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  • जानिए क्यों आर माधवन के लिए आत्मघाती साबित हुआ था 'बी और सी' सेंटर्स को रिझाने का फॉर्मूला

    जानिए क्यों आर माधवन के लिए आत्मघाती साबित हुआ था 'बी और सी' सेंटर्स को रिझाने का फॉर्मूला

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदाकारी और चॉकलेटी बॉय की छवि से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले अभिनेता आर माधवन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘धुरंधर 2’ की शानदार व्यावसायिक सफलता और उसमें उनके अभिनय की चौतरफा तारीफ हो रही है। इस बड़ी कामयाबी के बीच, माधवन ने अपने करियर के उस शुरुआती और अंधकारमय दौर को याद किया है, जब उन्होंने दूसरों की सलाह मानकर फिल्म इंडस्ट्री के ‘थलाइवा’ यानी महानायक रजनीकांत के नक्शेकदम पर चलने की कोशिश की थी और उन्हें अपने जीवन के सबसे बड़े वित्तीय और व्यावसायिक संकट का सामना करना पड़ा था।

    एक मशहूर मीडिया प्लेटफॉर्म को दिए इंटरव्यू में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए आर माधवन ने बताया कि जब वे साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे, तब कई कथित विशेषज्ञों और शुभचिंतकों ने उन्हें करियर को लेकर एक विशेष सलाह दी थी। उन लोगों का कहना था कि यदि माधवन को दक्षिण भारत का असली सुपरस्टार बनना है, तो उन्हें केवल शहरी दर्शकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सलाहकारों के मुताबिक, जब तक कोई अभिनेता ‘बी और सी’ सेंटर्स यानी ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों के दर्शकों के बीच अपनी पैठ नहीं बनाता और वहां के लोग उसे स्वीकार नहीं करते, तब तक वह रजनीकांत जैसा बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर सकता।

    इस तरह के आंकड़ों और सलाहों के दबाव में आकर माधवन ने अपनी स्वाभाविक शैली के विपरीत जाकर एक ऐसी फिल्म साइन कर ली, जो पूरी तरह ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे अनपढ़, बेहद गरीब और कमजोर ग्रामीण युवक की भूमिका निभाई थी जिसके पास खाने के भी लाले थे, लेकिन वह एक पेशेवर क्रिकेटर बनने का सपना देखता था। माधवन के करियर का यह प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर इतनी बुरी तरह से पिटा कि फिल्म अपनी लागत निकालना तो दूर, इतिहास की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में शुमार हो गई। इस फिल्म के डूबने का खामियाजा इतना बड़ा था कि फिल्म का निर्माण करने वाले पूरे प्रोडक्शन स्टूडियो को हमेशा के लिए अपना ताला बंद करना पड़ गया था।

    इस बेहद दर्दनाक और अप्रत्याशित विफलता पर बात करते हुए माधवन ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा कि फिल्म के इस महाडिजास्टर ने उनके चेहरे पर एक जोरदार थप्पड़ की तरह काम किया, जिसने उन्हें गहरे अवसाद से निकालकर हकीकत का आईना दिखाया। माधवन के अनुसार, उन्हें यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि उन्हें किसी दूसरे सुपरस्टार की नकल करने के बजाय अपनी खुद की मौलिकता और पहचान पर भरोसा करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सलाह देने वाले लोग अपने नजरिए से सही हो सकते थे, लेकिन उनकी गलती यह थी कि उन्होंने बिना सोचे-समझे उस फॉर्मूले को हूबहू अपने ऊपर लागू कर लिया था।

