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  • सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 30.61 प्रतिशत बढ़कर 38,306 करोड़ रुपये पहुंचा, उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये हुआ

    सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 30.61 प्रतिशत बढ़कर 38,306 करोड़ रुपये पहुंचा, उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सितंबर 2026 के दौरान इक्विटी योजनाओं में निवेश में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 38,306.55 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त में दर्ज 29,328.62 करोड़ रुपये के मुकाबले 30.61 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 82.64 लाख करोड़ रुपये रही। हालांकि, इक्विटी योजनाओं में निवेश बढ़ने के बावजूद डेट फंड से भारी निकासी के कारण उद्योग का कुल शुद्ध निवेश नकारात्मक रहा।

    सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, ओपन-एंडेड इक्विटी योजनाओं में कुल 74,831.96 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि 36,525.41 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। निवेश और निकासी के अंतर के आधार पर इन योजनाओं में शुद्ध निवेश 38,306.55 करोड़ रुपये रहा। इक्विटी योजनाओं का कुल शुद्ध एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 37.54 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं, सितंबर के दौरान इन योजनाओं का औसत एयूएम 38,50,660.61 करोड़ रुपये रहा।

    इक्विटी फंड की अलग-अलग श्रेणियों में स्मॉल कैप फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहे। इस श्रेणी में सितंबर के दौरान 9,038.57 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। स्मॉल कैप योजनाओं में कुल 13,025.13 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि 3,986.56 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। इस श्रेणी में निवेशकों के कुल 3.03 करोड़ फोलियो दर्ज किए गए। फोलियो से आशय निवेशकों के म्यूचुअल फंड खातों से है।

    अन्य इक्विटी श्रेणियों में मिड कैप फंड में 7,834.84 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। फ्लेक्सी कैप फंड में 6,701.80 करोड़ रुपये, लार्ज एंड मिड कैप फंड में 4,271.22 करोड़ रुपये और मल्टी कैप फंड में 3,859.55 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में स्मॉल कैप के साथ मिड कैप और फ्लेक्सी कैप योजनाओं में भी निवेशकों की अच्छी भागीदारी रही।

    थीमैटिक फंड में 1,800.07 करोड़ रुपये और सेक्टोरल फंड में 1,840.02 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके अलावा फोकस्ड फंड में 1,390.84 करोड़ रुपये, वैल्यू फंड में 1,290.89 करोड़ रुपये और लार्ज कैप फंड में 859.47 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। दूसरी ओर, कॉन्ट्रा फंड से 97.88 करोड़ रुपये और ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड से 662.14 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई।

    पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की स्थिति देखें तो सितंबर में कुल 1,33,375.57 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण डेट फंड से 1,83,155.76 करोड़ रुपये का भारी आउटफ्लो रहा। इस तरह इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश के बावजूद डेट श्रेणी से निकासी ने उद्योग के कुल आंकड़ों को प्रभावित किया। सितंबर में उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि अगस्त में यह 87.08 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

    एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में सितंबर के दौरान निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इस श्रेणी में कुल 15,501.40 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इक्विटी ईटीएफ में 9,959.96 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जबकि गोल्ड ईटीएफ में 4,450.61 करोड़ रुपये और सिल्वर ईटीएफ में 1,974.32 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। अगस्त में इक्विटी फंड में 29,328.62 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था, जो जुलाई की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक था। सितंबर में यह निवेश और बढ़कर 38,306.55 करोड़ रुपये पहुंच गया।

  • सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 45,536 करोड़ रुपये, लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब आकर्षक

    सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 45,536 करोड़ रुपये, लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब आकर्षक


    नई दिल्ली ।
    सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली की। महीने के दौरान उन्होंने कुल 45,536 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे। हालांकि, प्राथमिक बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और उन्होंने सितंबर में 9,676 करोड़ रुपये का निवेश किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती बिकवाली के पीछे अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका प्रमुख कारण रही।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसी दबाव के बीच बाजार लगातार आठ सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। इस दौरान 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमजोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार में हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली में ठहराव या उनके दोबारा खरीदारी की ओर लौटने के लिए कुछ सकारात्मक संकेतों की जरूरत होगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद के कारण एफपीआई का रुख कुछ सकारात्मक हुआ था, लेकिन यह बदलाव ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने करीब 34,965 करोड़ रुपये की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए निर्धारित इक्विटी बिकवाली 27,962 करोड़ रुपये रही। इससे महीने के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निकासी तेज होने का संकेत मिला।

    बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, द्वितीयक बाजार में बिकवाली और प्राथमिक बाजार में निवेश का अंतर यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे हैं। वे निवेश के अवसरों का चयन पहले की तुलना में अधिक सावधानी से कर रहे हैं। यह रुझान अक्टूबर में भी जारी रहने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। सितंबर 2026 में डीआईआई ने नकद इक्विटी बाजार में 76,030 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू संस्थागत और खुदरा निवेशकों की लगातार खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया।

    आगे बाजार की दिशा वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों से भी प्रभावित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में विदेशी निवेशकों की गतिविधि, घरेलू संस्थागत निवेश, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के दूसरी तिमाही के प्रदर्शन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

  • सेंसेक्स 173 अंक चढ़कर 83,450 पर बंद, निफ्टी 25,725 पर; बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी

    सेंसेक्स 173 अंक चढ़कर 83,450 पर बंद, निफ्टी 25,725 पर; बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी


    मुंबई । शेयर बाजार में आज 17 फरवरी को सीमित दायरे में बढ़त देखने को मिली। BSE Sensex 173 अंक चढ़कर 83,450 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 42 अंक की तेजी के साथ 25,725 पर बंद हुआ। बाजार में बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी रही, जबकि मेटल और एनर्जी सेक्टर दबाव में रहे।

    आज के कारोबार में Cochin Shipyard Limited के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। रक्षा मंत्रालय से 5,000 करोड़ रुपए का ऑर्डर मिलने की खबर के बाद यह डिफेंस PSU स्टॉक BSE पर 7.27% तक उछलकर 1,575 रुपए तक पहुंच गया। अंत में इसमें करीब 3.5% की मजबूती दर्ज की गई।एशियाई बाजारों की बात करें तो Nikkei 225 0.42% गिरकर 56,566 पर बंद हुआ। वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स अवकाश के कारण बंद रहे।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधि पर नजर डालें तो 16 फरवरी को FIIs ने 972 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने 1,667 करोड़ रुपए की खरीदारी की। फरवरी महीने में अब तक FIIs कुल 2,346 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि DIIs ने 11,443 करोड़ रुपए की खरीद की है। जनवरी 2026 में FIIs ने 41,435 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे, जबकि DIIs ने 69,220 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। गौरतलब है कि इससे पहले 16 फरवरी को बाजार में जोरदार तेजी रही थी। उस दिन सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 83,277 पर और निफ्टी 212 अंक की बढ़त के साथ 25,683 पर बंद हुआ था।