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  • शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    नई दिल्ली ।डिजिटल फाइनेंस और ऑनलाइन लोन सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से उभर रही OnEMI Technology Solutions ने शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत कर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते ही निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिला, जिससे IPO में हिस्सा लेने वाले लोगों के चेहरे खिल उठे।

    कंपनी के शेयर अपने तय इश्यू प्राइस से करीब 11 प्रतिशत ऊपर खुले। शुरुआती कारोबार में ही शेयरों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और यह लिस्टिंग निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई। बाजार में पहले से ही इस IPO को लेकर उत्साह बना हुआ था और लिस्टिंग के बाद वह भरोसा और मजबूत होता दिखाई दिया।

    हालांकि कुछ निवेशकों को इससे भी अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा बाजार की अस्थिर परिस्थितियों के बीच इस प्रदर्शन को मजबूत शुरुआत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेंडिंग सेक्टर की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

    करीब 926 करोड़ रुपये के इस IPO को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। अंतिम दिन तक यह इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हुआ, जिससे साफ संकेत मिला कि बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। खास बात यह रही कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में सबसे अधिक रुचि दिखाई।

    संस्थागत निवेशकों के अलावा गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों ने भी IPO में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से यह इश्यू बाजार में चर्चा का विषय बन गया। IPO खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए बड़ी रकम जुटाकर अपनी मजबूत स्थिति का संकेत दे दिया था।

    OnEMI Technology Solutions की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। कंपनी डिजिटल लेंडिंग और पेमेंट सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है और अपने प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को कई तरह की वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी पर्सनल लोन, छोटे कारोबारियों के लिए लोन, EMI फाइनेंसिंग और अन्य डिजिटल क्रेडिट सेवाओं के माध्यम से तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी ने करोड़ों यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई है। बड़ी संख्या में ग्राहकों के जुड़ने और डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने से कंपनी का कारोबार लगातार मजबूत हुआ है। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट भी तेजी से बढ़ा है, जो उसके विस्तार और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है।

    वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो कंपनी ने आय और मुनाफे दोनों में लगातार सुधार दर्ज किया है। यही वजह है कि निवेशकों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में बढ़ते अवसरों के कारण कंपनी को आगे भी मजबूत ग्रोथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कंपनी ने संकेत दिया है कि IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से अपने फाइनेंस कारोबार को और मजबूत करने में किया जाएगा। इसके जरिए कंपनी ज्यादा लोन ग्रोथ हासिल करने और डिजिटल फाइनेंस मार्केट में अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने की योजना पर काम करेगी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल क्रेडिट और ऑनलाइन फाइनेंस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए विकास के बड़े अवसर मौजूद हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ को भविष्य में किस तरह बनाए रखती है।

  • निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम

    निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम


    नई दिल्ली।
    बाजार नियामक सेबी (Market Regulator SEBI) ने सोने और चांदी के ईटीएफ (Gold-Silver ETF) के कारोबारी नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। इसका मकसद है कि इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के ज्यादा करीब रहें और निवेशकों को सही भाव पर खरीद-फरोख्त का मौका मिल सके। इससे आम निवेशकों को काफी फायदा होगा और अनचाहा नुकसान होने से बचाव हो सकेगा।

    दरअसल, दुनियाभर में सोने और चांदी की खरीद-बिक्री 24 घंटे होती है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज में भी इनकी कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो जाती हैं लेकिन भारत में ईटीएफ की खरीद-बिक्री शेयर बाजार के समय मुताबिक सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक ही होती है। इस दौरान इनके भाव एक तय सीमा (फिक्स्ड प्राइस बैंड) के भीतर ही घट-बढ़ सकते हैं।

    इस तय सीमा और समय अंतर की वजह से अक्सर भारतीय ईटीएफ की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से पिछड़ जाती हैं या उनमें बड़ा अंतर आ जाता है। इसके चलते आम निवेशकों को सही दाम पर खरीद-बिक्री नहीं मिल पाती और कई बार बिना वजह नुकसान हो भी जाता है। वर्तमान में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जिसकी वजह से निवेशकों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके चलते सेबी ने ईटीएफ के कारोबारी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।


