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  • विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 26 से 30 अक्टूबर तक का कारोबारी सप्ताह बढ़त वाला रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बाजार को समर्थन मिला। इस दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन तक बाजार ने अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखी, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता भी देखने को मिली।

    सप्ताह के पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,335.70 अंक यानी 1.83 प्रतिशत बढ़कर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 453.10 अंकों यानी 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,053.10 पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में कमी आने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिसका असर शेयर बाजार की खरीदारी पर दिखाई दिया।

    इस दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, तीनों केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा। इसके कारण जल्द मौद्रिक नरमी की उम्मीदों को सीमित समर्थन मिला। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में नरमी और बेहतर आर्थिक परिस्थितियों ने शेयर बाजार में व्यापक खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    सप्ताह के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 चार प्रतिशत चढ़ा। इससे पता चलता है कि बाजार में खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी। इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 6,304.67 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 3,109.79 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।

    सेक्टर के लिहाज से फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह कंपनियों के सकारात्मक वित्तीय नतीजे रहे। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट शेयरों को भी फायदा मिला। वहीं, इनपुट लागत कम होने की उम्मीदों के चलते मेटल, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिनों में बाजार का रुख कुछ सतर्क हो गया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। अब निवेशकों की नजर ओपेक प्लस की आगामी समीक्षा पर है। इस बैठक में तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

  • अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    नई दिल्ली । अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश पर अब निवेशकों के सवाल बढ़ने लगे हैं। बाजार में यह चिंता है कि कंपनियां जिस तेजी से AI तकनीक पर पूंजी खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे पर्याप्त कमाई और रिटर्न हासिल हो पाएगा। इसी अनिश्चितता का असर अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया है। अक्टूबर में नैसडैक अपने उच्चतम स्तर से 7.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

    इस गिरावट के दौरान नैसडैक का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2 ट्रिलियन डॉलर घट गया। यह रकम एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के अनुमानित बाजार मूल्य के बराबर बताई जा रही है। अक्टूबर का प्रदर्शन मार्च 2025 के बाद नैसडैक के लिए सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में लगातार दबाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। नैसडैक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों के लिए यह जून के बाद सबसे खराब कारोबारी दिन रहा। वहीं डाउ जोंस इंडेक्स भी 572 अंक यानी 1.1 प्रतिशत टूट गया। बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता रही।

    मेटा, अल्फाबेट और अमेजन जैसी कंपनियां AI तकनीक के विकास, डेटा सेंटर और संबंधित बुनियादी ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि इस निवेश से होने वाली कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ा पूंजीगत खर्च 2030 तक 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अकेले 2026 में इस क्षेत्र में करीब 900 अरब डॉलर खर्च होने की संभावना जताई गई है।

    चिप निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेल के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गया। यह 1974 के बाद एक कारोबारी दिन में इंटेल के शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व का अनुमान जताया है। इसकी एक प्रमुख वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आना बताई गई है।

    अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अमेजन के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनवीडिया का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इस गिरावट के बाद एनवीडिया बाजार पूंजीकरण के मामले में ऐपल से पीछे हो गई। अल्फाबेट और मेटा के शेयर अपने शीर्ष स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स के नतीजों में AI पर किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन शुक्रवार को इनके शेयरों में भी कमजोरी रही।

    शेयर बाजार में आई गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर भी पड़ा है। एलन मस्क की नेटवर्थ में 48.5 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति घटकर 865 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, मार्क जकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग की संपत्ति में भी गिरावट आई।

    अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति ने AI क्षेत्र में निवेश की रफ्तार और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कंपनियों के भारी खर्च और निवेशकों की रिटर्न संबंधी अपेक्षाओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आने वाले समय में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और AI कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों के बीच महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता का असर बाजार के रुख पर दिखाई दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,053.10 पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार बंद होने के बावजूद कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 540.40 अंक यानी 0.93 प्रतिशत गिरकर 57,301.25 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 347.75 अंक यानी 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 18,463.60 के स्तर पर आ गया। इन दोनों सूचकांकों में गिरावट से छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की बिकवाली का संकेत मिला।

