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  • सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल

    सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आने की खबर है। ईरान को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने का न्योता मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी तक ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्की में से किसी भी देश ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    यह दावा शनिवार को अल मयादीन ने ईरानी संसद की समाचार एजेंसी ‘खानेह मेल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से किया। रहीमी के मुताबिक ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है और इस पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा के लिए साझा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    अगर यह खबर सही साबित होती है तो इसे पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा, क्योंकि सऊदी अरब और ईरान लंबे समय तक एक-दूसरे के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

    क्या है ‘मक्का पैक्ट’?

    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा।

    समझौते का उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत सैन्य तालमेल, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते के आपसी रक्षा प्रावधान की तुलना NATO के अनुच्छेद 5 से की थी। हालांकि, तीनों देशों ने स्पष्ट किया था कि यह समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।

    ईरान ने पहले नहीं जताई थी आपत्ति

    मक्का पैक्ट के गठन के बाद ईरान ने इस पर खुलकर विरोध नहीं जताया था। 10 अगस्त को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि तेहरान को समझौते से चिंता की कोई वजह नजर नहीं आती। उन्होंने माना था कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है।

    ऐसे में अब ईरान को इसी सुरक्षा समझौते में शामिल होने का न्योता मिलने की खबर सामने आना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, ईरान का इसमें शामिल होना पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति में बड़ा बदलाव होगा।

    सऊदी और ईरान की रही है पुरानी प्रतिद्वंद्विता

    सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर खींचतान रही है। इसका असर यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में भी दिखाई देता रहा है। यमन में सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा है, जबकि ईरान के हूती विद्रोहियों से संबंध बताए जाते हैं।

    हालांकि, 2023 में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने राजनयिक रिश्ते बहाल किए थे। इसके बाद संबंधों में कुछ नरमी आई, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्तों में चुनौतियां बनी हुई हैं।

    ऐसे में यदि ईरान के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने की खबर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया के शक्ति समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल मामला न्योते की रिपोर्ट तक सीमित है और सभी संबंधित देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत

    77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत


    नई दिल्ली।
    देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह (77th Republic Day celebrations) में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा (European Council President Antonio Luis Santos da Costa) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (European Commission President Ursula von der Leyen) मुख्य अतिथि होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के निमंत्रण पर ये शीर्ष पदाधिकारी 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान, ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे, जहाँ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की जाएगी।


    भारत और EU के बीच आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

    उम्मीद है कि FTA भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आर्थिक संबंधों को मज़बूत करेगा, जिसमें व्यापार, निवेश और बाज़ार पहुँच जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिलेगी। इस समझौते के लिए पिछले कई महीनों से गहन बातचीत चल रही है और बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने व्यापार से जुड़े अधिकांश जटिल मुद्दों को सुलझा लिया है।


    प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम

    इन दोनों शीर्ष अधिकारियों का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम है। इसके अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन के इतर एक ‘भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम’ के आयोजन की भी संभावना है। वर्ष 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे भारत और यूरोपीय संघ के बीच फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में काफी विस्तार हुआ है। गणतंत्र दिवस समारोह में इनकी भागीदारी से दोनों पक्षों के बीच सहयोग और आपसी हितों के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को और मजबूती मिलेगी।


    द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं

    मंत्रालय ने कहा है कि पिछले साल फरवरी में EU कॉलेज ऑफ़ कमिश्नर्स की भारत की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं। EU अभी भारत का सामान के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है। 27 देशों के राजनीतिक और आर्थिक समूह के साथ FTA भारत का 19वां व्यापार समझौता होगा और इसकी व्यापार रणनीति में एक मुख्य स्तंभ होगा।