    क्या है नया प्रस्ताव

    सेबी ने अब ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लागू करने का सुझाव दिया है। इसका मतलब यह है कि कीमतों की सीमा बाजार की स्थिति के अनुसार बदली जा सकेगी। शुरुआत में एक तय सीमा रहेगी, लेकिन अगर बाजार में ज्यादा हलचल होती है तो यह दायरा बढ़ाया जा सकेगा। हर बड़े बदलाव के बाद कुछ समय का अंतर भी दिया जाएगा, ताकि बाजार स्थिर हो सके और घबराहट में खरीद-फरोख्त न हो। सेबी ने हाल ही में प्रस्ताव का मसौदा जारी किया है और मार्च 2026 तक लोगों से राय मांगी है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।


    निवेशक ऐसे समझें योजना को

    प्रस्ताव के मुताबिक, नया दायरा छह फीसदी का होगा। यानी एक दिन में ईटीएफ के भाव छह फीसदी तक ऊपर या नीचे हो सकते हैं। अगर बाजार में तेज हलचल होती है तो इस दायरे को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा और हर बार यह तीन फीसदी तक बढ़ेगा। हर बदलाव के बाद बाजार को स्थिर होने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। एक दिन में कुल दायरा ±20% की सीमा तक जा सकेगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक को ईटीएफ की जो कीमत स्क्रीन पर दिखेगी, वह उसकी वास्तविक वैल्यू के करीब होगी।


    बाजार खुलने से पहले ही तय होगी दिशा

    सेबी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो है ‘प्री-ओपन सेशन’ की शुरुआत। शेयर बाजार की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए भी बाजार खुलने से पहले एक खास सत्र हो सकता है। इसका मकसद यह है कि रातभर में विदेशी बाजारों में जो भी बदलाव हुए हैं, उन्हें भारतीय बाजार खुलने से पहले ही समायोजित कर लिया जाए। इससे सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में दिखने वाले भारी गैप को कम किया जा सकेगा और निवेशकों को एक संतुलित शुरुआत मिलेगी।

  • निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट

    निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) अब निवेशकों (Investors) को पेंशन के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कवर भी देने की तैयारी में है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन प्रमुख पेंशन फंड इस समय हेल्थ इंश्योरेंस कवर देने वाली पेंशन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

    यह नई पेंशन योजना या तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के साथ साझेदारी में, या फिर सीधे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से पेश की जा सकती है। रमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ के तहत लोगों को चिकित्सा खर्चों के लिए अलग से बचत करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें।

    यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, जो अब अपनी पेंशन के साथ-साथ अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकेंगे।

    पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा- हम चाहते हैं कि लोग खुद को सुरक्षित रखने की अहमियत को समझें। हम चाहते हैं कि लोग मेडिकल पेंशन योजना में पैसा बचत करें। यह राशि केवल चिकित्सा उद्देश्यों के भुगतान के लिए समर्पित होगी। बता दें कि PFRDA ने इस साल जनवरी में ‘स्वास्थ्य’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत निवेशक की पेंशन राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखा जा सकता है।


    स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर

    पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों का एकसाथ आना पेंशन फंड को बेहतर सौदे तय करने में मदद करता है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर और अस्पतालों से उपचार पर रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में अस्पतालों को मरीज के इलाज के तुरंत बाद ही भुगतान मिल सकेगा जबकि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत भुगतान में कई महीने लग जाते हैं। रमन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा की तरफ से प्रायोजित पेंशन फंड इस तरह की हेल्थ कवरेज योजनाएं पेश करने को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और आईसीआईसीआई जल्द ही अपना उत्पाद पेश कर देगा।

    सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश की योजना
    उन्होंने कहा कि रिटर्न को लंबे समय तक दहाई अंकों में बनाए रखने के उपायों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए परियोजना वित्त, रियल एस्टेट, वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के साथ सोना और चांदी ईटीएफ में सीमित निवेश की भी योजना है। उन्होंने एनपीएस के कम कवरेज (करीब एक करोड़ रुपये) को स्वीकार करते हुए कहा कि निवेशक आधार बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से बातचीत जारी है ताकि डिजिटल माध्यम से लोगों को जोड़ने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही रमन ने कहा कि कम-से-कम चार बैंकों या बैंकों के समूह ने पेंशन कोष कारोबार में उतरने की इच्छा जताई है। इनमें एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक एवं स्टार डायची का समूह शामिल हैं।

  • शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ

    शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ


    नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
    इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
    इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की गिरावट, मिडकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती..

    सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की गिरावट, मिडकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती..