    सेक्टर आधारित कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक समर्थन दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन के प्रमुख लाभ वाले सूचकांकों में शामिल रहा। निफ्टी हेल्थकेयर में भी 1.58 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी फार्मा 1.55 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.17 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्पशन 0.29 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    दूसरी ओर, कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी इंडिया डिफेंस में 2.01 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.78 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 1.46 प्रतिशत कमजोर हुआ। निफ्टी एनर्जी में 0.97 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में ट्रेंट, इंडिगो, इन्फोसिस, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, इटरनल, टेक महिंद्रा, एचयूएल टेक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईटीसी, एशियन पेंट्स, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, एचयूएल और टाइटन बढ़त के साथ बंद हुए। इसके विपरीत एसबीआई, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, बीईएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और मारुति सुजुकी के शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार में कमजोरी के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को भी प्रमुख कारण माना गया। महंगाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरह ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशकों की चिंता दोबारा बढ़ी है। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखाई दिया।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से जुड़ी नई खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया। इस माहौल में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़े स्तर पर बिकवाली हुई। दूसरी ओर, वैश्विक एआई शेयरों से कुछ निवेश निकलकर चुनिंदा आईटी कंपनियों में खरीदारी के रूप में आया। बेहतर नतीजों और डिफेंसिव मांग के चलते फार्मा तथा हेल्थकेयर शेयरों में भी मजबूती बनी रही। इस तरह आईटी और स्वास्थ्य क्षेत्र की खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में गिरावट का रुख कायम रहा।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का रुख बना रहा। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखने को मिली। आईटी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को गिरावट से बचाने में मदद की, लेकिन बाजार की कुल स्थिति कमजोर बनी रही।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 74,422.42 के ऊपरी स्तर और 74,099.33 के निचले स्तर के बीच कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी ने 23,019.25 का उच्चतम और 22,919.85 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। प्रमुख सूचकांकों में मामूली तेजी के बावजूद ज्यादातर शेयरों में गिरावट ने बाजार की वास्तविक स्थिति को कमजोर बनाए रखा।

    बाजार में बिकवाली का अंदाजा मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शुरुआती कारोबार के दौरान कुल 3,076 शेयरों में कारोबार हो रहा था। इनमें से 934 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 2,053 शेयर गिरावट में थे। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कुल 3,541 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,234 शेयरों में तेजी और 2,097 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट था कि बाजार में तेजी का दायरा सीमित था और अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.20 प्रतिशत बढ़कर 112.13 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 1.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 103.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए अहम चिंता माना जा रहा है।

    दूसरा बड़ा कारण एशियाई शेयर बाजारों में आई गिरावट रही। शुक्रवार को जापान का निक्केई 225 करीब 2.58 प्रतिशत टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.87 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। ताइवान के बाजार में 2.53 प्रतिशत और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी नैस्डैक करीब 1.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। वैश्विक बाजारों के इस रुख का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    तीसरा महत्वपूर्ण संकेत बाजार में बढ़ती अस्थिरता का रहा। इंडिया VIX शुक्रवार सुबह करीब 3.24 प्रतिशत उछलकर 15.61 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव और निवेशकों की अनिश्चितता का संकेतक माना जाता है। इसमें बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। इसका असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, बिकवाली के बीच आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.37 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.96 प्रतिशत की तेजी रही। हेल्थकेयर इंडेक्स भी 0.82 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 1.78 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी बैंक में 0.27 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    इस तरह शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों की मामूली बढ़त और व्यापक स्तर पर जारी बिकवाली के बीच अंतर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी बाजारों की कमजोरी और इंडिया VIX में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

  • एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    नई दिल्ली ।देश की सबसे बड़ी पेंट निर्माता कंपनियों में शामिल एशियन पेंट्स ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। नतीजों के साथ कंपनी ने शेयरधारकों के लिए अंतरिम डिविडेंड का भी एलान किया है।

    एशियन पेंट्स का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 1,539 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में मुनाफा करीब 30 प्रतिशत घटकर 1,067.6 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि के बावजूद तिमाही-दर-तिमाही प्रदर्शन में दबाव दिखाई दिया। कंपनी के कारोबार पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ा।

