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  • फरवरी में कमोडिटी फंड्स में बड़ी गिरावट, निवेश घटकर ₹45,708 करोड़

    फरवरी में कमोडिटी फंड्स में बड़ी गिरावट, निवेश घटकर ₹45,708 करोड़


    नई दिल्ली। फरवरी 2026 में सेंसेक्स का रुझान कमोडिटी फंड से अचानक घटता नजर आया, जिससे इस एसेट क्लास में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैल्यूमेट्रिक्स कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कुल सेंसेक्स निवेश 45,708 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद इस सेक्टर ने इंडेक्स आधार पर 80.3 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है, जो इसकी स्थिर क्षमता को बरकरार रखता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में तेजी का धीमा पड़ना रही। सोना और चांदी दोनों में फरवरी के दौरान कमजोरी देखी गई, जिसके चलते सेंसेक्स ने इस गिरावट से दूरी बना ली। जनवरी में जहां सेंसेक्स सेक्टर में 51,483 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, वहीं फरवरी में यह सिर्फ 5,774 करोड़ रुपये रह गया-यानी करीब 89 प्रतिशत की गिरावट। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक तेजी से के बाद मुनाफेवसूली की रणनीति अपना रहे हैं।

    इक्विटी में स्थिरता, मिड-स्मॉल कैप में ‘डिप बाइंग’ का ट्रेंड

    कुल नेट एसेट फ्लो में भी बड़ी गिरावट आई है। जनवरी के 1,64,277 करोड़ रुपये के मुकाबले फरवरी में यह 73,842 करोड़ रुपये रह गया। मनी मार्केट में भी ठंडापन देखने को मिला, जहां निवेश 45 प्रतिशत गिरकर 42,970 करोड़ रुपये पर आ गया। वहीं, फिक्स्ड इनकम से लगातार पैसा निकल रहा, हालांकि आउटफ्लो में हल्की कमी आई और यह 16,919 करोड़ रुपये रहा।

    इक्विटी उगाने में गिरावट लेटेस्ट लिमिटेड रही। निवेश 52,110 करोड़ रुपये से बढ़कर 42,017 करोड़ रुपये रहा, लेकिन बाजार में स्थिरता बनी रही। बदले पर मिड कैप और स्मॉल कैप रिकवरी में निवेश बढ़ाया है, जो यह संकेत देता है कि निवेशक गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं। मिड कैप निवेश 3,297 करोड़ से बढ़कर 3,739 करोड़ रुपये और स्मॉल कैप 2,536 करोड़ से बढ़कर 3,055 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, लार्ज कैप में थोड़ी गिरावट के बावजूद यह निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।

    इसके अलावा, फैक्टर फंड में भी दिलचस्प तेजी से देखने को मिली। निवेश 3,116 करोड़ से बढ़कर 4,495 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें ‘क्वालिटी’ कैटेगरी ने सबसे ज्यादा आकर्षण हासिल किया। विश्लेषकों के अनुसार, एक नए एनएफओ (न्यू फंड ऑफर) लॉन्च ने इस ऊंचाई में निवेश को बढ़ावा दिया है।

    कुल मिलाकर, फरवरी का महीना निवेश के लास से संतुलन का रहा, जहां जनवरी की असामान्य तेजी के बाद बाजार सामान्य होता दिखा। कमोडिटी में गिरावट, इक्विटी में स्थिरता और मिड-स्मॉल कैप में बढ़ती ब्याज यह संकेत देती है कि निवेशक अब ज्यादा सोच-समझकर और इक्विटी तरीकों से निवेश कर रहे हैं।

  • दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती

    दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

    International Monetary Fund के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।

    जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं और वैश्विक चुनौतियों के कारण अपने विकास अनुमान घटा रही हैं, तब भारत की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार पूरे वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, भले ही वैश्विक व्यापार में चुनौतियां बनी रहें।

    वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का सबसे बड़ा योगदान
    आईएमएफ का अनुमान है कि वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान लगभग 17 प्रतिशत हो सकता है। यह आंकड़ा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखता है।

    रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक वृद्धि में योगदान के मामले में अमेरिका दूसरे स्थान पर रह सकता है, जहां से लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा अन्य देशों में

    Indonesia से 3.8 प्रतिशत

    Turkey से 2.2 प्रतिशत

    Saudi Arabia से 1.7 प्रतिशत

    Vietnam से 1.6 प्रतिशत योगदान का अनुमान लगाया गया है।

    वहीं Nigeria और Brazil से करीब 1.5 प्रतिशत योगदान की संभावना जताई गई है।

    तुलनात्मक रूप से देखें तो China की विकास दर लगभग 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारत की तुलना में कम है।

    घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मिल रही मजबूती
    भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का असर देश के पूंजी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है।

    घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग ने वर्ष 2025 में अपने एसेट बेस में लगभग 14 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की। इसके साथ कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब 81 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय निवेशक अब लंबे समय के लिए पूंजी बाजार में निवेश करने के प्रति अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।

    एसआईपी निवेश में रिकॉर्ड वृद्धि
    साल 2025 में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी Systematic Investment Plan के जरिए निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान एसआईपी के माध्यम से कुल 3.34 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। तुलना करें तो 2024 में यह आंकड़ा 2.68 लाख करोड़ रुपये था जबकि 2023 में यह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तेजी से बढ़ते निवेश से साफ है कि छोटे और मध्यम निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगातार बढ़ रहा है।

    विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हो रही
    पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी हद तक विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की संरचना धीरे-धीरे बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है और लंबे समय में यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

    निवेश के क्षेत्र में अभी भी बड़ी संभावनाएं
    हालांकि भारत में निवेश की संभावनाएं अभी भी काफी व्यापक हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी केवल 15 से 20 प्रतिशत परिवार ही शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसके मुकाबले United States में लगभग 50 से 60 प्रतिशत परिवार पूंजी बाजार से जुड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में भारत में घरेलू निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार दोनों को मजबूती मिलेगी।