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  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    नई दिल्ली /छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दिए गए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संबोधन में देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का दावा किया गया है, जिसे सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर यह कहा गया कि वर्षों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भय, असुरक्षा तथा हिंसा के वातावरण की जगह शांति, विश्वास और विकास की नई धारा ने स्थान ले लिया है। संबोधन में यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती को समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया, जो सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और समन्वित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है।

    इस दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया और कहा गया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और जोखिम भरे इलाकों के बावजूद जवानों ने लगातार साहस और धैर्य के साथ अभियान को आगे बढ़ाया। यह भी उल्लेख किया गया कि अभियान के दौरान कई स्तरों पर रणनीतिक कार्रवाई की गई, जिसके चलते नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ा और धीरे-धीरे इसका प्रभाव समाप्त होने की दिशा में बढ़ा। इस पूरे अभियान को एक लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया गया, जिसमें सुरक्षा बलों की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

    संबोधन में यह भी कहा गया कि कुछ राजनीतिक परिस्थितियों में इस अभियान को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका, लेकिन इसके बावजूद प्रयासों को लगातार जारी रखा गया और परिणामस्वरूप स्थिति में निर्णायक बदलाव देखने को मिला। बस्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह इलाका कभी नक्सल गतिविधियों के कारण अत्यधिक प्रभावित माना जाता था, लेकिन अब वहां सामान्य जीवन की बहाली स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच बढ़ता आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना इस परिवर्तन का प्रमुख संकेत माना जा रहा है।

    इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अब क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति देने पर जोर दिया जाएगा, जिसमें सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में योजनाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रयास किया जाएगा कि शांति और स्थिरता को लंबे समय तक बनाए रखा जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह जोड़ा जा सके। लोगों के जीवन में आए बदलाव को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां भय के स्थान पर अवसरों की नई संभावनाएं उभर रही हैं।

    अंत में यह संदेश दिया गया कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा व्यवस्था की सफलता नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी है, जिसमें समाज, प्रशासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त भूमिका ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में अब एक नए युग की शुरुआत का दावा किया जा रहा है, जहां स्थायी शांति, विकास और विश्वास को प्राथमिकता दी जाएगी और आगे की दिशा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय होगी।