    इस बड़े झटके के बाद माधवन ने सबक लिया और दूसरों की तरह बनने की अंधी दौड़ से खुद को पूरी तरह बाहर कर लिया। उन्होंने इसके बाद अपनी खुद की अनूठी शैली विकसित की और ‘बी और सी’ सेंटर्स के लिए भी ऐसी फिल्मों का चयन किया जो उनके अपने व्यक्तित्व को सूट करती थीं। इस साक्षात्कार में माधवन ने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी पर भी खुलकर बात की और मजाकिया अंदाज में बताया कि कैसे वे अपनी पत्नी सरिता के साथ पिछले 27 वर्षों से एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वे एक सीधे-साधे मिडिल क्लास मद्रासी आदमी हैं और उनकी पत्नी के पास उनके फोन से लेकर ईमेल और बैंक खातों तक का पूरा एक्सेस रहता है, इसलिए उनसे कुछ भी छिपा पाना नामुमकिन है।

  • जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी अलग शैली, सहज व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाए हुए हैं। 80 और 90 के दशक में बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद भी आज वह नई पीढ़ी यानी जेनजी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया से लेकर युवा दर्शकों तक उनकी बढ़ती लोकप्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

    इसी बीच अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान बातचीत में जैकी श्रॉफ ने अपनी इस लोकप्रियता का कारण बेहद सरल शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा लोगों को उम्र के आधार पर नहीं देखते, बल्कि इंसानियत और व्यवहार को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। उनके अनुसार कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो, हर किसी के साथ समान सम्मान और अपनापन रखना ही उनके स्वभाव की असली पहचान है।

    अभिनेता ने कहा कि उनके लिए जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज इंसानी रिश्ते हैं। वह मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने दिल को खुला रखता है और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनता है, तो संबंध अपने आप मजबूत हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, इसलिए खुद को किसी से बड़ा या बेहतर समझना सही नहीं है।

    जैकी श्रॉफ ने यह भी बताया कि वह हमेशा लोगों के साथ सहजता से जुड़ने की कोशिश करते हैं, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। उनके अनुसार जब व्यवहार में सादगी और अपनापन होता है, तो पीढ़ियों के बीच की दूरी अपने आप खत्म हो जाती है। यही कारण है कि वह अलग-अलग उम्र के दर्शकों से आसानी से जुड़ पाते हैं और उनकी लोकप्रियता हर पीढ़ी में बनी रहती है।

    नई दिल्ली। अपनी आगामी फिल्म को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें एक अनोखी और अलग सोच को दिखाया गया है। फिल्म में उनका किरदार एक दादा का है, जो अपने पोते के साथ दोस्त जैसा रिश्ता साझा करता है। यह कहानी पारिवारिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जहां उम्र की दीवारें रिश्तों को सीमित नहीं करतीं।

    अभिनेता ने कहा कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका नया कॉन्सेप्ट है, जो पारंपरिक सोच से हटकर एक ताजा अनुभव देता है। यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्यार, समझ और अपनापन किसी भी पीढ़ी के बीच दूरी को खत्म कर सकता है।

    जैकी श्रॉफ का यह नजरिया न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने व्यवहार और सोच के जरिए सभी उम्र के दर्शकों से जुड़ा रह सकता है। उनकी सरलता और मानवीय दृष्टिकोण ही उन्हें आज भी दर्शकों के बीच खास बनाता है।

  • पहले खुद देख लो कितने पानी में हो…’ ट्रोलर्स पर भड़के शाहिद कपूर, बोले– नेगेटिविटी इंसिक्योरिटी से आती है

    पहले खुद देख लो कितने पानी में हो…’ ट्रोलर्स पर भड़के शाहिद कपूर, बोले– नेगेटिविटी इंसिक्योरिटी से आती है


    नई दिल्ली । बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ओ रोमियो को लेकर लगातार चर्चा में हैं। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी यह फिल्म 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और भले ही इसकी ओपनिंग धीमी रही लेकिन वीकडेज में फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली है। फिल्म में शाहिद के साथ Triptii Dimri लीड रोल में नजर आ रही हैं। ट्रेलर रिलीज के बाद से ही फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा थी और अब शाहिद की परफॉर्मेंस को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसी बीच एक इंटरव्यू में ट्रोलिंग को लेकर दिए गए उनके बयान ने सुर्खियां बटोर ली हैं।

