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  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

  • ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 9 से 13 जून तक इंदौर में, 21 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल

    ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 9 से 13 जून तक इंदौर में, 21 देशों के कृषि मंत्री होंगे शामिल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में केन्द्र सरकार द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    यह जानकारी रविवार देर शाम केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में इंदौर में आयोजित सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की और इसे ऐतिहासिक अवसर बताया।

    वैश्विक कृषि विमर्श का केंद्र बनेगा इंदौर

    केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह सम्मेलन खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृषि व्यापार और किसान कल्याण जैसे विषयों पर नई दिशा तय करेगा। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी तैयारियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, समयबद्ध और सुव्यवस्थित हों। सरकार का लक्ष्य केवल आयोजन नहीं, बल्कि भारत की कृषि क्षमता, नवाचार और परंपरा का प्रभावी प्रदर्शन करना है।

    केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देशों का वैश्विक कृषि में बड़ा योगदान है, जिसमें लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68 फीसदी छोटे किसान, करीब 45 प्रतिशत अनाज उत्पादन इन देशों से जुड़ा है। सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।

    केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण, जलवायु, स्मार्ट कृषि, कृषि व्यापार और आपूर्ति शृंखला, डिजिटल कृषि और प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स, किसान कल्याण और अनुसंधान सहयोग शामिल हैं। यह सम्मेलन केवल औपचारिक बैठक नहीं होगा, बल्कि अतिथियों को इंदौर की स्वच्छता, संस्कृति, मालवा की मेहमाननवाज़ी और कृषि विविधता से भी परिचित कराया जाएगा। इंदौर के 56 दुकान के सुस्वाद कराएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह आयोजन मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और इससे किसानों, कृषि नवाचारों और नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा। यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग, खाद्य सुरक्षा और नवाचार के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत और मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्य प्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।

    बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

    समीक्षा बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायकगण मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, इंदौर संभागायुक्त डॉ सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

    MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित तारामंडल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ का रविवार देर शाम आयोजित पैनल चर्चा ‘वे फॉरवर्ड’ सत्र के साथ समापन हुआ। इस सत्र में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल विज्ञान, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप्स और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर अपने विचार रखे।


    मानव संसाधन और स्टार्टअप की भूमिका रही महत्वपूर्ण

    पीआरएल, डीओएस अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। चंद्रमा पर मानव मिशन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान को आवश्यक बताते हुए कहा कि देश में विकसित हो रहे स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


    स्वदेशी तकनीक और उद्योग सहभागिता पर जोर

    एनसीआरए-टीआईएफआर, एसपीपी परिसर पुणे के निदेशक प्रो. यशवंत गुप्ता ने खगोल विज्ञान की बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योगों की भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पहले कई तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जीएमआरटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने देश की तकनीकी क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं में विकसित तकनीकों का साझा उपयोग किया जा सकता है, जिससे लागत कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।


    स्पेस साइंस की शिक्षा का विस्तार आवश्यक

    आईआईएसटी के कुलपति प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस साइंस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स की शिक्षा सीमित संस्थानों तक ही केंद्रित है, इसलिए इस ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी जैसे विषयों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी प्रारंभ से ही इस क्षेत्र के प्रति प्रेरित हो सकें। प्रो. बनर्जी शिक्षा, उद्योग, तकनीक और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को भविष्य के लिए आवश्यक बताया।


    भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के पुनर्पाठ पर बल

    इंडोलॉजिस्ट एवं चिंतक, पद्मश्री डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रमाण आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन और मालवा क्षेत्र की कालगणना एवं खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।

    युवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपार अवसर
    पैनल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सम्मेलन ने उज्जैन की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ते हुए विज्ञान, इतिहास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

  • उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम

    उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है, जहां ‘समय’ की अवधारणा पर विज्ञान और सनातन दृष्टिकोण के समन्वय पर चर्चा हो रही है।

    कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
    वसंत विहार स्थित अत्याधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह आयोजन शासन, विज्ञान और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे।

    साइंस सेंटर से उज्जैन को नई पहचान
    करीब 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक साइंस सेंटर ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दी है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

    विज्ञान और सनातन के बीच सेतु
    सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। ‘महाकाल’ यानी समय की अवधारणा को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं।

    युवाओं के लिए खास आकर्षण
    इस आयोजन में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान से जोड़ रही हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन भी विशेष आकर्षण का केंद्र है।

    विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत
    सम्मेलन के साथ ही विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा की गई।

    आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम
    वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन में महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर हो रहा यह मंथन आस्था और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल नई सोच को जन्म देगा, बल्कि युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।