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  • अमेरिका ग्रीनलैंड विवाद से निवेशकों में चिंता बाजार में उतार चढ़ाव जारी रहने के संकेत

    अमेरिका ग्रीनलैंड विवाद से निवेशकों में चिंता बाजार में उतार चढ़ाव जारी रहने के संकेत


    नई दिल्ली।ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित योजना के कारण वैश्विक बाजारों में निवेशकों की चिंता बनी हुई है एक रिपोर्ट के अनुसार इस मुद्दे से जुड़े कई अनिश्चित पहलुओं के चलते निकट भविष्य में बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है निवेशक फिलहाल अमेरिका और अन्य देशों के बीच होने वाली बातचीत के नतीजों का इंतजार कर रहे हैंबैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशक इस प्रस्ताव से जुड़ी और जानकारी मिलने तक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं रिपोर्ट के अनुसार बातचीत की दिशा और उसमें आने वाली संभावित बाधाएं यह तय करेंगी कि बाजार में स्थिरता आएगी या अस्थिरता बनी रहेगी

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सौदे से जुड़े कुछ अहम मुद्दे ऐसे हैं जिनके कारण आगे चलकर बातचीत पटरी से उतर सकती है इसी वजह से निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता हैविशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था अमेरिका और डेनमार्क के बीच वर्ष 1951 में हुए सुरक्षा समझौते का एक विस्तारित रूप हो सकती है हालांकि इसके स्वरूप और शर्तों को लेकर अभी तक पूरी तस्वीर साफ नहीं है

    बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता के अनुसार आगामी बातचीत में ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी वहां के खनिज संसाधनों के उपयोग और ग्रीनलैंड की संप्रभुता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है ये सभी पहलू भू राजनीतिक जोखिम को और बढ़ा सकते हैंरिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में अमेरिका की रुचि को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा है वहीं ग्रीनलैंड में मौजूद तेल गैस और दुर्लभ खनिज तत्व भी अमेरिका के लिए आकर्षण का बड़ा कारण हैं

    हालांकि अमेरिका और नाटो के बीच एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली है लेकिन इस समझौते की शर्तें और दायरा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है जिससे अनिश्चितता बनी हुई हैग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी तेज होने के बाद भू राजनीतिक तनाव और बढ़ गया और इसका असर सीधे बाजारों पर पड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ग्रीनलैंड को अपने में शामिल करने की बात कहने और विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर आर्थिक कदम उठाने की धमकी से हालात और बिगड़ गए

    इसके जवाब में फ्रांस जर्मनी और स्वीडन समेत कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य तैनाती बढ़ा दी जिससे तनाव और गहरा गयाडोनाल्ड ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि फरवरी 2026 से कई यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा जो जून 2026 से और बढ़ सकता था हालांकि बाद में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान उन्होंने टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हटने के संकेत दिए जिससे बाजारों को कुछ राहत मिली

  • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध

    भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध


    नई दिल्ली।  कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL की शेयर बाजार में प्रस्तावित लिस्टिंग अब 16 जनवरी की बजाय 19 जनवरी 2026 को होगी। लिस्टिंग में यह बदलाव मुख्य रूप से बृहन्मुंबई नगर निगम BMC चुनावों के परिणामों के कारण किया गया है जिनकी घोषणा 16 जनवरी को होनी है। हालांकि तारीख बदली है लेकिन निवेशकों में आईपीओ को लेकर उत्साह और भरोसा जस का तस बना हुआ है।BCCL का आईपीओ हाल के वर्षों के सबसे चर्चित सरकारी आईपीओ में से एक रहा है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS आधारित था जिसके तहत कोल इंडिया ने कंपनी में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। लिस्टिंग के बाद भी कोल इंडिया की BCCL में हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत बनी रहेगी।

    आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। बोली बंद होने तक यह इश्यू कुल 146 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ। कुल पब्लिक इश्यू का आकार करीब 1071 करोड़ रुपये था लेकिन इसकी मांग हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सब्सक्रिप्शन में संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया जिनके लिए आरक्षित कोटा 300 गुना से अधिक भरा गया। इसके अलावा रिटेल कैटेगरी करीब 49 गुना शेयरहोल्डर कोटा लगभग 87 गुना और कर्मचारी वर्ग करीब 5 गुना सब्सक्राइब हुआ।ग्रे मार्केट की गतिविधियां भी इस आईपीओ के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं। BCCL के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले ग्रे मार्केट में करीब 60 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार करते दिखे। इसका अर्थ यह है कि 19 जनवरी को लिस्टिंग के दिन शेयर मजबूत शुरुआत कर सकते हैं।BCCL देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनियों में शामिल है। वित्त वर्ष 202425 में देश के कुल कोकिंग कोल उत्पादन में कंपनी का योगदान लगभग 58 प्रतिशत रहा। इसका प्रमुख संचालन झारखंड के झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BCCL आईपीओ की यह भारी सफलता PSU शेयरों पर निवेशकों के भरोसे की बहाली को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि सरकारी कंपनियों के शेयरों में फिर से निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। बाजार विश्लेषक यह भी मानते हैं कि लिस्टिंग के दिन शेयर में सकारात्मक माहौल देखने को मिल सकता है खासकर तब जब ग्रे मार्केट में पहले ही मजबूत प्रीमियम नजर आ रहा है।कुल मिलाकर BCCL का आईपीओ न सिर्फ निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हुआ है बल्कि यह संकेत देता है कि PSU सेक्टर में नए अवसर और निवेश की संभावनाएं मजबूत हैं। 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में इसकी लिस्टिंग के बाद बाजार और निवेशकों के नजरिए पर इसके असर पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।