    हाल ही में शो द राइट एंगल में बातचीत के दौरान शाहिद ने ट्रोलिंग पर बेबाक राय रखी। जब उनसे पूछा गया कि वह सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना और ट्रोलिंग से कैसे निपटते हैं तो उन्होंने साफ कहा कि यह कहना गलत होगा कि इन बातों का कोई असर नहीं पड़ता। उनके मुताबिक जो लोग कहते हैं कि ट्रोलिंग से फर्क नहीं पड़ता वे खुद को गलतफहमी में रख रहे हैं। नेगेटिव बातें असर डालती हैं और इसे नकारना खुद को खतरनाक स्थिति में डालना है।

    शाहिद ने आगे कहा कि इंसान को सिर्फ बाहरी तारीफ या वैलिडेशन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने समझाया कि यह जानना जरूरी है कि आप खुद अपने काम को लेकर कैसा महसूस करते हैं लेकिन साथ ही दर्शकों की भावना को समझना भी उतना ही अहम है। उनका मानना है कि कलाकार और ऑडियंस के बीच कनेक्शन बनाए रखने के लिए संतुलन जरूरी है।

    ट्रोलर्स को लेकर शाहिद ने कड़े शब्दों में कहा आपके बोलने की औकात होनी चाहिए तभी मुंह खोलना चाहिए। पहले खुद देख लो आप कितने पानी में हो फिर बात करो। उन्होंने बताया कि यह सीख उन्हें बचपन से मिली है। बड़े कलाकारों के बीच पले-बढ़े शाहिद ने कहा कि पहले लोग बिना वजह टिप्पणी करने से बचते थे लेकिन आज सोशल मीडिया के दौर में हर किसी को बिना सोचे-समझे बोलने की आदत हो गई है।

    उन्होंने नेगेटिविटी को इंसिक्योरिटी से जोड़ते हुए कहा कि जो लोग लगातार नकारात्मक बातें करते हैं वे अंदर से असुरक्षित डरे हुए या दुखी हो सकते हैं। अगर इतनी नेगेटिविटी बाहर आ रही है तो यह दिखाता है कि उनके अंदर की दुनिया कितनी परेशान है शाहिद ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरी है कि इंसान खुद को पॉजिटिव रखे और गिरकर दोबारा खड़े होने की ताकत बनाए रखे। उनके शब्दों में एक अच्छा फाइटर वही है जो चोट लगने के बाद फिर उठ खड़ा हो।

    ओ रोमियो शाहिद और विशाल भारद्वाज की साथ में चौथी फिल्म है। इससे पहले दोनों कमीने हैदर और रंगून जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। इस फिल्म में नाना पाटेकर फरीदा जलाल दिशा पटानी और तमन्ना भाटिया जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को आईएमडीबी पर 6.4 की रेटिंग मिली है और दर्शकों की प्रतिक्रिया लगातार बेहतर होती दिख रही है।

  • मलाइका अरोड़ा का खुलासा: तलाक पर कोई पछतावा नहीं, प्यार और शादी में अब भी भरोसा

    मलाइका अरोड़ा का खुलासा: तलाक पर कोई पछतावा नहीं, प्यार और शादी में अब भी भरोसा

    नई दिल्ली। बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा ने अपने निजी जीवन और तलाक को लेकर खुलकर बातचीत की। साल 1997 में अरबाज खान से शादी करने वाली मलाइका ने 20 साल बाद तलाक लिया। तलाक के बाद उन्हें सोशल मीडिया और अपने करीबी लोगों से काफी आलोचना झेलनी पड़ी।एक इंटरव्यू में मलाइका ने बताया कि पब्लिक और अपनों के विरोध के बावजूद उन्होंने अपने फैसलों पर अडिग रहते हुए तलाक लिया और अब उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है।
    मलाइका ने कहा कि उस समय उन्हें नहीं पता था कि आगे क्या होगा, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में खुश रहने को प्राथमिकता दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शादी के कॉन्सेप्ट में विश्वास करती हैं, लेकिन यह उनके लिए हमेशा अनिवार्य नहीं था। तलाक के बाद उन्होंने कई रिश्तों में समय बिताया, लेकिन अब भी उन्हें प्यार और रिश्तों में खुशी पाना पसंद है। मलाइका ने कहा कि वे प्यार पाने और बांटने में यकीन रखती हैं और अगर सही समय पर प्यार उनके दरवाजे पर आएगा तो वे उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

