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  • टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली ।टी20 क्रिकेट के आधुनिक दौर में बल्लेबाजी के तौर-तरीकों और रन बनाने की गति में व्यापक परिवर्तन आया है। पावर हिटिंग, उन्नत फिटनेस और नई रणनीतियों के कारण खेल का स्वरूप काफी आक्रामक हो चुका है। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट के लंबे इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे लगभग तीन दशकों के बीत जाने के बाद भी कोई देश पार नहीं कर सका है। वर्ष 1997 में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम द्वारा भारत के विरुद्ध कोलंबो में बनाया गया 952 रनों का ऐतिहासिक स्कोर आज भी सर्वोच्च बना हुआ है।

    कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में आयोजित उस ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 537 रनों का विशाल स्कोर बनाकर पारी घोषित की थी। भारत की ओर से कप्तान सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू ने शानदार शतकीय पारियां खेली थीं। उस दौर में 500 से अधिक रनों का स्कोर मैच में बेहद मजबूत स्थिति माना जाता था, किंतु इसके जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी में सलामी बल्लेबाज सनत जयसूर्या ने 340 रनों की मैराथन पारी खेली, जबकि रोशन महानामा ने 225 रनों का योगदान दिया। इन दोनों दिग्गजों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो आज भी टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज अरविंद डी सिल्वा ने भी 126 रन बनाए। श्रीलंकाई टीम ने 271 ओवरों की लंबी बल्लेबाजी के बाद 6 विकेट पर 952 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की थी।

    क्रिकेट आंकड़ों के दृष्टिकोण से श्रीलंका का यह स्कोर टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इस सूची में इंग्लैंड द्वारा बनाया गया 903/7 का स्कोर दूसरे स्थान पर आता है, जबकि हाल के वर्षों में इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 823/7 का स्कोर बनाकर इस आंकड़े के समीप पहुंचने का प्रयास अवश्य किया था। हालांकि 952 रनों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले 29 वर्षों से एवरेस्ट की भांति अडिग खड़ी है।

    वर्तमान टी20 युग में यह प्रश्न बार-बार उठता है कि क्या आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में कोई टीम 1000 रनों के तिलिस्म को तोड़ सकती है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, 1000 रन के आंकड़े को छूने के लिए केवल तेज गति से रन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अत्यंत सपाट पिच, दो से तीन बड़ी और लंबी साझेदारियों तथा विपक्षी गेंदबाजों के पूरी तरह प्रभावहीन रहने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही टीम के कप्तान को व्यक्तिगत या टीम रिकॉर्ड तथा मैच के परिणाम के बीच संतुलन बनाना होगा। मध्य प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमी इस रिकॉर्ड के महत्व को भली-भांति समझते हैं।

    अधिकांश अवसरों पर टेस्ट मैच जीतने के लिए कप्तानों को समय रहते पारी घोषित करनी पड़ती है, ताकि विपक्षी टीम के 20 विकेट निकाले जा सकें। ऐसे में केवल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से बल्लेबाजी जारी रखना मैच के नतीजे को जोखिम में डाल सकता है। श्रीलंका ने 1997 में यह दर्शाया था कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी की क्या सीमाएं हो सकती हैं। आज के आक्रामक दौर में भी 952 रनों की यह क्रिकेटीय दीवार पूरी मजबूती से खड़ी है।

  • इंग्लैंड ने मैनचेस्टर में रचा इतिहास, भारत के खिलाफ सबसे बड़े लक्ष्य का किया सफल पीछा

    इंग्लैंड ने मैनचेस्टर में रचा इतिहास, भारत के खिलाफ सबसे बड़े लक्ष्य का किया सफल पीछा


    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट से जीत दर्ज की। 191 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लिश टीम ने 19 ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया और भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बड़े लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करने का नया रिकॉर्ड बना दिया।

    मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर इंग्लैंड ने 14 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इससे पहले वर्ष 2012 में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 178 रन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था। इस जीत के साथ ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड की लगातार चौथी टी20 जीत भी दर्ज हुई।

    हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में फिल साल्ट को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया। इसके बाद जोस बटलर भी शून्य पर आउट हो गए। महज एक रन पर दो विकेट गंवाने के बाद इंग्लैंड मुश्किल में दिखाई दे रहा था।

    ऐसे समय में कप्तान हैरी ब्रूक और जैकब बेथेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को संभाला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए केवल 23 गेंदों में 50 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया। ब्रूक ने सिर्फ 15 गेंदों में चार चौकों और तीन छक्कों की मदद से 39 रन की विस्फोटक पारी खेली।

