,18,270 रुपये के आसपास बताई गई है। इस तरह दोनों में जमा की गई कुल मूल रकम लगभग समान होने के बावजूद FD से मिलने वाली राशि करीब 19,772 रुपये अधिक हो सकती है।

    इस अंतर की मुख्य वजह निवेश की अवधि और रकम के बैंक में उपलब्ध रहने का समय है। FD में पूरी राशि पहले दिन से जमा होती है, इसलिए पूरी रकम पर निर्धारित अवधि के दौरान ब्याज मिलता रहता है। RD में पैसा धीरे-धीरे हर महीने जमा होता है, इसलिए बाद में जमा होने वाली रकम को पूरी अवधि का ब्याज नहीं मिल पाता।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक के लिए FD ही बेहतर विकल्प है। यदि किसी व्यक्ति के पास एकमुश्त रकम उपलब्ध है और निकट भविष्य में उसकी जरूरत नहीं है, तो वह FD पर विचार कर सकता है। इसके विपरीत जिन लोगों के पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है, लेकिन वे नियमित रूप से बचत करना चाहते हैं, उनके लिए RD उपयोगी हो सकती है।

    RD के जरिए हर महीने एक निश्चित राशि बचाने की आदत भी विकसित की जा सकती है। नौकरीपेशा लोगों या नियमित आय वाले निवेशकों के लिए यह तरीका भविष्य में किसी बड़े खर्च के लिए रकम तैयार करने में मददगार हो सकता है। दूसरी ओर, FD उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकती है जिनके पास पहले से पर्याप्त एकमुश्त बचत मौजूद है।

    टैक्स के लिहाज से भी निवेश से मिलने वाले ब्याज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। FD और RD से प्राप्त ब्याज कर नियमों के तहत आय का हिस्सा हो सकता है। निर्धारित सीमा और लागू नियमों के अनुसार बैंक ब्याज पर TDS भी काट सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले ब्याज दर के साथ टैक्स प्रभाव, अवधि, समय से पहले निकासी के नियम और अपनी वित्तीय जरूरतों को भी देखना जरूरी है।

    अंततः FD और RD में चुनाव केवल ज्यादा रिटर्न के आधार पर नहीं होना चाहिए। एकमुश्त रकम और निवेश की अवधि उपलब्ध हो तो FD का विकल्प उपयोगी हो सकता है, जबकि नियमित छोटी बचत के जरिए भविष्य के लिए रकम तैयार करने वालों के लिए RD अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

  • फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    नई दिल्ली ।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की कुछ अवधि वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली चुनिंदा बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से कम अवधि वाली बल्क एफडी पर किया गया है, जबकि लंबी अवधि की कई जमाओं की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

    बैंक की ओर से किए गए बदलाव के तहत 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली जमा पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इससे इन अवधि में बड़ी राशि एफडी के रूप में रखने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलेगा।

    हालांकि 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक की नई बल्क एफडी दरें अलग-अलग अवधि के आधार पर 5.25 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत के बीच हैं। इसलिए बड़ी राशि को कम अवधि के लिए एफडी में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

    बल्क एफडी में किया गया यह बदलाव सामान्य एफडी ग्राहकों पर लागू नहीं होता। 3 करोड़ रुपये से कम की घरेलू जमा राशि पर बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक जिनकी एफडी राशि इस सीमा से कम है, उनके मौजूदा ब्याज ढांचे पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    सामान्य एफडी में आम नागरिकों को अलग-अलग अवधि के आधार पर 3.05 प्रतिशत से 6.40 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अवधि के अनुसार 3.55 प्रतिशत से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस वजह से कम राशि वाली नियमित एफडी करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच राशि की सीमा महत्वपूर्ण होती है। बड़ी राशि जमा करने वाले ग्राहकों के लिए बैंक अलग दरें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में निवेश से पहले संबंधित अवधि और लागू ब्याज दर को देखना जरूरी होता है। खास तौर पर छोटी अवधि की एफडी में मामूली दर बदलाव भी बड़ी जमा राशि पर मिलने वाले कुल ब्याज को प्रभावित कर सकता है।