    यह इंटरव्यू मलाइका की सशक्त और आत्मनिर्भर छवि को दर्शाता है, जहां उन्होंने अपने फैसलों के प्रति ईमानदारी और अपनी खुशी को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उनके शब्दों से यह भी जाहिर होता है कि तलाक ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्होंने प्यार और जीवन के प्रति अपनी सोच को और मजबूत किया है।

  • माधुरी दीक्षित ने श्रीदेवी संग कैटफाइट पर खुलकर रखी अपनी बात कहाहम दोनों एक-दूसरे की इज्जत करते थे

    माधुरी दीक्षित ने श्रीदेवी संग कैटफाइट पर खुलकर रखी अपनी बात कहाहम दोनों एक-दूसरे की इज्जत करते थे


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की दो दिग्गज अभिनेत्रियां माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी एक समय में न केवल फिल्म इंडस्ट्री की सबसे चर्चित और हिट एक्ट्रेसेस में शामिल थीं बल्कि उनके बीच किसी प्रकार के मतभेदों और कैटफाइट की अफवाहें भी उड़ती रही थीं। अब लंबे समय बाद माधुरी दीक्षित ने इन अफवाहों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और इस मुद्दे पर अपनी साफ़ राय रखी है।

    एक हालिया इंटरव्यू में जब माधुरी से उनके और श्रीदेवी के बीच कथित दुश्मनी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया ऐसी कोई वजह नहीं थी हमारे बीच जो हम एक-दूसरे की इज्जत ना करें। वह उनमें से थीं जिन्होंने अपनी लाइफ में बहुत मेहनत की है और मैं भी उनमें से ही हूं। मुझे लगता है हम दोनों इस बात को अच्छे से समझते थे। माधुरी ने इस बयान के जरिए स्पष्ट किया कि दोनों के बीच कभी कोई असम्मानजनक संबंध नहीं थे और उनकी सफलता को वे एक-दूसरे से बराबरी से सराहती थीं।

    बॉलीवुड में अक्सर अभिनेत्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा की खबरें आती रहती हैं लेकिन माधुरी ने ये कहा कि उनके लिए श्रीदेवी की मेहनत और योगदान को हमेशा सम्मान था। हालांकि दोनों के बीच कभी भी नज़दीकी दोस्ती का कोई सार्वजनिक संकेत नहीं मिला लेकिन माधुरी ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों एक-दूसरे को प्रोफेशनल स्तर पर अच्छी तरह समझते थे। श्रीदेवी के निधन के बाद जब ‘कलंक’ फिल्म में उनके स्थान पर माधुरी ने काम किया तो यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण था।

    माधुरी ने इस फिल्म में श्रीदेवी के किरदार की जगह ली थी और यह उनके लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में देखा गया था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर ने भी माधुरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कलंक मां के दिल के बहुत करीब फिल्म थी पापा खुशी और मैं माधुरी जी के बहुत शुक्रगुजार हैं कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनीं।

    अब माधुरी दीक्षित का एक नया प्रोजेक्ट मिसेज देशपांडे भी चर्चा में है। इस सीरीज़ में उन्होंने एक कैदी का किरदार निभाया है जो एक मर्डर केस में पुलिस की मदद करती है। उनकी एक्टिंग को लेकर फैंस और क्रिटिक्स दोनों से अच्छे रिव्यूज़ मिल रहे हैं। इस प्रकार माधुरी दीक्षित ने श्रीदेवी के साथ अपनी रिश्तों की सच्चाई को स्पष्ट किया और उनकी फिल्मों और अभिनय की सराहना भी की।