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में उतारचढ़ाव भरे कारोबार के बाद हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता और अहम आर्थिक आंकड़ों से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 102.20 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84961.14 के स्तर पर बंद हुआ जबकि एनएसई निफ्टी 37.95 अंक या 0.14 प्रतिशत फिसलकर 26140.75 पर आ गया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही लेकिन बाजार के व्यापक हिस्से में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 276.15 अंक या 0.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ 61424.70 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.65 अंक या 0.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 17958.50 पर बंद हुआ। इससे साफ है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशते नजर आए।सेक्टोरल आधार पर आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.87 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.69 प्रतिशत निफ्टी फार्मा 0.69 प्रतिशत निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.65 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.07 प्रतिशत में भी मजबूती देखने को मिली।

    वहीं दूसरी ओर ऑटो और वित्तीय शेयरों में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 0.80 प्रतिशत निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.66 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा 0.50 प्रतिशत निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.33 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 0.31 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुए।सेंसेक्स के गेनर्स की सूची में टाइटन एचसीएल टेक टेक महिंद्रा इन्फोसिस सन फार्मा टीसीएस आईसीआईसीआई बैंक एलएंडटी बीईएल और ट्रेंट शामिल रहे। वहीं मारुति सुजुकी पावर ग्रिड एचडीएफसी बैंक एशियन पेंट्स टाटा स्टील एचयूएल एसबीआई भारती एयरटेल एमएंडएम बजाज फाइनेंस इंडिगो और बजाज फिनसर्व प्रमुख लूजर्स रहे।

    जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों और अमेरिका के अहम रोजगार आंकड़ों से पहले निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और चीन द्वारा दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कारकों से बाजार सीमित दायरे में बना रह सकता है। हालांकि आईटी फार्मा और मिडकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी से बाजार को कुछ राहत मिली है।

  • IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार

    IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार


    नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी ने साल 2025 में 165 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की और 26 दिसंबर को यह ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई। 19 दिसंबर को चांदी ₹2,00,336 प्रति किलो पर थी, जो मात्र एक हफ्ते में 27,771 रुपए की तेज वृद्धि दर्शाती है। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब चांदी में मजबूती देखने को मिली है।हफ्तेभर के कारोबार में चांदी ने चार बार नया ऑल टाइम हाई बनाया। शुक्रवार को यह ₹9,124 की एकदिनी तेजी के साथ बंद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टा नहीं, बल्कि मजबूत मांग और वैश्विक आर्थिक कारकों का नतीजा है।

    सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। 19 दिसंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,31,779 पर था, जो 26 दिसंबर को बढ़कर ₹1,37,956 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अब तक का उच्चतम स्तर है। घरेलू सोने की कीमतों में यह बढ़त न सिर्फ स्थानीय मांग बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों से भी प्रभावित मानी जा रही है।साल 2025 की शुरुआत के आंकड़े देखें तो 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था। इसका मतलब है कि सोने में इस साल 81 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं, चांदी ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई, यानी सालाना आधार पर 165 प्रतिशत की तेज वृद्धि।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती के संकेतों से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया। दूसरा, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया। तीसरा, चीन और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीद कर रहे हैं।चांदी की कीमतों में उछाल की वजहें थोड़ी अलग हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत ने औद्योगिक मांग को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में संभावित टैरिफ के डर से कंपनियां चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं। मैन्युफैक्चरर्स भी संभावित उत्पादन बाधा के चलते अग्रिम खरीद कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना है।

    IBJA की दरों में GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। इसलिए अलग-अलग शहरों में कीमतों में थोड़ी भिन्नता देखी जा सकती है। यही दरें RBI के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंकों के गोल्ड लोन के लिए आधार बनती हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक इस तेजी को ध्यान में रखते हुए सोने और चांदी में निवेश की रणनीति बनाएं। खासकर चांदी में लगातार पांचवे सप्ताह तक मजबूती ने निवेशकों और ज्वेलर्स दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और औद्योगिक मांग को देखते हुए, आने वाले हफ्तों में कीमती धातुओं की कीमतों में और उछाल की संभावना भी बनी हुई है।

  • एमपी सरकार ने 1 रुपये में 25 एकड़ जमीन दी अब खुलेंगे चार मेडिकल कॉलेज 2027 से एमबीबीएस प्रवेश

    एमपी सरकार ने 1 रुपये में 25 एकड़ जमीन दी अब खुलेंगे चार मेडिकल कॉलेज 2027 से एमबीबीएस प्रवेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में अब देश में पहली बार सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल पर चार नए मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहे हैं। इन कॉलेजों में 2027-28 से एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश शुरू होगा। यह योजना राज्य में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी क्योंकि इन कॉलेजों के जरिए 2035 तक डॉक्टरों की बड़ी संख्या तैयार हो सकेगी।इन मेडिकल कॉलेजों में हर कॉलेज में कम से कम 100 सीटें होंगी हालांकि सरकार ने प्रवेश 150 सीटों से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। भविष्य में कॉलेजों की सीटों की संख्या बढ़कर 250 तक हो सकती है। इस प्रकार इन कॉलेजों से हर साल बड़ी संख्या में डॉक्टर निकलकर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में योगदान देंगे।