    इसके बाद जैकब बेथेल ने जिम्मेदारी संभालते हुए नाबाद 76 रन बनाए। उन्होंने 46 गेंदों की अपनी शानदार पारी में पांच चौके और पांच छक्के लगाए तथा करीब 165 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। टॉम बैंटन ने भी 32 गेंदों में 39 रन बनाकर अहम योगदान दिया। अंत में जोफ्रा आर्चर 10 रन बनाकर नाबाद लौटे और टीम को जीत दिलाई।

    इससे पहले भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 190 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। अभिषेक शर्मा ने 43 रन की तेज पारी खेली जबकि ईशान किशन 49 रन बनाकर अर्धशतक से एक रन दूर रह गए। कप्तान श्रेयस अय्यर ने 37 रन का उपयोगी योगदान दिया।

    मिडिल और डेथ ओवरों में तिलक वर्मा ने सिर्फ 11 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। वहीं महज 15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले वैभव सूर्यवंशी ने 14 रन बनाकर अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई।

    हालांकि भारतीय गेंदबाज इस बड़े स्कोर का बचाव नहीं कर सके और इंग्लैंड ने आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर लक्ष्य हासिल करते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज कर ली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज में जोरदार वापसी की और मुकाबले को रोमांचक बना दिया।

  • विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा भी नहीं कर सके थे जो कमाल, युवा वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू मैच में दो छक्के जड़कर रचा वह इतिहास

    विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा भी नहीं कर सके थे जो कमाल, युवा वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू मैच में दो छक्के जड़कर रचा वह इतिहास

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के युवा और उभरते हुए बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर कदम रखते ही एक ऐसा अनोखा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है, जिसे विराट कोहली, रोहित शर्मा और अभिषेक शर्मा जैसे दिग्गज और आक्रामक बल्लेबाज भी अपने पदार्पण मैच में हासिल नहीं कर पाए थे। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी के बहुप्रतीक्षित डेब्यू का इंतजार आखिरकार समाप्त हुआ, जहां टीम के उप-कप्तान तिलक वर्मा ने उन्हें मैच से पूर्व डेब्यू कैप सौंपी। अपने इस पहले ही मुकाबले में वैभव ने अपनी बल्लेबाजी की आक्रामकता और निडरता का परिचय देते हुए इतिहास की किताबों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में वैभव सूर्यवंशी हालांकि केवल 14 रन ही बना सके, लेकिन इस संक्षिप्त पारी के दौरान उन्होंने दो गगनचुंबी छक्के जड़े। उन्होंने मैच का पहला छक्का इंग्लैंड के सबसे तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की गति का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए फाइन लेग की दिशा में लगाया। इसके बाद चौथे ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने तेज गेंदबाज जोश टंग की धीमी गति की गेंद को भांपते हुए मिड विकेट की दिशा में एक और शानदार छक्का जड़ा। इन दो छक्कों की मदद से वह भारत के उन गिने-चुने बल्लेबाजों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में एक से अधिक छक्के लगाने का कारनामा किया है।

    वैभव सूर्यवंशी अब भारत के छठे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने अपने टी20 पदार्पण मैच में एक से ज्यादा छक्के लगाए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस ऐतिहासिक सूची में पूर्व दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और तेज गेंदबाज आशीष नेहरा जैसे नाम भी शामिल हैं। ‘द वॉल’ के नाम से प्रसिद्ध राहुल द्रविड़ ने भारत के लिए अपने एकमात्र टी20 मैच में इंग्लैंड के खिलाफ ही 21 गेंदों पर 31 रनों की पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने तीन छक्के लगाए थे। वर्तमान भारतीय टीम के स्क्वॉड की बात करें, तो वैभव के अलावा केवल तिलक वर्मा और ईशान किशन ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने डेब्यू मैच में यह कारनामा किया था। तिलक वर्मा ने साल 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू पर तीन छक्के लगाए थे, जबकि ईशान किशन ने साल 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ चार छक्के जड़े थे।

    इस व्यक्तिगत उपलब्धि के बावजूद, मैनचेस्टर में खेले गए इस दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बोर्ड पर 190 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। हालांकि, मेजबान इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने इस बड़े लक्ष्य को 19वें ओवर में केवल चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। इंग्लैंड की इस जीत के सूत्रधार जैकब बेथल रहे, जिन्होंने 76 रनों की नाबाद और मैच जिताऊ पारी खेली, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से भी नवाजा गया। इस हार के बाद भी वैभव सूर्यवंशी का यह निर्भीक प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

    वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

    गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

    टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

    भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

    शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।