    एफडी को आमतौर पर निश्चित रिटर्न वाले निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। ब्याज दर पहले से तय होने के कारण निवेशक को मैच्योरिटी तक संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने में आसानी होती है। हालांकि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग होती है और समय से पहले एफडी तोड़ने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या जुर्माने में बदलाव हो सकता है।

    SBI की नई दरों का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि को छोटी अवधि की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट में रखने की योजना बना रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी बुक करने से पहले नई दरों और अवधि की तुलना करना उपयोगी होगा।

    वहीं सामान्य ग्राहकों और 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि रखने वालों के लिए इस बदलाव से राहत है, क्योंकि उनकी एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मौजूदा नियमित एफडी दरें जारी हैं। इसलिए निवेशकों को अपनी जमा राशि, निवेश अवधि और लागू ब्याज दर के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

  • पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 9 लाख रुपये लगाने पर हर महीने 5,550 रुपये मिलेंगे, जानिए पूरा हिसाब और नियम

    नई दिल्ली ।बचत की रकम को सुरक्षित जगह निवेश कर नियमित आय हासिल करने की योजना बना रहे लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम एक विकल्प है। इस योजना में एकमुश्त राशि जमा करने के बाद निवेश पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान हर महीने किया जा सकता है। बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों की तुलना में यह योजना उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जो नियमित आय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर निवेश व्यवस्था चाहते हैं।

    पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम यानी MIS छोटी बचत योजनाओं के तहत संचालित होती है। इन योजनाओं में निवेश को सरकारी समर्थन प्राप्त होता है। यही वजह है कि जोखिम को लेकर सतर्क रहने वाले निवेशकों, खासकर नियमित आय चाहने वाले लोगों के बीच ऐसी योजनाओं में रुचि बनी रहती है। हालांकि किसी भी निवेश से पहले लागू नियमों और ब्याज दरों की जानकारी देखना जरूरी है।

    इस योजना में फिलहाल 7.4 फीसदी सालाना ब्याज दर का उल्लेख किया गया है। इसमें मिलने वाला ब्याज मासिक आधार पर लिया जा सकता है। निवेशक को शुरुआत में कम से कम 1,000 रुपये से खाता खोलने की सुविधा मिलती है। योजना में व्यक्तिगत खाते के साथ संयुक्त खाता खोलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    मंथली इनकम स्कीम में निवेश की अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। व्यक्तिगत यानी सिंगल अकाउंट में निवेशक अधिकतम 9 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। वहीं संयुक्त खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की राशि के आधार पर हर महीने मिलने वाली ब्याज आय अलग-अलग होगी।

    अगर कोई निवेशक सिंगल अकाउंट में अधिकतम 9 लाख रुपये जमा करता है और 7.4 फीसदी की ब्याज दर लागू रहती है, तो सालाना ब्याज के आधार पर उसकी मासिक आय करीब 5,550 रुपये बनती है। इस तरह पांच साल की अवधि के दौरान ब्याज से नियमित मासिक भुगतान प्राप्त किया जा सकता है। वहीं संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये निवेश करने पर इसी दर से मासिक ब्याज करीब 9,250 रुपये बैठता है।

    इस गणना में यह समझना जरूरी है कि 5,550 रुपये या 9,250 रुपये की रकम मूल निवेश पर मिलने वाला मासिक ब्याज है। मूलधन और ब्याज की वास्तविक प्राप्ति योजना के नियमों और चुने गए भुगतान विकल्प के अनुसार होगी। निवेशक अपनी जरूरत के मुताबिक ब्याज की राशि प्राप्त करने का तरीका चुन सकता है।

    MIS की परिपक्वता अवधि पांच साल निर्धारित है। इसका मतलब है कि योजना को तय अवधि तक जारी रखने पर निवेशक को निर्धारित नियमों के अनुसार निवेशित राशि से संबंधित लाभ मिलता है। यह व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें एकमुश्त बचत से नियमित नकदी प्रवाह की जरूरत होती है।

    हालांकि, निवेश करने से पहले समय से पहले खाता बंद कराने से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, खाता खुलने के एक से तीन साल के भीतर बंद कराने पर मूलधन का 2 फीसदी हिस्सा काटा जा सकता है। वहीं तीन साल पूरे होने के बाद और पांच साल से पहले खाता बंद कराने पर 1 फीसदी की कटौती का प्रावधान बताया गया है।

