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  • भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    नई दिल्ली। भारतीय खानपान के लिए गर्व की बात है कि घर-घर में पसंद किया जाने वाला साधारण लेकिन स्वादिष्ट ‘राजमा-चावल’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। अपने गाढ़े स्वाद और घरेलू अंदाज के लिए मशहूर यह नॉर्थ इंडियन व्यंजन दुनिया की बेहतरीन बीन्स डिशेज में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि अब भारतीय घरेलू व्यंजन भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं और लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहे हैं।

    ग्लोबल रैंकिंग में मिली जगह
    हाल ही में फूड रेटिंग प्लेटफॉर्म TasteAtlas द्वारा जारी सूची में राजमा और राजमा-चावल को दुनिया के टॉप 100 बीन्स डिशेज में स्थान दिया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के हजारों यूजर्स की पसंद के आधार पर तैयार की गई है, जो भारतीय स्वाद की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।

    रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन

    इस सूची में राजमा को 14वां स्थान मिला है, जबकि राजमा-चावल की जोड़ी 25वें पायदान पर रही। खास बात यह है कि इस लिस्ट में ब्राजील, पुर्तगाल, मैक्सिको और तुर्की जैसे देशों के पारंपरिक व्यंजन भी शामिल हैं, जिनके बीच भारतीय डिश का यह स्थान काफी अहम माना जा रहा है।

    सिर्फ खाना नहीं, एक एहसास
    राजमा-चावल एक सरल लेकिन बेहद लोकप्रिय डिश है, जिसमें मसालों में पके लाल राजमा को चावल के साथ परोसा जाता है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा स्वाद है, जो लोगों को घर और बचपन की याद दिलाता है।

    सादगी में छिपा है असली स्वाद

    इस डिश की खासियत इसकी पारंपरिक तैयारी में है। राजमा को रातभर भिगोकर प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू गहराई तक विकसित होती है। चावल के साथ परोसे जाने पर यह स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल बन जाता है।

    टॉप पर रही पुर्तगाल की डिश
    जहां भारतीय राजमा-चावल ने सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं पहला स्थान पुर्तगाल की मशहूर डिश Sopa da pedra को मिला। इसके अलावा टॉप 10 में ब्राजील की फेजोआदा, मैक्सिको की सोपा तारास्का और मिस्र की फुल मेडामेस जैसी डिशेज भी शामिल हैं।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता

    भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल आया है, जब लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म बूंग ने BAFTA फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता। सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और बूंग की पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी।

    बूंग की सफलता भारतीय सिनेमा की विविधता और सार्थक कहानी कहने की परंपरा को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रतीक है। यह पुरस्कार न केवल फिल्म के निर्माता और कलाकारों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सराहना को भी दर्शाता है।

    आपको बता दें कि बूंग की यात्रा 2023 में शुरू हुई थी। फिल्म को वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में पेश किया गया था। यह पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और उन्हें वैश्विक उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया। इस सफलता ने फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समालोचक प्रशंसा दिलाई और इसकी पहचान पक्की की।

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन में सहयोग करने वाले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की भी सराहना की। फिल्म बाजार, वर्क इन प्रोग्रेस लैब और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को वैश्विक दर्शकों से जोड़ते हैं और रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बूंग ने न केवल अपने कंटेंट के दम पर नाम कमाया बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को भी मजबूती दी।

    फिल्म के निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बूंग की कहानी बच्चों और परिवारों को जोड़ने के साथ-साथ जीवन के सकारात्मक संदेश देती है। इस पुरस्कार से भारतीय सिनेमा की नई और विविध कथाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बूंग जैसी फिल्मों की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक मूल्य भी पेश कर सकता है। इस उपलब्धि से फिल्म निर्माताओं में नए प्रोजेक्ट्स और नवाचार के लिए प्रेरणा मिलेगी।