    सरकार की शर्त

    इस योजना में सरकार ने खास शर्त रखी थी कि निवेशक को खुद कॉलेज बनाना होगा। हालांकि पीपीपी मॉडल को लेकर पहले कई बार निविदाएं आमंत्रित की गईं लेकिन पहले चार फिर दस और बाद में बारह जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कोई निवेशक सामने नहीं आया। यह परियोजना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण थी लेकिन अंततः सरकार ने फैसला किया कि वह निवेशकों को 1 रुपये में 25 एकड़ ज़मीन देगी। इस निर्णय के बाद ही निवेशक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए सामने आए। इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने चार मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निवेशकों से प्रस्ताव स्वीकार किए और इस परियोजना की शुरुआत की। इन कॉलेजों के खुलने से मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का एक नया अवसर मिलेगा।

    राज्य में चिकित्सा शिक्षा का सुधार

    पीपीपी मॉडल के तहत इन कॉलेजों के खुलने से न केवल स्वास्थ्यसेवाओं में सुधार होगा बल्कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया मोड़ आएगा। यह कदम राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और भविष्य में अधिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा इन कॉलेजों में स्नातक एमबीबीएस के अलावा पोस्ट ग्रेजुएट और सुपर स्पेशलिटी कोर्स भी शुरू किए जा सकते हैं।

  • दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी

    दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी


    नई दिल्ली: साल 2025 का दिसंबर महीना अब अपने अंतिम चरण में है और इसके साथ ही कई अहम फाइनैंशल डेडलाइन भी खत्म होने वाली हैं। अगर आपने अब तक नेशनल पेंशन सिस्टमNPS, इनकम टैक्स रिटर्नITR या पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम पूरे नहीं किए हैं, तो अब सतर्क हो जाना जरूरी है। टाइम्स ऑफ इंडियाTOI की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर तक टैक्स रिटर्न भरने और पैन-आधार लिंक करने की अंतिम तारीख है, जबकि NPS निवेशकों के लिए 25 दिसंबर बेहद अहम दिन माना जा रहा है।

    NPS निवेशकों के लिए अलर्ट: 25 दिसंबर अहम

    पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीP FRDA ने हाल ही में NPS से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। PFRDA ने NPS की ‘स्कीम A’ को बंद कर इसे अन्य स्कीमों में मर्ज करने का निर्णय लिया है। दरअसल, स्कीम A का कॉर्पस काफी छोटा था और इसमें निवेश के विकल्प भी सीमित थे। इस स्कीम में REITs, InvITs, AIFs और स्ट्रक्चर्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वैकल्पिक निवेश शामिल थे।अब इस स्कीम को स्कीम Cकॉरपोरेट डेट और स्कीम Eइक्विटी में मर्ज किया जा रहा है। PFRDA का कहना है कि इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और कम जोखिम का फायदा मिलेगा। हालांकि, निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे 25 दिसंबर तक अपनी पसंद के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव कर लें। अगर कोई निवेशक इस तारीख तक कोई कदम नहीं उठाता है, तो उसका पैसा अपने आप दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

    ITR अलर्ट: 31 दिसंबर आखिरी मौका

    असेसमेंट ईयर 2025-26वित्त वर्ष 2024-25 के लिए देर से भरा जाने वाला या रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है। यह तारीख सिर्फ एक डेडलाइन नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के लिए आखिरी चेतावनी मानी जा रही है। अगर आपने अब तक ITR नहीं भरा है या उसमें कोई गलती रह गई है, तो इसे सुधारने का यह अंतिम अवसर है।अगर 31 दिसंबर तक रिटर्न दाखिल नहीं किया गया, तो टैक्सपेयर्स को लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है। इसके अलावा, बिजनेस या शेयर बाजार में हुए नुकसान को अगले साल के मुनाफे से समायोजित करने Carry Forward की सुविधा भी खत्म हो जाएगी। इसके बाद केवल ITR-U यानी अपडेटेड रिटर्न भरने का विकल्प बचेगा, जिसमें पेनल्टी टैक्स देना होगा और पुराने घाटे का दावा नहीं किया जा सकेगा।