    कंपनी की बिक्री से होने वाली आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में एशियन पेंट्स का रेवेन्यू 9,954 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 8,514 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर राजस्व में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 10,521 करोड़ रुपये के मुकाबले दूसरी तिमाही का रेवेन्यू करीब पांच प्रतिशत कम रहा।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण लागत से जुड़ा दबाव बना रहा। भू-राजनीतिक तनावों के चलते आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावटों ने भी कच्चे माल की उपलब्धता को प्रभावित किया। कंपनी ने बताया कि इन परिस्थितियों का असर जुलाई से सितंबर के दौरान उसके कामकाज पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लागत में बढ़ोतरी के बीच कारोबार की वृद्धि और मुनाफे के प्रदर्शन पर दबाव एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    डिविडेंड की घोषणा इस तिमाही के नतीजों का एक प्रमुख हिस्सा है। एशियन पेंट्स ने एक रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 5.75 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 13 नवंबर 2026 को या उसके बाद किया जाएगा। इस घोषणा से उन निवेशकों को लाभ मिलेगा, जो निर्धारित रिकॉर्ड डेट के अनुसार डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

    घरेलू कारोबार में कंपनी के डेकोरेटिव पेंट्स खंड ने वृद्धि दर्ज की। दूसरी तिमाही में घरेलू डेकोरेटिव पेंट्स कारोबार का वॉल्यूम 6.4 प्रतिशत और वैल्यू 14.5 प्रतिशत बढ़ी। कुल घरेलू कोटिंग्स कारोबार में वैल्यू के आधार पर 16.4 प्रतिशत और वॉल्यूम के आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस प्रदर्शन में इंडस्ट्रियल कोटिंग्स कारोबार का भी योगदान रहा, जहां वैल्यू के लिहाज से 31.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी बिक्री बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहा। इस खंड से शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 846 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,095.6 करोड़ रुपये हो गई, जो 29.5 प्रतिशत की वृद्धि है। स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 23.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कारोबार का कर-पूर्व मुनाफा 31 प्रतिशत घटकर 52.7 करोड़ रुपये रह गया। इससे स्पष्ट है कि बिक्री में बढ़ोतरी के साथ लागत और लाभप्रदता कंपनी के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र रहा, जब गिरावट का दबाव देखने को मिला। इस सप्ताह भी बाजार लगातार दूसरे दिन कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 122.37 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,484.38 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 44.40 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,708.80 के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों पर दबाव और बढ़ गया। सेंसेक्स एक समय अपने पिछले बंद स्तर 73,606.75 से 395.99 अंक यानी 0.53 प्रतिशत नीचे आकर 73,210.76 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 22,753.20 से 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 22,653.20 तक फिसल गया।

    हालांकि, व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.54 प्रतिशत चढ़ा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दबाव के बावजूद छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के कुछ शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में आईटी, सीमेंट और ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक गिर गया। निफ्टी सीमेंट में 0.98 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.53 प्रतिशत की कमजोरी रही। दूसरी ओर, फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.68 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी फार्मा में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही।

    मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती दिखाई। रुपया दो पैसे बढ़कर 95.17 प्रति डॉलर पर खुला। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.19 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि, रुपये का कमजोर स्तर और कच्चे तेल की महंगाई बाजार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

    बाजार के सामने प्रमुख चुनौतियों में ब्रेंट क्रूड का 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का लगभग 4.97 प्रतिशत पर रहना शामिल है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों के जोखिम लेने से बचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों में दिखाई दे रहे बेहतर कारोबारी संकेत और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    तकनीकी स्तरों के लिहाज से निफ्टी 50 के लिए 22,690 के आसपास रिकवरी की कोशिश और कमजोरी, दोनों संभावनाएं बनी हुई हैं। यदि सूचकांक 22,630 के ऊपर टिकता है, तो 23,000 से 23,500 तक पहुंचने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, 22,800 से 22,900 के दायरे में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, 22,630 का स्तर टूटने पर निफ्टी 22,250 से 22,000 तक फिसल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

    संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,462 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार दसवें कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 2,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 में 0.7 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.82 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान मिला-जुला रुख रहा।

    आगे बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर पड़ सकता है। साप्ताहिक और मासिक डेरिवेटिव अनुबंधों की समाप्ति के कारण कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। बाजार में गिरावट का यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दबाव देखने को मिला। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी एक प्रतिशत के करीब गिरावट के साथ अपने निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बीएसई का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 73,123.83 अंक पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 72,990.04 अंक पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत नीचे था। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,600 अंक के मुकाबले 22,524.40 अंक पर खुला। इसमें शुरुआती स्तर पर 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में सूचकांक 212.65 अंक यानी 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22,387.35 अंक के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.81 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की कमी आई। इससे व्यापक बाजार में भी निवेशकों के सतर्क रुख का संकेत मिला।

    सेक्टर के स्तर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक तक की गिरावट देखी गई। इसके विपरीत निजी बैंकिंग शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 0.49 प्रतिशत चढ़ा। फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों में भी अन्य प्रमुख क्षेत्रों की तुलना में कम दबाव रहा।

    निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। बाजार में व्यापक उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, बैठक के बाद भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर मिलने वाले संकेत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड दो प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड दो प्रतिशत से अधिक टूटकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालिया नरमी के बावजूद तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं कायम हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट की एक वजह मार्जिन फंडिंग पर आधारित सौदों का बंद होना भी रही। हालांकि, गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेशकों को आर्थिक जोखिमों पर नजर रखनी होगी।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के आंकड़े बाजार के लिए एक अलग संकेत भी देते हैं। 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 887 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी थी।

    एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की बैठकें, कंपनियों के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी निवेश धारणा आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।

  • अगले सप्ताह छह कंपनियों के डिविडेंड पर रहेगी नजर, रिकॉर्ड डेट से पहले जानें किस शेयर पर कितना मिलेगा लाभ

    अगले सप्ताह छह कंपनियों के डिविडेंड पर रहेगी नजर, रिकॉर्ड डेट से पहले जानें किस शेयर पर कितना मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में अगले सप्ताह छह कंपनियों के अंतरिम डिविडेंड को लेकर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ इन कंपनियों ने शेयरधारकों के लिए लाभांश घोषित किया है। इनमें हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, सायंट, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट, चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और एडोर वेल्डिंग शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रति शेयर घोषित डिविडेंड को जोड़ने पर कुल रकम 83.50 रुपये होती है। यह छह अलग-अलग कंपनियों के एक-एक शेयर पर घोषित लाभांश का जोड़ है, न कि किसी एक कंपनी के शेयर पर मिलने वाली राशि।

    हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 9.50 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के दूसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य एक रुपये है। इस आधार पर घोषित लाभांश अंकित मूल्य का 950 प्रतिशत है। कंपनी ने 26 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस तारीख के आधार पर तय होगा कि कौन से शेयरधारक घोषित डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

    एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 20 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य दो रुपये है, इसलिए यह लाभांश अंकित मूल्य का 1,000 प्रतिशत बैठता है। कंपनी ने 27 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की है। लाभांश का लाभ उन्हीं शेयरधारकों को मिलेगा, जो लागू नियमों के अनुसार पात्र होंगे।

    सायंट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य पांच रुपये है। इस हिसाब से घोषित लाभांश अंकित मूल्य का 240 प्रतिशत है। सायंट ने 28 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। आईटी क्षेत्र की इस कंपनी का डिविडेंड भी अगले सप्ताह निवेशकों के ध्यान में रह सकता है।

    निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट ने दूसरी तिमाही के परिणामों के साथ 9.50 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है और घोषित लाभांश इसके 95 प्रतिशत के बराबर है। कंपनी ने पात्र शेयरधारकों की पहचान के लिए 28 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की है।

    चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने 22 अक्टूबर 2026 को हुई बोर्ड बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 25 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसके आधार पर लाभांश 250 प्रतिशत होता है। इसकी रिकॉर्ड डेट 30 अक्टूबर 2026 रखी गई है। पात्र शेयरधारकों को भुगतान 21 नवंबर 2026 तक किए जाने की जानकारी दी गई है।