    योजना में ब्याज से मिलने वाली आय को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर लेने का विकल्प भी बताया गया है। ऐसे में निवेशक अपनी वित्तीय जरूरत के अनुसार भुगतान का तरीका चुन सकता है। हालांकि निवेश से पहले मौजूदा ब्याज दर, निवेश सीमा, समयपूर्व निकासी और अन्य नियमों की ताजा जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    देश के प्रमुख सरकारी बैंकों (Public sector Banks) में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) पर भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई बैंक द्वारा कुछ लोन खातों में तय सीमा से अधिक ब्याज वसूलने और KYC (Know Your Customer) नियमों का पालन नहीं करने के कारण की है। RBI के इस कदम से साफ संदेश गया है कि बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर किसी भी बैंक को राहत नहीं दी जाएगी, चाहे वह सरकारी बैंक ही क्यों न हो।

    क्या है मामला?
    RBI के अनुसार, यह मामला बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के निरीक्षण के दौरान सामने आया। जांच में पाया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुछ ग्राहकों से निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला। इसके अलावा कई खातों में ग्राहकों की KYC जानकारी को तय समय सीमा के अंदर CKYCR (Central KYC Records Registry) में अपडेट नहीं किया गया, जो RBI के नियमों का उल्लंघन है।

    कारण बताओ नोटिस
    इन खामियों के सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया और उससे स्पष्टीकरण मांगा। बैंक को लिखित जवाब देने के साथ-साथ व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया गया। हालांकि, RBI ने बैंक की दलीलों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद 30 जून 2026 को बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।

    RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई असर पड़ेगा। यानी बैंक की सामान्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं
    इसी कार्रवाई के तहत रिजर्व बैंक ने एक अन्य मामले में GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने का आरोप था। RBI ने नोटिस, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद कंपनी की दलीलों को भी असंतोषजनक पाया और 24 जून 2026 को जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया।

    बैंकिंग एक्सपर्ट का मानना है कि हाल के सालों में RBI नियमों के पालन को लेकर काफी सख्त हुआ है। KYC, ब्याज दरों की पारदर्शिता और ग्राहक हितों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। ऐसे में सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए RBI के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया गया यह जुर्माना ग्राहकों के लिए एक संदेश है कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए RBI लगातार सक्रिय है। वहीं, ग्राहकों के लिए यह राहत की बात है कि इस कार्रवाई का उनकी जमा राशि, बैंक खाते या बैंक की नियमित सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

  • FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?

    FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?


    नई दिल्ली। आज के समय में निवेश के लिए लोगों के पास तीन बड़े रास्ते हैंFD, EMI और SIP। FD को सुरक्षित माना जाता है, EMI से लोग अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि SIP धीरे-धीरे पैसा बढ़ाने का काम करता है। लेकिन सवाल यह है कि 20 साल बाद कौन आपको अमीर बना सकता है? अगर आप आज अपनी कमाई का एक हिस्सा इन तीनों में से किसी भी रास्ते पर लगाते हैं, तो 20 साल बाद आपकी स्थिति कैसी होगी?
    चलिए एक आसान कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं कि FD की सीमा क्या है, EMI का नुकसान कितना भारी है और SIP की कंपाउंडिंग पावर कितनी मजबूत है।

    सबसे पहले FD की बात करें। FD को भारत में भरोसे और सुरक्षा का दूसरा नाम माना जाता है।  20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹52 लाख तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर आप महंगाई को भी ध्यान में रखें, तो 20 साल बाद उस पैसे की असली वैल्यू लगभग ₹15-20 लाख के आसपास ही रह सकती है।

    इसका मतलब FD आपके पैसे को बचाती है, लेकिन महंगाई के हिसाब से बढ़ा नहीं पाती। FD में रिटर्न कम होने के कारण आपका पैसा “सुरक्षित” जरूर रहता है, लेकिन वह अमीर नहीं बनाता।