    PAN-आधार लिंकिंग की भी डेडलाइन

    31 दिसंबर को पैन-आधार लिंकिंग की एक और महत्वपूर्ण डेडलाइन खत्म हो रही है। यह डेडलाइन उन पैन कार्ड धारकों के लिए है, जिन्होंने पैन बनवाते समय आधार नंबर की जगह ‘आधार एनरोलमेंट आईडी’ का इस्तेमाल किया था। अगर तय समय तक लिंकिंग नहीं की गई, तो पैन कार्ड अमान्य हो सकता है।ऐसी स्थिति में न तो टैक्स रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा और न ही निवेश या KYC से जुड़े काम पूरे होंगे। साथ ही, इनकम पर ज्यादा TDS कट सकता है और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे वित्तीय उत्पादों के आवेदन भी खारिज हो सकते हैं।दिसंबर के अंतिम दिनों में फाइनैंशल मामलों को टालना भारी पड़ सकता है। NPS निवेश, टैक्स रिटर्न और पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम समय रहते पूरे करना ही समझदारी होगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

  • मीशो IPO में GMP के दम पर निवेशकों में जोश कल होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग

    मीशो IPO में GMP के दम पर निवेशकों में जोश कल होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग


    नई दिल्ली ।
    ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो का आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के दम पर इस आईपीओ ने बाजार में काफी ध्यान आकर्षित किया है। इसके बावजूद GMP में उतार-चढ़ाव के बाद भी लिस्टिंग पर 32 फीसदी तक मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही है। आईपीओ 3 से 5 दिसंबर तक खुला था और अब निवेशकों की नजर 10 दिसंबर पर है जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होगी।
    लिस्टिंग पर कितना हो सकता है मुनाफा
    लिस्टिंग से एक दिन पहले ग्रे मार्केट में मीशो का GMP 35 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा था। इसे आधार मानते हुए मीशो के शेयर 146 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हो सकते हैं जो इश्यू प्राइस 111 रुपये से करीब 32% ज्यादा है। हालांकि GMP में उतार-चढ़ाव को देखते हुए लिस्टिंग के वक्त प्रीमियम में बदलाव हो सकता है और इस वजह से लिस्टिंग पर वास्तविक मुनाफे का आकलन तभी होगा।

    GMP का ट्रेंडकब कितना प्रीमियम

    पिछले 10 दिनों में मीशो आईपीओ का GMP 31.5 रुपये से 49.5 रुपये के बीच रहा। शुरुआती दिनों में प्रीमियम मजबूत बना रहा लेकिन 9 दिसंबर को इसमें थोड़ी गिरावट देखी गई। 30 नवंबर को GMP 42 रुपये था जो 2 दिसंबर को बढ़कर 49 रुपये तक पहुंच गया लेकिन कुछ ही दिनों में यह घटकर 9 दिसंबर को 31.5 रुपये रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में अस्थिरता है और निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

    मीशो का आईपीओ और निवेशकों का आकर्षण

    मीशो एक सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो खासकर छोटे और मझोले व्यापारियों को ऑनलाइन बिक्री के लिए एक मंच प्रदान करता है। कंपनी का ब्रांड वैल्यू और मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम ने इसे निवेशकों के बीच काफी आकर्षक बना दिया है। कंपनी की प्राइस बैंड 105-111 रुपये प्रति शेयर रखी गई है और एक लॉट में 135 शेयर शामिल हैं। इस आईपीओ का कुल इश्यू साइज 488396721 शेयरों का है जो कुल 5421.20 करोड़ रुपये का है। इसमें से 4250 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 1171.20 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल है। कंपनी की फेस वैल्यू 1 रुपये रखी गई है।

    निवेशकों के लिए एक मौका

    मीशो के आईपीओ ने निवेशकों को एक अच्छा मौका प्रदान किया है लेकिन इसमें जोखिम भी है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को अपने निर्णय में सतर्क रहना चाहिए। कई बार आईपीओ की लिस्टिंग पर प्रीमियम में बदलाव हो सकता है और इसलिए निवेशकों को लिस्टिंग के समय निवेश के फैसले पर ध्यान देना चाहिए।

     मीशो का आईपीओ निवेशकों के लिए एक आकर्षक मौका हो सकता है खासकर जब लिस्टिंग के समय संभावित मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि बाजार की अस्थिरता को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि निवेशक अपने निवेश निर्णयों में सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की शॉर्ट टर्म अस्थिरता से बचने के लिए उचित रणनीति अपनाएं। 10 दिसंबर को लिस्टिंग के बाद ही इस आईपीओ की असली तस्वीर सामने आएगी।