    एडोर वेल्डिंग लिमिटेड ने 7.50 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी ने इसके लिए भी 30 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस प्रकार, छह कंपनियों की रिकॉर्ड डेट 26, 27, 28 और 30 अक्टूबर को निर्धारित हैं।

    निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि डिविडेंड की घोषणा और शेयर के अंकित मूल्य के आधार पर निकाला गया प्रतिशत, शेयर की मौजूदा बाजार कीमत पर मिलने वाले प्रतिफल के समान नहीं होता। रिकॉर्ड डेट के साथ पात्रता और लागू बाजार नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए। केवल डिविडेंड की राशि के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं है।

  • शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600.00 के स्तर पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार में व्यापक बिकवाली भी देखने को मिली। खास तौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव अधिक रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी।

    शुक्रवार के कारोबार में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,263.30 अंक यानी 2.21 प्रतिशत गिरकर 55,800.65 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 536.45 अंक यानी 2.94 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 17,739.45 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दिया।

    अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांक भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 2.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 2.63 प्रतिशत और इंडिया डिफेंस इंडेक्स 2.60 प्रतिशत नीचे आया। रियल्टी इंडेक्स में 2.38 प्रतिशत तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी एनर्जी 1.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 1.64 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 1.57 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी कमोडिटीज में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 1.04 प्रतिशत की गिरावट आई। अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ आई कमजोरी ने बाजार की व्यापक स्थिति को प्रभावित किया। इससे संकेत मिला कि बिकवाली का दबाव कई उद्योगों तक फैला हुआ था।

    सेंसेक्स में शामिल कुछ कंपनियों के शेयरों ने गिरते बाजार के बीच बढ़त दर्ज की। इटरनल, एलएंडटी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस और आईसीआईसीआई बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाटा स्टील, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बीईएल, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन और बजाज फाइनेंस समेत कई शेयरों में गिरावट रही। एनटीपीसी, एसबीआई, एचयूएल, सन फार्मा, भारती एयरटेल, आईटीसी और एमएंडएम के शेयर भी नुकसान में बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चिंता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले ज्यादा गिरावट है। ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता, कर्ज लेकर किए गए निवेश वाली पोजीशन में कमी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी को भी निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने की आशंका भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का असर जोखिम लेने की निवेशकों की क्षमता पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे बाजार की दिशा महंगाई के आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे माहौल में कंपनियों की कमाई की स्पष्टता और शेयरों का उचित मूल्यांकन निवेश संबंधी फैसलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत टूटकर 73,249.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,687.65 पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दिया। मीडिया, एफएमसीजी और रक्षा क्षेत्र के शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। इसके बाद प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निचले स्तरों पर कुछ समय के लिए खरीदारी भी आई, जिससे गिरावट को सीमित करने में मदद मिली, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती हासिल नहीं कर सका। लगातार तीसरे दिन की कमजोरी से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा दबाव में रहा और 2.35 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। निफ्टी एफएमसीजी में 1.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.21 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी एनर्जी और निफ्टी आईटी दोनों में 1.05 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.96 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और व्यापक बना दिया।

    हालांकि, सभी क्षेत्रों में गिरावट नहीं रही। निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन इसका असर प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी संकेतों पर बनी हुई है।

    बड़े शेयरों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 501.90 अंक यानी 0.87 प्रतिशत गिरकर 57,063.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 211.40 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,275.90 पर आ गया। छोटी कंपनियों के शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट से पता चलता है कि बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।

    सेंसेक्स में शामिल बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ बंद हुए। इन शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार की समग्र दिशा कमजोर बनी रही।

    दूसरी ओर, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, ट्रेंट, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बीएसई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, टाइटन, इंडिगो, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक गिरावट के साथ बंद हुए। इन शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख सूचकांकों और व्यापक बाजार में लगातार गिरावट निवेशकों की जोखिम लेने की सीमित इच्छा को दर्शाती है। फिलहाल बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकेतों का प्रभाव महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक बाजार के अगले रुझान को समझने के लिए सतर्कता से कारोबार कर रहे हैं।