    अब EMI की बात करें। EMI आमतौर पर लोगों को तुरंत सुख देती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए भारी पड़ सकती है। जब आप किसी पर्सनल लोन या लग्जरी कार के लिए 20 साल तक ₹10,000 EMI भरते हैं, तो आप कुल मिलाकर लगभग ₹24 लाख तो दे ही देते हैं, साथ ही बैंक को ब्याज में लगभग ₹15-20 लाख अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। 20 साल बाद आपके पास केवल एक पुरानी चीज बचती है जिसकी वैल्यू काफी कम हो चुकी होती है।

    EMI असल में आपकी फ्यूचर की कमाई को आज ही खर्च कर देती है और आपके लिए एक लंबा ब्याज का बोझ छोड़ जाती है। इसलिए EMI आपको अमीर नहीं बनाती, बल्कि बैंक को अमीर बनाती है।

    तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प SIP है। SIP में आप छोटे-छोटे निवेश करते हैं और कंपाउंडिंग की ताकत से लंबे समय में बड़ा फंड बनाते हैं। अगर आप हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और औसतन 12% रिटर्न मानें, तो 20 साल बाद आपका निवेश लगभग ₹24 लाख होकर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। और अगर रिटर्न 15% रहे तो यह राशि ₹1.5 करोड़ तक भी पहुंच सकती है।

    SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करता है। शुरुआती सालों में मार्केट गिरती है तो units ज्यादा मिलते हैं, और बाद में जब मार्केट बढ़ता है तो वही units ज्यादा लाभ देती हैं।

    अब 20 साल की जंग में किसका पलड़ा भारी है? FD सुरक्षित है, लेकिन महंगाई के हिसाब से अमीर नहीं बनाती। EMI आपको तुरंत सुविधा देती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी कमाई को खा जाती है और ब्याज के बोझ से आपकी संपत्ति घटती है।

    वहीं SIP में जोखिम जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह कंपाउंडिंग के जरिए सबसे ज्यादा फायदा देता है। अगर आपका लक्ष्य 20 साल में “वेल्थ” बनाना है और आप निवेश को समय के साथ बढ़ते देखना चाहते हैं, तो SIP सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
    (नोट: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)
  • Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    नई दिल्ली। भारत में कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 है, जिन्हें केंद्र सरकार कंट्रोल करती है। बैंक ऑफ इंडिया भी देश के 12 सरकारी बैंकों की लिस्ट में शामिल है। ये सरकारी बैंक अपने ग्राहकों को एफडी खातों पर काफी अच्छा ब्याज दे रहा है। बताते चलें कि पिछले साल आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई 1.25 प्रतिशत की कटौती के बाद तमाम बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में संशोधन कर दिया था। बैंक ऑफ इंडिया ने भी 1 दिसंबर, 2025 से अपनी एफडी स्कीम की ब्याज दरों में संशोधन किया था। यहां हम आपको बैंक ऑफ इंडिया की एक ऐसी एफडी स्कीम के बारे में बताएंगे, जिसमें 2 लाख रुपये जमा कर गारंटी के साथ 77,945 रुपये तक का फिक्स ब्याज पाया जा सकता है।
    एफडी खातों पर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है बैंक ऑफ इंडिया
    बैंक ऑफ इंडिया में कम से कम 7 दिनों के लिए और ज्यादा से ज्यादा 10 साल के लिए एफडी खाता खुलवाया जा सकता है। ये सरकारी बैंक एफडी खातों पर 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है। बैंक ऑफ इंडिया 450 दिनों की स्टार स्वर्णिम स्पेशल एफडी स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है। बैंक इस स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.70 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 7.20 प्रतिशत और अति वरिष्ठ नागरिकों को 7.35 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पब्लिक सेक्टर का ये बैंक 3 साल से ज्यादा और 5 साल से कम अवधि वाली एफडी स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 6.75 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है।

    2 लाख रुपये जमा करने पर मिलेगा 77,945 रुपये तक का ब्याज
    अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने (5 साल से कम) की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो 6.25% की ब्याज दर से आपको मैच्यॉरिटी पर कुल 2,71,302 रुपये मिलेंगे, जिसमें 71,302 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है। इसी तरह, अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो आपको 6.75 प्रतिशत की ब्याज दर से मैच्यॉरिटी पर कुल 2,77,945 रुपये मिलेंगे, जिसमें 77,945 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है।