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  • ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता प्राप्त करने का दावा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते सात वर्षों में 36 विभिन्न देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। इन भगोड़ों में आतंकवाद, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हत्या और पोक्सो जैसे अति गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में पहचान बदलकर रह रहे अपराधियों को खोजने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट, सैटेलाइट इनपुट और जियो-लोकेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई महीने तक 45 अन्य अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है।

    आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए गए इस अभियान के तहत धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी रिकवर की जा चुकी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित अवैध कमाई को पूरी तरह से कुर्क कर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों को घेरने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर में भी अप्रत्याशित तेजी आई है। अकेले वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि पिछले तीन सालों में यह संख्या 401 तक पहुंच गई है। वैश्विक पुलिस संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल के कारण भगोड़ों की गिरफ्तारी अब पहले से काफी सुगम हो गई है।

    अभियान को और अधिक धार देने के लिए जनवरी 2026 में एक विशेष खुफिया समन्वय समूह का गठन किया गया था, जो विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले मामलों पर काम कर रहा है। इसके साथ ही देश में लागू नए और संशोधित आपराधिक कानूनों ने आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालती प्रक्रिया चलाकर न्याय सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

  • काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 36 देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानूनी व्यवस्था के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में अलग-अलग पहचान के साथ छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल ट्रैकिंग और जियो-लोकेशन जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कई बड़े अपराधियों को भारत लाया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी वापस लाई गई है। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है ताकि अपराध से अर्जित लाभ को समाप्त किया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

    इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी, यौन अपराध और साइबर अपराध जैसे मामले प्रमुख रहे। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग से भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

    जनवरी 2026 में खुफिया समन्वय को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष समूह का गठन भी किया गया, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकता वाले मामलों में कार्रवाई तेज करने का कार्य कर रहा है। सरकार के अनुसार जटिल मामलों में तकनीकी निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों के संयोजन से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है। इसी क्रम में कई चर्चित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों और संशोधित कानूनी प्रावधानों ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया है। अब कुछ मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती। केंद्र का दावा है कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक सहयोग, खुफिया समन्वय और सख्त कानूनी ढांचे के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूत बनाया गया है तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाएगा।

  • भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई से साइबर अपराधियों पर शिकंजा, इंटरपोल के ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में हजारों गिरफ्तार और लाखों पीड़ितों को राहत

    भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई से साइबर अपराधियों पर शिकंजा, इंटरपोल के ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में हजारों गिरफ्तार और लाखों पीड़ितों को राहत


    नई दिल्ली । ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ इंटरपोल ने भारत सहित 97 देशों के सहयोग से अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान चलाकर वैश्विक स्तर पर संगठित साइबर अपराधियों को बड़ा झटका दिया है। ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 नाम से चलाए गए इस अभियान के दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान की गई और 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया। इसके साथ ही लगभग 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध राशि अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही जब्त या फ्रीज कर दी गई।

    यह अभियान 15 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित किया गया। कार्रवाई से पहले विभिन्न देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों के बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट, फर्जी कंपनियों, फोन नंबरों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। समन्वित रणनीति के तहत कई देशों में एक साथ छापेमारी कर साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य सोशल इंजीनियरिंग स्कैम पर रोक लगाना था। इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी एजेंसी के प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या अन्य विश्वसनीय व्यक्ति बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल पर नकली वर्दी और सरकारी कार्यालय जैसा माहौल दिखाकर लोगों को डराया या लालच दिया जाता है, जिसके बाद उनसे बैंकिंग जानकारी या धनराशि हासिल कर ली जाती है।

    ऑपरेशन के दौरान 1.42 लाख से अधिक संभावित पीड़ितों की पहचान की गई और 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 23,715 मामलों का समाधान किया गया। जांच से स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे फैला संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसके लिए देशों के बीच निरंतर समन्वय और सूचना साझा करना आवश्यक है।

    अभियान के दौरान इंटरपोल ने अपने विशेष भुगतान हस्तक्षेप तंत्र I-GRIP का भी उपयोग किया, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के बीच भेजी जा रही संदिग्ध धनराशि को समय रहते रोकने में सफलता मिली। इस प्रणाली ने कई मामलों में बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट तक रकम पहुंचने से पहले ही लेनदेन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कार्रवाई के दौरान कई देशों में चौंकाने वाले खुलासे भी हुए। एक स्थान पर ठगी के लिए नकली पुलिस स्टेशन तैयार कर लोगों को वीडियो कॉल के जरिए डराया जाता था, जबकि दूसरे मामले में रोमांस स्कैम के जरिए करोड़ों डॉलर का लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया गया। कई स्थानों से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अहम साक्ष्य भी बरामद किए गए, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है।

    इस अभियान में कई अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठनों ने भी सहयोग दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर और क्रिप्टो आधारित मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। ऐसे में विभिन्न देशों की संयुक्त कार्रवाई ही इन संगठित नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत माध्यम बन सकती है। इंटरपोल ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सदस्य देशों के साथ तकनीकी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के माध्यम से वैश्विक साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा।

  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।