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  • 3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज

    3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज


    भोपाल । निवेश के नाम पर देशभर में करीब 3200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी लविश उर्फ लविश चौधरी को दुबई से भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। विदेश में छिपे किसी आरोपी को वापस भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश की किसी जांच एजेंसी की ओर से की जा रही यह पहली बड़ी प्रत्यर्पण कवायद बताई जा रही है। लविश के खिलाफ पहले ब्लू नोटिस और उसके बाद रेड नोटिस जारी कराया जा चुका है। ब्लू नोटिस के जरिए एसटीएफ को उसके दुबई में होने और उसकी लोकेशन की पुष्टि करने में मदद मिली। अब जांच एजेंसी का अगला लक्ष्य आरोपी को दुबई से भारत लाकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करना है।

    एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की कार्रवाई के लिए केस से जुड़े करीब 200 दस्तावेज अरबी भाषा में तैयार कराए हैं। इन दस्तावेजों को सत्यापन के लिए इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उस अदालत से दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है जहां आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया गया है। एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा के मुताबिक अदालत से सत्यापन और मंजूरी मिलने के बाद अगले 15 दिनों में पूरी फाइल दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके बाद दस्तावेज राज्य स्तरीय प्रक्रिया से गुजरते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय तक पहुंचेंगे और इन्हीं माध्यमों से प्रत्यर्पण का अनुरोध संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित प्राधिकरण या अदालत के सामने रखा जाएगा।

    भारत और यूएई के बीच वर्ष 1999 से प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसी संधि के तहत तय शर्तों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी आरोपी के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में लविश को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचने वाली है। इस मामले में एसटीएफ अब तक करीब 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का फोकस अब विदेश में मौजूद मुख्य आरोपी तक पहुंचने पर है।

    प्रत्यर्पण के लिए तैयार की गई फाइल में आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर केस डायरी जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य अदालत से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। एसटीएफ के अनुसार मूल केस डायरी और ज्यादातर रिकॉर्ड हिंदी में हैं। यूएई की कानूनी प्रक्रिया में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए इनका अरबी भाषा में अनुवाद कराया गया है। इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा की कॉपी भी तैयार की गई है। इस तरह भारतीय जांच से जुड़े दस्तावेजों को यूएई की कानूनी व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    लविश की तलाश में एसटीएफ ने सबसे पहले ब्लू नोटिस का सहारा लिया था। जांच एजेंसी के मुताबिक ब्लू नोटिस के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान उसकी लोकेशन या उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। इसी प्रक्रिया के दौरान एसटीएफ को इनपुट मिला कि लविश अपने पासपोर्ट के जरिए दुबई पहुंचा था और इसके बाद उसके बाहर निकलने का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इस जानकारी के आधार पर उसके दुबई में मौजूद होने की पुष्टि की गई।

    इसके बाद एसटीएफ ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया। रेड नोटिस किसी वांछित व्यक्ति की तलाश और प्रत्यर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए अस्थायी गिरफ्तारी का अनुरोध होता है। हालांकि रेड नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता और जिस देश में आरोपी मौजूद है वहां की कानून व्यवस्था के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई होती है।

    अब लविश के मामले में एसटीएफ ने लोकेशन की पुष्टि से आगे बढ़ते हुए प्रत्यर्पण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अदालत से दस्तावेजों के सत्यापन के बाद फाइल सीबीआई मुख्यालय पहुंचेगी और फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के जरिए यूएई के संबंधित प्राधिकरण तक मामला पहुंचेगा। इसके बाद दुबई में आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • लालच में गवां दी कमाई: रिटायर टीआई के साथ 14 लाख की ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप ने बनाया शिकार

    लालच में गवां दी कमाई: रिटायर टीआई के साथ 14 लाख की ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप ने बनाया शिकार


    छिंदवाड़ा । जिले में रिटायर टीआई कोमल दियावार ठगी का शिकार हो गए जब फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर बनाए गए एक ग्रुप ने उनके साथ 14 लाख से अधिक की ठगी कर दी। ठगों ने मोटा मुनाफा दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसाया।

    ठगी का तरीका
    जानकारी के अनुसार ठगों ने एक ट्रेडिंग कंपनी जैसा दिखने वाला ग्रुप बनाया और रिटायर अधिकारी को उसमें शामिल किया। शुरुआत में खाते में अच्छे मुनाफे का लालच दिखाया गया। विश्वास होने के बाद अधिकारी ने अपने 14 लाख रुपए ग्रुप के माध्यम से जमा कर दिए। अचानक ग्रुप बंद होने पर उन्हें ठगी का अंदाजा हुआ और वह कोतवाली थाना पहुंचे।

    पुलिस कार्रवाई

    कोतवाली थाना प्रभारी आशीष धुर्वे ने मीडिया को बताया कि फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से रिटायर अधिकारी को धोखा दिया गया। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।

    सावधानी की जरूरत

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश के लालच में जल्दबाजी करना अक्सर भारी पड़ता है। किसी भी निवेश से पहले कंपनी का सत्यापन आधिकारिक पंजीकरण और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। यह मामला निवेश के नाम पर बढ़ती ठगी की गंभीर चुनौती को उजागर करता है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी देता है।

  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां

    CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां


    नई दिल्ली । देश में बढ़ते हुए संगठित साइबर अपराधों पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया है जिसका अनुमानित आकार ₹1 000 करोड़ से अधिक का है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन स्कीमों के माध्यम से आम जनता को निशाना बना रहा था। CBI ने इस मामले में गहन जांच के बाद 17 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोपपत्र चार्जशीट दाखिल किया है। इन आरोपियों में चार विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो इस रैकेट के अंतर्राष्ट्रीय आयामों को दर्शाते हैं।

    ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन

    जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ठगों ने ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए फर्जी लोन ऑफर आकर्षक लेकिन झूठे लोन प्रस्तावों के ज़रिए प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ठगी करना।
    नकली निवेश और पोंजी स्कीम मल्टी लेवल मार्केटिंग और पोंजी योजनाओं के झूठे वादे देकर लोगों से बड़ी पूंजी निवेश करवाना।
    फर्जी मोबाइल ऐप कई नकली मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना।झूठे नौकरी प्रस्ताव अच्छी वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर सिक्योरिटी डिपॉजिट या रजिस्ट्रेशन फीस लेना।CBI सूत्रों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के संचालन में चीन से जुड़े ठगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी जो भारत में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े पैमाने की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।

    फर्जी कंपनियों का जाल

    धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को वैध दिखाने और उसे विदेश भेजने के लिए इस गिरोह ने कंपनियों का एक बड़ा जाल बिछाया था। प्रारंभिक जांच में 58 से लेकर 111 जैसा कि शीर्षक में बताया गया है तक फर्जी या शेल कंपनियों का पता चला है जिनका उपयोग केवल ठगी के पैसे को लेयरिंग करने के लिए किया जाता था।CBI ने इस मामले में अक्टूबर में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
    आरोपपत्र में सभी 17 आरोपियों पर धोखाधड़ी आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।इस खुलासे से यह साफ होता है कि साइबर अपराधी अब छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क बनाकर संगठित रूप से काम कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को लगातार अपनी जांच तकनीकों को उन्नत करना पड़ रहा है। CBI की यह सफलता देश में साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है।